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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 19 मिनट पढ़ा गया: 470 बार

बेटी बनी बाप की रखैल- 4

गुरु 1090

01 Sep 2025 को प्रकाशित

बेटी बनी बाप की रखैल- 4
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Xxx टीन गर्ल सेक्स कहानी में जवान कमसिन बेटी की चूत चुदाई उसके पापा ने की. बेटी ने खुद से अपने विधुर पापा को सेक्स का मजा देने का फैसला किया.

मेरी कहानी के तीसरे भागबाप बेटी ने लिया ओरल सेक्स का मजामें आपने पढ़ा कि पहले पापा ने अपनी जवान बेटी की गुलाबी चूत को चाट कर उसे परमानन्द दिलाया. उसके बाद बेटी ने पापा का लंड चूसा. पापा ने अपनी बेटी का मुखचोदन करते हुए उसके गले में अपना माल छोड़ा.

अब आगे Xxx टीन गर्ल सेक्स कहानी:

“अच्छा इधर आ, मुझे मेरी गलती की भरपाई करने का मौका तो दे।” कहते हुए राकेश ने स्वीटी को अपने नज़दीक खींचा और होंठों पर एक चुम्बन जड़ प्रिया।उसने स्वीटी को अपने सामने खड़ा किया और दूसरी तरफ घुमा प्रिया।

अब राकेश के मुँह के आगे स्वीटी की गांड थी।

राकेश ने हौले से उसकी शॉर्ट्स का बटन खोला और जाँघों से होते हुए शॉर्ट्स अलग निकाल दी।अब राकेश के ख्यालों की मल्लिका उसकी खुद की बेटी उसके आगे मादरजात नंगी खड़ी थी।

नज़ारा देख राकेश का लंड फिर उठने लगा था लेकिन फिलहाल राकेश का प्लान कुछ और ही था।

उसने पीछे से ही स्वीटी के चूतड़ फैला कर गांड चाटना चालू कर प्रिया।

2 मिनट गांड का छेद जीभ से कुरेदने के बाद उसने स्वीटी को आगे झुकने को कहा तो उसने दीवार के सहारा लेकर अपने पैर फैला लिए और गांड बाहर निकाल कर खड़ी हो गयी।इस पोज़ में खड़ी अपनी बेटी को 30 सेकंड निहार कर मन में उस जवानी की दाद देने के बाद राकेश ने आगे बढ़ कर स्वीटी की चूत पर जीभ रख दी।

नन्ही सी चूत राकेश के होंठों में पूरी तरह ढक गयी।

दाने पर जीभ की रगड़ पड़ते ही स्वीटी सीत्कार उठी।दीवार से उसके हाथ सरक गए और हल्की धम की आवाज़ के साथ उसका सिर दीवार से टकराया।

आवाज़ सुन कर राकेश ने अपना मुँह हटाया और स्वीटी का हाल पूछा.जिस पर स्वीटी ने सिस्कारते हुए वापस चाटते रहने का हुक्म प्रिया और दोनों हाथों में अपने चूचे पकड़ कर मसलने लगी।

बेटी की बेचैनी और तड़प देख राकेश मन ही मन मुस्कुराया और वापस स्वीटी की चूत चाटने लगा।वो दोनों चूतड़ों को फैला कर बारी बारी से चूत और गांड चाट रहा था।

स्वीटी को मानो स्वर्ग का आनंद मिल रहा हो!उसकी ‘आह हहह … ओह्ह … ममम …’ से पूरा घर गूंज रहा था।उसे ऐसा मज़ा आज तक नहीं आया था।

राहुल से स्वीटी को बस लंड मिला था।सेक्स उसे आज बाप से मिला।

राहुल नौसिखिया है और पापा ने जवानी में जाने कितनी चूतें चटकाई होंगी।

बेटी की तड़प और उसके कांपते पैरों को सहारा देते हुए राकेश ने स्वीटी की जांघें सहलाई और पूछा- मज़ा आ रहा है मेरी राजकुमारी?“हाँ पापा, बहुत मज़ा आ रहा है … आई लव यू पापा!”“आई लव यू टू मेरी गुड़िया!” कहकर राकेश ने वापस अमृत कलश से होंठ सटाये और रसपान करने लगा।

इस बार उसने स्वीटी का दाहिना पैर उठा कर बेड के सिरहाने रख प्रिया और टांगों के बीच से निकल कर आगे से चूत चाटने लगा।

अब राकेश का सिर स्वीटी के आगे था जिस पर वो बीच बीच में हाथ फिरा देती थी।साथ ही वो अपने खुद के जिस्म में सुलगती लगातार अपने निप्पल मींजने में लगी थी।

चूतड़ों को सहलाते पापा ने चूत चाट चाट कर बेटी की हालत खराब कर दी थी।राकेश कभी होंठों से दाने को मसलता तो कभी दांतों से काटता … जीभ जितनी लंबी जा सके उसे चूत में घुसाकर जीभ से चूत चुदाई कर रहा था।

अबकी बार राकेश ने अपने हाथ के अंगूठे से स्वीटी की गांड का छेद रगड़ना चालू कर प्रिया।चूत और गांड पर एक साथ होने वाले हमलों से स्वीटी की नींव हिल गयी, उसके पैर थर थर काँपने लगे।बेटी को संभलता न देख राकेश ने उसे चूतड़ और चूत के बल पर ही उठा लिया और अपने सामने बेड पर पटक प्रिया।

राकेश का मुँह अब भी चूत चाट रहा था लेकिन अंगूठा गांड के अंदर घुस चुका था।

स्वीटी ने दोनों हाथों से राकेश के बाल जकड़ लिए और पूरी ताकत से उसे अपनी चूत में दबाने लगी।मानो वो अपने बाप को अपनी चूत में समा लेना चाहती हो।

जीभ और अंगूठा लगातार अंदर बाहर चलने की वजह से स्वीटी संभल न सकी और एक के बाद एक पिचकारियां मारते हुए अपने बाप को पूरा भिगो प्रिया।जितना रस राकेश पी सकता था उतना पी गया बाकी चेहरे गले और छाती पर फैला पड़ा था।

कुछ देर में स्वीटी का सांस जुड़ा तो उसने देखा पापा सामने बैठे इसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रहे हैं।

5 मिनट पहले शर्म लिहाज़ फेंक कर बाप के मुँह पर चूत घिसने वाली बेटी अब शर्मा रही थी।

कुछ देर पहले का सीन याद कर स्वीटी ने मुस्कुराते हुए मुँह फेर लिया।लेकिन राकेश ने चुटकी लेते हुए कहा- इन छोटी संतरे की फांकों में में इतना रस निकलेगा, सोचा नहीं था!

स्वीटी कुछ नहीं बोली, बस बाप की तरफ देख कर मुस्कुरा दी।

राकेश फिर बोला- और तुझ छोटे से पटाखे में इतनी आग होगी, वो भी नहीं मालूम था।“आपका ही खून है पापा, और चिंगारी भी आपने ही लगाई थी।” इतना कहते हुए स्वीटी उठी और लपक कर अपने पापा से लिपट गयी।

स्वीटी के चूचे बाप की भीगी छाती पर घिस रहे थे चेहरे से टपकते अपने चूत के रस को चाट चाट के साफ करने लगी।बेटी का स्खलन देख कर राकेश का लंड फिर से खड़ा हो चुका था।

गोद में बैठी स्वीटी की गांड पर जब लंड ने दस्तक दी तो वो उछल गयी, फिर उसे गांड की दरार में सेट करके वापस बैठ गयी और राकेश को जहाँ तहाँ चूमने लगी।

बेटी की गांड की गर्मी सीधे अपने लंड पर महसूस करते हुए राकेश ने स्वीटी के कान में पूछा- तैयार हो बेटी?“आपके लिए हमेशा पापा!”“आई लव यू मेरी रानी!”“आई लव यू टू मेरी माँ के पति!” बोल कर स्वीटी खिलखिला के हँस दी।

इसी खेल में राकेश ने स्वीटी को हल्का सा उठा कर लंड सेट किया और वापस स्वीटी को नीचे दबा प्रिया।राकेश का मोटा लंड स्वीटी की मासूम चूत को चीरता हुआ आधा अंदर घुस गया।

स्वीटी दर्द से दोहरी हो गयी।उसकी चीख इतनी तेज थी कि अगर पड़ोसियों तक भी आवाज़ गयी हो तो बड़ी बात नहीं है।

बिना हिले जुले राकेश अपनी जगह रुक गया और उछल कर भागती स्वीटी को भी कंधों से पकड़ कर उसी पोजीशन में जाम कर प्रिया।स्वीटी कहीं हिल नहीं पा रही थी और बाप के कंधे पर गाल रख के रो रही थी।

एक हाथ से राकेश ने उसके चूचे सहलाना चालू किया और होंठों में स्वीटी के कान की लटकन को पकड़ कर चूसने लगा।

राकेश के कान चूसते ही स्वीटी को गुदगुदी हुई और बदन में एक लहर सी दौड़ गयी।उसने बाप से कान छुड़ाने के लिए अपना सिर दूसरे कंधे पर रखा तो राकेश ने दूसरे कान को होंठों में भर लिया।

समय के साथ कुछ दर्द कम हुआ और कुछ राकेश की हरकतों ने स्वीटी के जिस्म में मस्ती जगा दी।इसी बीच मौका देख के राकेश ने एक और धक्का लगाया और लंड सीधा बच्चादानी से टकराया।

राकेश का लंड जड़ तक स्वीटी के अंदर घुस चुका था।यह देखकर राकेश ने स्वीटी को बेड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया।

2 मिनट के ब्रेक के बाद राकेश ने स्वीटी के होंठों को चूसते हुए हल्के धक्के देने चालू किये।

थोड़ी देर बाद उसने महसूस किया कि स्वीटी भी नीचे से धक्कों का जवाब देने लगी थी।

राकेश ने अपनी स्पीड बढ़ते हुए पूछा- अब ठीक लग रहा है मेरी जान को?“हाँ पापा, अब ठीक है।”

दर्द तो नहीं हो रहा?”“हल्का हो रहा है … लेकिन मज़ा ज्यादा रहा है।” कहते हुए स्वीटी ने राकेश के होंठों में अपनी जीभ घुसाते हुए उसकी कमर पर अपनी टांगें लपेट दी।

राकेश स्वीटी की जीभ चूसते हुए हर धक्के में स्वीटी की बच्चेदानी हिला रहा था।

स्वीटी जैसे सातवें आसमान पर उड़ रही थी। स्वीटी का छोटा जिस्म बाप के बड़े लंड से ऐसे कूटा जा रहा था जैसे ओखली में सरसों का दाना!राकेश की चौड़ी छाती के नीचे स्वीटी के चूचे मसले जा रहे थे और पतली नाज़ुक जाँघों के बीच फ़ौलादी लौड़े की चोट लगातार पड़ रही थी।

इतनी देर तक लगातार ठुकवाने के बाद स्वीटी चरमरीमा पर आ चुकी थी, उसकी आंखें चढ़ने लगी और हाथ पैर अकड़ने लगे।

स्वीटी की हालत देख राकेश ने भी रफ्तार बढ़ा दी और धकाधक पेलने लगा।

पूरा कमरा स्वीटी की सिसकारियों से भरा हुआ था।

तभी राकेश की कमर में नाखून गड़ाती हुई स्वीटी झड़ने लगी।

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झड़ते समय भी राकेश रुका नहीं, बेटी की चूत से फव्वारा चलता रहा और बाप धकापेल चोदता रहा।

पूरी तरह निचुड़ जाने के बाद स्वीटी बेदम सी राकेश के नीचे पड़ी उसे निहार रही थी।चूत में पड़ने वाले धक्कों को एन्जॉय करने तक का दम नहीं बचा था।

अब राकेश रुक गया।उसका माल अभी निकला नहीं था। लन्ड अब भी स्टील की रॉड सा सख्त था और चूत में ही पड़ा था।बस धक्के रुक गए थे।

स्वीटी की खस्ता हालत पर तरस खा कर राकेश ने ब्रेक लेने का फैसला किया और कुछ बातें करने लगा।

“बेटी तू अपने उस बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करती है ना?”

इस वक़्त ऐसा सवाल सुन कर स्वीटी को आश्चर्य हुआ।सीधा जवाब ने देकर ‘ऐसा क्यों पूछा आपने?’ बोल कर सवाल टाल प्रिया।

“दरअसल मैं अक्सर सोच करता था कि मेरी लाडो कुंवारी होगी, आज जब तूने खुद को मुझे सौंपा तो मन में सील तोड़ने की खुशी थी। लेकिन तेरी सील तो पहले से टूटी हुई है।” इतना कहकर राकेश ने मुँह लटका लिया।

बच्चों की तरह उदास होते अपने बाप पर स्वीटी को प्यार आ गया, उसने राकेश के गालों पर हाथ फिराते हुए कहा- मुझे मालूम नहीं था कि एक दिन आएगा जब मेरी ज़िंदगी का बेस्ट सेक्स अपने पापा के साथ मिलेगा। अगर ऐसा मालूम होता तो आपके लिए बचा लेती। मेरी सील पैक न होने से क्या आपको बुरा लगा?

“बुरा तो नहीं लेकिन हाँ थोड़ी निराशा तो हुई थी, लेकिन कोई बात नहीं। एक और रास्ता है।”“कैसा रास्ता?”“वो रास्ता जिससे सील तोड़ने का सौभाग्य तेरे पापा को मिल सकता है। बोल देगी ये मौका तू अपने पापा को?”“मैं आपके लिए जान भी दे सकती हूँ पापा, आप बस कहिए क्या करना है।”

“अच्छा ये बता, कभी मुँह और चूत के अलावा कही और लंड लिया है?”लंड चूत जैसे शब्द अपने पापा से सुन कर स्वीटी शर्मा गयी- कहीं और मतलब? कहाँ?

“अरे बाबा, गांड मरवाई है कभी? पीछे के छेद में घुसवाया है?”ये सुनते ही डर और आश्चर्य के भाव स्वीटी के चेहरे पर बिखर गए।

स्वीटी समझ गयी थी कि राकेश अब उसकी गांड मरना चाहता था।यही वो रास्ता था जिसकी सील पैक होने की राकेश को उम्मीद थी और वो सही भी था।

स्वीटी बड़े ही असमंजस में फंस चुकी थी।सील पैक न होते हुए भी सील तुड़वाने जैसा दर्द झेला था उसने!बाप का लौड़ा जो इतना फ़ौलादी था।अब उसी फ़ौलादी लौड़े को गांड में लेने की हिम्मत नहीं थी उसकी!

“बोल न मेरी जान, देगी अपने पापा को ये मौका?” राकेश ने फिर वही सवाल पूछा और स्वीटी की चूत में हल्के हल्के धक्के देने चालू कर दिए।

सवाल सुन कर स्वीटी का चेहरा उतर गया और घंटे भर से चुद कर सूज चुकी चूत पर वापस लंड के धक्के भी दर्द कर रहे थे।चेहरे पर दर्द की लकीरों के बीच डर के मारे उससे कोई जवाब देते न बना।

लेकिन बेटी की अवस्था बाप भली भांति समझ गया था।राकेश ने बेटी के माथे को चूमते हुए उसे सांत्वना दी- चिंता मत कर मेरी रानी, आज नहीं चोदूंगा तेरी गांड। बस भविष्य में ये गिफ्ट अपने पापा को ही देगी ये वादा कर दे।

इतना सुनते ही स्वीटी मुस्कुरा दी और पापा की गर्दन से लिपट कर होंठ चूसने लगी।वह राकेश को पलट कर नीचे किया और खुद ऊपर आ गयी।

अब स्वीटी राकेश के ऊपर सीधी बैठ कर लौड़े पर उछल रही थी, हर झटके के साथ उसके उछलते चूचे राकेश को पागल कर रहे थे।

राकेश ने दोनों हाथों से चूचे पकड़ लिए और पागलों की तरह दबाने, खींचने लगा।

बाप के लंड पर उछलती स्वीटी अपने बाप को खुश देखकर बहुत खुश थी।वो ख्यालों में ऐसी खोई थी कि राकेश के धक्कों से तालमेल नहीं बिठा पा रही थी।

राकेश पूरे जोश में चोद रहा था लेकिन ऊपर बैठी स्वीटी बस बाप के चेहरे को देख कर मुस्कुराए जा रही थी।

इस अव्यवस्था से झुंझलाए राकेश ने एक झटके में स्वीटी को बेड पर पटक कर घोड़ी बना प्रिया और खुद उसके पीछे जाकर पोजीशन ले ली।

स्वीटी ने गर्दन घुमा कर पीछे देखा तो राकेश निशाने पर अपना लौड़ा सेट कर के फायर करने की तैयारी में था।

राकेश ने भरे हाथ का एक तमाचा स्वीटी के चूतड़ पर मारा और एक झटके पूरा लंड ठोक प्रिया।

इस अचानक हमले से स्वीटी की सीत्कार निकल गयी और बैलेंस डगमगा गया।हाथों का सपोर्ट खत्म कर बिटिया रानी अब मुँह के बल डॉगी स्टाइल में चुद रही थी।

स्वीटी का चेहरा बेड पर था और घुटनों के बल गांड उठा के चुदवा रही थी।बीच में चूचे ऐसे झूल रहे थे जैसे किसी बाग में पके फल!

राकेश कभी हाथ बढ़ा कर चूचे भींच देता तो कभी चूतड़ों पर चांटे चटका देता।वो पूरे जोश में स्वीटी की चूत में लंड अंदर बाहर कर रहा था।हर धक्के के साथ राकेश की झूलती गोटियां स्वीटी की जाँघों से टकरा कर मीनूर संगीत बना रही थी।

चट चट की तेज आवाज कमरे में गूंज रही थी जिसमें स्वीटी की चीखें घुल कर माहौल को और भी कामुक बना रही थी।राकेश पूरे जोश में अपनी बेटी को ठोक रहा था।

कुछ ही देर में राकेश का लन्ड फूलने लगा, अब वो जल्दी ही झड़ने वाला था।उसने झट से स्वीटी को पलटा और चटाई की तरह अपने नीचे बिछा कर उसपे लेट गया। दोनों हाथों से पूरी जान लगा कर स्वीटी के चूचे ऐंठ दिए और चूत में तेज तेज़ ओर गहरे धक्के लगाने लगा।

बाप के वहशीपन के निशान बेटी के पूरे जिस्म पर दिख रहे थे लेकिन फिलहाल उसकी चिंता किसी को नहीं थी।

स्वीटी का जोश भी चरम पर था और वो अपने बाप की छाती की चिपक कर झड़ने लगी।साथ ही राकेश ने लंबे धक्के लगाते हुए अपनी बेटी की चूत को अपने वीर्य से सराबोर कर प्रिया।

गर्भाशय की गहराई में गर्म वीर्य की तराई से जैसे स्वर्ग का आनंद मिल गया हो।आँखें मूंद कर दोनों एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे रहे।बाप बेटी की चुदाई के अंतिम पलों का आनंद वो खोना नहीं चाहते थे।

राकेश खुश था कि उसने जिस रूप में अपनी बेटी को चाहा आज उसी रूप में वो उसकी बांहों में लिपटी पड़ी है।स्वीटी खुश थी कि पापा के अकेलेपन में वो अपनी माँ की कमी पूरी कर पाई जिस वजह से उसके पापा खुश थे।

थोड़ी देर में राकेश का लंड सिकुड़ कर खुद ही चूत से बाहर सरक आया।

राकेश ने स्वीटी के होंठों को चूमते हुए पूछा- स्वीटी, मेरी बेटी, मेरी जान। प्यार से क्या बुलाऊँ मैं तुझे?“आपका जो मन करे बुलाइये पापा … बस बुलाते रहिये। अपने से दूर मत रहने देना अब मुझे कभी!”“कभी नहीं मेरी जान, कभी भी नहीं … क्यों न तू मुझसे शादी कर ले बेटी?”

यह सुनते ही स्वीटी चौंकी और राकेश से अलग होकर बैठ गयी।उसने उठने की कोशिश की लेकिन स्वीटी से उठा नहीं गया।

चूत सूज के पाव बन चुकी थी और अंदरूनी जांघें भी सूजकर लाल हो गईं थी।“पापा, मुझे बाथरूम जाना है। उठा नहीं जा रहा!”“कोई बात नहीं, मैं उठा कर ले जाऊंगा अपनी रानी बिटिया को।”

राकेश ने स्वीटी को गोद में उठाया और बाथरूम में लाकर कमोड पर बिठा प्रिया।

मूतने के बाद स्वीटी ने दोबारा अपने बाप की तरफ हाथ फैला दिए।राकेश उसे उठा कर वापस बेड पर लाया और फिर से वही सफल दोहराया।

“बोल बेटा, शादी करेगी मुझसे?”“नहीं!”

“नहीं? क्यों नहीं मेरी जान? क्या तू अपने पापा से प्यार नहीं करती?”“करती हूँ पापा, बहुत प्यार करती हूँ। दुनिया में किसी भी चीज़ से ज्यादा प्यार करती हूँ। लेकिन आपसे शादी नहीं करूंगी।”

राकेश कुछ नहीं बोला, बस सवालिया आंखों से अपनी बेटी के बेबाक जवाबी चेहरे को घूरता रहा।

पापा की जिज्ञासा शांत न होती देख स्वीटी ने फिर बोला- देखिए पापा, मैं आपके लिए मम्मी की कमी पूरी करना चाहती हूँ। मम्मी के लिए उनके पति का प्यार महसूस करना चाहती हूँ। लेकिन उनका हक़ कभी नहीं लूंगी। आपसे शादी करने का हक़ सिर्फ माँ का था। मैं ये नहीं करूंगी।

“लेकिन बेटा, अब ये जो हमारे बीच है वो क्या है। इस रिश्ते को क्या नाम दोगी?”

स्वीटी कुतिया की तरह चारों पैरों पर उठी और राकेश के नज़दीक जाकर बोली- इस घर के बाहर मैं पहले की तरह आपकी बेटी हूँ।

बात अधूरी सी महसूस करके राकेश ने पूछा- और घर के अंदर?स्वीटी मुस्कुराई और राकेश की गर्दन के नीचे हाथ लगाकर उसका सिर उठाते हुए अपने चूचों में घुसाते हुए बोली- आप की रखैल!

राकेश बेटी के जवाब के बारे में सोचते हुए बेटी के चूचे चूसने लगा और इसी तरह बाप बेटी की चुदाई का अगला राउंड चालू हो गया।

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बेटी बनी बाप की रखैल

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