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जवान लड़की पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,000 बार

पापा के दोस्त के साथ मस्ती- 1

गरिमा सेक्सी

02 Nov 2025 को प्रकाशित

पापा के दोस्त के साथ मस्ती- 1
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यंग पुसी का मजा लेने के लिए सभी तैयार रहते हैं. इस कहानी में मेरे पापा के दोस्त ने मुझे देखा तो वे मेरे जिस्म को खा जाने वाली नजर से देखने लगे.

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मेरे प्यारे पाठको,मेरी पिछली कहानीचूत और लण्ड का एक ही रिश्तामें मैंने आपको बताया था कि कैसे छोटे भाई सोनू के बाद मेरे और पापा के बीच भी चुदाई का खेल शुरू हो गया था।उसके बाद से मुझे और पापा को जब भी और जहाँ भी मौका मिलता, वहां अपना चुदाई का खेल शुरू कर देते थे।

सच कहूं तो मुझे घर में मम्मी के सामने ही उनसे छुप कर पापा के साथ इस तरह का यंग पुसी सेक्स एडवेंचर खेल में मजा आ रहा था।

बाद में मैंने इस खेल में अपनी दोस्त स्वाति को भी शामिल कर लिया था।वह पहले से ही इस बात के लिए तैयार बैठी थी इसलिए तुरंत हां कर दी।

पापा के साथ स्वाति को इस खेल में शामिल करने से पापा बड़े खुश थे कि उन्हें अब दो-दो जवान चूत चोदने का मौका मिल रहा था।

स्वाति को इस खेल में कैसे शामिल किया इसकी भी बड़ी मजेदार कहानी है।अगर आप लोग जानना चाहेंगे तो मुझे मेल करके बता दीजिएगा, मैं वह कहानी भी अलग से लिख दूंगी।

और हाँ एक बात और … स्वाति को पापा के साथ चुदाई के खेल में शामिल करने के काफी दिनों बाद मैंने मौका देखकर एक दिन स्वाति को भी अपने और सोनू (छोटे भाई) के संबंध के बारे में भी बता प्रिया।जिसे सुनकर स्वाति बोली- अरे वाह तू तो बड़ी खिलाड़ी निकली … घर में दो-दो लण्ड का जुगाड़ कर लिया तूने!

बाद में मैंने सोनू को भी स्वाति के बारे में बता प्रिया कि वह तुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार है।इसके बाद सोनू जब भी घर आता तो मेरे साथ स्वाति की भी चुदाई कर लेता था जिससे मेरी दोस्त स्वाति को चोदने की सोनू की पुरानी ख्वाहिश भी पूरी हो गयी।

इस बीच जब से सोनू जब से इंजीनियरिंग के लिए एक बड़े शहर में रहने लगा था तब से वह बाइसेक्सुअल हो गया था।क्योंकि एक बार जब वह छुट्टी पर घर आया था तो मैंने उसके मोबाइल में नंगे लड़कों की आपस में गांड मारते हुए फोटो देखी थी।

मैंने सोनू से एक बार चुदाई के समय पूछ भी लिया था- तेरे मोबाइल में नंगे लड़कों की फोटो देखी है मैंने!तो वह हंसते हुए बोला- अरे दीदी बाहर हॉस्टल में लड़कियां तो मिलती नहीं तो हम एक-दो दोस्त आपस में ही मजे कर लेते हैं।

मैंने कहा- मतलब क्या करता है तू?सोनू बोला- अरे वही जैसे आप और स्वाति दीदी मजे करती हैं, उसी तरह हम एक-दूसरे के लण्ड चूस लेते हैं या कभी-कभी गांड भी मारते हैं एक-दूसरे की!

मैं थप्पड़ मारकर हंसती हुई बोली- मतलब तुझे कोई लड़की नहीं मिली जो लड़कों के साथ करने लगा।सोनू बोला- अरे कभी-कभी सब चलता है दीदी! तुम भी तो मजे लेती हो न आखिर स्वाति दीदी के साथ। बस समझ लो, हम लड़के भी मजे कर लेते हैं।

मैंने भी मन में सोचा कि सोनू सही बोल रहा है.जैसे मैं और स्वाति मजे लेती हैं, वैसे ये भी अपने दोस्तों के साथ मजे लेता होगा।

खैर … पापा को इस बात की भनक तक नहीं थी कि सोनू भी मेरी चुदाई करता है।

वहीं सोनू को भी पापा और स्वाति के पापा के साथ चल रहे मेरे चुदाई के खेल के बारे में नहीं पता था।

जब कभी सोनू छुट्टी पर घर आता था तो फिर उतने दिन पापा कुछ नहीं करते थे।

हाँ इस बीच मैंने मौका पाकर एक दिन पापा को बता प्रिया कि मुझे बुआ और उनके बीच चल रहे खेल के बारे में पता है और बुआ को भी पता चल गया कि मुझे उनके और पापा के बीच जो चोरी छिपे चुदाई का खेल चल रहा है उसकी जानकारी है।

धीरे-धीरे मुझे पापा और बुआ के बीच ये सब कब शुरू हुआ कैसे शुरू हुआ उसकी कहानी भी पता चल गयी।

हालांकि बुआ को यह नहीं पता था कि वही खेल मेरे और पापा के बीच भी चल रहा है।

चूंकि उनकी कहानी भी लंबी, मजेदार और जबरदस्त है जिसके बारे में आगे कभी बताऊंगी।

और हाँ मेरी सहेली स्वाति की भी कहानी भी आपको बताऊंगी जो उसने मुझे बतायी थी कि कैसे उसके पापा-मम्मी ने चुदाई के खेल में उसे भी शामिल किया।

खैर धीरे-धीरे इसी तरह वक्त बीतता गया और मेरी चूत को तीन-तीन लण्ड का स्वाद मिलता रहा, पापा, सोनू और स्वाति के पापा का।कभी पापा, मैं और स्वाति मेरे घर और स्वाति के घर पर मैं, स्वाति और उसके पापा … कभी-कभी उसकी मम्मी के साथ मजे करती थी।

इन सबके बारे में जानने के लिए मेरी पिछली कहानियों को ज़रूर पढ़ें, तभी आपको पूरा मजा आएगा।

इसी तरह करीब दो साल गुजर गये।

उसके बाद पापा के नये बॉस ट्रांसफर होकर हमारे शहर में आये।उनके आने से पापा बेहद खुश थे।उसकी वजह यह थी कि वे पापा के कॉलेज टाइम से दोस्त भी हैं।लेकिन उनकी नौकरी पापा से पहले लग गयी थी तो वे सीनियर हो गये।

पापा के बॉस भी इसी कॉलोनी में रहते थे लेकिन उनका घर दूसरे ब्लॉक में था जहाँ ज्यादा बड़े घर बने थे अधिकारियों के लिए।

अभी पापा के नये बॉस को आये 3-4 दिन ही हुए थे कि एक-दिन शाम को पापा ऑफिस से आने के बाद पापा बोले- आज देव ने अपने घर बुलाया है शाम को!

उनका नाम देवेन्द्र था लेकिन बचपन से पापा उन्हें देव ही कहकर बुलाते थे।अंकल भी पापा को उनके नाम से ही बुलाते थे।

शाम को हम तीनों तैयार होकर उनके घर गये।चूंकि घर उसी कॉलोनी में था तो हम पैदल ही चले आये थे।

हमारे पहुंचने पर अंकल ने ही दरवाजा खोला।हम सब अंदर आकर बैठ गये।

मुझे देखकर वे बोले- अरे ये कितनी बड़ी हो गयी है। जब मैंने देखा था तो गोद में खेलती थी।

बातचीत में पता चला कि कुछ साल पहले हुए एक एक्सीडेंट में अंकल की पत्नी की मृत्यु हो गयी थी।

उसी में अंकल के पैर में भी काफी चोट आयी थी जिससे वे अभी भी तेज नहीं चल पाते थे।जैसा कि मैंने बताया था कि वे भी करीब पापा की ही उम्र के थे करीब 45-46 साल के।

उनके भी एक बेटा और एक बेटी है।दोनों दूसरे शहर (जहाँ उनका अपना घर) में रहकर अपनी पढ़ाई करते हैं।

बेटा बड़ा है जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है और बेटी छोटी है जो अभी 12वीं में थी।

बातचीत में अंकल ने बताया कि वे अपने लड़के को भी रेलवे में ही जॉब दिलवाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

हालांकि उन्होंने धीरे से पापा से खुलासा भी किया कि बेटे की रेलवे में जॉब के लिए उन्होंने ऊपर के लोगों से बात भी कर ली है और रिजल्ट आये तो शायद उसकी नौकरी पक्की है।इतने बड़े घर में अंकल रहते तो अकेले थे लेकिन सरकारी नौकर मिला हुआ था तो खाने-पीने की दिक्कत नहीं होती थी।

पापा और अंकल को एकदम दोस्तों की तरह हंसी मजाक और बात कर रहे थे।

खैर इस बीच मैंने नोटिस किया कि अंकल मुझमें बहुत दिलचस्पी ले रहे थे।मैंने देखा कि वे अक्सर मम्मी-पापा से नज़र बचाकर मुझे देख लिया करते थे।एक बार तो मैंने उन्हें चोरी से अपनी चूचियों को देखते हुए देख लिया।

जैसे ही हमारी नजर मिली, अंकल हड़बड़ा गये और इधर-उधर देखने लगे और फिर पापा से बात करने लगे।

मैं समझ गयी कि अंकल भी पापा की तरह ही ठरकी हैं और यंग पुसी का मजा लेने की फ़िराक में हैं।मुझे तो वैसे भी इन सबमें मजा आता था।

मैंने टीशर्ट और जींस पहना हुआ था।मैं और भी जानबूझकर अपनी गोल-गोल चूचियों को उभार कर बैठ गयी ताकि अंकल आराम से मेरी चूचियों को टीशर्ट के ऊपर से ही देख सकें।

खैर … खाना वगैरह खाकर जब हम चलने को हुए तो मैंने अंकल को नमस्ते किया तो उन्होंने आशीर्वाद देने के बहाने मेरी पीठ पर हाथ रखा लेकिन तुरंत हटाने के बजाय वह हल्का सा मेरी पीठ सहलाने लगे।उस समय मम्मी-पापा की पीठ हमारी तरफ थी क्योंकि वे आगे निकल रहे थे दरवाजे से और अंकल पैर में चोट की वजह से वह तेज नहीं चल पाते थे तो वह पीछे थे और मैं उनकी बगल में थी।

मैं भी बिना कुछ बोले उसी तरह रही।

जैसे ही मम्मी-पापा मुड़ने वाले थे वैसे अंकल ने अपना हाथ मेरी पीठ से हटा लिया।

इतनी देर में मैं समझ चुकी थी कि अंकल भी चूत के दीवाने हैं और काफी दिनों से किसी जवान लड़की को इतने करीब से नहीं छुआ है, तभी पहली ही मुलाकात में इतना उतावलापन दिखा रहे हैं।

इस बीच पापा के बॉस का हमारे घर भी आना-जाना लगा रहने लगा।चूंकि वह अकेले रहते थे तो अक्सर सैटरडे या संडे को रात के खाने के लिए पापा उन्हें घर पर ही बुला लेते थे।

अंकल जब भी घर आते तो मैं जानबूझकर थोड़ी टाइट टीशर्ट या कभी स्कर्ट पहन लेती थी।

शुरुआत में तो अंकल चोरी-चोरी मुझे देखते थे और नजर मिल जाने पर जल्दी से निगाह हटा लेते थे।लेकिन कई बार ऐसा हुआ कि जैसे ही मैंने अंकल को चोरी से अपनी चूचियों या गांड को घूरते देखा और हमारी निगाह मिली तो मैं मुस्कुरा देती थी।

बाद में ऐसा होने लगा कि अंकल जब भी घर आते थे तो भले ही मम्मी-पापा की चोरी से मुझे देखते थे लेकिन धीरे-धीरे मेरे देख लेने का डर उनके मन से निकलने लगा था।

क्योंकि कई बार मैंने यह महसूस किया मेरे देखने के बाद भी अंकल मेरी चूचियों को घूरते रहते थे फिर अक्सर निगाह मिलने पर वह मुस्कुरा देते थे जिस पर मैं भी मुस्कुरा देती थी।अंकल समझ रहे थे कि मुझे उनकी हरकतों के बारे में पता है लेकिन फिर भी मैं इग्नोर कर रही हूँ।

इसके अलावा अंकल मुझे छूने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे।कभी किसी बहाने पीठ को सहला देना या कभी कंधे पर हाथ रख देना।

हालांकि ये हरकतें करते समय अंकल बेहद सावधान रहते थे वह हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि पापा-मम्मी को न पता चले।

अंकल की इस तरह की हरकतों को मेरी मौन सहमति भी मिल रही थी जिसे वे भी समझ रहे थे।वैसे भी मुझे इस तरह किसी को उकसाने में शुरू से ही मज़ा आता था और वही मैं अंकल के साथ भी कर रही थी।

खैर इसी तरह दिन बीतने के साथ हमारे और अंकल के बीच इस तरह की हरकतें बढ़ने लगीं।अब मैं जानबूझकर संडे के दिन स्कर्ट और टॉप पहनती थी।

जिससे कभी-कभार मौका मिलते ही पापा-मम्मी की नजर बचाकर उन्हें अपनी चिकनी गोल मांसल जांघों के दर्शन करा देती थी।कहानी अभी लम्बी चलेगी.यंग पुसी की कहानी पर अपने विचार मुझे भेजते रहिएगा.

यंग पुसी का मजा कहानी का अगला भाग:पापा के दोस्त के साथ मस्ती- 2

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पापा के दोस्त के साथ मस्ती

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
s

sonampandey777

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

हिमांशु नॉटी

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

रोहित हैण्डसम

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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