इमरान ओवैश
सत्यापित कहानीकार (Verified)@imarana-ovasha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
इमरान ओवैश की रचनाएं
वो सात दिन कैसे बीते-6
‘हम एनल सेक्स कर सकते हैं… अगर तुम चाहो।’ मैंने खुद को थोड़ा सँभालते हुए कहा।‘करो… कुछ भी करो… कहीं भी घुसा दो पर इसे मेरे अंदर कर दो।’
वो सात दिन कैसे बीते-5
गौसिया को हस्तमैथुन सिखाते हुए मैंने अपने मुख में ढेर सी लार बनाई और उसके सीधे हाथ की उँगलियों को अपने मुख में ले उन्हें लार से गीला किया- वहाँ सूखी उँगलियों से जल्दी ही जलन होने लगती है इसलिए हमेशा ध्यान रखना कि चिकनाई ज़रूरी है।मैंने उसे चेताते ह...
वो सात दिन कैसे बीते-4
गौसिया स्खलित होने के बाद सनसनाते दिमाग के साथ बेजान सी पड़ गई जैसे बेहोश हो गई हो। मैं भी थक गया था तो मैं भ उसकी बगल में लेट कर अपनी साँसें दुरुस्त करने लगा।
वो सात दिन कैसे बीते-3
मैंने उसके घुटने मोड़ कर दोनों जांघों को फैलाया कि वो बंद पड़ी गहरे रंग की लकीर खुल गई, एकदम सुर्ख सा अंदरूनी भाग मेरे सामने आ गया।
वो सात दिन कैसे बीते-2
मेरे पड़ोस की पर्दानशीं लड़की ने मुझ पर भरोसा करके मुझे मिलने के लिये बुलाया।
वो सात दिन कैसे बीते-1
साल भर हो गया शायद, मेरी अंतिम कहानी को छपे…ऐसा नहीं है कि इस बीच ऐसा कुछ हुआ नहीं जो लिखने के काबिल हो मगर कुछ व्यस्तता रही और कुछ लिखने का मन भी नहीं हुआ…
हवसनामा: मेरी तो ईद हो गयी
मेरे अज़ीज़ दोस्तो, आपने मेरी पिछली कहानीनंगी आरज़ूपढ़ी और पसंद की. आप सबका दिल से शुक्रिया.
एक बेवा का शिकार-3
भाभी की चुदाई के चार रोज़ बाद एक रात ऐसा मौका भी आया… जब रात के किसी पहर मेरी आँख खुल गई। खुलने का कारण मेरे लंड का खड़ा होना और उसका गीला होना था। मैंने अपनी इंद्रियों को सचेत कर के सोचा तो समझ में आया कि कोई मेरे लंड को अपने गीले-गीले मुँह में लिए...
एक बेवा का शिकार-2
एक शाम मैंने फिर मुठ्ठ मार कर उसकी चड्डी में पोंछ कर टांग प्रिया और अपने कमरे की खिड़की से उसकी प्रतिक्रिया देखने लगा।उसने जब कपड़े समेटे तभी महसूस कर लिया कि मैंने फिर वही हरकत की थी लेकिन इस बार उसने नीम अँधेरे में चड्डी को गौर से देखा, फिर मुड़ कर ...
एक बेवा का शिकार-1
वो बाकायदा मुम्बई आकर मुझे मिले। उनसे जो बातचीत हुई, वो तो काफी लम्बी थी। मगर जो लब्बोलुआब था वो पेश कर रहा हूँ।