इमरान ओवैश
सत्यापित कहानीकार (Verified)@imarana-ovasha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
इमरान ओवैश की रचनाएं
निदा की अन्तर्वासना-3
इमरान ओवैशहम तीनों ही मादरजात नग्न थे और मेरे इशारे पर नितिन भी ऐसा सट गया था कि हम तीनों ही एक-दूसरे से रगड़ रहे थे। नितिन ने उसका चेहरा थाम कर उसे चूमने की कोशिश की, लेकिन निदा ने शर्म से चेहरा घुमा लिया और वो पीछे से उसकी गर्दन पीठ पर चुम्बन अंक...
निदा की अन्तर्वासना-2
इमरान ओवैशमैंने न सिर्फ अपने हाथों को उसकी पीठ पर रखे हुए निदा की ब्रा के हुक खोल दिए बल्कि हाथ नीचे करके उसकी कुर्ती को एकदम से ऐसा ऊपर उठाया के उसकी भरी-भरी चूचियां नितिन की आँखों के आगे एकदम से अनावृत हो गईं और वह दोनों हाथों से उन पर जैसे टूट ...
निदा की अन्तर्वासना-1
दोस्तो, मेरी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि कैसे मेरा ठिकाना लखनऊ में हुआ और फिर यहाँ जो ननद-भाभी की चूत के दर्शन सुलभ हुए तो वारे न्यारे हो गए और बाद में जब दोनों के बीच सब कुछ साफ़ हो गया तो मेरी उँगलियाँ समझो कि घी में तैर गईं।
हवसनामा: जवानी की भूख-2
जब एक बार यह तय कर लिया कि उन दोनों को छूट देनी ही है तो फिर मन से सब नैतिक अनैतिक निकाल प्रिया। कभी शादी से पहले यह सब वीणा ने भी किया ही था और मेरी बेटी भी इंग्लैंड में रह रही है तो क्या करती न होगी। यह सब जवानी की सहज स्वाभाविक प्रतिक्रियायें हैं...
हवसनामा: जवानी की भूख-1
‘हवसनामा’ के अंतर्गत यह अगली कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जो उच्च स्तरीय सरकारी सेवा में है और ‘सेक्स’ के पैमाने पर बेहद साधारण रहा है, लेकिन एक मुकाम फिर ऐसा भी आया है जब उसने इस भूख को ठीक युवाओं की तरह महसूस किया है। आगे की कहानी, उन्हीं...
वो सात दिन कैसे बीते-8
अगले दिन शुक्रवार था और आज भी उसकी क्लास थी जिससे वह साढ़े बारह बजे फारिग हुई। मैंने उसे यूनिवर्सिटी से पिक किया और पहले ही साहू के पीछे जाकर पेट पूजा कर ली।
वो सात दिन कैसे बीते-7
‘मज़ा आ गया।’ थोड़ी देर बाद उसने करवट ली और मेरी आँखों में देखते हुए बोली- अब मैं इमैजिन कर सकती हूँ कि जब आगे से इस तरह सोहबत करते होंगे तो कितना मज़ा आता होगा।’