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रंडी की चुदाई / जिगोलो पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,069 बार

आज दिल खोल कर चुदूँगी -20

नेहा रानी

16 Oct 2023 को प्रकाशित

आज दिल खोल कर चुदूँगी -20
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अब तक आपने पढ़ा..संजय अनगिनत बार मेरी बुर से लण्ड को खींचता और बुर में डाल देता..तभी एकाएक उसने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी.. ठाप पर ठाप लगाते हुए अपने वीर्य से बुर को भरकर मुझे कस कर जकड़ कर झड़ने लगा।उधर महमूद मेरी बुर और संजय के लण्ड को चाट रहे थे और संजय बुर में लण्ड चांप कर अन्तिम बूंद तक वीर्य बुर में गिरा रहा था। संजय मेरी बुर को फाड़ चुका था। मेरी बुर की दीवार से संजय का वीर्य बह रहा था.. जिसे महमूद मजे से चाट रहे थे।अब आगे..

संजय का लण्ड अभी भी मेरी बुर में था और मैं.. बेजान सी बेड़ पर पड़ी थी, महमूद संजय राना के लण्ड से निकले वीर्य को चाट रहे थे।संजय का लण्ड मेरी बुर में पड़ा पड़ा जब कुछ ढीला हुआ.. तो संजय ने अपना लण्ड मेरी चूत से खींचना शुरू किया.. लण्ड जितना बाहर आता जा रहा था.. उतना ही वीर्य भी बाहर आता जा रहा था, जिसे महमूद मजे लेकर चाटते जा रहे थे।महमूद की बुर चटाई से चूत को कुछ राहत मिल रही थी।

जैसे ही संजय का पूरा लण्ड चूत से बाहर निकला.. वीर्य भलभला कर बाहर आने लगा.. जिसे महमूद ने मेरी गांड से लेकर चूत तक का सारा माल चाट कर साफ कर प्रिया।संजय का लण्ड निकल जाने पर भी मेरी चूत की फाँकें खुली ही रह गईं.. जैसे कोई बड़ा सा बांस बुर में डालकर निकाल लिया हो।चूत से लण्ड निकलने के बाद मैं राहत की सांस महसूस कर रही थी।

इधर महमूद पूरी तरह चूत को चाटकर साफ करके मेरे बगल में लेट गए और दूसरी तरफ संजय मैं उन दोनों के बीच में पड़ी रही। कुछ देर आराम करने के बाद महमूद ने गरम पानी से मेरी चूत की सिकाई की। सिकाई से मेरी चूत को राहत मिली.. पर शायद महमूद मेरी बुर की सेवा करके उसे दोबारा चोदने के लिए तैयार कर रहे थे।

फिर संजय मुझे अपनी बाँहों में लेकर और लण्ड को बुर पर चिपका कर लेट गया। उधर पीछे से महमूद ने अपना लण्ड मेरी गान्ड पर लगा प्रिया और सोने लगे।मैं दोनों तरफ से एक साथ चुदने के भय से कांप गई।

महमूद ने मुझे समझाया- डरो मत मेरी जान.. आज मैं नहीं चोदूँगा.. आज तुम्हारी चूत को संजय के नाम कर प्रिया है.. आज केवल तुम्हारी चूत और गान्ड संजय लेगा.. ओह्ह.. सॉरी गान्ड संजय के लण्ड से तो तुम मरवा ही नहीं पाओगी संजय केवल चूत ही चोदेगा। अभी आराम करो.. थक गई हो।

मुझे भी यूँ लेटे-लेटे नींद आने लगी और मैं सो गई।मेरी नींद तब खुली जब आधी रात को मेरी चूचियाँ मींजी जा रही थीं और जब मैंने आँख खोली.. तो देखा कि संजय मेरी चूचियाँ मसल रहा था।महमूद मेरी बगल में बैठे हुए ये सब देख रहे थे।

संजय मेरी चूचियों को मींजते हुए मेरी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। मेरी चूचियों को संजय दबा-दबा कर चूसते हुए मेरे चूचुकों पर जीभ फिराने लगा। संजय के इस तरह के प्यार से मेरी चूचियां तन गईं और संजय खूब खींच-खींच कर मेरी चूचियों को पीता रहा। वो दोनों हाथों से चूचियों को दबाते हुए धीमे-धीमे मेरी चूचियों से होते हुए मेरे पेट को चूमने लगा, साथ ही वो मेरी नाभि पर मुँह रख कर मेरी नाभि में जीभ फिराते हुए मेरी नाभि प्रदेश को जीभ से कुरेदने लगा।

इस बार संजय मेरे जिस्म से इस तरह से खेलते हुए प्यार कर रहा था कि मेरी चूत खुद ब खुद कुलबुलाने लगी, मैं संजय के प्यार को पाकर पिघलने लगी।संजय धीमे-धीमे नीचे मेरी चूत की तरफ चूमते हुए बढ़ने लगा और मेरी बुर पर जीभ नचाने लगा।अभी भी संजय मेरी चूचियां मींज रहा था और नीचे मेरी बुर चाट रहा था।

संजय की बुर चटाई और प्यार को पाकर मेरी बुर संजय का लण्ड लेने के लिए मचलने लगी जब कि मेरी पहली चुदाई में संजय ने मेरी बुर को चोदकर सत्यानाश कर प्रिया था, फिर भी इस बार मैं संजय के लण्ड को अपनी बुर में लेने के लिए मचलने लगी थी और संजय मेरी बुर की फांकों को एक-एक कर चाटे जा रहा था और मैं कमर उचका कर बुर चटाई करवाते हुए.. मन ही मन सोच रही थी कि संजय के लण्ड ने पहली चुदाई में मुझे बहुत तकलीफ दी थी.. पर इस बार मैं संजय के लण्ड को अपनी बुर में मजे लेकर चूत चुदवाऊँगी।

एक बार तो संजय का लण्ड मेरी बुर में जा ही चुका है और अन्दर जाकर मेरी बुर को ढीला कर ही प्रिया है.. अब चुदाई में उतनी तकलीफ नहीं होगी। नीचे मेरी बुर को संजय खींचकर चूस रहा था और मेरी बुर संजय का प्यार पाकर पानी छोड़ने लगी, मैं मचलते हुए कमर उचका कर चूत चटवाते हए सिसियाने लगी।

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‘आह.. सिसिई.. आहहह.. सीइइ.. उई आह.. संजय मेरी चूत आपके लण्ड के लिए तैयार है.. मेरी जान एक बार फिर मैं आपके लण्ड को चूत में लेना चाहती हूँ..’ प्यार से मेरी चूत में अपना लण्ड को उतार दो जानूँ.. तेरा प्यार पाकर मेरी बुर तेरे लण्ड के स्वागत के लिए तैयार है.. आहहह.. सीसीसीईईई.. बस अब प्यार से मेरी बुर चोद दो.. आहह..’

मेरी बेताबी देखकर संजय मेरी चूत चाटना छोड़कर मेरे ऊपर सवार हो गया और मुझे अपनी बाँहों में दबाकर अपना मोटा लण्ड मेरी चूत पर सटाकर मेरे होंठों को किस करने लगा।उधर मेरे और संजय के लण्ड और चूत के खेल को महमूद बैठे हुए देख रहे थे।तभी संजय मेरी चूत पर दबाव बढ़ाने लगा, उसका सुपारा अन्दर जाता.. इससे पहले ही मैं छटपटाते हुए बोली- प्लीज.. नहीं ऐसे नहीं.. मैं मर जाऊँगी..इस बार संजय भी मुझे बेदर्दी के साथ नहीं चोदना चाहता था.. शायद इसी लिए लण्ड का दबाव कम कर प्रिया।

तभी मेरी चूत पर किसी की साँसों गरमाहट महसूस हुई।बगल में महमूद नहीं थे.. एकाएक महमूद संजय के लण्ड को और मेरी बुर को एक साथ चाट रहे थे। शायद संजय के लण्ड को गीला कर रहे थे।कुछ देर चाटकर महमूद ने ढेर सारा थूक निकाल कर संजय के सुपारे पर लगा प्रिया और संजय का लण्ड मेरी चूत पर सैट करके मेरे पैरों को फैलाकर चूत की फांकों को चौड़ा करके संजय के चूतड़ों पर दबाव दे प्रिया, संजय ने महमूद का इशारा पाकर लण्ड का दबाव दुबारा मेरी बुर पर बढ़ा दिए।सुपारा अन्दर प्रवेश कर गया और मैं चीख उठी- आह्ह… उईई माँ… फट गईई… फट गई… मरर… गईई…

मेरी चीख सुन कर संजय नी चूत पर लण्ड का दबाव कम कर प्रिया.. पर मैं इस बार संजय के मोटे लण्ड को अपनी चूत में लेना चाहती थी और अपनी गरम चूत को संजय के लण्ड से लड़ाना चाहती थी।संजय के लण्ड ने तो पहली चुदाई में मुझे तो केवल दर्द ही प्रिया था.. पर इस बार अपनी चूत संजय के लण्ड से चुदवा कर मैं अपनी बुर का पानी निकलवाना चाहती थी।इस चुदाई में संजय मुझे बड़े प्यार से चोदना चाहता था.. मैं कराहते हुए संजय से बोली- प्लीज संजय.. रूको मत.. डालते जाओ.. मेरी बुर में लण्ड आहह..

संजय एक बार फिर लण्ड को मेरी बुर में डालने लगा और मैं दांत भींच कर संजय का लण्ड चूत में लेने लगी।आहिस्ता-आहिस्ता संजय ने मेरी चूत में अपना तीन चौथाई हिस्सा लण्ड उतार कर मेरी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

संजय चूचियों को चूसते हुए मेरी बुर से लण्ड खींचता.. फिर अन्दर डाल देता। संजय के बार-बार लण्ड अन्दर-बाहर करने से मेरी चूत ढीली होकर पानी छोड़ते हुए लण्ड लेने के लिए फूलकर कुप्पा हो गई थी, अब आसानी के साथ संजय का लण्ड मेरी चूत में.. आने-जाने लगा और मैं भी कमर उठाकर कर लण्ड को चूत में लेने लगी।

इधर महमूद मेरी जाँघ के पास बैठ कर चुदाई देखते हुए लण्ड हिला रहे थे, संजय मेरी चूत में लण्ड की रफ्तार बढ़ाते जा रहे थे।मुझे अब संजय के लण्ड से धीमे-धीमे चूत चुदाना अच्छा लगने लगा, मैं चूत में लण्ड लेते हुए सिसकारी लेने लगी- म्म्म्मीम.. ह्म्म्म्म म आआअहह.. हाआअ.. सिईम्म्मा.. मम्म्म.. हाय.. आह.. आअहह आअहह.. म्म्म्म मम..फिर मैंने संजय को अपनी ओर भींच लिया ‘आह्ह्ह्ह.. संजय.. मारो मेरी चूत.. चोदो मेरी चूत..।’

अब मुझे भी मज़ा आ रहा था और मैं भी चूत उठाकर चुद रही थी, संजय अपनी रफ़्तार बढ़ाता रहा। अब वो पूरे जोश के साथ मुझे चोद रहा था।मैं भी मस्त हो चुकी थी, चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, मेरी चूत का खूब सारा रस संजय के लण्ड पर भी लग गया था, मेरी चूत भी अब संजय के लण्ड का स्वागत कर रही थी और मैं अपनी जाँघों को खोल करके लंड को पूरा रास्ता दे रही थी।

अब उसका लंड मेरी चूत में सटासट अन्दर-बाहर होने लगा था, संजय की रफ़्तार भी अब काफ़ी तेज हो चुकी थी, मैं संजय की चुदाई से मस्त होकर झड़ने के करीब थी, मेरा पानी निकलने वाला था और संजय ‘गपगप.. खचखच..’ लण्ड मेरी बुर में पेले जा रहा था।

मैं इस मस्त चुदाई की मस्ती में अपनी गाण्ड उठा कर चरम पर आ गई ‘आहहह.. सीसीसीईई.. आह.. उउउउइ.. आह.. धीमे आह.. मैं गई राजा.. आह.. म्म्म्ममी.. आहसीईई..’मैं जाँघें भींच कर झड़ने लगी। संजय मेरी चूत में लगातार झटके मारता रहा और जब संजय के लण्ड ने मेरी चूत में पानी छोड़ा.. तो संजय मुझे दबोचते हुए चूत में वीर्यपात करने लगा।उधर महमूद ने भी मेरी चुदती चूत देखकर अंतिम बार मुठ्ठ मार कर मेरे मुँह पर वीर्य छोड़ प्रिया। एक साथ दोनों ने मेरी बुर और मुँह को वीर्य से सान प्रिया।

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