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अंगूर का मजा किशमिश में-12

सारिका कंवल

03 Aug 2023 को प्रकाशित

अंगूर का मजा किशमिश में-12
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सारिका कंवलहम तीनों काफी थक चुके थे, फिर हमने खुद को पानी से साफ़ करके कपड़े पहने और वापस घर को आ गए।रास्ते में मैंने उनको बताया, “मेरे पति ने मुझे कल वापस बुलाया है।”इस पर अजय को दु:ख हुआ क्योंकि वो मेरे साथ कुछ समय और बिताना चाहता था।पर उसने कहा- मैं रात को मिलूँ, पर मेरी हालत इन 4 दिनों में ऐसी हो गई थी कि मेरा मन नहीं हो रहा था।फिर भी मैंने कहा- मैं कोशिश करुँगी !फिर हम अपने-अपने घर चले गए।मैं घर जाकर थोड़ी देर सोई रही, फिर शाम को घरवालों को बताया- मुझे कल वापस जाना है।इस पर मेरी भाभी मुझे शाम को बाज़ार ले गईं और एक नई साड़ी दिलवाई। फिर करीब 7 बजे हम घर लौटे।रास्ते भर मुझे अजय फोन करता रहा पर मैंने भाभी की वजह से फोन नहीं उठाया।रात को सबके सोने के बाद मैंने उसको फोन किया तो उसने जिद कर दी कि मैं उसको छत पर मिलूँ !काफी कहने पर मैं चली गई पर मैंने कहा- मुझसे और नहीं हो पाएगा।हम छत पर बातें करने लगे। काफी देर बातें करने के बाद मैंने कहा- मुझे जाना है.. सुबह बस पकड़नी है !पर उसने शायद ठान ली थी और मुझे पकड़ कर अपनी बांहों में भर लिया। मैंने उससे विनती भी की कि मुझे छोड़ दे, मेरी हालत ठीक नहीं है.. मेरे पूरे बदन में दर्द हो रहा है पर उसका अभी भी मुझसे मन नहीं भरा था।शायद इसलिए मुझसे मेरे कानों में मुझे चूमते हुए कहा- मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं दूँगा, क्या तुम्हें अभी तक मुझसे कोई परेशानी हुई !मैं उसकी बातों से पिघलने लगी और उसकी बांहों में समाती चली गई। उसने मुझे वहीं पड़ी खाट पर लिटा प्रिया और मेरे ऊपर आ गया।मैंने एक लम्बी सी मैक्सी पहनी थी। उसे उसने उतारना चाहा, पर मैंने ने मना कर प्रिया।तब उसने मेरे मैक्सी के आगे के हुक को खोल कर मेरे स्तनों को बाहर कर प्रिया और उनको प्यार करने लगा। उसने इस बार बहुत प्यार से मेरे स्तनों को चूसा, फिर कभी मेरे होंठों को चूमता या चूसता और कभी स्तनों को सहलाता।तभी उसने मेरी मैक्सी को ऊपर पेट तक उठा प्रिया और मेरी जाँघों को सहलाने लगा। इतनी हरकतों के बाद तो मेरे अन्दर भी चिंगारी भड़कने लगी। सो मैंने भी नीचे हाथ डाल कर उसके लिंग को सहलाना शुरू कर प्रिया।उसका एक हाथ नीचे मेरी जाँघों के बीच मेरी योनि को सहलाने लगा।मैं गीली होने लगी तभी अजय मुझे चूमते हुए मेरी जाँघों के बीच चला गया और मेरी एक टांग को खाट के नीचे लटका प्रिया। अब उसने मेरी योनि को चूसना शुरू कर प्रिया पर इस बार अंदाज अलग था। वो बड़े प्यार से अपनी जीभ को मेरी योनि के ऊपर और बीच में घुमाता, फिर दोनों पंखुड़ियों को बारी-बारी चूसता और जीभ को छेद में घुसाने की कोशिश करता।मुझे इतना आनन्द आ रहा था कि मुझे लगा अब मैं झड़ जाऊँगी। पर तभी उसने मेरे पेट को चूमते हुए नाभि से होता हुआ मेरे पास आ गया। मेरे होंठों को चूमा और अपना पजामा नीचे सरका प्रिया।मैंने उसके लिंग को हाथ से पकड़ कर सहलाया, थोड़ा आगे-पीछे किया, फिर झुक कर चूसने लगी। उसका लिंग इतना सख्त हो गया था जैसे कि लोहा और काफी गर्म भी था। वो मेरे बालों को सहला रहा था और मैं उसके लिंग को प्यार कर रही थी।तभी उसने मेरे चेहरे को ऊपर किया और कहा- अब आ जाओ मुझे चोदने दो !मैंने सोचा था कि जैसा अब व्यवहार कर रहा है, वो इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करेगा, पर मैं भूल गई थी कि वासना के भूखे सब भूल जाते हैं।मुझे अब यह बात ज्यादा पहले की तरह बैचैन नहीं कर रहे थे, क्योंकि इन 4 दिनों में मैं खुद बेशर्म हो चुकी थी।उसने मुझे चित लिटा प्रिया। मेरी टाँगों को फैला कर अपनी जाँघों पर चढ़ा प्रिया। फिर झुक गया और मेरे ऊपर आ गया। उसका लिंग मेरी योनि से लग रहा था। सो मैंने हाथ से उसे पकड़ा और फिर अपनी योनि में उसका सुपाड़ा अन्दर कर प्रिया।इसके बाद अजय मेरे ऊपर अपना पूरा वजन दे कर लेट गया फिर उसने मुझे चूमते हुए कहा- कुछ कहो !मैं समझ गई कि वो क्या चाहता है, सो मैंने उसको कहा- अब देर मत करो.. चोदो मुझे !उसने मुझे मुस्कुराते हुए देखा और मेरे होंठों को चूमते हुए धक्का प्रिया। उसका लिंग मेरी योनि में अंत तक चला गया। मेरी योनि में तो पहले से ही दर्द था, तो इस बार लिंग के अन्दर जाते ही मैं दर्द से कसमसा गई।मेरी सिसकी सुनकर वो और जोश में आने लगा और बड़े प्यार से मुझे धीरे-धीरे धक्के लगाता, पर ऐसा लगता था जैसे वो पूरी गहराई में जाना चाहता हो। पता नहीं मैं दर्द को किनारे करती हुई उसका साथ देने लगी।जब वो अपनी कमर को ऊपर उठाता, मैं अपनी कमर नीचे कर लेती और जब वो नीचे करता मैं ऊपर !इसी तरह हौले-हौले हम लिंग और योनि को आपस में मिलाते और हर बार मुझे अपनी बच्चेदानी में उसका सुपाड़ा महसूस होता। वो धक्कों के साथ मेरे पूरे जिस्म से खेलता और मुझे बार-बार कहता- कुछ कहो!काफी देर बाद उसने मुझे ऊपर उठाया और अपनी गोद में बिठा लिया और मुझसे कहा- सारिका, अब तुम चुदवाओ !मैं समझ रही थी कि वो ऐसा इसलिए कह रहा था ताकि मैं भी उसी तरह के शब्द उसको बोलूँ।मैंने भी उसकी खुशी के लिए उससे ऐसी बातें करनी शुरू कर दीं।मैंने कहा- तुम भी चोदो मुझे.. नीचे से मैं भी धक्के लगाती हूँ !यह सुन कर उसने अपनी कमर को उछालना शुरू कर प्रिया। मैंने भी धक्के तेज़ कर दिए। करीब 20 मिनट हो चुके थे, पर हम दोनों में से कोई अभी तक नहीं झड़ा था।फिर उसने मुझे खाट के नीचे उतरने को कहा और मुझसे कहा कि मैं घुटनों के बल खड़ी होकर खाट पर पेट के सहारे लेट जाऊँ।मैं नीचे गई और वैसे ही लेट गई।अजय मेरे पीछे घुटनों के सहारे खड़ा हो गया फिर मेरी मैक्सी को मेरे चूतड़ के ऊपर उठा कर मेरे कूल्हों को प्यार किया, दबाया, चूमा फिर उन्हें फैला कर मेरी योनि को चूमते हुए कहा- तुम्हारी गांड और बुर कितनी प्यारी है !फिर उसने अपना लिंग मेरी योनि से लगा कर धक्का प्रिया।कुछ देर बाद शायद उसे मजा नहीं आ रहा था तो मुझसे कहा- तुम अपनी टाँगों को फैलाओ और चूतड़ ऊपर उठाओ !मैंने वैसा ही किया इस तरह मेरी योनि थोड़ी ऊपर हो गई और अब उसका लिंग हर धक्के में पूरा अन्दर चला जाता, कभी-कभी तो मेरी नाभि में कुछ महसूस होता।करीब दस मिनट और इसी तरह मुझे चोदने के बाद उसने मुझे फिर सीधा लिटा प्रिया और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी एक टांग को अपने कंधे पर चढ़ा प्रिया और मुझे चोदने लगा। करीब 5 मिनट में मेरी बर्दाश्त से बाहर होने लगा, सो मैंने अपनी टांग उसके कंधे से हटा कर उसको दोनों टाँगों से उसकी कमर जकड़ ली।मेरी योनि अब रस से भर गई और इतनी चिपचिपी हो गई थी कि उसके धक्कों से ‘फच-फच’ की आवाज आने लगी थी। मैं अब चरमसुख की तरफ बढ़ने लगी। धीरे-धीरे मेरा शरीर सख्त होने लगा और मैंने नीचे से पूरी ताकत लगा दी।उधर अजय की साँसें भी तेज़ होती जा रही थीं और धक्कों में भी तेज़ी आ गई थी। उसने अपनी पूरी ताकत मुझ पर लगा दी थी।मैंने उसके चेहरे को देखा उसके माथे से पसीना टपक रहा था और चेहरा मानो ऐसा था जैसे काफी दर्द में हो। पर मैं जानती थी कि ये दर्द नहीं बल्कि एक असीम सुख की निशानी है।उसने मुझे पूरी ताकत से पकड़ लिया और मैंने उसको। वो धक्कों की बरसात सा करने लगा और मैंने भी नीचे से उसका साथ प्रिया। इसी बीच मैं कराहते हुए झड़ गई। मेरे कुछ देर बाद वो भी झड़ गया। उसके स्खलन के समय के धक्के मुझे कराहने पर मजबूर कर रहे थे।हम काफी देर तक यूँ ही लेटे रहे। करीब रात के 1 बज चुके थे। मैंने खुद के कपड़े ठीक किए फिर मैंने अजय को उठाया, पर वो सो चुका था।मैंने चैन की सांस ली कि वो सो गया क्योंकि अगर जागता होता तो मुझे जाने नहीं देता सो मैंने दुबारा उठाने की कोशिश नहीं की।मैंने उसका पजामा ऊपर चढ़ा प्रिया और दबे पाँव नीचे अपने कमरे में चली आई। दिन भर की थकान ने मेरा पूरा बदन चूर कर प्रिया था।अगली सुबह मैं जल्दी से उठी। नहा-धो कर तैयार हुई और बस स्टैंड जाने लगी। रास्ते भर मेरी जाँघों में दर्द के वजह से चला नहीं जा रहा था।उसी रात पति को भी सम्भोग की इच्छा हुई। पर राहत की बात मेरे लिए ये थी कि वो ज्यादा देर सम्भोग नहीं कर पाते थे, सो 10 मिनट के अन्दर सब कुछ करके सो गए।अगले महीने मेरी माहवारी नहीं हुई, मैं समझ गई कि मेरे पेट में बच्चा है। पर अब ये मुश्किल था तय करना कि किसका बच्चा है।फिर भी मुझे कोई परेशानी नहीं थी और तीसरा बच्चा भी लड़का ही हुआ।मेरी ये कहानी कैसी लगी। मुझे जरुर बताइएsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

डैशिंग आदित्य

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

हिरेन कादिया

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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