सारिका कंवलतभी मेरी सहेली मुझे लेने आ गई और हम दोनों उस वक्त भी चुदाई कर रहे थे।वो हमें देख कर हँसने लगी और कहा- अभी तक तुम दोनों का मन नहीं भरा ! ठीक है कर लो, मैं यही इन्तजार करती हूँ !मुझे उसके सामने शर्म आ रही थी, पर मैं खुद को आज़ाद भी नहीं कर पा रही थी।कुछ देर बाद हम दोनों फिर से झड़ गए। मैंने जल्दी से अपनी योनि को साफ़ किया कपड़े पहने और चली गई।सुधा हँसते हुए बोली- काफी प्यासी लग रही हो, सुबह पता चलेगा रात की मस्ती का !मैं शर्माते हुए जाने लगी।अपने कमरे में जाते ही मैं कब सो गई पता ही नहीं चला और सुबह देर तक सोती रही।अगले दिन मैं करीब 10 बजे उठी तो भाभी ने मुझे सुबह पूछा- इतनी देर तक सोती हो क्या तुम?मैंने जवाब दिया- नहीं.. पर रात को नींद नहीं आ रही थी, तो देर से सोई हूँ इसलिए देर हो गई उठने में !मैं जब बिस्तर से उठ रही थी, तो मेरे बदन में दर्द हो रहा था, जांघें अकड़ सी गई थीं, पेशाब करने गई, तो जलन महसूस हुई।ये सब रात की कामक्रीड़ा का असर था। सुधा सच कह रही थी कि सुबह पता चलेगा।मुझे मेरा पहला सहवास याद आ गया क्योंकि सुहागरात के दूसरे दिन यही सब मैंने महसूस किया था।मैं मन ही मन मुस्कुराई और फिर अपना नहाना-धोना सब कर के तैयार हो गई।दिन भर मैं घर में भाभी के कामों में हाथ बंटाती रही।शाम को मेरी सहेली और विजय छत पर आए और मैं और भाभी भी गए।हम सब काफी देर तक गप्पें करते रहे, फिर भाभी नीचे चली गईं और रात के खाने की तैयारी करने लगी।हम तीनों वहीं बैठे बात करते रहे।सुधा ने रात की बात को लेकर मुझे छेड़ना शुरू कर दिया। वो बिल्कुल बेशर्म हो गई थी और विजय उसका साथ दे रहा था।ख मेरी जिंदगी में पहली बार था कि किसी की जानकारी में मैंने सम्भोग किया हो।वो बार-बार मुझसे पूछ रही थी कि रात को क्या-क्या किया हमने.. पर मैं उसकी बात टाल दे रही थी।अब काफी देर हो चुकी थी, सो मैं नीचे जाने लगी।तब विजय ने कहा- तुम आज आओगी न?मैंने कहा- अगर किसी को शक नहीं हुआ और सब ठीक लगा तो जरुर आऊँगी।फिर मैं नीचे चली गई, सबको खाना खिलाया फिर मैं और भाभी खाना खा कर अपने-अपने कमरे में चले गए।मैं पिताजी के पास गई, उन्हें अच्छे से सुला दिया और फिर अपने कमरे में आ गई।अब मुझे उसके फोन का इन्तजार था। करीब 10 बजे फोन आया कि मैं सीधे गोदाम में चली आऊँ।मैंने बाहर निकल कर देखा कहीं कोई देख तो नहीं रहा, फिर दबे पाँव गोदाम के तरफ चल दी।मैंने अन्दर जा कर देखा विजय पहले से वहाँ मेरा इन्तजार कर रहा था।मेरे दरवाजा बंद करते ही उसने अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया और मुझे भी कपड़े उतारने को कहा।मैंने भी मुस्कुराते हुए अपने कपड़े उतार दिए और नंगी हो गई।हमने एक-दूसरे के नंगे जिस्म को देखा और फिर मुस्कुराते हुए सामने आए फिर दोनों आपस में चिपक गए।हमने एक-दूसरे के जिस्मों से खेलना शुरू कर दिया। पहले तो हमने जी भर के होंठों और जुबान को चूसा, फिर उसने मेरे स्तनों को बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया।मैं बस हाय-हाय करती रह गई।उसने मुझे घुमा कर मेरे पीठ की तरफ से मुझे पकड़ा और मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया फिर मेरी पीठ को चूमता हुआ नीचे आने लगा।फिर मेरी कमर और चूतड़ को प्यार से दबाने और चूमने लगा उन्हें सहलाने लगा।मेरी योनि अब गीली होने लगी थी। मैं अब उत्तेजित हो रही थी। उसने मेरे चूतड़ों को हाथों से फैलाया और पीछे से मेरी योनि को चाटने लगा।उसने अपनी जुबान को मेरी पंखुड़ियों के ऊपर फिराना शुरू कर दिया, फिर योनि को दो उंगलियों से फैला कर अपनी जुबान उसमें घुसाने की कोशिश करने लगा।मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने भी अब उसका लिंग चूसने का सोच लिया, पर उसके दिमाग में आज कुछ और ही था।उसने मुझसे कहा- आज कुछ अलग करूँगा !मैंने पूछा- क्या?तब उसने एक बोतल निकाली, उसमें तेल था। उसने तेल मेरे पूरे बदन पर मलना शुरू कर दिया। गले से पाँव तक मुझे तेल में डुबो दिया।मैंने पूछा- क्या कर रहे हो?तो उसने कहा- मालिश कर रहा हूँ।मैं मुस्कुराते हुए बोली- इतना तेल कोई लगाता है क्या..?तब उसने कहा- बस तुम देखती जाओ।मेरा पूरा बदन तेल की वजह से झलक रहा था। फिर उसने अपना बदन मेरे बदन से रगड़ना शुरू कर दिया।थोड़ा और तेल लेकर उसने मुझे उसके बदन पर लगाने को कहा। मैंने भी प्यार से उसके बदन पर तेल लगा कर मालिश की। उसके लिंग को पूरी तरह से तेल में नहला दिया।हम दोनों अब तेल में चमक रहे थे।उसकी हरकत अब जाहिर कर रही थी कि वो अब पूरा गर्म हो चुका है और पूरे जोश में है।उसने मुझे दीवार के एक कोने में ले जाकर कहा- तुम इन दो बोरियों के ऊपर अपनी दोनों टाँगें फैला कर खड़ी हो जाओ !उन दो बोरियों के बीच करीब 2 फ़ीट की दूरी थी और ऊंचाई करीब 1 फिट थी। मैं खड़ी हो गई दोनों टाँगें फैला कर। मैं बेताब थी कि आखिर वो क्या करने जा रहा है !उसने मेरी योनि पर थोड़ा तेल और लगाया और उंगली से अन्दर भी लगा दिया। फिर अपने लिंग पर भी लगा कर उसे हाथ से हिला कर और खड़ा किया।अब वो मेरे पास आया और मेरी कमर को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से अपने लिंग को मेरी योनि पर रगड़ने लगा। मैंने भी उसको गले में हाथ डाल कर पकड़ लिया और अपनी योनि को उसके तरफ आगे कर दिया।मेरी योनि बहुत गीली हो चुकी थी और मेरे अन्दर वासना की आग जल रही थी।फिर उसने अपने लिंग को मेरी योनि की छेद पर टिका कर दोनों हाथों से मेरे दोनों चूतड़ों को कस कर पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखते हुए मुझे चूम लिया।फिर मेरे होंठों को चूसते और जुबान को जुबान से टकराते हुए धक्का दिया। पूरा का पूरा लिंग फिसलते हुए मेरी योनि की गहराई में उतरता हुआ मेरे बच्चेदानी से टकरा गया।मैं सिसक गई… मजे में कराह उठी।उसने मेरे चूतड़ों को दबाते हुए मुझे चोदना शुरू कर दिया, वो मुझे जोरों से धक्के मार रहा था, मैं हर धक्के पर उसका साथ दे रही थी। मेरे मुँह से अजीब-अजीब सी आवाज आने लगी थीं, साथ ही योनि में लिंग के घुसने और निकलने से ‘फच…फच’ की आवाज आ रही थी और जब उसका बदन मेरे से टकराता तो ‘थप-थप’ की भी आवाज निकल रही थी।हम काफी देर तक ऐसे ही चुदाई करते रहे, फिर उसने मुझे जमीन पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया।वो मुझे बार-बार एक ही बात कहता- बहुत मजा आ रहा है.. तुम्हारी बुर कितनी मुलायम और कसी हुई है !मुझे अपनी तारीफ़ सुन कर अच्छा लग रहा था और मैं और जोश में आ रही थी और अपनी कमर उछाल कर उसके लिंग को अपनी योनि में और अन्दर तक लेने की कोशिश कर रही थी।मेरी योनि से पानी रिस रहा था और उसका लिंग उसमें पूरी तरह भीग कर चिपचिपा हो गया था।करीब 20 मिनट के बाद मैं झड़ गई और मेरे कुछ देर बाद वो भी मेरे अन्दर रस की पिचकारी मारते हुए झड़ गया।हम हाँफते हुए एक-दूसरे से काफी देर तक लिपटे रहे। जब कुछ सामान्य हुए तो फिर से कुछ अलग करने की उसने कहा।मैंने पूछा- और क्या करने का इरादा है?उसने कहा- चुदाई तो आम बात है.. कुछ ऐसा करते हैं.. जो अलग हो !फिर उसने कहा- जैसा फिल्मों में होता है वैसा।मैंने पूछा- जैसे क्या?उसने कहा- जैसे अलग-अलग पोजीशन में चोदना, कुछ गन्दी हरकतें करना, गन्दी बातें करना, एक साथ बहुत से लोगों के साथ चुदाई करना, खुले में चोदना, ये सब !तब मैंने कहा- तुमने इन में से कुछ चीजें तो कर ली हैं, पर अब गन्दी चीजें करना, खुले में चोदना और बहुत से लोगों के साथ चोदना ही रहा गया है।तब उसने कहा- आज रात मैं तुम्हें खुले में चोदना चाहता हूँ !मैंने तुरंत कहा- यह नहीं हो सकता, यह गाँव है किसी ने देख लिया तो तुम्हें और मुझे जान से मार डालेंगे !तब उसने कहा- गोदाम के पीछे तो जंगल सा है और अँधेरा है और इतनी रात को उधर कौन आएगा !मैंने कहा- बिल्कुल नहीं.. उधर मुझे डर लगता है, कहीं कोई सांप-बिच्छू ने काट लिया तो?तब उसने कहा- जीने का असली मजा तो डर में ही है।और वो जिद करने लगा, रात काफी हो चुकी थी, करीब 12 बज चुके थे तो मैंने भी हार कर ‘हाँ’ कह दी।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com
अंगूर का मजा किशमिश में-7
सारिका कंवल
16 May 2012 को प्रकाशित
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अंगूर का मजा किशमिश में
कुल भाग: 12
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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2 टिप्पणियां
न
नीरज खन्ना
1 week agoसच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।
प
पहचान कौन (राज)
1 week agoकहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।