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भाभी की चुदाई पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 438 बार

देवर के साथ सेक्स पति के सामने-1

नम्रता भट्ट

30 Apr 2020 को प्रकाशित

देवर के साथ सेक्स पति के सामने-1
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मेरा नाम गीता है, मेरे पति नवीन बहुत अच्छे और सुलझे हुए हैं. हम सेक्स का पूरा आनन्द लेते हैं, बात करते हैं और पर-पुरुष, पर-स्त्री की अर्चना भी करते हैं. मेरे पति को ऐसे ही सेक्स करना अच्छा लगता है और मुझे भी कोई ऐतराज नहीं है!

मेरे उम्र 29 साल है मेरे नवीन 32 के हैं. हमारी शादी को 9 साल हो गए हैं. वैसे तो हमें सेक्स में ठीक-ठाक मजा आता है पर हम लोग जब किसी पराये के साथ सेक्स करने की बात करते हुए सेक्स करते हैं तो मेरा मन बहुत ही चंचल हो जाता है और मुझे किसी दूसरे के साथ सेक्स करने का मन होने लगता है. वैसे मेरे पति का भी मन है कि मैं किसी और के साथ भी सेक्स का मजा लूँ. वो कहते हैं कि सबके लिंग का आकार अलग-अलग होता है और अलग-अलग लिंग का मजा अलग होता है.

इनकी बुआ का लड़का विनोद जो अभी 25 साल का है, उसकी अभी शादी नहीं हुई है, हमारे यहाँ अकसर आता जाता रहता है क्योंकि बुआ का गाँव पास ही है और विनोद भैया अभी पढ़ाई कर रहे हैं. इनका कहना है- विनोद का लिंग बहुत अच्छा है और मेरे लिंग से बहुत बड़ा है. और देखने में सुंदर भी है. अगर तुम चाहो तो मैं बात करूँ विनोद से, या तुम खुद ही सेट कर लो अगर तुम चाहो तो! सच! चाहत तो मुझे भी हो गई है कि मैं भी कोई अलग लिंग लेकर देखूँ. नवीन ने मेरे मन में एक बात कूट-कूट कर भर दी है कि अलग लिंग का अलग मजा!मैं वही मजा लेना चाहती हूँ!

खैर, एक दिन ऐसा ही हुआ कि विनोद हमारे यहाँ दो दिन के लिए आया. कोई परीक्षा देना था और उसका परीक्षा-केन्द्र यहीं था.बस क्या था, इन्होने भी दो दिन की छुट्टी ले ली. वैसे दोनों भाइयों के बीच में अच्छा प्रेम है. विनोद सवेरे-सवेरे आने वाला था, इन्होंने फोन लगाया तो वो बोला- भैया ग्यारह बजे तक पहुँच जाऊँगा, खाना साथ ही खाएँगे.

मैंने खाना बनाया और इन्होंने परीक्षा के बाद घूमने का भी कार्यक्रम तय कर लिया, कहा- शाम को बाहर चलेंगे और रात का खाना बाहर ही खायेंगे!11.30 तक विनोद भैया आ गए. हमने सभी ने साथ ही खाना खाया, मैंने विनोद की पसंद का खाना बनाया था- खीर, आलू की मटर की सब्जी, रायता और काजू कतली ये बाहर से ले आये थे. दो बजे विनोद को पेपर देने जाना था, नवीन उसको परीक्षा-केन्द्र छोड़ कर आ गए.

आने के बाद बहुत ही रोमांटिक मुद्रा में थे, साथ में कंडोम लेकर आये थे, मुझे दबा कर कहा- क्या मूड है जानू?मैंने कहा- जैसा आपका है, वही मेरा है!दिन में कभी-कभी ही तो मौका मिलता है, और ये शुरू हो गए, मुझे चूमने लगे.

बस सेक्स शुरु होने के साथ ही हमारी बातें भी शुरू हो जाती हैं. ये बोले- आज क्या मन है जानू? आज तो विनोद आया है, आज अपनी इच्छा पूरी कर लो, बहुत मजा आएगा! तुम कहो तो सारा कार्यक्रम मैं तय कर लेता हूँ, तुमको तो ज्यादा कुछ नहीं करना है.

और हम ऐसे ही बात करते-करते सेक्स करने लगे. मैं अर्चना के गोते लगाने लगी और ये भी मेरे साथ सेक्स करते हुए विनोद का सा अहसास कराने लगे. हम लोग जल्दी ही निबट गए.शाम के पाँच बज गए थे, विनोद के आने का समय हो गया था. हम लोग नहा कर तरोताज़ा हुए.विनोद आया, हमने चाय पी और निकल लिए!मैंने पूछा- भैया, कैसा रहा तुम्हारा आज का पेपर?वो बोला- अच्छा रहा भाभी!और ऐसे ही बातें करने लगे. मेरी आँखों में शरारत थी!

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और ये भी बस रात का ही कार्यक्रम सेट करने की सोच में थे. खाना खाने के बाद हम घर आ गए.रात के आठ बज चुके थे, बाहर बहुत सर्दी थी तो चाय का एक दौर और होना था.अरे गीता! चाय पी लेते हैं यार! क्यों विनोद? क्या मन है?अरे भैया! बहुत मन है!

मैं चाय बनाने के लिए उठी तो ये बोले- अरे रुको गीता! मैं बना लेता हूँ!और चाय बनाने के लिए ये चले गए, शायद हमें मौका देने के लिए! तो मैंने भी फालतू बात के साथ साथ पूछा- क्यों भैया, शादी का कब का मन है? अब तो आपकी उम्र भी हो गई है! कब कर रहे हो?वो बोला- अभी नहीं भाभी! पहले मैं कुछ बन जाऊँ भैया की तरह, तो शादी की सोचूँगा!हम बात कर ही रहे थे, इतने में ये भी चाय चढ़ा कर बाहर आ गए, बीच में ही बोले- क्यों भाई? क्या मन नहीं होता है तुम्हारा?अरे होता तो है! पर अब क्या करें भैया! जैसा पहले चल रहा था वैसे ही अब भी काम चल रहा है!मैं नहीं समझी, मैंने कहा- क्या मतलब है तुम्हारा विनोद भैया?यह तो अब आपको भैया ही बताएँगे! मैं नहीं बता सकता हूँ!अरे नहीं! क्यों? क्या बात है? बताओ ना? मैंने कहा- क्या कोई है तुम्हारी जिन्दगी में? मैंने कहा.अरे नहीं भाभी! ऐसा कुछ नहीं है! मैं अभी भी असली कुंवारा ही हूँ!

वैसे हमारी ऐसे बातें पहले भी होती रहती थी. विनोद इनके सबसे निकट रहा है बचपन से ही तो मेरे साथ भी जल्द ही घुलमिल गया था.ये चाय छानने के लिए चले गए तो मैंने जोर प्रिया- बोलो न विनोद, क्या बात है? कैसे कम चल रहा है?वो बोला- फिर कभी बताऊँगा!कह कर बाथरूम चला गया और ये भी चाय लेकर आ गए.

हमने चाय पी और ये बोले- यार चलो, अंदर आराम से लेट कर बात करते हैं!हम तीनों आराम से बैडरूम में जाकर बिस्तर में लेट गए. ये बीच में, विनोद उधर मैं इधर! हमने अपने ऊपर रजाई डाल ली. सर्दी कुछ ज्यादा ही थी.बात करते करते इन्होंने मेरे स्तन दबाने शुरू कर दिए, मुझे मजा आने लगा.यार विनोद! क्या होता होगा तुम्हारा इस सर्दी में बिना सेक्स के? ये बोले.अरे भैया, क्या बताऊँ? बहुत बुरा हाल है! बहुत मन करता है! आप तो बहुत किस्मत वाले हो जो आपको भाभी जैसे सुंदर पत्नी मिली! भाभी के साथ सेक्स करके आपको बहुत मजा आता होगा न?हाँ यार! बहुत सुंदर है गीता! और इसकी चूचियाँ! बहुत अच्छी हैं, कितनी सख्त हैं आज भी!भैया, सच में?हाथ लगा कर देखना है क्या? ये बोले.

शेष कहानी अगले भाग में!support@mohakkisse.com

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देवर के साथ सेक्स पति के सामने

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