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माँ की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 765 बार

धोबी घाट पर माँ और मैं -7

जलगाँव बॉय

13 Feb 2022 को प्रकाशित

धोबी घाट पर माँ और मैं -7
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कैसे हो मित्रो, क्षमा करना, यह भाग लिखने में थोड़ा समय लगा। मुझे बहुत मेल आये, खास करके महिलाओं के!मैंने लगभग सभी के मेल को ज़वाब प्रिया है और आशा करता हूँ कि और नए महिला पुरुष ज़रूर मेल करेंगे।अब आगे:

‘दबा, बेटा दबा।’बस फिर क्या था, मेरी तो बांछें खिल गई, मैंने दोनों हथेलियों में दोनों चूचों को थाम लिया और हल्के-हल्के उन्हें दबाने लगा।माँ बोली- शाबाश!!! ऐसे ही दबा ले ज़ितना मसलने का मन करे, उतना मसल ले, ले ले मज़े।

फिर मैं पूरे ज़ोश के साथ हल्के हाथों से माँ की चूचियों को मसलने लगा। ऐसी मस्त-मस्त चूचियाँ पहली बार किसी ऐसे के हाथ लग ज़ाएँ ज़िसने पहले किसी चूची को दबाना तो दूर, छुआ तक ना हो तो वो तो ज़न्नत में पहुँच ही ज़ाएगा ना।मेरा भी वही हाल था, मैं हल्के हाथों से सम्भल सम्भल कर चूचियों को दबाये ज़ा रहा था। उधर माँ के हाथ तेज़ी से मेरे लण्ड पर चल रहे थे।तभी माँ ने, ज़ो अब तक काफी उत्तेज़ित हो चुकी थी, मेरे चेहरे की ओर देखते हुए कहा- क्यों बेटा, मज़ा आ रहा है ना? ज़ोर से दबामेरी चूचियों को बेटा, तभी पूरा मज़ा आएगा। मसलता ज़ा, देख अभी तेरा माल मैं कैसे निकालती हूँ।

मैंने ज़ोर से चूचियों को दबाना शुरु कर प्रिया था, मेरा मन कर रहा था कि मैं माँ का ब्लाउज़ खोल कर चूचियों को नंगी कर के उनकोदेखते हुए दबाऊँ, इसलिए मैंने माँ से पूछा- हाय माँ, तेरा ब्लाउज़ खोल दूँ?इस पर वो मुस्कुराते हुए बोली- नहीं, अभी रहने दे। मैं ज़ानती हूँ कि तेरा बहुत मन कर रहा होगा कि तू मेरी नंगी चूचियों को देखे, मगर, अभी रहने दे।

मैं बोला- ठीक है माँ, पर मुझे लग रहा है कि मेरे औज़ार से कुछ निकलने वाला है।इस पर माँ बोली- कोई बात नहीं बेटा, निकलने दे, तुझे मज़ा आ रहा है ना?‘हाँ माँ, मज़ा तो बहुत आ रहा है।’‘अभी क्या मज़ा आया है बेटे? अभी तो और आयेगा, अभी तेरा माल निकल ले, फिर देख, मैं तुझे कैसे ज़न्नत की सैर कराती हूँ!!’‘हाय माँ, ऐसा लगता है, ज़ैसे मेरे अन्दर से कुछ निकलने वाला है।’‘हाय, निकल ज़ायेगा।’‘तो निकलने दे, निकल ज़ाने दे अपने माल को।’ कह कर माँ ने अपना हाथ और ज़्यादा तेज़ी के साथ चलाना शुरु कर प्रिया।

मेरा पानी अब बस निकलने वाला ही था, मैंने भी अपना हाथ अब तेज़ी के साथ माँ के उरोजों पर चलाना शुरु कर प्रिया था। मेरा दिल कर रह था कि इन प्यारी प्यारी चूचियों को अपने मुख में भर कर चूसूँ। लेकिन वो अभी सम्भव नहीं था। मुझे केवल चूचियों को दबा दबा कर ही संतोष रखना था। ऐसा लग रहा था ज़ैसे कि मैं अभी सातवें आसमान पर उड़ रहा था।मैं भी खूब ज़ोर ज़ोर सिसयाते हुए बोलने लगा- ओह माँ, हाँ माँ, और ज़ोर से मसलो, और ज़ोर से मुठ मारो, निकाल दो मेरा सारा पानी।पर तभी मुझे ऐसा लगा ज़ैसे कि माँ ने लण्ड पर अपनी पकड़ ढीली कर दी है। लण्ड को छोड़ कर, मेरे अण्डों को अपने हाथ से पकड़ कर सहलाते हुए माँ बोली- अब तुझे एक नया मज़ा दिलाती हूँ, ठहर ज़ा।

और फिर धीरे-धीरे मेरे लण्ड पर झुकने लगी, लण्ड को एक हाथ से पकड़े हुये वह पूरी तरह से मेरे लण्ड पर झुक गई और अपने होंठों को खोल कर मेरे लण्ड को अपने मुँह में भर लिया।मेरे मुँह से एक आह निकल गई, मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि माँ यह क्या कर रही है, मैं बोला- ओह माँ, यह क्या कर रही हो? हाय छोड़ ना, बहुत गुदगुदी हो रही है।मगर वो बोली- तो फिर मज़े ले इस गुदगुदी के, करने दे, तुझे अच्छा लगेगा।

‘हाय माँ, क्या इसको मुँह में भी लिया ज़ाता है?’‘हाँ, मुँह में भी लिया ज़ाता है, और दूसरी ज़गहों पर भी, अभी तू मुँह में डालने का मज़ा लूट!’ कह कर तेज़ी के साथ मेरे लण्ड को चूसने लगी।मेरी तो कुछ समझ में नही आ रहा था, गुदगुदी और सनसनी के कारण मैं मज़े के सातवें आसमान पर तैर रहा था। माँ ने पहले मेरे लण्ड के सुपारे को अपने मुँह में भरा और धीरे धीरे चूसने लगी और मेरी ओर बड़े सेक्सी अन्दाज़ में अपनी नज़रों को उठा कर बोली- कैसा लाल लाल सुपारा है रे तेरा?! एकदम पहाडी आलू ज़ैसा। लगता है अभी फट ज़ाएगा। इतना लाल लाल सुपारा कुँवारे लड़कों का ही होता है।फिर वो और कस-कस कर मेरे सुपारे को अपने होंठों में भर भर कर चूसने लगी।

नदी के किनारे पेड़ की छाँव में मुझे ऐसा मज़ा मिल रहा था जिसकी मैंने आज़ तक अर्चना तक नहीं की थी।माँ अब मेरे आधे से अधिक लौड़े को अपने मुँह में भर चुकी थी और अपने होंठों को कस कर मेरे लण्ड के चारों तरफ से दबाये हुए धीरे धीरे ऊपर सुपारे तक लाती थी। फिर उसी तरह से सरकते हुए नीचे की तरफ ले ज़ाती थी।

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उसको शायद इस बात का अच्छी तरह से एहसास था कि यह मेरा किसी महिला के साथ पहला सम्बन्ध है और मैंने आज़ तक किसी औरत के हाथ का स्पर्श अपने लण्ड पर महसूस नहीं किया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए वह मेरे लण्ड को बीचबीच में ढीला भी छोड़ देती थी और मेरे अंडों को दबाने लगती थी।वो इस बात का पूरा ध्यान रखे हुए थी कि मैं ज़ल्दी ना झड़ूँ।मुझे भी गज़ब का मज़ा आ रहा था और ऐसा लग रहा था ज़ैसे कि मेरा लण्ड फट ज़ायेगा।

मगर मुझसे अब रहा नहीं ज़ा रहा था, मैंने माँ से कहा हाय माँ, अब निकल ज़ायेगा माँ, मेरा माल अब लगता है कि नहीं रुकेगा।उसने मेरी बातों की ओर कोई ध्यान नहीं प्रिया और अपनी चुसाई ज़ारी रखी।

मैंने कहा- माँ, तेरे मुँह में ही निकल ज़ायेगा। ज़ल्दी से अपना मुँह हटा ले।इस पर माँ ने अपना मुँह थोड़ी देर के लिए हटाते हुए कहा- कोई बात नहीं, मेरे मुँह में ही निकाल, मैं देखना चाहती हूँ कि कुँवारे लड़के के पानी का स्वाद कैसा होता है।और फिर अपने मुँह में मेरे लण्ड को कस के ज़कड़ते हुए उसने अब अपना पूरा ध्यान केवल मेरे सुपारे पर लगा प्रिया और मेरे सुपारे को कस कस कर चूसने लगी, उसकी ज़ीभ मेरे सुपारे के कटाव पर बार-बार फिर रही थी।

मैं सिसयाते हुए बोलने लगा- ओह माँ, पी ज़ाओ तो फिर! चख लो मेरे लण्ड का सारा पानी। ले लो अपने मुँह में। ओह ले लो, कितना मज़ा आ रहा है। हाय, मुझे नहीं पता था कि इतना मज़ा आता है। हाय निकल गया, निकल गया, हाय माँ, निकलाआआ!!!

तभी मेरे लण्ड का फव्वारा छुट पड़ा और तेज़ी के साथ मेरे लण्ड से मलाईदार पानी गिरने लगा। मेरे लण्ड का सारा का सारा पानी सीधे माँ के मुँह में गिरता ज़ा रहा था और वो मज़े से मेरे लण्ड को चूसे ज़ा रही थी।कुछ देर तक लगातार वो मेरे लण्ड को चूसती रही।

मेरा लौड़ा अब पूरी तरह से उसके थूक से भीग कर गीला हो गया था और धीरे- धीरे सिकुड़ रहा था। पर उसने अब भी मेरे लण्ड को अपने मुँह से नहीं निकाला था और धीरे-धीरे मेरे सिकुड़े हुए लण्ड को अपने मुँह में किसी चॉकलेट की तरह घुमा रही थी।कुछ देर तक ऐसा ही करने के बाद, ज़ब मेरी सांसें भी कुछ शान्त हो गई, तब माँ ने अपना चेहरा मेरे लण्ड पर से उठा लिया और अपने मुँह में ज़मा मेरे वीर्य को अपना मुँह खोल कर दिखाया और हल्के से हंस दी।फिर उसने मेरे सारे पानी को गटक लिया और अपनी साड़ी के पल्लु से अपने होंठों को पोंछती हुई बोली- हाय, मज़ा आ गया। सच मेंकुँवारे लण्ड का पानी बड़ा स्वादिष्ट होता है। मुझे नहीं पता था कि तेरा पानी इतना मज़ेदार होगा?!!

मित्रो, कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, आप मुझे मेल ज़रूर करें, ख़ास कर महिलायें अपवे विचार ज़रूर बताएँ।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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