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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 866 बार

कमाल की हसीना हूँ मैं-35

शहनाज़ खान

02 Jan 2023 को प्रकाशित

कमाल की हसीना हूँ मैं-35
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मेरी चूत का मुँह लंड के एहसास से लाल हो कर खुल गया था जिससे उनके लंड को किसी तरह की परेशानी ना हो। मेरी चूत से काम-रस झाग बनके निकल कर मेरे चूतड़ों के कटाव के बीच से बहता हुआ बिस्तर की ओर जा रहा था। मेरी चूत का मुँह पानी से उफ़न रहा था।

“अंदर कर दूँ???”

“हाँ ऊऊहह हाँऽऽऽ !”

“मेरे लंड पर किसी तरह का कोई कंडोम नहीं है। मेरा वीर्य अपनी कोख में लेने की इच्छा है क्या?”

“हाँऽऽ ऊऊहह माँ… हाँऽऽ मेरी चूत को भर दो अपने वीर्य सेऽऽऽ! डाल दो अपना बीज मेरी कोख में !” मैं तड़प रही थी।

पूरा जिस्म पसीने से तरबतर हो रहा था, मेरी आँखें उत्तेजना से उलट गई थीं और मेरे होंठ खुल गये थे, मैं अपने सूखे होंठों पर अपनी जीभ चला कर गीला कर रही थी।

“फिर तुम्हारी कोख में मेरा बच्चा आ जायेगा !!”

“हाँऽऽ हाँऽऽऽ मुझे बना दो प्रेगनेंट ! अब बस… करोऽऽऽ… मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ… और मत सताओ ! मत तड़पाओ मुझे !”

मैंने अपनी दोनों टाँगें बिस्तर पर जितना हो सकता था फैला लीं, “देखो तुम्हारे बेटे की दुल्हन तुम्हारे सामने अपनी चूत खोल कर लेटी तुमसे गिड़गिड़ा रही है कि उसकी चूत को फाड़ डालो। रगड़ दो उसके नाज़ुक जिस्म को। मसल डालो मेरे इन मम्मों को… जिन पर मुझे नाज़ है ! ये सब आपके छूने… आपकी मुहब्बत के लिये तड़प रहे हैं।” मैं बहकने लगी थी।

अब वो मेरी मिन्नतों पर पसीज गये और अपनी उँगलियाँ से मेरी भगनासा को मसलते हुए अपने लंड को अंदर करने लगे। मैं अपने हाथों से उनकी छातियों को मसल रही थी और उनके लंड को अपने चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर दाखिल होते महसूस कर रही थी।

“हाँऽऽ मेरे ताहिर ! इस लुत्फ का मुझे जन्मों से इंतज़ार था। तुम इतने नासमझ क्यों हो ! मेरे दिल को समझने में इतनी देर क्यों कर दी?”

उन्होंने वापस मेरी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। उनके दोनों हाथ अब मेरे दोनों सीने के कबूतरों पर थे, दोनों हाथ मेरी छातियों को जोर-जोर से मसल रहे थे और वो मेरे निप्पलों को उँगलियाँ से मसल रहे थे।

मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी इसलिये उनके लंड को दाखिल होने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। उनका लंड पूरी तरह मेरी चूत में समा गया था। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने लंड को पूरी तरह से बाहर खींच कर वापस एक धक्के में अंदर कर दिया।

अब उन्होंने मेरी टाँगें अपने कंधों से उतार दीं और मेरे ऊपर लेट गये और मुझे अपनी बाँहों में भर कर मेरे होंठों को चूमने लगे।

सिर्फ उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी, मेरी टाँगें दोनों ओर फ़ैली हुई थीं, कुछ ही देर में मैं उत्तेजित होकर उनके हर धक्के का अपनी कमर को उनकी तरफ़ उठा कर और उछाल कर स्वागत करने लगी।

मैं भी नीचे की ओर से पूरे जोश में धक्के लगा रही थी। एयर कंडिशनर की ठंडक में भी हम दोनों पसीने-पसीने हो रहे थे।

कमरे में सिर्फ एयर कंडिशनर की हमिंग के अलावा हमारी ‘ऊऊऽऽ…हहऽऽ… ओओऽऽ…हहऽऽ…’ की आवाज गूँज रही थी। साथ में हर धक्के पर ‘फ़च फ़च’ की आवाज आती थी।

हमारे होंठ एक दूसरे से सिले हुए थे, हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह में घूम रही थी, मैंने अपने पाँव उठा कर उनकी कमर को चारों ओर से जकड़ लिया।

काफी देर तक इसी तरह चोदने के बाद वो उठे और मुझे बिस्तर के किनारे खींच कर आधी-लेटी हालत में लिटा कर मेरी टाँगों के बीच खड़े होकर मुझे चोदने लगे।

उनके हर धक्के के साथ पूरा बिस्तर हिलने लगता था। मेरी चूत से दो बार पानी की बौछार हो चुकी थी।

कुछ देर तक और चोदने के बाद उन्होंने अपने लंड को पूरी जड़ तक मेरी चूत के अंदर डाल कर मेरे दोनों मम्मों को अपनी मुठ्ठी में भर कर इतनी बुरी तरह मसला कि मेरी तो जान ही निकल गई।

“ले ! ले मेरा बीज… मेरा वीर्य अपने पेट में भर ले। ले-ले मेरे बच्चे को अपने पेट में ! अब नौ महीने बाद मुझसे शिकायत नहीं करना।” उन्होंने मेरे होंठों के पास बड़बड़ाते हुए मेरी चूत में अपना वीर्य डाल दिया।

मैंने उनके नितंबों में अपने नाखून गड़ा कर अपनी चूत को जितना हो सकता ऊपर उठा दिया और मेरा भी रस उनके लंड को भिगोते हुए निकल पड़ा।

दोनों खल्लास होकर एक दूसरे की बगल में लेट गये। हम कुछ देर तक यूँ ही लंबी-लंबी साँसें लेते रहे।

फिर उन्होंने करवट लेकर अपना एक पैर मेरे जिस्म के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे मम्मों से खेलते हुए बोले, “ओओऽऽ…फफऽऽ… शहनाज़ तुम भी गजब की चीज़ हो। मुझे पूरी तरह थका दिया मुझे !”

“अच्छा?”

“इसी तरह अगर अक्सर चलता रहा तो बहुत जल्दी ही मुझे दवाई लेनी पड़ेगी… ताकत की।”

“मजाक मत करो ! अगर दवाई की किसी को जरूरत है तो मुझे, जिससे कहीं प्रेगनेंट ना हो जाऊँ।”

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हम दोनों वापस एक दूसरे से लिपट गये और उस दिन सारी रात एक दूसरे से खेलते हुए गुजर गई।

उन्होंने उस दिन मुझे रात में कई बार अलग-अलग तरीके से चोदा।

सुबह उठने की इच्छा नहीं हो रही थी। पूरा जिस्म टूट रहा था। आज हैमिल्टन और साशा भी हमारे साथ मिल गये।

हैमिल्टन मौका खोज रहा था मेरे साथ चुदाई का, लेकिन अब मैं ताहिर अज़ीज़ खान जी के ही रंगों में रंग चुकी थी।

मेरा रोम-रोम अब इस नये साथ को तरस रहा था। उस दिन भी वैसी ही चुहल बाजी चलती रही।

मैंने स्विमिंग पूल पर अपनी सबसे छोटी बिकनी पहनी थी। मेरा आशिक तो उसे देखते ही अपने होश खो बैठा।

हैमिल्टन के होंठ फ़ड़क उठे थे, हैमिल्टन ने पूल के अंदर ही मेरे जिस्म को मसला।

शाम को हम डाँस फ़्लोर पर गये तो मैं नशे में झूम सी रही थी। उस दिन शाम को भी हैमिल्टन के उकसाने पर मैंने काफी ड्रिंक कर रखी थी। डाँस फ़्लोर पर कुछ देर हैमिल्टन के साथ रहने के बाद ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मुझे अपने पास खींच लिया।

साशा भी उनके जिस्म से चिपकी हुई थी। हम दोनों को अपनी दोनों बाजुओं में कैद करके ताहिर अज़ीज़ खान जी थिरक रहे थे।

हैमिल्टन टेबल पर बैठा हम तीनों को देखते हुए मुस्कुराता हुआ अपनी कॉकटेल सिप कर रहा था।

हम दोनों ने ताहिर अज़ीज़ खान जी की हालत सैंडविच जैसी कर दी थी। मैं उनके सामने सटी हुई थी तो साशा उनकी पीठ से चिपकी हुई थी।

हम दोनों ने उनके जिस्म से शर्ट नोंच कर फ़ेंक दी थी। उन्होंने भी हम दोनों को टॉपलेस कर दिया था। हम अपने मम्मों और अपने सख्त निप्पलों को उनके जिस्म पर रगड़ रही थीं।

कुछ देर बाद हैमिल्टन भी स्टेज पर आ गया। उसके साथ कोई और लड़की थी। यह देख कर साशा हम से अलग होकर हैमिल्टन के पास चली गई।

जैसे ही हम दोनों अकेले हुए, ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने तपते होंठ मेरे होंठों पर रख कर एक गहरा चुम्बन लिया।

“आज तो तुम स्विमिंग पूल पर गजब ढा रही थीं।”

“अच्छा? मिस्टर ताहिर अज़ीज़ खान ! एक स्टड ऐसा कह रहा है? जिस पर यहाँ कईं लड़कियों की आँखें गड़ी हुई हैं। जनाब ..जवानी में तो आपका घर से निकलना मुश्किल रहता होगा?”

“शैतान, मेरी खिंचाई कर रही है !” ताहिर अज़ीज़ खान जी मुझे अपनी बाँहों में लिये-लिये स्टेज के साईड में चले गये।

“चलो यहाँ बहुत भीड़ है। स्विमिंग पूल पर चलते हैं… अभी पूल खाली होगा।”

“लेकिन पहले बिकिनी की ब्रा तो ले लूँ।”

“उसकी क्या जरूरत?” वो बोले। मैंने उनकी तरफ़ देखा तो वो बोले, “आज मूनलाईट में न्यूड स्विमिंग करेंगे। बस तुम और मैं।”

उनकी प्लानिंग सुनते ही उत्तेजना में मेरा रोम-रोम थिरक उठा। मैंने कुछ कहा नहीं बस चुपचाप ताहिर अज़ीज़ खान जी का सहारा लेकर उनकी कमर में हाथ डाले मैं नशे में लड़खड़ाती हुई उनके साथ हो ली।

हम लोगों से बचते हुए कमरे से बाहर आ गये। स्विमिंग पूल का नज़ारा बहुत ही दिलखुश था। हल्की रोशनी में पानी का रंग नीला लग रहा था। तब शाम के नौ बज रहे थे, इसलिये स्विमिंग पूल पर कोई नहीं था और शायद इसलिये रोशनी कम कर दी गई थी।

ऊपर पूरा चाँद ठंडी रोशनी बिखेर रहा था। हम दोनों वहाँ पूल के नज़दीक पहुँच कर कुछ देर तक एक दूसरे को निहारते रहे फिर हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किये।

मैंने ड्रेस कोड के मुताबिक पैंटी नहीं पहन रखी थी। इसलिये जैसे ही वो मेरी स्कर्ट को खींचने लगे मैंने उन्हें रोका।

“प्लीऽऽऽज़ ! इसे नहीं। किसी ने देख लिया तो?”

“यहाँ कोई नहीं आयेगा और किसे परवाह है? देखा नहीं हॉल में सब नंगे नाच रहे थे।” कहते हुए उन्होंने मेरी स्कर्ट खींच दी और मेरे सैंडलों के अलावा मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया और खुद भी बिल्कुल नंगे हो गये।

कहानी जारी रहेगी।

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

कमाल की हसीना हूँ मैं

कुल भाग: 46
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 16
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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