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भाई बहन पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 897 बार

जिस्मानी रिश्तों की चाह -23

जूजाजी

02 Sep 2020 को प्रकाशित

जिस्मानी रिश्तों की चाह -23
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सम्पादक जूजा

हम भाइयों की जिद पर आपी ने अपनी कमीज उतार कर अपनी नंगी चूचियाँ हमें दिखाई और जब आपी क़मीज़ पहनने लगी तो हम उदास हो गए।तब आपी ने एक बार अपनी क़मीज़ ऊपर की और अपने खूबसूरत दूधों को नंगा करके दायें बायें हरकत देने लगीं।आह्ह..4-5 झटकों के बाद उन्होंने अपनी क़मीज़ नीचे की और कहा- शब्बाखैर.. और अब फिर ना शुरू हो जाना.. अपनी सेहत का ख़याल रखो.. और एनर्जी सेव करके रखो..

फिर मुस्कुराते हुए बाहर चली गईं।

मैं और फरहान दोनों ही आपी की इस हरकत पर बुत बने खड़े थे और शायद मेरी तरह फरहान भी हमारी बेपनाह हया वाली बहन के इस अंदाज़ के बारे में ही सोच रहा था।

मैं अपनी सोचों में आपी के कल और आज का मिलान करने लगा।

मैं और फरहान दोनों ही रूही आपी के ख्यालों में गुम थे और आज जो कुछ हुआ.. उस पर बहुत खुश थे। हम दोनों ने ही आज तक कभी किसी लड़की को असल में नंगी नहीं देखा था और आज असली मम्मे देखे भी थे.. तो अपनी ही सग़ी बहन के..

मुझे यह सोच पागल किए दे रही थी कि अब मैं रोज़ अपनी बहन के खूबसूरत जिस्म का दीदार किया करूँगा..क्या हुआ.. जो सिर्फ़ ऊपरी जिस्म ही है.. और हो सकता है कि आपी जल्द ही पूरी नंगी होने पर आमादा हो ही जाएँ।

फरहान की आवाज़ पर मेरी सोच का सिलसिला टूटा..वो कह रहा था- भाई आपका क्या ख़याल है.. क्या हम आपी को इस बात पर तैयार कर लेंगे कि पूरी नंगी होकर हमारे सामने बैठा करें?

मैं फरहान के इस सवाल पर सिर्फ़ मुस्कुराने लगा.. जो मैं सोच रहा था वही फरहान.. मतलब हम दोनों की सोच एक ही लाइन पर जा रही है।

‘भाई कितना मज़ा आएगा ना.. अगर ऐसा हो जाए..’ फरहान ने छत को देखते हुए गायब दिमाग से कहा।

‘यार मैं प्लान कर रहा हूँ कि अब आगे क्या करना है.. बस तुम अपना दिमाग मत लगाना.. और जो मैं कहूँ या करूँ बस वैसे ही होने देना.. ओके.. मैं नहीं चाहता कि कोई गड़बड़ हो और आपी हमसे नाराज़ हो जाएँ.. बस अब कोई प्लान सोचने के बजाए आपी के दूधों को सोच और सोने की कोशिश करो और मुझे भी सोने दो।’

मैंने फरहान को डाँटने के अंदाज़ में कहा और आँखें बंद करके सोचने लगा कि अब क्या करना है और ये ही सोचते-सोचते ना जाने कब नींद ने आ दबोचा।

अगले दिन मैं कॉलेज से जल्दी निकला और घर वापस आते हुए अपने दोस्त से 3 नई सीडीज़ भी लेता आया। मैं चाहता था कि आज आपी जब रात में हमारे कमरे में आएं.. तो पहले से ही गर्म हों..

जब मैं घर पहुँचा तो 2 बज रहे थे। अम्मी.. रूही आपी और फरहान बैठे खाना खा रहे थे।मैंने सबको सलाम किया और हाथ-मुँह धोकर खाने के लिए बैठ गया।खाने के बाद हम वहाँ ही बैठे टीवी देख रहे थे.. तो अम्मी उठीं और सोने के लिए अपने कमरे में चली गईं।

रूही आपी और फरहान वहाँ ही थे।मैंने बिला वजह ही चैनल चेंज करना शुरू किए.. तो एक चैनल पर हॉट सीन बस शुरू ही हुआ था और लड़का-लड़की किसिंग कर रहे थे।मैं उससे चैनल पर रुक गया।

आपी ने दबी आवाज़ में कहा- सगीर क्या हिमाक़त है ये.. अम्मी किसी भी वक़्त बाहर आ सकती हैं.. चैनल चेंज करो..फरहान मेरा साथ देने के लिए फ़ौरन बोला- कुछ नहीं होता आपी.. अम्मी का दरवाज़ा खुलेगा तो आवाज़ आ ही जाएगी.. तो भाई चैनल चेंज कर देंगे।

आपी ने अपना मख़सूस लिबास यानि क़मीज़-सलवार और सिर पर स्कार्फ बाँधा हुआ था और बड़ी सी चादर लपेट रखी थी और टांग पर टांग रखे हुए बैठी थीं।

मैंने आपी को देखते हुए कहा- सोहनी सी आपी… क्या ख़याल है आज दिन की रोशनी में अपने प्यारे से दुद्धुओं का दीदार करा दो ना.. मेरे जेहन से उनका ख्याल निकल ही नहीं रहा है प्लीज़.. आपीईइ..आपी फ़ौरन घबरा कर बोलीं- तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? बिल्कुल ही उल्टी बात करने लगते हो।

‘चलो ना यार.. मज़ा आएगा ना आपी.. डरते हुए ये सब करने का मज़ा ही अलग है।’ मैंने कहा और आपी को देखते हुए अपनी पैंट की ज़िप खोली और लण्ड बाहर निकाल कर अपने हाथ से सहलाने लगा।

आपी के साथ-साथ फरहान भी तकरीबन उछल ही पड़ा- ये क्या है भाई.. मूवी देखना और बात है.. आप फ़ौरन चैनल चेंज कर सकते हो.. लेकिन ये?वो कुछ डरे-डरे से लहजे में बोला।

मैंने हाथ को मक्खी उड़ाने के स्टाइल में लहराया और कहा- कुछ नहीं होता यार.. चलो आपी.. मैंने आपको दिन की रोशनी में अपना लण्ड दिखा प्रिया है.. अब आप भी दिखाओ ना?

आपी अभी भी ‘नहीं.. नहीं..’ करने लगीं.. तो मैंने फरहान को इशारा किया- चलो फरहान शुरू हो जाओ..

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मेरे कहने पर फरहान ने भी अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और हाथ में पकड़ लिया.. लेकिन वो अभी भी डरा हुआ सा था।

आपी ने फरहान को हैरत से देखा और मेरी तरफ इशारा करके कहा- ये तो है ही खबीस.. तुम्हें किस पागल कुत्ते ने काटा है.. अम्मी बाहर आ गईं तो पता लग जाएगा सबको।

फरहान को डरते देख कर मैंने आपी को कहा- आपी अभी भी टाइम है.. मान लो नहीं तो..आपी फ़ौरन बोलीं- नहीं तो क्या??मैंने मुस्कुरा कर आपी को देखा और फरहान की टाँगों के दरमियान बैठते हुए कहा- नहीं तो ये.. और फरहान का लण्ड अपने मुँह में ले लिया।

आपी खौफ से पीली पड़ गईं और अपनी जगह से खड़ी होती हुई बोलीं- बस करो सगीर.. खुदा के लिए उठो.. अम्मी बाहर आ गईं तो..मैंने आपी की बात काट कर कहा- अगर अम्मी बाहर आईं.. तो इस सबकी जिम्मेदारी आप पर होगी.. आप दिखा दो ना.. देख लिए जाने के डर से ये सब करते हुए आपको मज़ा नहीं आएगा क्या। इसमें अजीब सा मज़ा है आपी प्लीज़ करके तो देखो..

आपी ने डरते हुए ही अम्मी के दरवाज़े और बाहर वाले मेन गेट पर नज़र डाली और कहा- सगीर छोड़ो ना प्लीज़ उठो.. ये सब कमरे में कर लेंगे ना..

मैंने अनसुनी करते हुए कोई जवाब नहीं प्रिया और अपना मुँह फरहान के लण्ड पर चलाते-चलाते आपी को क़मीज़ उठाने का इशारा कर प्रिया।

आपी ने झिझकते-झिझकते झुक कर अपनी चादर समेत क़मीज़ के दामन को पकड़ा..तो मेरा दिल भी धक-धक करने लगा।मैं ज़ाहिर तो बहुत कर रहा था कि मुझे परवाह नहीं.. और शायद मुझे अपनी इतनी परवाह भी नहीं थी.. लेकिन आपी को ये करता देख कर मुझ पर भी खौफ कायम हो गया था कि कहीं सचमुच ही अम्मी बाहर आ गईं.. या बाहर से कोई घर में दाखिल हुआ.. और उन्होंने ये देख लिया तो क्या होगा..

इसके आगे मुझसे सोचा ही नहीं गया।मैंने धक-धक करते दिल के साथ अम्मी के दरवाज़े पर नज़र डाली।

अम्मी का कमरा आपी की बैक की तरफ था और बाहर का मेन गेट उनके दायें और हमारी बाईं तरफ़ था।

फिर मैंने आपी को देखा.. उन्होंने अपनी चादर और क़मीज़ के दामन को थामा हुआ था और घुटनों से ऊपर उठा रखा था।आपी ने खौफजदा सी आवाज़ में कहा- सगीर तुम अम्मी के दरवाज़े का ध्यान रखना और फरहान तुम बाहर वाले गेट को भी देखते रहना.. अच्छा।

यह कह कर आपी ने अपनी चादर और क़मीज़ को अपनी गर्दन तक उठा प्रिया। आपी ने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी और ब्लैक ब्रा से झाँकते गुलाबी-गुलाबी मम्मों का ऊपरी हिस्सा क़यामत ढहा रहा था। मैंने कुछ देर इस मंज़र को अपनी नज़र में सामने देखने के बाद.. डरी हुई आवाज़ में आहिस्तगी से कहा- आपी अपना ब्रा भी उठाओ ना प्लीज़..

और शायद आपी को भी अब इस सब में मज़ा आने लगा था.. उन्होंने गर्दन घुमा कर अम्मी के कमरे के दरवाज़े को और फिर बाहर वाले दरवाज़े को देखा और एक झटके में अपनी ब्रा भी ऊपर कर दी।

इसी के साथ मेरे दिल की धड़कन बिल्कुल रुक गईं..मुझ पर वो ही कैफियत हावी होने लगी थी.. जो कल आपी के सीने के उभारों को देख कर हुई थी।

मैं चंद लम्हें ऐसे ही अपनी खूबसूरत सी बहन के प्यारे से मम्मों को देखता रहा और फिर उनके हसीन भूरे गुलाबी निप्पलों पर नज़र जमाए हुए एकदम गुमशुदा दिमाग की कैफियत में जैसे ही आपी की तरफ बढ़ा तो…आपी ने फ़ौरन अपनी क़मीज़ नीचे कर दी.. और चादर और क़मीज़ के ऊपर से ही अपने ब्रा को मम्मों पर सैट करने लगीं।

मैंने ये देखा तो हँसते हुए तंज़िया अंदाज़ में कहा- आपीजान इतने में ही गीली हो गई हो.. और नखरे इतने कर रही थीं।

‘बकवास मत कर खबीस.. मैं नखरे नहीं कर रही थी.. अगर अम्मी या कोई और आ जाता ना.. तो फिर तुम्हें पता चलता।’आपी ने ये कहा और फिर अपना लिबास सही करने लगीं।

फरहान पहले ही अपना लण्ड अन्दर कर चुका था.. मैंने भी अपना लण्ड पैंट में डाला और ज़िप बंद करते हुए कहा- अच्छा सच-सच बताओ आपी.. मज़ा आया ना आपको..

आपी को खामोश देख कर मैंने फिर कहा- आपी झूठ मत बोलना.. आपको हम दोनों की कसम.. सच बताओ?मेरी बात सुन कर आपी मुस्कुरा दीं और अपने कमरे की तरफ चल पड़ीं।

फिर 4-5 क़दम बाद रुक कर पलटीं और मुझे आँख मार कर बड़े फिल्मी स्टाइल में कहा- एकदम झकास्स्स..और कमरे में चली गईं।

दोस्तो, यह कहानी बहुत ही रूमानियत से भरी हुई है.. आपसे निवेदन है कि अपने ख्याल कहानी के नीचे डिसकस कमेन्ट्स में लिखें।

कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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