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भाई बहन पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 908 बार

जिस्मानी रिश्तों की चाह -35

जूजाजी

16 Oct 2020 को प्रकाशित

जिस्मानी रिश्तों की चाह -35
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सम्पादक जूजा

मैंने आपी को आँख मारते हुए बाथरूम की तरफ आँख से इशारा करते हुए हाथ ऐसे हिलाया जैसे मैं आपी को बता रहा होऊँ कि हनी के सीने के उभार कितने मस्त हो गए हैं।

हनी जब तौलिये में लिपटी बाहर निकली थी.. तो उसके गीले बाल और भीगा ज़िस्म बहुत सेक्सी लग रहा था।

तौलिये में हनी के सीने के उभार काफ़ी बड़े दिख रहे थे और जब वो वापस जाने के लिए मुड़ी थी.. तो उसके चूतड़ों की शेप भी वज़या हो रही थी और वो 3-4 क़दम ही भागी थी.. लेकिन मैंने हनी के कूल्हों का मटकना पहली बार गौर से देखा था.. जो बहुत दिलकश मंज़र था।

हनी के नंगे बाज़ू और नंगी पिण्डलियाँ.. बालों से बिल्कुल साफ और आपी की ही तरह शफ़फ़ थीं.. बस ये था कि उसका रंग थोड़ा दबता हुआ था या फिर ये कहना ज्यादा मुनासिब है कि आपी के मुक़ाबले में वो साँवली नज़र आती थी।

हनी का क़द तकरीबन 4 फीट 10 इंच था और उसका जिस्म भारी-भरकम नहीं था.. बल्कि वो दुबली-पतली सी थी.. लेकिन सीने के उभार आपी से थोड़े छोटे और साइज़ में 32सी के थे, कूल्हे ना ही बहुत ज्यादा बड़े थे और ना ही बहुत छोटे.. बस मुनासिब थे।

उसकी चाल कुदरती तौर पर ही ऐसी थी कि वो चलती थी.. तो उसकी टांग दूसरी टांग को क्रॉस करते हुए पाँव ज़मीन पर पड़ता था.. बिल्कुल बिल्ली की तरह और खुद बा खुद ही उसके छोटे क्यूट से कूल्हे मटक से जाते थे।

मैंने अपनी इन्हीं सोचों के साथ गुसल किया और नाश्ते की टेबल पर ही लैपटॉप अब्बू के हवाले करके कॉलेज के लिए निकल गया।

दो दिन तक आपी की प्रेज़ेंटेशन चलती रही.. जिसकी वजह से वो हमारे कमरे में नहीं आ सकीं और हमने आपस में भी कुछ नहीं किया।

तीसरे दिन कॉलेज से वापस आकर मैंने कुछ देर आराम किया और फिर शाम को चाय के वक़्त आपी ने भी सेक्स की हिद्दत से बोझिल आँखें लिए बता प्रिया कि वो आज रात को हमारे पास आएँगी।

दो रातें और 2 दिन गुज़र चुके थे कि आपी हमारे रूम में नहीं आई थीं। फरहान और मैं बहुत शिद्दत से कमरे में बैठे आपी का इन्तजार कर रहे थे।

हम दोनों ने अपने कपड़े पहले से ही उतार रखे थे। जब आपी कमरे में दाखिल हुईं.. तो हमारे खड़े लण्ड पर नज़र पड़ते ही उनकी आँखों में भी चमक पैदा हो गई।आख़िर वो थीं तो हमारी ही बहन और अब उन्हें भी इस खेल की आदत हो गई थी।

आपी ने दरवाज़ा बंद करके बहुत बेताबी से अपनी क़मीज़ उतार कर फैंकी और ब्रा को खोल कर सोफे की तरफ उछाल प्रिया।

मैंने आपी को क़मीज़ उतारते देखा तो बिस्तर से उठ कर भागता हुआ आपी की तरफ गया और अपने बाज़ू उनकी कमर के गिर्द मज़बूती से कसते हुए आपी की गर्दन पर होंठ रख दिए।

आपी भी 2 दिन से जिस्म की आग को दबाए बैठी थीं, जैसे ही उनके सीने के उभार और निप्पल मेरे बालों भरे सीने से दबे.. तो उनकी आँखें खुद ही बंद हो गईं और आपी के मुँह से एक सिसकारी निकली और उन्होंने बेसाख्ता ही अपने बाज़ू मेरे जिस्म के गिर्द कस कर मुझे भींचना शुरू कर प्रिया और कभी मेरी कमर को अपने हाथों से सहलाने लगीं।

कुछ देर मैं और आपी ऐसे ही खड़े अपने-अपने जिस्मों को महसूस करते रहे.. फिर मैंने अपने होंठ आपी की गर्दन से हटाए और आपी के होंठों को चाटते और चूमते हुए उन्हें तकरीबन घसीटता हुआ बिस्तर की तरफ चल प्रिया।

फरहान मुझे और आपी को इस हाल में देख कर एकदम बेखुद सा बिस्तर पर ही बैठा था। मैंने उससे 2 दिन पहले आपी के साथ हो सेक्स के बारे में कुछ नहीं बताया था।

आपी को लिए हुए ही मैं बिस्तर पर लेट गया.. आपी के अंदाज़ में आज बहुत गरमजोशी थी.. वो बहुत वाइल्ड अंदाज़ में मेरी कमर को सहला रही थीं और अपने सीने के उभारों को मेरे सीने पर रगड़ रही थीं।

आपी कभी मेरे होंठों को बहुत बेताबी से चूसने लगतीं.. तो कभी दाँतों में दबा कर खींच लेतीं।

कुछ देर ऐसे ही एक-दूसरे के होंठ और ज़ुबान चूसने और चाटने के बाद मैं थोड़ा नीचे हुआ और आपी की गर्दन को चाटने और छूने लगा।

आपी सीधे लेटी हुई थीं और उनके हाथ मेरी कमर पर थे.. मैं आपी के दिल की तेज-तेज धड़कन को साफ सुन और महसूस कर रहा था।

आपी की गर्दन से होता हुआ मैं नीचे उनके सीने के उभार तक पहुँचा और बारी-बारी दोनों निप्पलों को चाटने और चूसने लगा। आपी के उभार को मुँह में लिए लिए ही मैंने अपना हाथ नीचे किया और आपी की सलवार को नीचे उनके पाँव की तरफ सरकाना शुरू कर प्रिया।

यह भी अच्छा था कि आपी की इस सलवार में अजारबंद के बजाए इलास्टिक थी.. जिसकी वजह से सलवार आसानी से नीचे सरक रही थी।

जब आपी को महसूस हुआ कि मैं उनकी सलवार उतार रहा हूँ.. तो उन्होंने अपने एक हाथ से फ़ौरन मेरे उस हाथ को पकड़ लिया जो उनकी सलवार पर था और आँखें बंद किए हुए ही बोलीं- नहीं सगीर प्लीज़ सलवार मत उतारो.. ऊपर-ऊपर से ही कर लो.. जो भी करना है।

मैंने अपना हाथ आपी की सलवार से हटा प्रिया और फरहान को देखा.. जो आपी की दायीं तरफ़ ही बैठा था। फरहान से नज़र मिलने पर उससे इशारा किया कि आपी के एक उभार को मुँह में ले ले।

फरहान तो बस तैयार ही बैठा था.. उसने मेरा इशारा समझा और एकदम से आपी के दायें निप्पल पर टूट पड़ा, उसने निप्पल मुँह में लिया और जंगलियों की तरह चूसना और हाथ से दबाना शुरू कर प्रिया।

आपी ने एक लम्हे को आँख खोली.. तो अपने दोनों सगे भाईयों के मुँह में अपना एक-एक उभार देख कर वो मचल सी गईं और अपने दोनों हाथ हम दोनों के सिर पर रख कर दबाने लगीं।उनकी साँसें बहुत तेज हो गई थीं और वो मदहोश होने लगीं थीं।

मैंने दोबारा अपने हाथ को नीचे करके आपी की सलवार को थामा और दूसरे हाथ से आपी की कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए एक झटके से उनकी सलवार को कूल्हों के नीचे से निकाल प्रिया।

आपी ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि मैंने अपने होंठ उनके होंठों से चिपका के उनका मुँह बंद कर प्रिया और दूसरे हाथ से आपी की सलवार को घुटनों से नीचे तक पहुँचा प्रिया।

फरहान कभी आपी के उभार को चाटने लगता.. तो कभी उनके निप्पल को चूसने लगता।उसके अंदाज़ में बहुत जंगलीपन था.. और होना भी था क्योंकि ज़िंदगी में पहली बार वो दुनिया की हसीन-तरीन चीज़ को चूस रहा था।

मेरे मुँह हटाते ही फरहान ने आपी के दूसरे उभार को भी हाथ में पकड़ लिया था और झंझोड़ने लगा था।

मैंने आपी के दोनों होंठों को अपने होंठों से खोलते हुए सांस तेजी से अन्दर को खींची.. तो आपी मेरा इशारा समझ गईं और फ़ौरन अपनी ज़ुबान मेरे मुँह में दाखिल कर दी।

मैंने आपी की ज़ुबान को अपने दाँतों में पकड़ा और चूसने लगा.. आपी को ज़ुबान चुसवाने में बहुत मज़ा आता था और मैंने आपी के इसी मज़े का फ़ायदा उठाते हुए आपी की टाँगों के दरमियान अपना हाथ रख प्रिया।

मैंने कुछ देर तेजी से अपनी ऊँगलियों को आपी की चूत के दाने पर मसला.. तो उनकी हालत माही-बेआब बिन पानी की मछली.. की तरह हो गई और आपी ने तेजी से अपने पाँव की मदद से अपनी सलवार को पाँव तक पहुँचाया और घुटनों को मोड़ते हुए अपनी टाँगों को थोड़ा खोल लिया।

आपी की चूत बहुत गीली हो गई थी और मेरी उंगलियाँ खुद ब खुद उनकी चूत के दाने से स्लिप होकर नीचे चूत के दरवाजे पर टच होने लगती थीं।

मैंने आपी की टाँगों को खुलता महसूस कर लिया था और उनकी चूत से बहते पानी ने भी मुझे यह समझा प्रिया था कि अब आपी का दिमाग उनकी चूत के कंट्रोल में आ गया है.. इसलिए मैंने उनकी ज़ुबान को अपने दाँतों से निकाल प्रिया।

आपी ने अपनी ज़ुबान को आज़ाद महसूस करके आँखें खोल दीं।

उनकी आँखें भी बहुत लाल हो रही थीं और नशे की सी हालत में थीं।

मैंने आपी को अपनी तरफ देखता पाकर आपी की चूत पर रखा अपना हाथ हटाया और आपी को दिखाते हुए अपनी एक-एक उंगली को चूसने लगा।

आपी ने मेरी इस हरकत पर आँखें फाड़ कर मुझे देखा.. तो मैंने मुस्कुराते हुए मज़े से डूबी आवाज़ में कहा- यम्मम्मी.. मेरी सोहनी बहन की चूत से निकले लव-जूस का ज़ायक़ा.. दुनिया के बेहतरीन मशरूब से ज्यादा लज़ीज़ है।

मेरी बात सुन कर आपी का चेहरा शदीद शर्म से लाल हो गया और उन्होंने मुस्कुरा कर अपनी आँखें बंद करते हुए चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

मैं भी मुस्कुरा प्रिया और नीचे सरकते हुए अपनी ज़ुबान आपी की नफ़ में दाखिल कर दी।

फरहान ने भी उसी वक़्त आपी के निप्पल को दाँतों में दबा कर ज़ोर से काटा और ऊपर को खींचने लगा।

फरहान के काटने की वजह से और मेरी ज़ुबान को अपनी नफ़ के अन्दर महसूस करते हुए आपी ने एक ज़ोरदार ‘आआआअहह..’ भरी।

उस ‘आहह..’ में ‘मज़े की शिद्दत’ और ‘तक़लीफ़ का अहसास’ दोनों ही बहुत नुमाया हो रहे थे।

यह कहानी एक पाकिस्तानी लड़के सगीर की है, बहुत ही रूमानियत से भरे हुए वाकियात हैं.. आप अपने ख्यालात कहानी के आखिर में अवश्य लिखें।

कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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जिस्मानी रिश्तों की चाह

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