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Group Sex Story पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 288 बार

नयना और दीप्ति संग वासना का खेल -4

आशीष जोशी

14 Sep 2020 को प्रकाशित

नयना और दीप्ति संग वासना का खेल -4
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अब तक आपने पढ़ा..

मेरे ऐसे अचानक से झड़ने से दीप्ति बहुत नाराज़ और गुस्सा हो गई.. उसने उसी हालत मे मेरी गोटियाँ अपने हाथ में पीछे से पकड़ लीं और गुस्साते हुए कहा- इस तरह से मेरी जाँघों पर अपना वीर्य गिरा कर तुमने बड़ी ग़लती कर दी है.. इससे सुधारने के लिए तुम्हारे पास दो विकल्प हैं.. एक यह कि तुम खुद ये सब चाट कर मेरी जाँघों साफ़ कर दो.. या फिर अपनी गाण्ड का छेद मेरे हवाले कर दो।

मैं- ओह.. आई एम सॉरी दीप्ति.. मुझे ऐसे अचानक से नहीं झड़ना चाहिए था.. पर मैं क्या करूँ.. मैं खुद को रोक नहीं पाया.. मुझे माफ़ कर दो..दीप्ति- ग़लती तो हुई है और उसकी सज़ा तो भुगतनी पड़ेगी.. नयना क्या फ्रिज में ककड़ी या खीरा है?

अब आगे..

नयना- हाँ है ना.. और इस बार तो बाज़ार में बहुत बड़ी-बड़ी ककड़ियाँ मिली हैं और आशीष वैसे भी तुम्हें तुम्हारी गाण्ड हम लोगों को जैसी लगती है ना.. तो आज हमें जो गाण्ड मराने का दर्द होता है.. वो भी तुम महसूस कर ही लो ना.. हा हा हा हा हा..

मैं- प्लीज़ रहम करो मुझ पर.. ऐसा मत करो..दीप्ति- ठीक है.. फिर अपने मुँह से ये सब चाट ले.. और मेरी जाँघों को साफ़ कर दे..

मैं पूरी तरह से दुविधा में था.. अपना खुद का वीर्य खा लूँ या फिर अपनी गाण्ड में वो सब करने दूँ.. जो वे दोनों करने जा रही हैं। समय कम था.. इसलिए मैंने सोचा कि खुद का वीर्य खाने से अच्छा है मैं अपनी गाण्ड का छेद उसके हवाले कर दूँ।

तब तक नयना फ्रिज में से एक लंबी ककड़ी लेकर आई थी.. जो मोटी भी लग रही थी।नयना- क्या तय किया इसने? यह ले, सबसे लंबी वाली लाई हूँ।मैं- मैं मेरी गाण्ड मारने का विकल्प लेने को तैयार हूँ।नयना- ठीक है.. अब एक काम कर.. मैं ये तेरा वीर्य दीप्ति की जाँघों से साफ़ कर देती हूँ.. तब तक तू मेरी पैन्ट निकाल दे..

नयना झुककर दीप्ति की जाँघों पर पड़ा मेरा पूरा वीर्य चाट कर साफ़ करने लगी और मैं उसकी जीन्स की बटन खोल कर पैन्टी के साथ नीचे खींचता चला गया।

वॉऊ.. क्या चूतड़ थे नयना के.. एकदम राउंडेड.. चिकने और दूध की तरह मुलायम.. !मैं उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा। उसके नितंब फैलाकर.. मैंने उसकी योनि के और गाण्ड के छेद के भी दीदार कर लिए..तब तक वो दीप्ति की जाँघों से मेरा माल साफ़ कर चुकी थी.. वो उठकर खड़ी हो गई और बोली- वाहह.. क्या मस्त टेस्ट है इसके वीर्य का.. मज़ा आ गया..

दीप्ति नीचे कार्पेट पर पीठ के बल लेट गई और उसने वो लंबी सी ककड़ी को अपनी चूत के ऊपरी हिस्से में खड़ा पकड़ लिया और कहा- चल.. अब इस पर सवार होकर बैठ जा और राइड कर.. नयना.. ज़रा इसके छेद में तेल लगा दे और थोड़ा ककड़ी के ऊपर भी तेल लगा दे..

नयना जल्दी से तेल लेकर आई और थोड़ा सा तेल ककड़ी पर लगाकर थोड़ा हाथ में लिया और मुझे झुकने को कहा.. मेरे झुकते ही उसने वो तेल मेरी गाण्ड के छेद पर लगाना शुरू किया और कहा- वॉऊ.. इसका छेद तो सचमुच मुलायम है.. थोड़ा इसको फ्री करती हूँ..इतना कहकर उसने एकदम से बीच वाली बड़ी उंगली मेरे छेद के अन्दर डाल दी।

दो मिनट के लिए मेरी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया और ऐसा लगा कि कोई मेरे छेद को चीरता जा रहा है।थोड़ी देर अन्दर-बाहर करके उसने मेरी गाण्ड के छेद को फ्री कर प्रिया और मैं बिल्कुल ककड़ी के ऊपर अपनी गाण्ड को रखकर बैठ गया.. पर अब तक उसे अन्दर नहीं लिया था.. मैं डर रहा था…तभी नयना ने ऊपर से मुझे नीचे की ओर ज़ोर से पुश किया.. मैंने आँखें बंद कर ली थीं.. और वो लंबी सी ककड़ी तेल की वजह से मेरी गाण्ड को चीरती हुई अन्दर समा गई।

मैं दर्द से बेहाल हो रहा था.. दीप्ति के हाथ का स्पर्श मेरे चूतड़ों पर होते ही.. मैं 2 मिनट के लिए वैसे ही रुक गया.. तभी..दीप्ति- सिर्फ़ बैठ मत कुत्ते.. ऊपर नीचे करना शुरू कर..दीप्ति के चिल्लाने से मैं जैसे होश में आ गया और धीरे-धीरे उठक बैठक करने लगा।नयना मेरी वो हालत देखकर हँसे जा रही थी।

दीप्ति ने मुझे स्पीड बढ़ाने के लिए कहा.. और मैं ज़ोर-ज़ोर से उठक-बैठक करने लगा।पता नहीं कैसे पर मेरा लिंग अब हरकत करने लगा और बड़ा होने लगा.. यह देखकर नयना बोलीन- देख दीप्ति.. यह भी खुद की गाण्ड मरवाना एंजाय कर रहा है.. देख कैसे इसका लंड खड़ा हो रहा है.. हा हा हा हा हा..

दीप्ति- हाँ यार.. सचमुच बहुत बड़ा हरामी कुत्ता है ये.. चल बोल बे ‘फक मी हार्ड मैडम.. गिव मी अ गुड फक, आई एम योर स्लेव..’साले मुझे तेरी आवाज़ ज़ोर ज़ोर से सुनाई देनी चाहिए..

मैं- आहह.. आअहह.. फक मी फर्दर एंड हार्डर दीप्ति मैम.. मैं आपका गुलाम हूँ.. मुझे अच्छी तरह से चोद दो आज..

नयना ये सब सुनकर हँसती जा रही थी.. तभी वो नीचे झुकी और दीप्ति के कान में कुछ बोली।वैसे ही दीप्ति ने मुझे एकदम से रुकने को कहा.. तब ककड़ी मेरी गाण्ड के छेद के अन्दर घुसी हुई थी..

दीप्ति ने ककड़ी छोड़ दी और मुझे उसी हालत में पीठ के बल लेटने को कहा, मैं किसी तरह सहन करके पीठ के बल लेट गया.. ककड़ी मेरे छेद में फंसी होने के कारण मुझे अपने पैर हवा में ऊपर करने पड़े।

दीप्ति मेरे पैरों के बीच बैठ गई और नयना बिल्कुल मेरे मुँह पर अपनी चूत रखकर..दीप्ति ने ककड़ी हाथ में पकड़ने की कोशिश की.. पर तेल की वजह से वो फिसल रही थी। इधर मैं नयना की मुलायम चूत के अन्दर जीभ डाल चुका था..

किसी तरह दीप्ति ने ककड़ी पर पकड़ जमा ली और एक-दो ज़ोर के झटके दे दिए और ककड़ी बाहर निकाल दी।

नयना की दूधिया चूत को चूसते हुए मेरा लौड़ा पूरी तरह से सख्त हो चुका था और इस बार दीप्ति ने बड़े ही प्यार से उसे हाथ में पकड़ कर शेक किया.. और फिर वो अपनी जीभ मेरे लंड की नोक पर घुमाने लगी।

लड़कियों के सामने मेरी नंगे होने की आदत ने मेरे साथ क्या-क्या गुल खिलाए.. इस सबसे लबरेज इस रसीली कहानी आप सभी को कैसी लगी इसके लिए मुझे अपने ईमेल जरूर भेजिएगा।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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नयना और दीप्ति संग वासना का खेल

कुल भाग: 5
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

विक्की हॉट

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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