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Group Sex Story पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 315 बार

नयना और दीप्ति संग वासना का खेल -5

आशीष जोशी

15 Sep 2020 को प्रकाशित

नयना और दीप्ति संग वासना का खेल -5
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दीप्ति ने ककड़ी हाथ में पकड़ने की कोशिश की.. पर तेल की वजह से वो फिसल रही थी। इधर मैं नयना की मुलायम चूत के अन्दर जीभ डाल चुका था..किसी तरह दीप्ति ने ककड़ी पर पकड़ जमा ली और एक-दो ज़ोर के झटके दे दिए और ककड़ी बाहर निकाल दी..नयना की दूधिया चूत को चूसते हुए मेरा लौड़ा पूरी तरह से सख्त हो चुका था और इस बार दीप्ति ने बड़े ही प्यार से उसे हाथ में पकड़ कर शेक किया.. और फिर वो अपनी जीभ मेरे लंड की नोक पर घुमाने लगी..।

अब आगे..

मैं अब पूरी तरह से जन्नत में था.. एक तरफ मैं एक मदमस्त चूत को चाट रहा था.. तो दूसरी तरफ बहुत प्यारे से मुलायम होंठ मेरे लंड को चूस रहे थे।

दीप्ति ने स्पीड बढ़ा दी और वो अब ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लगी और मेरा सुपारा उसके गले को टच किए जा रहा था.. मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था.. पर मैं उसे बर्दाश्त किए जा रहा था..नयना मेरे बालों में हाथ डाल कर मेरा मुँह और खींच रही थी.. मुझे समझ आ गया कि वो जल्द ही झड़ने वाली है.. तो मैंने भी अपनी जीभ को ज़ोर-ज़ोर से चूत के अन्दर घुमाना शुरू कर प्रिया।तभी नयना झड़ गई.. उसने अपनी चूत का पूरा रस मेरे मुँह में छोड़ प्रिया।

इधर दीप्ति ने मेरा लंड मुँह से निकाला और हाथ में पकड़ कर खींच लिया.. और लंड के ऊपर एक थप्पड़ भी मार प्रिया।अब तक नयना का मुँह मेरे मुँह की तरफ था.. वो अब उठी और मेरी तरफ पीठ करके वो फिर से मेरे मुँह पर बैठ गई।

अब उसकी चूत और गाण्ड के छेद दोनों मेरे मुँह के दायरे में थे.. उसका मुँह दीप्ति की तरफ था और दीप्ति भी उसी की तरफ देखते हुए मेरे लंड पर बैठने लगी।

नयना ने मेरा तना हुआ लंड हाथ में ले लिया और बिल्कुल दीप्ति के चूत के छेद पर टिका प्रिया.. और तभी दीप्ति नीचे की तरफ बैठ गई.. चूत और लंड दोनों गीले होने के कारण वो मेरा पूरा लंड निगल गई..इधर मैं फिर से नयना की चूत और गाण्ड का छेद बारी-बारी से चूसने और चाटने लगा था.. वो भी मचल रही थी, उसके नितंबों की दरार मेरी आँखों के सामने थी।

जब दीप्ति ने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाना शुरू किया.. तब शायद वो दोनों एक-दूसरे को किस भी कर रही थीं।अब हॉल में सिर्फ़ ‘पच.. पच..’ की आवाजें गूँज रही थीं। दीप्ति ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को उछल-कूद कर रही थी।

तभी मैंने उसकी आवाज़ सुनी- आशीष.. याद रख.. अगर अब तू मेरे चूत में झड़ गया तो तुझे पूरी रात नंगा बाल्कनी में मुर्गा बना कर खड़ा कर दूँगी.

मैंने नयना के नितंबों को थोड़ा ऊपर उठा कर बात करने के लिए जगह बनाई और कहा।मैं- नहीं.. अब मैं दोबारा वो ग़लती नहीं करूँगा.. अगर मुझे ऐसा लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ.. तो मैं नयना के नितंबों पर एक चमाट लगा दूँगा.. तब तुम रुक जाना..दीप्ति- ठीक है.. आआहह.. आआअहह..

लगभग 15-20 मिनट तक लगातार उठक-बैठक करने से दीप्ति झड़ने की कगार पर थी, उसने नीचे बैठ कर मेरे लंड को अन्दर खींच लिया और वो झड़ गई.. अपना रस मेरे लंड के ऊपर छोड़कर वो दो मिनट वैसे ही पड़ी रही।

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उसके रस की गर्माहट से मुझे ऐसा लगा कि मैं झड़ जाऊँगा.. तभी मैंने नयना के नितंबों पर ज़ोर से चमाट मार दी.. और उन्हें सिग्नल मिल गया। वे दोनों उठकर खड़ी हो गईं..शायद दीप्ति दो बार मेरे मुँह में और एक बार मेरे लंड पर झड़ने के बाद अब थक गई थी.. तो वो सोफे पर जाकर लेट गई और हमें देखने लगी।

अब नयना पूरे खुमार में थी और वो मेरी तरफ मुँह करके मेरे लंड पर बैठ गई.. दीप्ति के रस में भीगा हुआ मेरा बिना झड़ा हुआ लंड फटाक से नयना की चूत में दाखिल हो गया.. और अब मैं भी नीचे से झटके मारने लगा।

दोनों तरफ से झटकों की वजह से हम दोनों बहुत एंजाय कर रहे थे, ‘फट.. फटा.. फट..’ की आवाजें गूँज रही थीं.. मैंने हाथ बढ़ाकर नयना के उछलते हुए मम्मों को अपने हाथ में पकड़ लिया.. और उन्हें ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा।

नयना और मस्त हुए जा रही थीं.. लगभग 10-15 मिनट तक चुदाई करने के बाद वो भी दीप्ति की तरह ही मेरे लंड पर बैठ गई और उसने लंड को पूरे ज़ोर से अन्दर खींच लिया.. कुछ समझ में आने से पहले ही वो झड़ गई और उसने खुद को ढीला छोड़ प्रिया।

अब उसकी चूत की गरमी और ज़ोरदार पकड़ से मैं भी झड़ने वाला था.. इसलिए मैंने कहा- नयना.. मैं भी झड़ने वाला हूँ.. जल्दी बताओ.. कहाँ झड़ना है?

यh सुनते ही नयना उठकर खड़ी हो गई और सोफे पर जा बैठी.. साथ ही में दीप्ति भी उठ गई और नयना ने कहा- आओ.. हम दोनों के मुँह में झड़ जाओ..

मैं यह सुनकर खुश हो गया.. जल्दी से उन दोनों की तरफ जाकर मैंने अपना लंड बिल्कुल उन दोनों के मुँह के सामने रख कर हिलाने लगा.. केवल 2-3 बार मुठियाते ही मैंने वीर्य छोड़ प्रिया और उन दोनों के मुँह में बारी-बारी से गिरा प्रिया।वे दोनों पूरा का पूरा वीर्य निगल गईं और दोनों ने मेरा लंड बारी-बारी से चाट कर साफ़ कर प्रिया।दो बार झड़ने से और लगभग सारा वीर्य बाहर निकल जाने से मैं भी थक गया था और मेरा लंड भी सिकुड़ गया।यह देखकर वे दोनों हँसने लगीं..

अब हम तीनों पूरी तरह से संतुष्ट हो चुके थे और थक चुके थे, अब हमें नींद की सख्त ज़रूरत थी.. हम जैसे-तैसे एक-दूसरे का सहारा लेकर बेडरूम में चले गए और उसी नंगी हालत में एक-दूसरे की बांहों में बेड पर सो गए।एक डॉक्टर और एक एचआर इतनी बड़ी चुदक्कड़ और स्ट्रेट फॉर्वर्ड निकलेंगी.. यह मैंने कभी सोचा नहीं था!

दूसरे दिन लगभग सुबह 9 बजे हम लोगों की आँख खुली.. जब दूध वाले ने डोरबेल बजाई.. उस दिन हम लोगों ने क्या-क्या किया और किस तरह उन लोगों ने फिर से मुझे सता कर मेरा अपमान किया और कैसे अपनी आग बुझाई.. यह आगे लिखूँगा..

आशा है.. आपको यह कहानी भी पसंद आई होगी और आप लोग अपनी राय जरूर भेज दीजिएगा।support@mohakkisse.com

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नयना और दीप्ति संग वासना का खेल

कुल भाग: 5
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Dosto agar aapko kahani pasand aa rahi ho, to support@mohakkisse.com pe mail kare. Ya fir isi mail pe meri hangout ID hai, aap uspe bhi message kar sakte ho. Aap log batana na bhoole, ki aapko kahani kaisi lagi.

13 मिनट 405

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

विकास शॉर्ट्स

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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