रेलवे प्लेटफार्म सेक्स कहानी में एक भाई बहन सेक्स के इरादे से स्टेशन पर आये थे क्योंकि वहां कोई आता जाता नहीं था उस समय. इससे पहले कि वे चुदाई शुरू करते, उन्हें कुछ और दिख गया.
नमस्ते दोस्तो,कहानी के पहले भागभाई के साथ एक बार फिर रेलवे स्टेशन परमें आपने पढ़ा कि मैंने अपने भाई सोनू के साथ स्टेशन पर आ गयी गाड़ी आने से 2 घण्टे पहले. हमारा इरादा सेक्स का मजा लेने का था.पर हमें वहां हमारे चचेरे भी बहन दिख गए थे. उन्होंने हमें नहीं देखा था.
हमें ऐसा लगा कोई हमारी तरफ ही आ रहा है।हम दोनों उठ कर पेड़ की आड़ में हो गये।
पास आने पर दो परछाई दिखाई देने लगी।मगर अभी वे इतने पास नहीं थे कि हम उन्हें देख सकें कि वे कौन थे।
जैसे ही वे पास आए, हम दोनों एकदम चौंक गए।क्योंकि वे रोहित और स्वीटी थे।
अब आगे रेलवे प्लेटफार्म सेक्स कहानी:
रोहित और स्वीटी ने हमें नहीं देखा था लेकिन वे हमारी ही तरफ आ रहे थे।
मैंने टाइम देखा तो अभी पौने सात ही हो रहे थे.मैं सोचने लगी कि ये दोनों इतनी जल्दी कैसे यहां आ गए।
सच कहूँ तो मेरा मूड एकदम खराब हो गया था।मैं और सोनू ने अभी मजे लेना शुरू ही किया था कि इनके आने से सब गड़बड़ हो गई।
मैंने सोनू को देखा तो वह भी चौंक कर उन्हें ही देख रहा था।
तभी हमसे ठीक पहले वाले पेड़ के चबूतरे पर बैग रखे हुए रोहित ने स्वीटी से कहा- यहां ठीक है।स्वीटी बोली- ‘हाँ भैया यहीं बैठते हैं.और फिर दोनों वही बैठ गये।
रोहित ने जींस और जैकेट पहनी थी और स्वीटी ने भी मेरी तरह सलवार-कुर्ता पहना था और ऊपर जैकेट पहनी थी।
मैं और सोनू पेड़ के पीछे छुपकर खड़े थे.अंधेरा होने की वजह से उन लोगों ने अभी तक हमें नहीं देखा था।
मैं अभी निकल कर कुछ कहने ही वाली थी कि सोनू ने मेरा हाथ दबा प्रिया और मुंह पर उंगली रख कर मुझे चुप रहने का इशारा किया।सोनू धीरे से बोला- अभी थोड़ी देर रुको, पहले सुनते हैं कि ये क्या बात करते हैं। उसके बाद सामने आएंगे।
मैं कुछ बोली नहीं और चुपचाप खड़ी हो गई।
तभी स्वीटी ने रोहित से कहा- भैया, उनको आने में अभी टाइम है ना?रोहित- अरे अभी पौने सात ही हो रहे हैं … वे दोनों इतनी जल्दी कहां आने वाले हैं!
मैं समझ गई कि वे हमारे बारे में ही बात कर रहे थे।अब मैं भी चुप होकर उनकी बात सुनने लगी।उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि हम दोनों यहीं हैं।
रोहित ने कहा- अभी ट्रेन आने में 2 घंटे से ज्यादा टाइम बचा है और मेरे ख्याल से वे लोग 8 बजे तक आएंगे।फ़िर उसने हंसते हुए कहा- चलो तब तक हम अपना काम शुरू करते हैं।
इस पर स्वीटी ने हंसते हुए कहा- कौन सा काम? मैं कुछ नहीं करने वाली हूं।रोहित ने कहा- यार स्वीटी, प्लीज़ अब नाटक मत करो।
स्वीटी हंसती हुई बोली- क्या भैया, अभी तो परसों ही तो किया था तुमने! आज फिर?
उन दोनों की यह बात सुनकर मुझे बड़ा अजीब लगा कि ये काम की बात कर रहे हैं।मगर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई थी और मैं और सोनू चुपचाप से उनकी बातें सुन रहे थे।
रोहित ने मुंह बनाते हुए कहा- स्वीटी, मजा मत खराब करो।स्वीटी- अरे भैया, यहां कोई देख लेगा तो?रोहित- हम दोनों के अलावा कोई और नहीं है यहाँ।
स्वीटी हँसती हुई- और अगर वे लोग आ गये तो?रोहित- तो क्या हुआ … वे भी हमारे साथ मजे कर लेंगे।
स्वीटी हंसती हुई- हां हां, तुम तो जरूर साथ में मजे करोगे। मैंने देखा था कि तुम चोरी-चोरी गरिमा दीदी की चूचियां देखा करते थे।
जैसा ही मैंने ये शब्द स्वीटी के मुंह से सुना, मेरे तो होश ही उड़ गए और मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।मैंने सोनू की ओर देखा जो ठीक मेरे बगल खड़ा था।नजर मिलते ही हम दोनों मुस्कुरा दिये।
सोनू ने धीरे से मेरे कान में कहा- अरे वाह दीदी, तुम्हारे तो बड़े दीवाने हैं।मैंने मुस्कुराते हुए उसे चिकोटी काटी और चुप रहने का इशारा किया।
सोनू फिर अपना मुंह मेरे कान के पास लाकर धीरे से हंसते हुए बोला- दीदी, लगता है ये दोनों भी हमारी ही तरह हैं और मजे लेने के लिए ही इतना पहले स्टेशन पर आए हैं।मैं भी हल्का सा मुस्कुरा दी और फिर चुप रहने का इशारा किया।
स्वीटी की बात पर रोहित ने हंसते हुए कहा- अच्छा … और सोनू जो तेरे आगे-पीछे घूमता रहता था वो?स्वीटी- अरे, तो मैं थोड़े ही जाती थी, वही तो आता था मेरे पास!
रोहित- लेकिन उनके आने से एक फायदा होगा।स्वीटी- क्या?रोहित- तुम्हारा चूत चाटने का सपना पूरा हो जाएगा क्योंकि तुम गरिमा का चूत चाट सकती हो।
स्वीटी हंसने लगी और बोली- हां, यह तो सही कह रहे हो भैया! तुम चूत चाटने में मजा आने की इतनी तारीफ कर चुके हो कि मेरा भी किसी की चूत चाटने का मन करता है।
फ़िर उसने कहा- अच्छा भैया, एक बात बताओ, जैसे तुम मेरी चूत के स्वाद की तारीफ करते हो वैसा ही स्वाद गरिमा दीदी की चूत का भी होगा?रोहित- यह तो गरिमा की चूत चाट कर ही पता चलेगा।
फ़िर रोहित ने कहा- अच्छा … चलो अब शुरू करते हैं।स्वीटी- लेकिन बस एक बार भैया!रोहित- ठीक है!
रेलवे प्लेटफार्म सेक्स शुरू होने को था.
इसके बाद रोहित खड़ा हो गया और अपनी जींस खोलने लगा।जींस खोल कर रोहित ने उसे थोड़ा नीचे खिसका प्रिया और फिर अपने अंडरवियर को भी पकड़ कर नीचे कर प्रिया।उसका लंड एक झटके से बाहर आ गया।
रोहित का लंड एक दम खड़ा था.उसका लंड देखते ही मेरे दिल की धड़कन एकदम बढ़ गयी थी क्योंकि उसका लंड सोनू के लंड से बड़ा था.
मैं और सोनू एकटक उनकी तरफ देख रहे थे।
रोहित फिर चबूतरे पर बैठ गया और अपने लंड को हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए स्वीटी से बोला- जल्दी करो यार!
स्वीटी चबूतरे से उठ कर रोहित के सामने आ कर खड़ी हो गई।उसने रोहित के लंड को अपने हाथ से पकड़ा और हल्का-हल्का हिलाने लगी।
फ़िर वह घुटनों के बल नीचे बैठ गई और रोहित के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
स्वीटी को ये सब करते देख कर लग ही नहीं रहा था कि वह पहली बार ये कर रही है।
अब स्वीटी की पीठ हमारी तरफ थी; रोहित उसके सिर पर हाथ रख बालों को धीरे-धीरे सहला रहा था।
फ़िर रोहित हल्का सा आगे झुका और अपना एक हाथ नीचे ले गया।वह शायद स्वीटी की चूचियां दबा रहा था।
मेरी चढ़ती जवानी के रोचक प्रसंग- 1
तभी स्वीटी लंड चूसना छोड़ कर सीधी हुई और फिर उसने अपनी जैकेट की चेन खोल कर जैकेट को दोनों या फैला प्रिया ताकि रोहित आराम से उसकी चूचियों को दबा सके.और वह फिर दोबारा झुक कर रोहित का लंड चूसने लगी।
इधर मेरी हालत खराब होने लगी थी।मेरी चूत गीली हो चुकी थी.
मैंने सोनू की तरफ देखा तो वह तो उन्हें देखते एक हाथ से अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही सहला रहा था।
उधर स्वीटी अपने मुँह को आगे पीछे कर रोहित का लंड चूस रही थी।
थोड़ी देर तक लंड चूसने के बाद स्वीटी खड़ी हो गई और बोली- भैया अब तुम्हारी बारी है।यह कहकर वह अपनी सलवार का नाड़ा खोलने लगी।
नाड़ा खुलते ही उसकी सलवार नीचे हो गई और फिर उसने अपनी पैंटी भी उतार कर घुटनों से नीचे कर दी।
रोहित चबूतरे से उतर कर स्वीटी के सामने आ गया और वह घुटनों के बाल नीचे बैठ गया.फिर रोहित ने स्वीटी के कुर्ते को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसे अपना मुंह ले जाकर स्वीटी की चूत पर रख प्रिया और उसकी चूत चाटने लगा।
स्वीटी ने अपने कुर्ते को अपने कमर से पूरा ऊपर उठाया और अपने पेट के पास मोड़ कर प्रिया।और फिर अपने दोनों हाथ रोहित के सिर पर रख प्रिया और हल्का-हल्का अपने कमर को हिलाने लगी।
थोड़ी ही देर में उसने अपनी जैकट भी उतार कर चबूतरे पर रख दी।स्वीटी की पीठ हमारी तरफ थी।
उसने अपने कुर्ते को पहले ही ऊपर कर प्रिया था अब बाहर निकलने से उसकी गोरी-गोरी सुंदर सी गांड दिख रही थी।
इधर मेरी और सोनू दोनों की हालत खराब हो रही थी।मैं भी धीरे से अपने एक हाथ को नीचे ले जाकर सलवार के ऊपर से ही अपनी चूत को सहलाने लगी थी.मेरी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और इस वजह से चूत के पास का सलवार का हिसा भी गीला हो गया था।
मैंने सोनू की ओर देखा तो एक बार हमारी नजर मिली.उसकी निगाह नीचे मेरे हाथ पर गई और वो समझ गया कि मैं अपनी चूत को सहला रही हूं।
हम दोनों फिर रोहित और स्वीटी को देखने लगे।
रोहित अभी भी स्वीटी की चूत को चाटते जा रहा था और अपने एक हाथ से अपने लंड को भी सहलाता जा रहा था।तभी सोनू हल्का झुका तो मेरी निगाह उस पार गई तो मैं चौंक गई।
सोनू ने अपने लोअर को नीचे कर प्रिया था।उसने भी अंदर अंडरवियर नहीं पहना था जिसका खड़ा हुआ लंड झटके से बाहर आ गया।
सोनू, रोहित और स्वीटी की तरफ देखते हुए हाथ से अपने लंड को सहलाने लगा।उसने मेरी तरफ देखा.
जैसे ही हमारी नज़र मिली, हम दोनों मुस्कुरा दिए और फिर रोहित और स्वीटी को देखने लगे।
थोड़ी देर तक स्वीटी की चूत चाटने के बाद रोहित खड़ा हो गया और चबूतरे की तरफ इशारा करते हुए स्वीटी से बोला- स्वीटी इधर आ जाओ।
फिर स्वीटी आगे बढ़कर चबूतरे के पास आ गई और अपने दोनों हाथ चबूतरे पर रख कर झुक गई।
रोहित स्वीटी के पीछे आया और अपने लंड को स्वीटी की चूत पर रखा और दोनों हाथ से स्वीटी की कमर को पकड़ कर एक झटका प्रिया।
स्वीटी के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली और फिर स्वीटी की चूत में पूरा लंड डालकर उसे चोदने लगा।
इधर सोनू अपने लंड को हाथ में लेकर तेजी से हिला रहा था।
मेरी हालत एकदम ख़राब हो गई थी।मेरा चेहरा एकदम गर्म हो गया था।
मैंने भी अपनी सलवार का नाड़ा खोल प्रिया।नाड़ा खुलते ही मेरी सलवार नीचे गिर गई।
फिर मैं अपनी एक उंगली में डाल कर तेजी से अंदर-बाहर करने लगी।
उस वक्त माहौल बड़ा अजीब हो गया था; एक तरफ एक भाई अपनी बहन को चोद रहा था तो दूसरी तरफ एक भाई और बहन उसकी चुदाई को देख कर मुठ मार रहे थे।
तभी मैंने अपनी गांड पर कुछ महसूस किया.मैंने देखा तो सोनू मेरे पीछे आ गया था और ऊपर से अपने लंड को मेरी गांड पर रगड़ रहा था।
उधर रोहित ने तेजी से धक्के लगा कर स्वीटी को चोद रहा था और स्वीटी भी अपनी गांड उछाल कर भाई से चुदवा रही थी।
इधर सोनू ने हाथ से पकड़ कर मेरे कुर्ते को ऊपर उठा प्रिया और मेरी नंगी गांड पर अपना लंड रगड़ने लगा।
मुझसे भी अब चूत की खुजली बर्दाश्त नहीं हो रही थी।इसलिए मैंने चूत में उंगली करके आगे झुक गई और चबूतरे पर अपने दोनों हाथों को टिका प्रिया और अपनी गांड उठा कर सोनू को चूत चोदने के लिए खुला निमंत्रण दे प्रिया।
अब सोनू ने अपना गर्म लंड मेरी चूत पर रख प्रिया।
मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि कमर के एक ही झटके में सोनू का लंड मेरी चूत में घुस गया।मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली.
उसके बाद सोनू ने तेजी से धक्के लगाते हुए मुझे चोदना शुरू कर प्रिया।
हम दोनों इतने उत्तेजित हो चुके थे.करीब 10-15 धक्के में ही सोनू झड़ गया और उसका गर्म गर्म वीर्य मेरी चूत में निकल गया.
इतने में मेरा शरीर पूरी तरह से अकड़ गया और फिर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ प्रिया।मैं हांफने लगी और उसी तरह चबूतरे का सहारा लेकर झुकी रही और अपनी सांसों को काबू में करने लगी।
सोनू ने भी अपना लंड मेरी चूत से बाहर नहीं निकाला था और उसकी तरह चूत में अपना लंड डाले खड़े होकर लम्बी-लम्बी सांस ले रहा था।
उधर रोहित भी तेजी से धक्के मारते हुए बड़बड़ा रहा था- आआ आहा स्वीटी आआ आआ … आहा हाआ आ बस्स्स थोड़ाआ आआआ आआ आआआ!
और तेजी से झटके लेते हुए अपनी बहन की चूत में ही झड़ गया।स्वीटी भी तेजी से गांड उछालती हुई झड़ गई।
इस तरह हम चारों साथ ही झड़े।
प्रिय पाठको, आपको इस रेलवे प्लेटफार्म सेक्स कहानी में मजा आया होगा ना?मुझे कमेंट्स में बताएं.
रेलवे प्लेटफार्म सेक्स कहानी का अगला भाग:चढ़ती जवानी में हुई मेरी चूत मस्तानी- 3