जूजा जीअब तक आपने पढ़ा कि मेरी बातों को सुन कर पंकज हंस पड़ा और बोला- विभा, मैं तो तुम्हें एक चुदक्कड़ औरत समझ रहा था लेकिन तुम तो गाण्डू भी हो। चलो अब मैं तुम्हारी गाण्ड मारता हूँ।इतना कहकर पंकज ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में एक झटके से ठूँस दिया और मेरी गाण्ड चोदने लगा।मैं भी अपनी कमर को झटके के साथ आगे-पीछे करके पंकज का लण्ड अपने गाण्ड में मज़े से पिलवाने लगी।थोड़ी देर में पंकज मेरी गाण्ड के अन्दर झड़ गया और अपना लण्ड मेरी गाण्ड से निकाल कर बाथरूम में चला गया। मैं भी बिस्तर के चादर से अपनी गाण्ड को पौंछ कर रसोई में चली गई।अब आगे :रसोई में मैंने खाना बनाया और जब बाहर निकली तो देखा कि पंकज नहाने के बाद नंगा ही जाकर बिस्तर पर सो गया है और उसका सोया हुआ लण्ड दोनों पैरों के बीच सुस्त पड़ा हुआ है।एक बार तो मैं पंकज का लण्ड देख कर मचल गई लेकिन मैंने अपने आप को रोक लिया क्योंकि कल रात से पंकज बहुत ज़्यादा मेहनत कर चुका है और मेरी चूत और गाण्ड भी चुदते-चुदते चसक रही थी।मैं पंकज को छोड़ कर अपने कमरे गई और थोड़ी देर में नहा धोकर रसोई में जाकर अपने और पंकज के लिए खाना लगाया और तब जाकर मैंने पंकज को जगाया।पंकज उठ कर खाना खाने के बाद फिर मुझे बिस्तर पर ले कर मुझसे लिपट कर सो गया और मैं भी पंकज की बाँहों में सो गई।रात में एक बार मैं पेशाब करने के लिए उठी तो देखा कि पंकज मेरे बगल में नंगा लेटा हुआ है और उसका एक हाथ मेरी चूची पर है।मैंने धीरे से पंकज का हाथ अपनी चूची पर से हटाया और नंगी ही बाथरूम चली गई। बाथरूम से जब आई तो देखा कि पंकज की आँख भी खुली हुई है और वो अपने हाथों से अपना लण्ड मसल रहा है।जैसे ही मैं पंकज के बगल फिर से लेटी तो पंकज ने मुझे फिर से अपने बाँहों में जकड़ लिया और हम लोग एक बार फिर से ज़ोरदार चुदाई कर के सो गए।सुबह ज़न्नत का फ़ोन आया कि पंकज और मैं लंच पर उसके घर नरेन और ज़न्नत से मिलें।मैं और पंकज मेरे घर गए, वहाँ पर ज़न्नत ने बड़ा अच्छा खाना बना कर रखा हुआ था। हम सबने पहले थोड़ी ड्रिंक्स ली और फिर आराम से खाना खाया। खाने के बाद सब मेरे ड्राइंग रूम में आए और अपने-अपने कपड़े निकाल दिए, मैं पंकज की गोद में और ज़न्नत नरेन की गोद में बैठ गई।नरेन और पंकज फिर हम दोनों के नंगे शरीर से खेलने लगे।हम सब के हाथों में अपनी अपनी ड्रिंक्स थी। तब पंकज ने नरेन से पूछा- नरेन, तुम्हें ज़न्नत के साथ अकेले कैसा लगा?नरेन ने कहा- ज़न्नत को अकेले चोदने तो मज़ा आ गया पंकज, पर जानते हो कि कल जिस चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा उत्तेजित किया वो था अपनी आँखों के सामने विभा को तुम से चुदवाते हुए देखना। वाकयी तुम्हारे लंबे लण्ड को विभा की चूत में बार-बार अन्दर-बाहर जाते हुए देख कर मज़ा आ गया।पंकज बोला- मुझे भी कल रात विभा को अकेले चोदने में बड़ा मज़ा आया, पर नरेन, सच कहो तो मुझे भी तुम को अपने सामने ज़न्नत को चोदते देख कर और साथ-साथ विभा को तुम्हारे और ज़न्नत के सामने उसी बिस्तर पर चोद कर जो मज़ा आया वह मैं बता नहीं सकता।बाद में नरेन ने बताया कि उसने भी ज़न्नत को घर ले जा कर रात भर उसको पूरा मज़ा दिया। ज़न्नत को अपने घर ले जाने के बाद नरेन नंगे होकर बिस्तर पर लेट गया।फिर उसने ज़न्नत से उसे जी भर के मज़ा देने को कहा। ज़न्नत भी नंगे हो कर बिस्तर पर आई और नरेन के लण्ड अपने हाथ में लेकर चूसने लगी।फिर नरेन ने ज़न्नत को अपने ऊपर उल्टा लेट कर अपनी चूत को नरेन के मुँह के ऊपर रखने को कहा।ज़न्नत नरेन के ऊपर उल्टा लेट गई, नरेन ज़न्नत की चूत को और ज़न्नत नरेन के लण्ड को चूसने लगी।
सामूहिक चुदाई का आनन्द-7
जूजाजी
26 Jan 2020 को प्रकाशित
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सामूहिक चुदाई का आनन्द
कुल भाग: 8
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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