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बीवी की अदला बदली पठन समय: 22 मिनट पढ़ा गया: 876 बार

याराना-1

लीलाधर

11 Jan 2010 को प्रकाशित

याराना-1
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यह घटनाक्रम मेरे एक पाठक राजवीर (छद्म नाम) की आपबीती है। वे स्वयं पाठकों के समक्ष नहीं आना चाहते तो उन्होंने मुझसे इस कहानी को आप तक पहुँचाने का अनुरोध किया है। इसलिए यह मेरी नहीं उनकी कृति है। मेरी कहानी के अभ्यस्त पाठकों को हो सकता है थोड़ी अलग-सी या कम लगे, लेकिन इसकी घटनाएँ रोचक हैं और वास्तव में घटित हुई हैं। इसे आपके सामने लाने के पहने इसकी भाषा में मुझे थोड़ा-बहुत सम्पादन करना पड़ा है।

राजवीर के शब्दों में:

जर, जोरू और जमीन- कहा जाता है कि झगड़े की यही सबसे बड़ी वजहें होते हैं और इनके कारण भाई-भाई भी दुश्मन हो जाते हैं। खासकर जोरू तो भाइयों तो क्या गहरे से गहरे दोस्तों में भी अलगाव करा देती है। लेकिन हमारे मामले में कुछ उल्टा ही हुआ था। ‘जोरुओं’ की वजह से हम दो दोस्तों की टूट चुकी दोस्ती फिर से जुड़ गई।

मैं राजवीर (26) और मेरे बचपन का दोस्त रणअजय। हमारा जन्म दो दिन के अंतर पर हुआ था, सो हमारे घर वालों ने हमारा नाम भी एक सा रखा था।गाँव में हमारे घर आमने सामने हैं। हमारे परिवारों का बहुत बड़ा फॅमिली बिजनेस था और हम गाँव के अमीरों में से थे। दोनों परिवारों में पहले बहुत दोस्ती थी लेकिन बिजनेस की वजह से मनमुटाव हो गया था।

अब हाल यह था कि उन्हें अपने बिजनेस के लिए पार्ट्स खरीदने पड़ते थे जो हम बनाते थे लेकिन वे दुश्मनी की वजह से हमसे पार्ट्स ना खरीदकर बाहर से इम्पोर्ट करते थे। इधर हमारे प्रॉडक्ट का नाम विश्वसनीय था। नुकसान दोनों पक्षों को था।

बचपन से रणअजय और मैं अच्छे दोस्त थे। दोनों गाँव की क्रिकेट टीम में साथ खेलते बड़े हुए थे। अच्छे खिलाड़ियों के रूप में हमारी धाक थी। लेकिन जब हम बड़े हुए और अपना अपना बिजनेस सम्हाला तो आपस में बोलना बंद कर प्रिया।

रणअजय की शादी दिया से हुई और उसी साल मेरी भी शादी रीना से हुई। दोनों ही सुंदरियाँ। दिया देखने में फिल्मी हीरोइन इलियाना डिक्रूज जैसी थी और मेरी पत्नी रीना टीवी सीरियल की हीरोइन अदा ख़ान जैसी।इधर रणअजय और मैं भी देखने में स्मार्ट और हैंडसम।

हमारी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी थी। घर आमने सामने होने के कारण रणअजय और मेरी रोज नजरें मिलती लेकिन हम बात नहीं करते थे। दोनों ही एक-दूसरे के ग्राहकों को भड़काते। इससे हमारे बिजनेस पर काफ़ी असर पड़ रहा था।

कहानी में मोड़ तब आया जब हमारे गाँव का एक मैच था और जीतने के लिए गाँव के लड़कों ने हमें खेलने को कहा। हमारी जोड़ी ने बल्ले और गेंद से टीम को जीत दिलाई।गाँव के लोग बहुत खुश हुए, बोले- तुम लोग हमेशा साथ ही खेलो।

पुरानी दोस्ती थी और मैच में हमने साथ खेला था सो मैच के बाद एक दूसरे के खेल की टांग खींचने लगे। तुझसे अच्छा मैंने खेला, तू तो स्ट्रेट में गेंद डाल रहा था, वगैरह!दोनों को बचपन का याराना याद आने लगा।

थोड़ी देर में खेल के और साथी चले गये और मैदान में हम दोनों ही रह गए तो थोड़ी बिजनेस की भी बात होने लगीं। दोनों ने एक दूसरे के बहुत से ग्राहकों को भड़काया था और एक दूसरे का बहुत नुकसान किया था।

मैंने कहा- यार, बहुत नुकसान हो रहा है। चल एक-दूसरे से लड़ाई खत्म कर बिजनेस बढ़ाते हैं।उसने कहा- ठीक है, लेकिन तुझसे पार्ट्स खरीदने के लिए मुझे अपने मौजूदा सप्लायर से करार तोड़ना पड़ेगा। उसके बाद अगर तूने मुझे पार्ट्स नहीं दिए तो मेरा लाखों का नुकसान हो जाएगा। और हम दोनों कमीने हैं सो मुझे इस बात का यकीन नहीं है कि तू बाद में मुकर नहीं जाएगा।

मैंने कहा- अपन स्टांप पर या खाली चेक लेकर ये डील कर लेते हैं।तो उसने कहा- कुछ पैसों के चेक से न तुझे फर्क पड़ेगा न मुझे, लेकिन पुराना करार टूटा तो पूरे बिजनेस फ्यूचर की वॉट लग जाएगी। तो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने देते हैं।

बात खत्म।

फिर हमने बात का विषय बदला, मैंने पूछा- तेरी मैरिड लाइफ कैसी चल रही है?उसने कहा- मस्त है।आगे उसने कहा- लाइफ तो तेरी भी मस्त होगी। चूमने के लिए इतने प्यारे चेहरे वाली वाइफ जो घर में है।मैंने भी कहा- तेरी वाइफ जैसा शेप कहाँ है आगे पीछे का…

हम एक दूसरे की टांग खींचते हुए अश्लील होते जा रहे थे।मैंने कहा- दिया के बटक्स इलियाना जैसे हैं।वो गुस्से में बोला- और तेरी रीना के बूब्स तो किसी इंग्लिश लेडी के जैसे व्हाइट होंगे।

बात बढ़ने लगी।

उसने कहा- कमीने, मुझे पता था तू दिया को जरूर घूरता होगा!मैंने भी कहा- मैं भी तुझे अच्छी तरह जानता हूँ।

घर जाते जाते रणअजय ने कहा- भाई एक आइडिया हैं बिजनेस डील करने का, अगर तू बुरा ना माने?मैंने कहा- बता?

उसने कहा- देख, दोनों परिवारों की इज्जत सबसे बड़ी चीज़ है और दोनों इसके लिए कुछ भी कर सकते हैं। और हमारी पत्नियाँ भी अपने अपने परिवारों की इज्जत हैं।मैंने कहा- तो?उसने कहा- एक बार रीना का मेरे साथ एम एम एस बनवा दे, फिर मैं पुराना करार तोड़ दूँगा। तुझसे करार करके एड्वान्स दे दूँगा। इससे यह टेंशन खत्म हो जाएगी कि तू मेरे को सप्लाई देगा या नहीं, क्योंकि तेरी इज्जत मेरे मोबाइल में होगी।

मुझे गुस्सा आ गया, मैंने कहा- कमीने, तू ही इस तरह की गंदी बात कर सकता है। तू बचपन का दोस्त हैं तो यह पहली और आखिरी बार बर्दाश्त किया है, ऐसा सोचना भी नहीं! आई लव रीना।

हम अपने अपने रास्ते चल दिए, हमने एक-दूसरे से फिर बोलना बंद कर प्रिया।

लेकिन दिमाग़ में दिन-रात उसकी बात घूमने लगी। मैं अर्चना करता कि वो रीना के साथ संभोग कर रहा है और मैं उत्तेजित हो जाता। ऊपर से बात करोड़ों के भविष्य के बिजनेस की भी थी। अगर मेल हो जाता तो मेरा हर माह लाखों का प्रॉडक्ट बिकने का भविष्य था।मैं भी उसकी पत्नी दिया के बारे में सोचने लगा। उसका बेहतरीन आकार वाला पिछवाड़ा गजब का सेक्सी था। उसमें लिंग डालकर… सोच कर मेरा बुरा हाल हो जाता।

आखिरकार मैंने रणअजय को एक शाम उसी खेल के मैदान में बात करने के लिए बुलाया। आते ही उसने पिछली बात के लिए सॉरी कहा।मैंने कहा- इट्स ओके! बात तेरी सही थी। तुम्हें भी तो कोई बड़ी गारंटी चाहिए। लेकिन वह मेरी पत्नी है और उसकी कीमत करोड़ों से भी ज्यादा है मेरे लिए!

वह उत्सुकता से मेरे चेहरे को देखने लगा।मैंने कहा- लेकिन बिजनेस के फ्यूचर का सवाल है तो एक आइडिया मेरे पास भी है… तू रीना के साथ सो सकता है लेकिन मैं भी दिया के साथ सेक्स करूंगा।मैं डर रहा था कहीं फिर झगड़ा न हो जाए।

‘तो बात फिर वहीं आ गई। अगर तेरे गड़बड़ करने पर मैंने तेरी बीवी का एमएमएमस रिलीज किया तो तू भी ऐसा करेगा। तो बात तो बिगड़ जाएगी।’ उसने कहा।

मैंने कहा- मैं एमएमएस नहीं बनाऊंगा। तू अपनी सिक्योरिटी रखना एमएमएस बनाकर!

वह सोचने लगा, बोला- देख हम अपनी बीवियों को बहुत प्यार करते हैं लेकिन बिजनेस के अच्छे फ्यूचर के लिए हमें कुछ तो करना ही होगा। और वैसे भी तू इलियाना के साथ और मैं अदा के साथ सेक्स करना ही चाहते हैं। तो क्यों ना असली में…‘ठीक है, तो पक्का रहा?’

अब मन में सवाल था कि हमारी बीवियाँ इसके लिए मानेंगी कैसे? यह बहुत बड़ी चुनौती थी।

मेरी जिंदगी में जैसे कोई नया उद्देश्य मिल गया था। दिन का समय तो व्यवसाय में व्यस्त गुजर जाता मगर रातें बेचैन करने लगीं। मैं रीना को रणवीर के बाँहों में होने की अर्चना करता और खुद को उसकी सुंदर सेक्सी इल्याना डिक्रूज के साथ।रीना सेक्स के दौरान पूछती- क्या बात है, इधर कुछ दिन से ज्यादा जोश में नजर आ रहे हो?

उधर रणवीर का भी यही हाल था।

हमें अपनी बीवियों को लेकर कहीं बाहर निकलना था क्योंकि यह काम घर में नहीं हो सकता था, हम दोनों के ही संयुक्त परिवार थे। रणअजय और मैं रोज बात कर रहे थे, शाम को अपने वर्कशॉप बंद करने के बाद कहीं दूर बैठ जाते और योजना बनाते।

मुश्किल यह थी हमारे कारोबार एक ही क्षेत्र से संबंधित थे इसलिए दोनों को एक साथ निकलना कठिन था।

लेकिन एक बहुत बड़ी चीज के लिए कुछ तो कुर्बानी देनी ही पड़ती है। हमने कुछ दिन वर्कशॉप बंद करके शिमला घूमने का प्लान बनाया, लंबा पाँच दिन का।अपने घर वालों को नहीं बताया कि सामने वाला कपल भी उसी जगह घूमने जा रहा है।

बिजनेस वालों की बीवियों से पूछो वे बाहर जाने को कितना तरसती हैं। उनके पति हर समय बिजनेस में बंधे होते हैं। सो हमारी बीवियों की खुशी का ठिकाना नहीं था, वे उत्साह से तैयारी करने लगीं।

लेकिन असली तैयारी तो हमको करनी थी- अपनी पत्नियों को बिगाड़ कर! बिगड़ने से ही वे बिगड़े हुए काम यानि स्वैपिंग के लिए राज़ी होतीं।दोनों पैसे वाले परिवारों से थीं मगर ससुराल में अच्छी बहुओं जैसी ही रहती थीं। रणअजय और मैं एक दूसरे को अपने बेडरूम में होने वाली घटनाएँ बताते थे। कैसे रात में वो सेक्सी ड्रेस पहनकर हमें उत्तेजित करती, कैसे हमने सेक्स किया, कैसे हमने अपनी पत्नी के साथ ब्लू फिल्म देखी, वगैरह।

रीना ने एक दिन कहा- तुमने सपने तो दिखा दिए घूमने जाने के लेकिन तुम्हारा प्लान नहीं सेट हो पा रहा, या तो बताते ही नहीं?मैं- कोई बात नहीं यार, जब भी चलेंगे इतना कुछ करेंगे कि सारे इंतज़ार को भूल जाओगी।रीना- अच्छा! ऐसा क्या करने वाले हो? नया तो रोज कर ही रहे हो। ब्लू फिल्म देख-देख के सारे प्रैक्टिकल कर लिए। अब क्या नया करोगे?

मैं- यार, मैंने कोई प्लान थोड़ी बनाया हुआ है। बस ख्वाहिश है कि इसे यादगार बनाऊँ क्योंकि समय तो मिलता नहीं खुद की लाइफ जीने का। बिजनेस ही ऐसा है।

रीना- मुझको तो समझ नहीं आता कि इतना पैसा क्यों इकट्ठा कर रहे हो कि खत्म करने के लिए जिंदगी कम पड़ जाए?मैं- हम्म्म्म… लेकिन अपनी आउटिंग को यादगार बनाने के लिए तुमको भी साथ देना होगा।

रीना- हाँ जी, आपको आपकी जरूरत से ज्यादा ही दूँगी, देख लेना।

रीना अच्छे से नहाकर छोटी सी पारदर्शी नाईटी पहनकर आई थी, उसने मुझे बिस्तर पर ठेलकर गिरा प्रिया, बोली- कल तुमने थोड़ा सा मेरी चूत और उसके नीचे की छेद को जीभ से गुदगुदाया था तो बड़ा अच्छा लगा था। तो कल के ट्रेलर की आज पूरी फिल्म दिखाओ।

वह उल्टी तरफ मुँह करके मेरे ऊपर चढ़ गई, पीछे खिसक कर उसने अपने गोरे नितम्बों के बीच की गहरी जगह को मेरे मुँह पर टिकाई और मेरे ऊपर लेट गई, अपना सारा बोझ स्तनों के सहारे मेरे पेट पर डालते हुए उसने अपने प्यारे प्यारे कोमल मुँह में मेरे खड़े लिंग को ले लिया।मेरी पत्नी सेक्स में प्रयोग पसंद करती थी।

रणवीर की बातों से लगता था कि उधर भी कुछ ऐसा ही था। हम दोनों ने अपनी पत्नियों को बता प्रिया था कि दोनों दोस्त अब बात करने लगे हैं लेकिन घर वालों को जाहिर नहीं होने देते। हमने बता प्रिया कि घूमने का प्लान भी चारों का है ताकि दोनों दोस्त खुलकर रह सकें और बातें कर सकें और तुम भी नई सहेली बना लो।

पत्नियों को इन बातों से कोई दिक्कत नहीं हुई, वे भी मिलजुल कर रहना पसंद करती थीं, दोनों ने कहा- अच्छा है, कम्पनी मिल जाएगी घूमने को!

आख़िर तीन महीने बाद वह दिन आ गया जिसका हमें इंतज़ार था। हम स्टेशन पर अपनी अपनी गाड़ियों से पहुँचे ड्राइवर के साथ! वहाँ स्टेशन के अंदर रणअजय और दिया हमारा इंतजार कर रहे थे, हमारे टिकट फर्स्ट एसी में बुक थे।

हम दोनों पास से एक दूसरे की बीवियों को देख रहे थे। दिया बिल्कुल इलियाना जैसी, उसका शरीर साँचे में ढला हुआ, पतली सी कमर, उसके नीचे साड़ी में छिपी (मेरी अर्चना में) मोटी जाँघें। क्या शेप था… कई हीरोइनें भी उसके सामने फीकी थीं। गोल नाभि के नीचे बँधी हुई साड़ी में वह बड़ी सेक्सी लग रही थी।

और इधर गोरे रंग की रीना को देखकर रणअजय का बुरा हाल था, मौका मिलते ही बोला- यार, क्या चीज़ अपने साथ लेकर घूम रहा है तू, इसको तो थोड़ा हाथ लगाओ तो लाल हो जाए।

हम अपने ट्रेन के केबिन में बैठ गए।एसी फर्स्ट के उस केबिन में केवल चार हमारी सीटें ही थीं। दोनों औरतें एक-दूसरे से बात करने लगीं। वे बेचारी हमारे शैतान दिमाग और आगे की योजनाओं से अनजान थीं, हम भी कोई जल्दी नहीं करना चाहते थे।

आधे दिन और एक रात के सफर में हल्के-फुल्के हँसी-मजाक करते हुए हम अच्छे दोस्त बन गए।रास्ते में कालका स्टेशन से ट्रेन बदल कर हम सुबह मुँह अंधेरे शिमला पहुँच गए।

वहाँ थ्री-स्टार होटल में हमारे अगल-बगल के कमरे बुक थे, पहुँच कर पहले नहाए, थोड़ा आराम किया और नीचे रेस्तराँ में नाश्ते की टेबल पर मिले।

सफर के दौरान हमने एक-दूसरे की पत्नियों को भाभी नहीं कहकर उनके नाम से ही बुलाया था।

रणअजय- हाँ तो रीना, कैसा रहा रात का सफर? ज्यादा थकान तो नहीं हुई?रीना- नहीं अजय, ऐसा कुछ नहीं हुआ!

मैं- तुम दोनों को रास्ते में ही थकान न हो जाए इसीलिए तो टिकट 1-एसी में कराया था क्योंकि थकान अच्छे कामों से होनी चाहिए।

दिया- हां जी, आपके अच्छे काम हमें खूब पता हैं। थोड़ा आराम देकर हमारी जान निकालने की साजिश करके लाए हैं आप हमें!रीना- हाँ वो तो है, रणवीर तो तीन महीने से बोल रहे हैं कि याद रखोगी यह टूर! देखते हैं कितना यादगार बनाते हैं ये टूर को?

दिन भर हम साथ में शिमला घूमे और शाम को होटल में आ गये। हमारी उत्सुकता घूमने से ज्यादा कुछ और में थी। घूमने के दौरान दोनों की पत्नियों के उत्तेजक कपड़ों ने हमारा ध्यान भटकाए रखा। हमारी नजर उनकी छातियों और कूल्हों पर ही रहती, लेकिन उनसे छिपा कर!

शाम को हमने डिनर किया, चारों की आँखों और व्यवहार से लग रहा था कि अब सबको सेक्स की भूख है तो हम अपने अपने कमरों में चले गए। हमने हनीमून सुइट बुक कराया थाम उनमें कई साधन थे जिन पर शानदार तरीके से सेक्स किया जा सकता था। अलग अलग किस्म के सोफे और कुर्सियाँ, बड़ा सा सुंदर बाथटब जिसमें दो आदमी आराम से बैठ सकें।

हमने बाथटब में नहाते हुए सेक्स किया, धो पौंछ कर बिस्तर पर लौटे तो फिर ब्लू फिल्म देख कर माहौल बनाया और जमकर सेक्स किया, चार बजे तक बिस्तर के कब्जे ढीले करते रहे।

रीना- रियली यार, बहुत मजा आया, तुमने मेरी चीखें निकलवा दीं।मैं- हाँ, बहुत मजा आया। और बताओ तुम्हारी नयी दोस्त दिया कैसी है। और अजय कैसा लगा तुम्हें?रीना- यार ये लोग तो बहुत अच्छे हैं। दोनों का व्यवहार बहुत अच्छा हैं न? कितने स्मार्ट भी हैं ये।

मैं- लेकिन अपन से अच्छा थोड़े ही हैं।रीना- हाँ ये बात तो है। पता है, दिया बता रही थी कि अजय की सिक्स पैक है। वह सुबह-सुबह दो घंटे जिम करता है।मैं- हाँ, वो बचपन से करता है। लेकिन क्या बात है, तुम दोनों ने एक दूसरे की पतियों की बॉडी को भी डिस्कस कर लिया? क्या चल रहा है भाई? और कुछ तो डिस्कस नहीं किया ना?

रीना- यू डर्टी माइंड! ऐसा नहीं है। वो दिया उसके जिम की आदत से परेशान है। कह रही थी सुबह रोज इतना समय बर्बाद करते हैं। बिना जिम के भी तो लोग फिट रह सकते हैं। जैसे कि राजवीर!

मैं- ओह सचमुच दिया ने मेरे बारे मे ऐसा कहा?रीना- हाँ… लेकिन ज्यादा खुश न हो, क्योंकि मुझे अब तुम्हारे सिक्स पैक चाहिए, घर जाते ही फटाफट तैयारी शुरू कर देना।मैं- अच्छा! मुझसे न होगी इतनी मेहनत। कोई सिक्स पैक वाला ढूंढ कर कर लो अपने मन की!रीना- मर जाओगे इस गम से कि मैंने किसी और से अपने मन की कर ली। तो जाओ माफ किया।

ऐसे बातें करते हुए हमको नींद आ गई।अगली सुबह नाश्ते की टेबल पर चारों बैठे थे, हमारा प्लान शुरू करने का समय आ गया था।

मैंने पूछा- कैसी रही रात… होटल का रूम तो ठीक था ना?अजय- हा यार, रियली, हमने तो रखे हुए सारे फर्नीचर का खूब उपयोग किया।

दिया शरमा गई, उसने अजय को धीरे से मारा- चुप रहो।

मैं- अरे यार दिया, क्यों मार रही हो उसे? इसी के लिए तो हम यहाँ आए हैं। सबको पता है। देखो, रीना ने तो बाथटब से रात का पैसा वसूल करवा प्रिया मेरा।चारों हँसने लगे।

रणअजय- भाई यहाँ का पॉर्न मूवी कलेक्शन भी जोरदार था। एक थ्रीसम वाली मूवी थी। मजा आ गया। उसमें यार बताऊँ क्या होता है?दिया ने अजय को फिर मारा- यार हद कर रहे हो। उनके रूम में भी डीवीडी है, उनको तुम्हारी देखी सुनाना जरूरी है क्या?

रणअजय- चलो यार, आज साथ में कुछ मस्ती करते हैं।मैं- कैसी मस्ती? मस्ती तो यार अपनी बीवियों के साथ ही अच्छी लगती है।रणअजय- हाँ तो सब होंगे ना साथ में।

रीना कभी मुझे कभी रणअजय को देख रही थी… कैसी मस्ती?

हम रणअजय के कमरे में इकट्ठा हुए रात के 9 बजे थे।

अजय- ताश खेलते हैं, चलो बताओ ताश खेलना किस किस को नहीं आता।हमें पता था कि ताश खेलना चारों को आता है।

मैं- अरे अजय, तू कहीं पोकर खेलने के बारे में तो नहीं सोच रहा? जिसमें…मैं रुक गया।

दिया- जिसमें क्या…??रणअजय- जिसमें हारने वाला अपना एक कपड़ा उतारता है।रीना- सो फनी! हमें ऐसा कोई खेल नहीं खेलना! कोई सिंपल सा गेम खेलो।रणअजय- यार कोई बच्चे थोड़े ही हैं जो नॉर्मल गेम खेलें। इट्स एक्साइटिंग एंड न्यू… तभी तो अपना टूर नया और यादगार बनेगा। वरना जो कल रात किया था वही रोज करने मे क्या मजा है।

मैं- हाँ यार, मैं भी रीना से यही बोल रहा था कि कुछ यादगार करेंगे।दिया- नहीं, मुझे ऐसा यादगार नहीं चाहिए।रीना- चलो स्ट्रेट का ट्राई करते हैं।

दिया- क्या रीना, तुम भी इनके साथ?रीना- मैं समझती हूँ इनका तरीका… ये हमें नंगी करके मजे लेना चाहते हैं। लेकिन मेरा चैलेंज है कि इनकी बिल्ली इनको ही म्याऊँ बुलवा दूँगी।

दिया-लेकिन हार गये तो?रीना- तो अपने हज़्बेंड ही हैं यार, इनको मना लेंगे अपने तरीके से, कि हमें कपड़े न खोलने पड़ें।

रणअजय- अच्छा! ये कोई बात नहीं होती। रूल इज रूल।मैं- अरे ठीक है। एक बार शुरू तो करते हैं।दिया कुनमुनाती रह गई।

पत्ते बँट गए, रणअजय हार गया, उसने अपनी टीशर्ट उतारी, अंदर बनियान नहीं थी तो ऊपर से नंगा हो गया।सचमुच उसकी बॉडी सिक्स पैक वाली थी।मैंने तारीफ की, रीना आँखें फाड़े उसके पैक देख रही थी।

दूसरी बार दिया हारी, उसने टॉप खोलने से मना कर प्रिया। काफ़ी समझाने के बाद बहुत शर्माते हुए उसने अपना टॉप खोला।ओ माय गॉड!!!!उसको काली ब्रा में देखकर मेरे दिमाग़ ठिकाने नहीं रहा, क्या शेप था… शानदार उभार… बड़े बड़े तीखे समोसों के साइज के… नजरें नहीं हटा पा रहा था।लेकिन दूसरों का ख्याल करके लगातार देखने से बच रहा था।

उसके इस रूप से कमरे का माहौल बदलने लगा था।

इस बार रीना हारी, पहले से दिया के ब्रा में होने से वह ज्यादा देर तक नखरे नहीं कर पाई। उसके कसे हुए गोल स्तन अपने भार से बस जरा से ही लटके पूरे घमंड से सीने पर विराजमान थे, देख कर अजय की आँखें नशीली हो गईं।

अब सबका ध्यान खेल पर कम, एक दूसरे के शरीर पर अधिक था।

मैं लगातार दो बार हारा और मुझे अंडरवियर में आना पड़ा, दोनों स्त्रियाँ मेरे अंडरवियर में से तने हुए लिंग को देखकर हँसने लगीं।और फिर अजय हार गया, अब हम दोनों अंडरवियर में थे, दोनों बीवियाँ भी ब्रा पेंटी में आ चुकी थीं।

माहौल बदल चुका था, चारों अंदर ही अंदर उत्तेजित थे लेकिन एक-दूसरे की शर्म की वजह से भावनाएँ बाहर नहीं आ रही थीं।रणअजय और मैंने हँसी-मज़ाक करते हुए माहौल ऐसा बनाए रखा कि बीवियाँ खेलती रहें।

अगली बार दिया हारी!इस अवसर का इंतजार मैं कब से कर रहा था।उसे अपनी ब्रा उतारनी थी लेकिन उसने मना कर प्रिया, काफी मिन्नत के बावजूद नहीं मानी। फिर भी, मुझे इस बात की तसल्ली थी कि रीना ने हमारी दिया की ब्रा उतरवाने की कोशिश का विरोध नहीं किया था, मैं डर रहा था इस मुद्दे पर दोनों औरतें एक न हो जाएँ।

हमने खुशी खुशी खेल बंद कर प्रिया और अपने कमरे में आ गये।

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