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Group Sex Story पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 389 बार

मेरा गुप्त जीवन -57

यश देव

19 Feb 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -57
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फिर रानी एकदम से अपने चूतड़ ऊपर उठा कर मेरे पेट के साथ चिपक गई और फिर एक हल्की चीख मार कर छूट गई। उसकी चूत अपने आप खुल और बंद हो रही थी और मेरे लंड को निचोड़ने की कोशिश कर रही थी।कम्मो के इशारे को देखते हुए मैंने फिर ज़ोर से चुदाई शुरू कर दी और कुछ ही देर में मेरा फव्वारा पूरी फ़ोर्स से छूट गया।

मैं थोड़ी देर लंड को अंदर डाले हुए ही रानी के ऊपर लेटा रहा और फिर धीरे से लंड को निकाल लिया चूत से!कम्मो ने फ़ौरन ही रानी की टांगों को हवा में लहरा दिया और कमर के नीचे एक मोटा तकिया रख दिया।वहाँ से उठ कर मैं प्रेमा को आलिंगन में ले लिया और उसके लबों पर एक जोशीली चुम्मी कर दी, होटों को होटों पर रख कर मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और उसको गोल गोल घुमाने लगा।

मेरा लौड़ा जो पूरा गीला हो कर रानी की चूत से निकला था अब प्रेमा की चूत के मुंह पर खड़ा हुआ था और अंदर जाने की इजाजत मांग रहा था।जब तक आज्ञा आती, तब तक मैं उसके गोल और ठोस दुग्ध भंडारों में मस्ती लेने लगा. उसके दुग्ध भण्डार सुंदर और काले थनों से सुसज्जित थे और वो थन भी ऐसे कि देखते ही मुंह में लेने को जी चाहे।

जब दोनों भंडारों से दुग्ध पान कर लिया तो अपना मुंह नीचे ले जाते हुए बालों से भरी प्रेमा की चूत में मुंह डाल दिया और उसके भग को ढून्ढ कर चूसना शुरू कर दिया।प्रेमा के दोनों हाथ मेरे सर को पकड़े हुए थे और चूत के और अंदर जाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। मैंने अपने दोनों हाथ उसके बिलौरी नितम्बों पर टिके हुए थे और उनको खूब मसल रहे थे।

रेशमी ज़ुल्फ़ों का ज़िक्र तो बहुत सुना था लेकिन रेशमी चूतड़ और मम्मों को छूना और उनको हाथ में लेकर मसलना कभी नहीं सुना था, ना ही देखा ही था।

अब प्रेमा ने मुझको उठने का इशारा किया और मैं उठ कर उनको ले कर बेड की खाली वाली साइड में लेट गया। लेटते ही प्रेमा जी इस कदर गर्म और नर्म हो चुकी थी कि वो उठ कर मेरे तने हुए लौड़े पर बैठ गई और मेरे मुंह पर अपना मुंह रख कर मुझको बेतहाशा तेज़ी से चोदने लगी।

प्रेमा जी की जीभ मेरे मुंह के अंदर जा कर गिल्ली डंडा खेल रही थी और मेरा सारा रस चूस रही थी, मैं भी डबल जोश से प्रेमा को नीचे से ज़ोरदार लंड की चोटें दे रहा था, मेरे हाथ अभी भी बिलौरी मम्मों के कुर्बान हो रहे थे।

उधर देखा तो रानी की चूत पर कम्मो रुमाल डाल रही थी ताकि कीमती वीर्य चूत के बाहर ना निकल जाए।अब प्रेमा सर फ़ेंक कर मुझको चोद रही थी और क़भी नीचे झुक कर मेरे होटों को भी चूस लेती थी।फिर अचानक प्रेमा में इतना जोश आया कि वो चीखती हुई ऊपर उछाल भर रही थी और मुंह से बोल रही थी- फाड़ दो, मार दो मेरी चूत को सोमू, छोड़ना नहीं इस ससुरी को!वो फिर सर ऊंचा कर इस कदर ज़ोर से चीखी- छूट गया… अरे मर गई रे…और प्रेमा थर थर कांपती हुई मेरे ऊपर पसर गई।

रानी और कम्मो दोनों हैरानी से प्रेमा को देख रही थी जो अब शांत मेरे ऊपर लेटी थी।

अब मैंने प्रेमा को सीधे लिटाया और उसके रेशमी मम्मों को चूसने लगा, तब कम्मो ने इशारा किया कि उसको घोड़ी बना कर चोदूँ।मैंने प्रेमा को घोड़ी बनने के लिए कहा और जब वो घोड़ी बन गई तो मैंने उसकी चूत को पीछे से चूमा और चाटा और फिर अपने सख्त खड़े लंड को खुली चूत में डाल दिया।पहले बहुत धीरे से चुदाई शुरू की। पूरा लौड़ा अंदर डाल कर फिर उस को पूरा बाहर लाना और फिर धीरे से उस को अंदर डालना यह क्रम देर तक जारी रखा, इसका लाभ यह था कि प्रेमा की चूत जो एक बार छूट चुकी थी, फिर से तैयार हो रही थी, चुदाई आनन्द लेने के लिए!

जब मेरे लंड को महसूस हुआ कि चूत फिर चुदाई के लिए तैयार है तो मुझको प्रेमा ने एक हल्का सा धक्का अपने चूतड़ से मारा और अपने चूतड़ों को पीछे धकेल कर मेरे लंड और पेट से जोड़ दिया।अब धीरे धीरे मैंने अपनी पिस्टन की स्पीड बढ़ा दी, अंदर बाहर का क्रम आहिस्ता से तेज़ी में बदल गया, धक्के हल्के की बजाए गहरे और तेज़ हो गए, मेरे हाथ प्रेमा के चूतड़ों को हल्के हल्के थाप देने लगे।

और फिर प्रेमा ने चुदाई के आनन्द से भाव विभोर हो कर कहा- और मार और मार साली को… फाड़ दे हरामज़ादी को सोमू, सोमू मत छोड़ना रे इस साली को, बहुत तंग कर रही थी ना, ले अब ले पूरा का पूरा ले!प्रेमा मेरे हर धक्के का जवाब अपने चूतड़ों से दे रही थी, अब मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तेज़ हो गई कि प्रेमा को वापसो जवाब देने का समय ही नहीं मिल रहा था।

फिर वही हुआ जो अक्सर होता है मेरे साथ, प्रेमा की चूत सिकुड़ने और फैलने लगी और फिर उसकी चूत से पानी की हल्की धार निकली और मेरे लंड को गीला करती हुई मेरे पेट पर आ गिरी।कम्मो जो अब मेरे पास ही खड़ी थी, मुझको अपना छुटाने के लिए उकसाने लगी, मैंने भी आज्ञा का पालन करते हुए लम्बे और गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए।

थोड़ी देर में ही प्रेमा फिर छूटने की कगार पर थी लेकिन मैं तो अपने नशे में था तो मैंने तेज़ और गहरे धक्कों को जारी रखा।तभी प्रेमा का बड़ा ही प्रचंड छुटावन हुआ और उसका सारा शरीर कम्पकंपी में विलीन हो गया।कम्मो जो यह देख रही थी, फ़ौरन प्रेमा के पास आ गई और उसको कस के पकड़ लिया और मुझको इशारा किया कि मैं चुदाई जारी रखूँ।

तेज़ और गहरे धक्के जारी कर दिए और 10 मिन्ट्स के बाद ही मैं भी छूटने की कगार पर था और मैंने पूरी कोशिश करके लौड़ा प्रेमा की बच्चेदानी में डाल दिया और वहाँ अपना फव्वारा छोड़ा।एकदम गरम लावे की तरह जब मेरा वीर्य उस के अंदर गया तो प्रेमा झूम उठी, बंद आँखों और चेहरे पर आई मुस्कान से यह अंदाजा लगाया गया कि वो पूर्ण रूप से आनंदित हो गई है।

मैंने प्रेमा को एक हॉट किस दी उसके लबों पर और उसके मखमली मम्मों को चूम लिया।

दूसरी तरफ रानी पूरी तरह से शांत और एक हल्की मुस्कान लिए मुझको देख रही थी।रानी बोली- ज़रा इधर आना सोमू!

मैं उसके पास गया और उसने लेटे ही मेरे अभी भी खड़े लंड को अपने मुंह में लिया और उसको एक चाट गई।कम्मो अब प्रेमा के साथ जुट गई थी और उसमें गए वीर्य की रक्षा कर रही थी।अपने लौड़े को साफ़ करने के लिए मैं बाथरूम में गया और गीले तौलिये से अपना पसीना भी पौंछा।

बाहर आया तो रानी अपने कपड़े पहन रही थी, मैंने वहीं से आवाज़ दी- रुक जाओ रानी जी!उसने अभी पेटीकोट ही पहना था सिर्फ और ब्रा को पहन ही रही थी।मैंने कहा- आपको ब्रा मैं ही पहना दूँ क्या?रानी मुस्कुराते हुए बोली- हाँ हाँ, सोमु तुम ब्रा पहना दो मुझको!

मैंने आगे बढ़ कर पहना दी और उसके रेशमी मम्मों को झुक कर एक बहुत ही मीठी सी चुम्मी भी दी, ब्लाउज खुद ही पहना और साड़ी भी वो खुद ही लपेटने लगी।

जब वो कपड़े पहन चुकी तो मैंने उसको कस के आलिंगन में बाँधा और एक बहुत ही गरम चुम्मी उसके होटों पर दी।तब तक प्रेमा भी उठ चुकी थी, उसको भी ब्रा मैंने ही पहनाई।

जब हम सब कपड़े पहन चुके तो कम्मो दोनों को फिर समझा रही थी कि कैसे आचार व्यवहार करना है एक दो दिन, और पति से चुदाई की बात भी समझाई उस दोनों को!

रानी बोली- मेरा पति तो करता ही नहीं कभी भी, तो फिर मैं क्या करूँ?कम्मो बोली- क्यों रानी, कभी तुम पति के सामने बिल्कुल नंगी नहीं होती क्या?वो बोली- कभी नहीं। अगर वो कभी करने की इच्छा भी करता है तो मेरा पेटीकोट उठा कर लंड अंदर डाल देता है और 5-6 धक्कों में उसका छूट जाता है।कम्मो बोली- तुम ऐसा करो, आज न किसी बहाने से रोशनी में उसके सामने पूरी नंगी हो जाना, वो ज़रूर तुमको चोदेगा।

जब दोनों जाने लगी तो मैंने कम्मो को कहा- इनको कोकाकोला तो पिलाओ।कोकाकोला पीते हुए ही मैंने कहा प्रेमा और रानी से- अब आप जा रही हो दोनों तो फिर कब आओगी?कम्मो बोली- अगर गर्भ नहीं ठहरता तो अगली माहवारी के बाद ही आएँगी दोनों।

यह सुन कर मैं उदास हो गया और मेरी उदासी तीनों औरतों ने नोट की, प्रेमा और रानी बोली- क्या हुआ सोमू?मैं बोला- एक महीना तो बहुत होता है. इससे पहले नहीं आ सकती क्या?

कम्मो बोली- पहले आकर क्या करेंगी यह दोनों?मैं बोला- सच में बताऊँ, मैं इन दोनों से बेहद प्यार करने लगा हूँ।दोनों एकदम से चहक उठी- हम आ जाएँगी जब तुम बुलाओगे!

कम्मो हंस कर बोली- वाह छोटे मालिक, आप तो दोनों के आशिक हो गए हो!मैं थोड़ा शरमाया और फिर बोला- सच बताऊँ? आप दोनों बुरा तो नहीं मानोगी न?

दोनों ने ना में सर हिला दिया और बोली- कहो सोमू, क्या बात कहना चाहते हो?मैं बोला- आप दोनों मुझको बहुत अच्छी लगती हो, आपको मालूम है आप दोनों इतनी खूबसूरत हैं कि कोई भी आदमी आपको पाकर धन्य हो जाएगा। कैसी मिट्टी के बने हैं आप दोनों के पति?

दोनों मेरी बात सुन कर दौड़ कर आई और मुझसे लिपट गई और दोनों मुझको चूमने लगी और बोली- जब चाहो तुम हमको बुला सकते हो, बस कम्मो से फ़ोन करवा देना, हम दौड़ी चली आयेंगी।मैं बोला- थैंक यू प्रेमा जी और रानी जी, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ, मैंने आप दोनों का नाम अपने मन में रख लिया है। जानना चाहेंगी क्या नाम रखा है आप दोनों का?

दोनों एक साथ बोली- क्या नाम रखा है सोमू जी?मैं हँसते हुए बोला- प्रेमा जी का नाम है- ताजमहल नम्बर एक और रानी जी का नाम है- ताजमहल नम्बर!वो दोनों बहुत हँसी लेकिन उनके चेहरे से ख़ुशी साफ़ झलक रही थी, वो मेरी और भी मुरीद हो गई।

फिर हम तीनों ने एक दूसरे को आलिंगन किया और चूमा चाटा।मैं बोला- अगर आप दोनों दो दिन बाद फिर आ जाएँगी तो मुझको बहुत अच्छा लगेगा। कोशिश करते रहते हैं कि किसी दिन भी गर्भ ठहर सकता है, क्यों कम्मो?वो भी हँसते हुए बोली- ठीक है छोटे मालिक, आप एक दिन छोड़ कर आ जाया करो। ईश्वर ने चाहा तो आपकी मुराद जल्दी पूरी हो जायेगी।

फिर हम सबने कस के आलिंगन किया एक दूसरे से और फिर वो चली गई और मैं भी कॉलेज के लिए तैयार होने लगा।

कम्मो उन दोनों को बाहर छोड़ कर आई और आते ही मुझ से लिपट गई और मेरे मुंह को चूमते हुए बोली- वाह छोटे मालिक आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले। क्या तारीफ की है उन दोनों की! वो तो आपको सर्वस्व देने के लिए तैयार हो गई थी! वाह वाह मेरे सनम, यह सब किसने सिखाया?मैं हँसते हुए बोला- कम्मो, यह सब तुमने ही तो सिखाया है यार, तुम्हारी चूत की कसम!खूब हँसते रहे और फिर मैं कॉलेज के लिए चल पड़ा।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 144
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भाग 12
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आदित्य शिवा

2 days ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

राहुल 8

4 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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