राहुल ने चोदने की रफ़्तार और तेज कर दी थी..वो भी थक गया था और उसकी उत्तेजना भी चरम रीमा पर थी..बस लौड़े की ठाप से चूत को पीट रहा था..
जैसे ही दीपाली की चूत का पानी निकल कर लौड़े से स्पर्श हुआ..राहुल ने लौड़े को जड़ तक घुसा कर एक लंबी सांस ली और उसका बाँध भी टूट गया..दो नदियों का संगम हो गया..काफ़ी देर तक दोनों उसी हालत में पड़े रहे।
इनका तो हो गया.. अब आप सोच रहे होंगे संजय और दिया अन्दर गए थे.. पीछे से सोनू भी गया था.. वहाँ क्या हंगामा हुआ.. तो चलो हम वहीं जाकर देखते हैं।
सुधीर के घर में जाते ही दिया ने मुख्य दरवाजा बन्द कर प्रिया और संजय से चिपक गई।उसने अपने होंठ उसके होंठों पर टिका दिए।
संजय भी उसका साथ देने लगा और उसकी गाण्ड को दबाते हुए उसे चुम्बन करने लगा।थोड़ी देर बाद दोनों अलग हुए।
संजय- मेरी प्यारी बहना.. यहाँ नहीं.. कमरे में चल.. वहाँ आज तेरी गाण्ड मारूँगा…
दिया- नहीं भाई.. पहले तो मेरी चूत को शान्त करो.. लौड़े के लिए ये बड़ी तड़प रही है.. उसके बाद आप गाण्ड मार लेना…
दोनों कमरे में चले जाते हैं और वहाँ जाते ही दिया नीचे बैठ कर संजय की ज़िप खोल कर लौड़ा बाहर निकाल लेती है और मज़े से चूसने लगती है।
संजय- आहह.. अरे बहना.. आहह.. कपड़े तो निकालने देती.. उफ़ ऐसे ही शुरू हो गई तू आहह…
दोस्तो, इसी पल सोनू खिड़की से अन्दर आया था और आपको बता दूँ वो रसोई की खिड़की थी.. यह उसके पास के कमरे में थी.. सोनू जब खिड़की से अन्दर कूदा दूसरे कमरे में.. इन दोनों को आवाज़ सुनाई दी।
संजय ने जल्दी से दिया के मुँह से लौड़ा निकाला और पैन्ट के अन्दर करके ज़िप बन्द कर ली।
दिया- भाई बाहर कोई आया है.. आवाज़ आई ना अभी?
संजय- चुप चुप.. आराम से.. उस कुर्सी पर बैठ जा.. शायद दीपाली आ गई होगी…
दिया- नहीं भाई.. चाभी मेरे पास है.. दरवाजा बन्द है.. वो कैसे अन्दर आ सकती है.. शायद घर वाला आ गया है.. उसके पास तो दूसरी चाभी होगी ना…
संजय- तू यहीं बैठ.. मैं बाहर जाकर देखता हूँ.. वो हुआ तो कह देंगे दीपाली ने यहाँ मिलने के लिए बुलाया था.. ओके.. मैं अभी आता हूँ।
संजय कमरे से बाहर निकला.. उधर सोनू भी दबे पांव रसोई से बाहर आ रहा था। दोनों आमने-सामने हो गए नजरें मिलीं और…
संजय- अरे साले.. मादरचोद.. डरा प्रिया.. तू यहाँ क्या कर रहा है?
सोनू- तुझे देख कर ही यहाँ आया हूँ.. तू बता दिया के साथ यहाँ क्या कर रहा है?
अब संजय की हवा निकल गई.. वो हकलाने लगा- श..श..सी.. क्या बोल रहा है प्प..दिया को तूने क..कब देखा?
सोनू- जब तुम दोनों मुख्य दरवाजे से अन्दर घुसे.. तब देखा और पीछे की खिड़की से यहाँ आया हूँ.. अब सच-सच बता.. तुम दोनों इस खाली घर में क्या करने आए हो..? दूसरा तो कोई दिखाई ही नहीं दे रहा यहाँ।
संजय कुछ बोलता.. उसके पहले दिया कमरे से बाहर आ गई और बोल पड़ी।
दिया- सोनू.. मैं बताती हूँ.. हम यहाँ क्यों आए हैं।
संजय हक्का-बक्का सा बस दिया को देखने लगा।
सोनू- हाँ.. बताओ.. बताओ.. मैं भी सुनना चाहूँगा।
दिया- तो सुनो तुमने और मैडी ने भाई को पागल कर प्रिया है.. बिगाड़ कर रख प्रिया है.. उस उस दीपाली के चक्कर में भाई दिन-रात उसी के बारे में सोचते रहते हैं.. मुझसे ये देखा नहीं गया.. तब मैंने भाई से कहा कि मैं दीपाली को उनसे मिलवा देती हूँ.. बस आज यहाँ इसी लिए आए हैं दीपाली भी आने वाली है.. समझे…
दिया ने इतनी सफ़ाई से झूठ बोला कि संजय तो बस उसको देखता रह गया और सोनू का भी मुँह खुला का खुला रह गया।
सोनू- क्या दीपाली यहाँ आ आने वाली है.. व्व..वो मानी कैसे? और द..संजय तुमने हमें बताया क्यों नहीं.. कि दिया हमारा साथ दे रही है?
अब तो संजय में जान आ गई थी.. सोनू दिया के झूठ के जाल में फँस गया था।
संजय- बहन के लौड़े.. तुझे बड़ी जल्दी है हर काम की.. वो साला मैडी प्लान बना रहा है मगर कुछ बता नहीं रहा.. तो मैंने सोचा क्यों ना दिया के जरिए दीपाली तक पहुँच जाऊँ मगर तू यहाँ अपनी माँ चुदवाने आ गया.. अगर वो आ गई और तुझे यहाँ देख लिया तो हाथ से गई समझ.. उसके बाद तो मैं तुझे देख लूँगा।
सोनू- अरे यार मुझे क्या पता.. मैं तो समझा तुम दोनों यहाँ…
संजय- क्या सोचा बे.. मादरचोद.. बोल साले तेरी ज़ुबान काट के हाथ में दे दूँगा.. अगर कुछ भी उल्टा-सीधा बोला तो.. बता अब…
सोनू बेचारा क्या बोलता.. उसकी तो जान आफ़त में आ गई थी और संजय तो बस पूछो मत उल्टा चोर कोतवाल को डांटने पर तुल गया था।
सोनू- अरे कुछ नहीं सोचा मेरे बाप.. अब मैं जाता हूँ मगर जाने के पहले बस एक बार दीपाली को देख लूँ.. मेरे मन को तसल्ली मिल जाएगी।
दिया- हाँ देख लेना.. वो आती ही होगी.. जाओ छुप जाओ और सुनो उसके सामने मत आ जाना.. भाई भी यहाँ छुपने ही मेरे साथ आए थे.. बस वो मुझसे मिलने आ रही है।
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संजय ने कुछ और बोलना ठीक ना समझा और सोनू के साथ रसोई में छुप गया।
उन दोनों के जाने के बाद दिया बड़बड़ाने लगी।
दिया- ओह.. गॉड.. बाल-बाल बची.. दीपाली अब आ भी जाओ.. एक तो सर ने मेरी चूत को पानी-पानी कर प्रिया.. अब ये बीच में सोनू आ गया.. सर जल्दी से दीपाली को चोद कर भेज दो.. नहीं तो सोनू को समझाना मुश्किल हो जाएगा।
संजय- साले तुझे ऐसे खिड़की से किसी के घर में घुसते हुए ज़रा भी डर नहीं लगा…
सोनू- कैसा डर.. तुम दोनों को जाते देख लिया तो बस मन नहीं माना और यहाँ देखने आ गया।
संजय- मैं जानता हूँ साले.. तू एक नम्बर का हरामी है.. जरूर कुछ गलत सोच कर देखने आया होगा।
सोनू- ऐसी बात नहीं है यार.. अच्छा ये सब जाने दे.. पहले ये बता दीपाली यहाँ आ रही है.. ये सब जुगाड़ कैसे किया.. दिया को सब बातों का पता है क्या?
संजय- अरे नहीं साले.. उसको थोड़ी ये बोल सकता हूँ कि दीपाली को चोदना चाहता हूँ.. मैंने दिया को झूट-मूट प्यार का नाम ले प्रिया इसी लिए उसने दीपाली को यहाँ बुलाया है।
सोनू- ओह.. ये बात है.. प्यार के चक्कर में फँसा कर चोदेगा.. चल अच्छा है.. कैसे भी आए.. चूत मिलनी चाहिए बस….
संजय कुछ बोलना चाह रहा था.. तभी दरवाजे की घन्टी बजने लगी शायद दीपाली आ गई थी।
दोस्तो, दूसरी बार चुदने के बाद दीपाली ने राहुल से कहा- उसको अब जाना होगा.. जरूरी काम है।
राहुल ने बहुत रोकना चाहा मगर वो वहाँ से बहाना बना कर निकल गई और अब दरवाजे के बाहर खड़ी है।
दिया झट से गई.. दरवाजा खोला और धीरे से कहा।
दिया- सस्स.. कुछ मत कहना.. सोनू यहीं है ऐसी कोई बात करना उसको कुछ पता नहीं है।
दीपाली- अरे शिट.. उसको यहाँ क्यों बुलाया?
दिया- चुप रह ना.. सब बता दूँगी अन्दर तो आ.. किसी ने नहीं बुलाया.. खुद आ गया.. अब आ जा…
सोनू रसोई की खिड़की से दीपाली को आता देख रहा था, तभी संजय ने उसको वहाँ से हटा प्रिया।
संजय- साले हट.. वो देख लेगी तो बना-बनाया काम बिगड़ जाएगा।
दिया और दीपाली उस कमरे में चली गईं वहाँ जाकर दिया ने सारी बात दीपाली को समझा दी।
सोनू- अरे यार तू सच में खिलाड़ी है.. दीपाली आ गई.. काश अभी दिया यहाँ ना होती तो साली को अभी चोद देते…
संजय- अबे चुप बहन के लौड़े.. अब चल निकल जा यहाँ से और सुन बाहर इंतजार कर.. मैं बस 5 मिनट में आता हूँ.. वहीं रहना।
सोनू की उसी खिड़की से बाहर निकल गया संजय ने खिड़की बन्द कर दी और कमरे में चला गया।
दिया- गया क्या वो? आज तो बाल-बाल बचे.. वैसे क्या बोला अपने उसे?
संजय- कुछ नहीं.. यही कि तुम दीपाली को मेरे प्यार के बारे में बता कर यहाँ बुलाकर लाने वाली हो.. अब मैं जाता हूँ.. साला वो बाहर ही खड़ा है.. कहीं उसको शक हो गया तो गड़बड़ हो जाएगी।
दिया- ठीक है आप जाओ।
दीपाली- अरे मेरे आशिक.. तेरी किस्मत में आज भी मेरी चूत नहीं लिखी.. जा मैडी से मिल.. उसका कल का प्लान पता कर.. नया बदलाव में फ़ोन पे बता दूँगी तुम्हें ओके….
संजय- मेरी जान अब कोई टेन्शन नहीं है.. जब चाहूँ तुझे चोद लूँगा.. फिलहाल तो मैं जाता हूँ.. उस हरामी सोनू के रहते मैं कोई ख़तरा मोल नहीं ले सकता.. तुम दोनों यहीं रहो.. मैं जाता हूँ.. जल्दी आने की कोशिश करूँगा।
संजय के जाने के बाद दीपाली आराम से बिस्तर पर लेट गई।
दीपाली- आह.. बड़ा सुकून मिल रहा है आज तो कमर दुखने लगी।
दिया- तू तो सर के लौड़े से चुद कर आई है मेरी चूत की हालत खराब है.. ये सोनू कुत्ता भी ऐन मौके पर आ गया.. नहीं तो संजय के लौड़े से अब तक मेरी चूत ठंडी भी हो जाती।
दीपाली- शुक्र कर.. कुछ शुरू होने के पहले वो आ गया.. नहीं तो तुम दोनों को भारी पड़ जाता और संजय के साथ वो भी अभी तेरी चूत के मज़े ले रहा होता।
बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है। अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं!तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए…मुझे आप अपने विचार मेल करें।support@mohakkisse.com