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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 940 बार

विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक-48

पिंकी सेन

13 Mar 2025 को प्रकाशित

विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक-48
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दिया- हाँ भाई.. दिख रहा है मगर मुझे थोड़ा डर लग रहा है.. आपका इतना लंबा लौड़ा मेरी छोटी सी गाण्ड में कैसे जाएगा।

संजय- अरे पगली.. जब चूत में चला गया.. तो गाण्ड में भी चला जाएगा.. तू डर मत.. पहली बार में थोड़ा दर्द होगा.. उसके बाद सब ठीक हो जाएगा।

दिया- नहीं भाई पहली बार जब चूत में गया था.. मेरी जान निकलते-निकलते बची थी।

संजय- अरे वो तो मैं गुस्से में तुझे चोद रहा था.. अब तो बड़े प्यार से तेल लगा कर तेरी गाण्ड में लौड़ा डालूँगा.. तू डर मत मेरी प्यारी बहना..।

दिया- ठीक है भाई.. जैसी आपकी मर्ज़ी.. आ जाओ अब आप ही मुझे नंगी कर दो।

संजय उसके करीब गया और उसके कपड़े निकाल दिए.. और खुद भी नंगा हो गया.. उसका लौड़ा झटके खा रहा था।

दिया- भाई देखो कैसे ये झटके खा रहा है.. बड़ा हरामी है.. इसको पता लग गया कि आज ये मेरी कसी हुई गाण्ड में जाएगा।

संजय- हाँ मेरी जान ये सब महसूस करता है पहले तुझे अच्छे से चूमूँगा.. चाटूँगा.. उसके बाद ही तेरी गाण्ड मारूँगा।

संजय और दिया अब एक-दूसरे के होंठों का रस पीने लगे थे।

इसी दौरान संजय का हाथ दिया की गाण्ड को दबा रहा था.. दिया को बड़ा मज़ा आ रहा था।

दोनों बिस्तर पर लेट गए और चूसने का प्रोग्राम चालू रहा.. संजय अब दिया के निप्पल को चूसने लगा।

दिया- आ आह्ह.. भाई मज़ा आ रहा है.. उह.. ये निप्पल का कनेक्शन आह्ह.. चूत से है क्या.. आह्ह.. आप चूस रहे हो और अह.. चूत में मीठी खुजली शुरू हो गई आह्ह..

संजय- हाँ मेरी बहना निप्पल और चूत की तारें आपस में जुड़ी हुई हैं अब तू मज़ा ले.. मुझे भी तेरे आमों का रस पीने दे.. उफ़ बड़े रसीले हैं तेरे आम..

संजय काफ़ी देर तक दिया के मम्मों को चूसता रहा.. अब वो नीचे आकर चूत को चाटने लगा था। दिया तो बस आनन्द के मारे सिसकियां ले रही थी। संजय का लौड़ा लोहे जैसा सख़्त हो गया था।

संजय- साला ये लंड भी ना.. परेशान कर रहा है.. ठीक से चूत चाटने भी नहीं दे रहा.. दिया घूम जा तू.. लौड़े को चूस.. मैं तेरी चूत को ठंडा करता हूँ.. उसके बाद तेरी गाण्ड का मज़ा लूँगा..

दिया घूम गई अब दोनों 69 की अवस्था में आ गए थे.. संजय बड़े सेक्सी अंदाज में चूत को चाटने लगा। दिया भी तने हुए लौड़े को ‘घपाघप’ मुँह में चूसे जा रही थी। उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी.. क्योंकि संजय चूत चाटने के साथ-साथ अपनी ऊँगली पर थूक लगा कर उसकी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था।

दिया को बहुत मज़ा आ रहा था.. उसे गाण्ड में ऊँगली करने से गुदगुदी हो रही थी और चूत पर जीभ का असर उसे पागल बना रहा था।

करीब 10 मिनट बाद उसकी चूत ने उसका साथ छोड़ प्रिया और वो झड़ने लगी।

संजय ने सारा चूतरस पी लिया।

संजय- आह्ह.. मज़ा आ गया मेरी रानी.. चल अब तैयार हो जा गाण्ड मरवाने के लिए मेरा लौड़ा भी कब से तड़फ रहा है।

दिया- भाई आपका लौड़ा बहुत गर्म हो गया है.. चुसाई से जल्दी ही झड़ जाएगा.. मैं मुँह से ही चूस कर पानी निकाल देती हूँ दूसरी बार कड़क हो जाए तब आप गाण्ड मार लेना।

संजय- नहीं मेरी जान.. लौड़े को इतना क्यों चुसवाया.. पता है.. ताकि ये तेरी गाण्ड में जाने के लिए तड़पे.. तब तेरी गाण्ड मारने का मज़ा दुगुना हो जाएगा..

दिया- ठीक है मेरे गान्डू भाई.. आप नहीं मानोगे.. लो मार लो कौन सी अवस्था पसन्द करोगे।

संजय- आज गधी बन जा.. तुझे गधी बना कर मैं तेरी सवारी करूँगा..

दिया- क्या भाई.. कभी कुतिया.. कभी गधी.. आप घोड़ी भी तो बोल सकते हो।

संजय- देख अब तू चाहे कुछ भी बन.. लौड़ा तो तेरी गाण्ड में ही जाना है। क्या फ़र्क पड़ता है कि तू क्या बनी है।

दिया- अच्छा भाई.. लो आपके लौड़े के लिए तो गधी भी बन जाती हूँ लो अपनी गधी की गाण्ड में लौड़ा डाल दो।

दिया घुटनों के बल हो गई। कमर को सीधा कर लिया पैर फैला लिए.. ताकि गाण्ड का छेद थोड़ा खुल जाए.. मगर कुँवारी गाण्ड थी तो कहाँ छेद खुलने वाला था।

संजय ने लौड़े पर अच्छे से थूक लगाया और दिया की गाण्ड में भी ढेर सारा थूक लगा कर ऊँगली से अन्दर तक करने लगा।

दिया- उइ आई आह्ह.. भाई ऊँगली से ही दर्द हो रहा है.. लौड़ा कैसे जाएगा.. प्लीज़ आप चूत ही मार लो, लौड़े का अन्दर जाना मुश्किल है।

संजय- अरे साली रंडी बनने का शौक तुझे ही चढ़ा था.. अब दर्द से क्या घबराती है.. बस आज की बात है.. उसके बाद तो तेरे दोनों छेद खुल जायेंगे.. तू पक्की रंडी बन जाएगी.. मैं रोज तुझे चोदूँगा।

दिया- नहीं भाई मुझे कोई रंडी नहीं बनना.. बस आपके सिवा मैं किसी के बारे में नहीं सोचूँगी.. आह्ह.. रंडी तो वो दीपाली है.. जो सब के पास जा जा कर चुदती है उई आह्ह..

संजय- अच्छा.. तू रंडी नहीं बनेगी तो क्या मेरी बीवी बनने का इरादा है?

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दिया- हाँ भाई हम कहीं भाग जाते हैं वहाँ शादी कर लेंगे.. अपना घर बसाएंगे हम..

संजय- अब ये सपने देखना बस भी कर.. हम भाई-बहन हैं.. ये नामुमकिन है.. चल अब रेडी हो जा.. लौड़ा गाण्ड में लेने के लिए.. मैंने तेरी गाण्ड में अच्छे से थूक लगा प्रिया है.. अब दर्द कम होगा.. लौड़ा आराम से अन्दर जाएगा।

दिया- आप भी ना भाई कोई क्रीम लगाते या तेल लगाते.. आप ना थूक लगा रहे हो..

संजय- अरे मेरी बहना थूक लगा कर गाण्ड मारने का मज़ा ही अलग होता है.. अब बस बात बन्द कर.. मुझे लौड़ा घुसड़ेने दे।

संजय ने लौड़े पर और थूक लगाया और दिया के छेद पर लौड़ा टिका कर दबाव देने लगा.. लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया.. दोबारा किया तो फिसल कर नीचे हो गया। संजय थोड़ा झुंझला सा गया।

संजय- तेरी माँ की चूत.. साला अन्दर ही नहीं जा रहा..।

दिया- भाई मेरी गाण्ड बहुत छोटी और आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.. नहीं जाएगा आप समझो बात को.. आह्ह..

संजय- चुप बहन की लौड़ी.. साली कब से ‘पक-पक’ कर रही है.. जाएगा क्यों नहीं.. अबकी बार देख कैसे जाता है।

दिया समझ गई कि ये गुस्सा हो गया.. वो चुप रही और दाँत भींच लिए अपने ताकि दर्द हो तो चींख ना निकले।

संजय ने लौड़े पर और थूक लगाया और दिया के छेद पर लौड़ा टिका कर दबाव देने लगा.. लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया.. दोबारा किया तो फिसल कर नीचे हो गया। संजय थोड़ा झुंझला सा गया।

संजय- तेरी माँ की चूत.. साला अन्दर ही नहीं जा रहा..

दिया- भाई मेरी गाण्ड बहुत छोटी और आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.. नहीं जाएगा आप समझो बात को.. आह्ह..

संजय- चुप बहन की लौड़ी.. साली कब से ‘पक-पक’ कर रही है.. जाएगा क्यों नहीं.. अबकी बार देख कैसे जाता है।

दिया समझ गई कि ये गुस्सा हो गया.. वो चुप रही और दाँत भींच लिए अपने ताकि दर्द हो तो चींख ना निकले।

अबकी बार संजय ने दोनों हाथों से गाण्ड को फैलाया और टोपी छेद पर रख कर थोड़ा सा दबाव बनाया तो टोपी गाण्ड के छेद में अटक गई.. बस यही मौका था उसके पास.. उसने जल्दी से एक हाथ से लौड़ा पकड़ा दूसरे हाथ से दिया की कमर को पकड़ा और दबाव बनाया.. दो इंच लौड़ा अन्दर घुस गया।

दिया- आह आह.. भाई उआई.. बहुत दर्द हो रहा है…

संजय- अरे मेरी जान तेरी गाण्ड है ही इतनी टाइट.. थोड़ा दर्द तो होगा ही.. तू बस बर्दास्त कर.. उसके बाद बड़ा मज़ा आएगा..।

संजय ने दिया की कमर को पकड़ कर दोबारा लौड़े पर दबाव बनाया.. दो इंच लौड़ा और अन्दर घुस गया।

संजय का लंड गाण्ड में एकदम फँस सा गया था जैसे उसे किसी ने शिकंजे में फंसा प्रिया हो.. उधर दिया की हालत भी खराब हो रही थी। दर्द के मारे उसकी आँखों में आँसू आ गए थे.. मगर वो दाँत भींचे.. बस सिसक रही थी।

संजय- आह्ह.. मज़ा आ गया.. कैसी कसी हुई गाण्ड है तेरी.. साला लौड़ा अन्दर जकड़ सा गया है।

दिया- आई भाई उफ़ ससस्स.. अब और मत डालना.. आह्ह.. मेरी गाण्ड फट जाएगी.. बहुत आआह्ह.. आह.. दर्द हो रहा है प्लीज़.. आह्ह.. इतने से ही आप काम चला लो आह्ह..

संजय- हाँ बहना जानता हूँ.. तुझे तकलीफ़ हो रही है.. डर मत मैं बड़े आराम से तेरी गाण्ड मारूँगा।

संजय का 4″ लौड़ा गाण्ड में फँसा हुआ था। अब वो धीरे-धीरे उसे अन्दर-बाहर करने लगा.. दिया को दर्द हो रहा था मगर कुछ देर बाद दर्द के साथ उसको एक अलग ही मज़ा भी आने लगा। वो उत्तेजित होने लगी.. उसकी चूत भी पानी छोड़ने लगी।

दिया- आ आह.. हाँ ऐसे ही भाई.. आह्ह.. आराम से करो आह्ह.. स..सस्स मज़ा आ रहा है.. आई धीरे.. अभी दर्द है मगर आह्ह.. कम हो रहा है आह्ह..

संजय अब थोड़ी रफ्तार बढ़ा रहा था और लौड़े पे दबाव बना रहा था ताकि और वो अन्दर तक चला जाए।

दस मिनट तक ये सिलसिला चलता रहा। अब संजय भी चरम रीमा पर पहुँच गया था.. दिया की दहकती गाण्ड में लौड़ा ज़्यादा देर नहीं टिक पाया उसको लगा कि अब कभी भी पानी निकल जाएगा तो उसने दिया की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ लिया।

संजय- बहना मेरा पानी किसी भी पल निकल सकता है… अब बर्दास्त नहीं होता.. मैं पूरा लौड़ा तेरी गाण्ड की गहराई में उतार रहा हूँ संभाल लेना तू…

दिया- आह्ह.. आई.. भाई आह्ह.. अब मना करूँगी आह्ह.. तो आप मानोगे थोड़ी.. आह डाल दो आह्ह.. अब आधा गया तो आह पूरा भी पेल दो आह्ह..

बस इसी पल संजय ने लौड़ा गाण्ड से बाहर निकाला और तेज झटका मारा। दिया की गाण्ड को चीरता हुआ लौड़ा जड़ तक उसमें समा गया।

ना चाहते हुए भी दिया के मुँह से चीख निकल गई.. मगर वो इतनी ही चीखी कि बस उसकी आवाज़ कमरे से बाहर ना जा पाए।

बस दोस्तों आज के लिए इतना काफ़ी है। अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं.! क्या आप जानना नहीं चाहते कि आगे क्या हुआ?

तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए..मुझे आप अपने विचार मेल करें।support@mohakkisse.com

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विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक

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