सारिका कंवल
सत्यापित कहानीकार (Verified)@saraka-kaval
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
सारिका कंवल की रचनाएं
अंतहीन प्यास-8
आपकी सारिका कंवलहम दोनों ही एक-दूसरे से साँपों की तरह लिपटे एक-दूसरे को प्यार करने और अंगों को सहलाने लगे। मुझे अब सहन नहीं हो रहा था और मैंने उससे कह दिया- अब देर किस बात की है, जल्दी से लंड मेरी बुर में घुसा दो..!उसने मेरी बात सुनते ही कहा- अभी ...
अंतहीन प्यास-7
आपकी सारिका कंवलउसने मेरे कूल्हों को दबाया और फिर अपनी जीभ मेरे चूतड़ों पर फिराने लगा और उन्हें चूमते हुए मेरे चूतड़ों के बीच में घुमाने लगा। जब वो ऐसे करता मेरी कमर खुद बा खुद ऊपर की ओर उठ जाती।उसने अब मेरी टांगों को थोड़ा फैलाया और मेरी योनि को अपन...
अंतहीन प्यास-6
आपकी सारिका कंवलमैंने कहा- मैं तो फिलहाल अकेली रहती हूँ बच्चों के साथ.. मगर रात में ही मिल सकती हूँ!उसने तुरंत कहा- आज रात को मिलें फिर?मैंने कहा- नहीं… आज नहीं… फिर कभी!उसने कहा- कब?मैंने कहा- कल!उसने कहा- ठीक है।मैं अपने बच्चे को लेकर घर चली आई ...
अंतहीन प्यास-5
आपकी सारिका कंवलउसने अपने लंड को हाथ से हिलाया और कहा- अपनी टाँगें फैलाइए और मोड़ लीजिए।मैंने अपनी टाँगें फैला लीं और घुटनों से मोड़ लिया। मुर्तुजा मेरी टांगों के बीच आया उसने अपने लिंग को मेरी योनि के पास रखा और हाथ से लिंग को पकड़ कर मेरी योनि के ब...
अंतहीन प्यास-4
आपकी सारिका कंवलउसने पजामे के ऊपर से ही मेरी योनि को सहलाते हुए पैंटी को खींच कर किनारे कर दिया। वो अपने लिंग को पूरी ताकत से मेरे कूल्हों के बीच दबाने लगा साथ ही मुझे जोरों से पकड़ अपनी और खींच रहा था और दूसरे हाथ से मेरी योनि को सहला रहा था।उसने ...
अंतहीन प्यास-3
आपकी सारिका कंवलबारिश इतनी तेज़ हो चुकी थी कि 4 लोगों का एक छाता के नीचे बच पाना मुश्किल था, पर आस-पास कोई जगह नहीं थी कि हम छुप सकें इसलिए हम जल्दी-जल्दी चलने लगे।हमने बच्चों को आगे कर दिया और हम पीछे हो गए, जिसके कारण उसका जिस्म मेरे जिस्म से चलत...
अंतहीन प्यास-2
आपकी सारिका कंवलमैंने कहा- फिर भी आपको तो सोचना चाहिए था कि अपने बच्चों का एक पढ़ी-लिखी औरत जैसा ख्याल रख सकती है वैसा एक अनपढ़ औरत नहीं रख सकती!तब उसने कहा- जी पढ़ी-लिखी तो है, पर सिर्फ उर्दू!फिर मैंने कहा- आपने इतनी जल्दी-जल्दी बच्चे क्यों किए? क्य...
अंतहीन प्यास-1
आपकी सारिका कंवलनमस्ते, आप सबके प्यार और अनुरोध ने मुझे फिर से एक नई कहानी लिखने पर विवश कर दिया।मैं नहीं चाहती थी कि अब कोई कहानी लिखूँ, क्योंकि यह कोई कहानी नहीं बल्कि मेरे जीवन का अनुभव है जो मैं आप लोगों से बाँटना नहीं चाहती थी, पर कुछ लोगों क...
वो हसीन पल-4
उन्होंने कहा- प्लीज ये कॉन्डोम निकाल देता हूँ बिल्कुल मजा नहीं आ रहा है।मैंने मना किया, पर कुछ देर के सम्भोग में लगने लगा कि वो पूरे मन से नहीं कर रहे हैं।फिर उन्होंने मुझसे कहा- कॉन्डोम निकाल देता हूँ जब स्खलन होने लगूंगा तो लिंग बाहर निकाल लूँगा...
वो हसीन पल-3
सारिका कंवलइसी तरह 4 दिन बीत गए थे हम दोपहर को रोज मिलते और रोज सम्भोग करते। शाम को 5 से 7 मेरा बेटा पढ़ाई के लिए जाता, तो उस वक़्त भी हमें समय मिल जाता और एक-दो बार कर लेते थे। दिन भर मैं बस उसके बारे में ही सोचती रहती थी। मुझे नशा सा हो गया था, उस...
वो हसीन पल-2
सारिका कंवलमैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “फिलहाल तो मुझे पता नहीं, क्योंकि मैं अभी पुराने वाली ब्रा और पैंटी पहन रही हूँ और वो 34d हैं और xl की पैंटी है, पर अब वो मुझे थोड़े टाइट होते हैं..!”ये कहते ही उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी और खींचा और बिस्तर...