प्रेम गुरु
सत्यापित कहानीकार (Verified)@parama-gara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
प्रेम गुरु की रचनाएं
तीन पत्ती गुलाब-30
गौरी की कसी खूबसूरत गुलाबी गांड मारने के लिए मैं मरा जा रहा हूँ। चूत का उदघाटन तो आराम से हो गया था पर उसे गांड के लिए तैयार करना जरा मुश्किल लग रहा है।आइए अब शुरू करते हैं अगला सोपान‘ये गांड मुझे दे दे गौरी!’
तीन पत्ती गुलाब-29
दोस्तो! मुझे लगता है मैं कोई पिछले जन्म की अभिशप्त आत्मा हूँ। पता नहीं मैं अभी तक अपनी सिमरन को क्यों नहीं भूल पा रहा हूँ? सच कहूं तो मिक्की, पलक, अंगूर, निशा, सलोनी और अब गौरी, मीठी या सुहाना में कहीं ना कहीं मुझे सिमरन का ही अक्स (छवि) नज़र आता ह...
एक दिल चार राहें -5
इस इरोटिक लव मेकिंग स्टोरी में मैंने बताया है कि मैंने अपनी देसी कामवाली को साड़ी पहनाने के चक्कर में नंगी किया फिर उसके बदन को छू छू कर मजा लिया.
एक दिल चार राहें -4
देसी वर्जिन गर्ल इरोटिक सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मैंने कैसे अपनी कमसिन कामवाली के जिस्म को भोगने के लिए उसे अपनी बातों के लपेटे में लिया. कैसे मैंने उसकी पसंद की बातें करके उसे खुश किया.
एक दिल चार राहें -3
फ्री देसी सेक्स गर्ल स्टोरी में पढ़ें कि मैं अपनी कामवाली की जवान बेटी को पटाने के चक्कर में उसे दाने पे दाना डाले जा रहा था. लग रहा था कि चिड़िया जाल में फंस जायेगी.
तीन पत्ती गुलाब-27
आप सभी तो बहुत गुणी और अनुभवी हैं पर एक बात आपको बता देता हूँ कई बार मिठाई के साथ अगर बीच में नमकीन खा लिया जाए तो आनन्द दुगना नहीं चार गुणा हो जाता है। कुछ लड़कियों और शादीशुदा औरतों को चुदाई के दौरान थोड़ा गंदा बोलना और नितम्बों पर थप्पड़ खाना और अ...
एक दिल चार राहें- 2
मेरे घर कामवाली की छोटी बेटी आने लगी थी. मेरा मन इस इंडियन देसी हॉट गर्ल की मीठी नमकीन कचौरी जैसी बुर को चखने को ललचाने लगा. तो मैं उसे अपने जाल में फांसने में लग गया.
तीन पत्ती गुलाब-26
गौरी ने शरमाकर अपनी आँखों पर हाथ रख लिए। गौरी की मौन स्वीकृति पाकर मैंने उसे एक बार फिर कसकर अपनी बांहों में भींचते हुए चूम लिया। लंड महाराज तो पजामा फाड़कर ही बाहर आने लेगे थे।
तीन पत्ती गुलाब-25
कई बार मुझे संदेह होता है कहीं मीनूर जानबूझ कर तो हम दोनों को ऐसा करने के लिए उत्साहित तो नहीं कर रही और बार-बार इस प्रकार की स्थिति और मौक़ा तो पैदा नहीं कर रही जिससे हम दोनों की नजदीकियां बढ़ जायें?
तीन पत्ती गुलाब-24
किसी भी कहानी या कथानक को लिखने में लेखक को बहुत समय और ऊर्जा के साथ-साथ सकारात्मक मनोदशा (मूड) की जरूरत होती है। आज के व्यस्त जीवन में बहुत सी समस्याएँ होती हैं और ऐसे में किसी कहानी को सुन्दरतम ढंग से लिखना किसी चुनौती से कम नहीं होता।