प्रेम गुरु
सत्यापित कहानीकार (Verified)@parama-gara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
प्रेम गुरु की रचनाएं
मधुर प्रेम मिलन-2
प्रेषिका : स्लिमसीमा‘मधुर, क्या मैं एक बार आपके हाथों को चूम सकता हूँ?’
हुई चौड़ी चने के खेत में -5
प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज)चौथे भाग से आगे :‘अरे मेरी सोन-चिड़ी ! मेरी रामकली ! एक बार इसका मज़ा लेकर तो देखो तुम तो इस्सस… कर उठोगी और कहोगी वंस मोर… वंस मोर…?’
हुई चौड़ी चने के खेत में -4
लेखक : प्रेम गुरुप्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज)तीसरे भाग से आगे :
हुई चौड़ी चने के खेत में -3
लेखक : प्रेम गुरुप्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज)दूसरे भाग से आगे :
अंगूर का दाना-7
प्रेम गुरु की कलम से‘अम्मा बापू का चूसती क्यों नहीं। अनार दीदी बता रही थी कि वो तो बड़े मजा ले ले कर चूसती है। वो तो यह भी कह रही थी कि मधुर दीदी भी कई बार आपका…?’ कहते कहते अंगूर रुक गई।
अंगूर का दाना-6
प्रेम गुरु की कलम सेप्रथम सम्भोग की तृप्ति और संतुष्टि उसके चहरे और बंद पलकों पर साफ़ झलक रही थी। मैंने उसे फिर से अपनी बाहों में कस लिया और जैसे ही मैंने 3-4 धक्के लगाए मेरे वीर्य उसकी कुंवारी चूत में टपकने लगा।
अंगूर का दाना-4
मैंने उसे बाजू से पकड़ कर उठाया और इस तरह अपने आप से चिपकाए हुए वाशबेसिन की ओर ले गया कि उसका कमसिन बदन मेरे साथ चिपक ही गया। मैं अपना बायाँ हाथ उसकी बगल में करते हुए उसके उरोजों तक ले आया।वो तो यही समझती रही होगी कि मैं उसके मुँह की जलन से बहुत पर...
अंगूर का दाना-3
प्रेम गुरु की कलम सेउस रात मुझे और अंगूर को नींद भला कैसे आती दोनों की आँखों में कितने रंगीन सपने जो थे। यह अलग बात थी कि मेरे और उसके सपने जुदा थे।