प्रेम गुरु
सत्यापित कहानीकार (Verified)@parama-gara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
प्रेम गुरु की रचनाएं
तीन पत्ती गुलाब-11
आज भी मैं थोड़ा जल्दी उठ गया था। मीनूर ने बेडरूम में ही चाय पकड़ा दी थी। आज मैंने कई दिनों बाद पप्पू का मुंडन किया था और तेल लगाकर मालिश भी की थी। बाथरूम से फारिग होकर जब तक मैं बाहर आया तब तक मीनूर स्कूल जा चुकी थी।
तीन पत्ती गुलाब-10
सुबह के लगभग 8 बजे हैं। रात को थोड़ी बारिश हुई थी इस वजह से मौसम आज थोड़ा खुशगवार (सुहावना) सा लग रहा है। अक्सर ऐसे मौसम में मीनूर नाश्ते में चाय के साथ पकोड़े बनाया करती है। पर आजकल तो मीनूर के पास मेरे लिए जैसे समय ही नहीं है। मीनूर तो कब की स्कूल जा ...
तीन पत्ती गुलाब-9
गौरी को उसके घर के पास ड्राप करने के बाद ऑफिस जाते समय मैं सोच रहा था ‘साली यह नौकरी भी एक फजीहत ही तो है। पता नहीं ये पढ़ाई-लिखाई, नौकरी चाकरी, घर-परिवार, रिश्ते-नाते, शादी-विवाह, बालिग-नाबालिग किस योनि निष्कासित (भोसड़ी वाले) का आइडिया था। आराम स...
तीन पत्ती गुलाब-8
रात को देरी से नींद आई तो सुबह उठने में भी देरी हो गई। स्कूल जाते समय मीनूर ने मुझे जगाया। अक्सर मेरे देरी से उठने पर वो बहुत उलाहना सा देते हुए मुझे जगाया करती है पर आजकल तो उसका यह चुलबुलापन जैसे गायब ही हो गया है।
तीन पत्ती गुलाब-7
इस वाक्य का अर्थ मेरी समझ में नहीं आ रहा था। पता नहीं गौरी मेरे बारे में क्या सोचती होगी? क्या पता उसे मेरी मेरी इन भावनाओं का पता है भी या नहीं? पर मुझे नहीं लगता वो इतनी नासमझ होगी कि मेरे इरादों का उसे थोड़ा इल्म (ज्ञान) ना हो। खैर इतना तो पक्का...
तीन पत्ती गुलाब-6
मीनूर आज खुश नज़र आ रही थी। मुझे लगता है आज मीनूर ने खूब ठुमके लगाए होंगे। खुले बाल और लाल रंग की नाभिदर्शना साड़ी … उफफ्फ … पता नहीं गौरी को यही साड़ी पहनाई थी या कोई दूसरी! पर कुछ भी कहो मीनूर इस समय बाजीराव की मस्तानी ही लग रही थी।
तीन पत्ती गुलाब-5
ये साली नौकरी भी जिन्दगी के लिए फजीता ही है। यह अजित नारायण (मेरा बॉस) भोंसले नहीं भोसड़ीवाला लगता है। साला एक नंबर का हरामी है। पिछले 4 सालों से कोई पदोन्नति (प्रमोशन) ही नहीं कर रहा है। आज मैं इससे हिसाब चुकता कर ही लेता हूँ। मैं इंतज़ार कर रहा थ...
तीन पत्ती गुलाब-4
इस भयंकर प्रेमयुद्ध के बाद सुबह उठने में देर तो होनी ही थी। मीनूर ने चाय बनाकर मुझे जगाया और खुद बाथरूम में घुस गयी। आज उसे अपनी मुनिया की सफाई करनी थी सो उसे पूरा एक घंटा लगने वाला था।मैं बाहर हाल में बैठकर चाय की चुस्कियाँ लेते हुए अखबार पढ़ रहा ...
तीन पत्ती गुलाब-3
मैंने अपने और मीनूर के दुश्मनों को (अरे भाई कपड़ों को) परे हटा प्रिया और उसे बांहों में दबोच लिया। अब मीनूर ने अपनी जांघें खोल दी और पप्पू को अपने हाथों से पकड़कर अपनी मुनिया के छेद पर रगड़ने लगी। मैंने एक जोर का धक्का मारकर उसका काम आसान कर प्रिया।
तीन पत्ती गुलाब-2
आज पूरा दिन गौरी के बारे में सोचते ही बीत गया। उसके चक्कर में मैं आज दफ्तर से थोड़ा जल्दी घर आया था। पर गौरी नज़र नहीं आ रही थी शायद वह काम निपटाकर चली गयी थी। मीनूर ने आज भूरे रंग की पैंट और टॉप पहना था। मीनूर के नितम्ब और कमर इन कपड़ों में बहुत कात...
तीन पत्ती गुलाब-1
प्यारे पाठको और पाठिकाओ! इस कथानक की नायिका नाम है गौरी। और जिसका नाम गौरी हो भला उसकी खूबसूरती के बारे में कोई शक़-शुबहा कैसे किया जा सकता है। पता नहीं गुलाबो ने क्या खाकर या सोच कर गौरी का नाम रखा होगा, पर उसकी खूबसूरती ठीक उसके नाम के मुताबिक ह...