यश देव
सत्यापित कहानीकार (Verified)@yasha-thava
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
यश देव की रचनाएं
मेरा गुप्त जीवन-33
चाची और उषा के जाने के बाद हम तीनों फिर एक साथ हो गये यानि कम्मो और पारो फिर मेरे कमरे की हर रात को शोभा बढ़ाने लगी।सबसे पहले दोनों ने चाची और उषा की कहानी सुननी चाही।जैसे कैसी थी दोनों? उनके मम्मे कैसे थे और चूत कैसी थी?मैंने भी खूब मज़े ले ले कर उ...
मेरा गुप्त जीवन-32
चाची रात में 3-4 बार चुद चुकी थी इसलिए मैंने सोचा सुबह उषा को ही चोद दूंगा लेकिन जब आँख खुली तो देखा कि चाची का हाथ मेरे लंड के साथ खेल रहा था।लंड, जैसा कि आम बात थी, पूरा तना हुआ था और चाची का हाथ मुठ की तरह नीचे ऊपर हो रहा था।
मेरा गुप्त जीवन-31
अब इतनी बड़ी कोठी में सिर्फ मैं, पारो और कम्मो ही रह गए थे। रोज़ रात को चुदाई का क्रम जारी रहा।
मेरा गुप्त जीवन -30
कम्मो जब लखनऊ में आई तो उसके पास धन के नाम मेरे दिए हुए थोड़े से रूपए ही थे। जब तक वो चले वो एक छोटी सी धर्मशाला में रही और जब वो खत्म हो गए तो वो मजबूरन लोगों के घर का काम-काज करने लग गई और एक सज्जन परिवार में उसको आसरा भी मिल गया लेकिन घर के मालि...
मेरा गुप्त जीवन -29
मैं दो औरतों को चोद कर उनके बीच खड़े लंड को लेकर लेटा था और हैरान हो रहा था कि पारो कैसे मेरे मन मर्ज़िया हो गई।एक हाथ पारो के मोटे मम्मों के साथ खिलवाड़ कर रहा था और दूसरे से मैं गंगा की चूत को सहला रहा था।पारो के साथ चुदाई एक क्षण में हो गई, पारो इ...
मेरा गुप्त जीवन-28
मम्मी मेरा इंतज़ार कर रही थी और हम दोनों ने मिल कर मेरा सूटकेस तैयार कर प्रिया।यह फैसला हुआ था कि मैं अपनी लखनऊ वाली कोठी, जो कभी कभी इस्तेमाल होती थी, में जाकर रहूँगा। वहाँ एक चौकीदार अपने परिवार के साथ नौकरों की कोठरी में रहता था, उसको फ़ोन पर सब बत...
मेरा गुप्त जीवन-27
मैं बोला- चम्पा, आज हम तीनों चुदाई करते हैं, पहले गंगा को चोदते हैं हम दोनों फिर तुझको चोदते हैं हम दोनों।क्यों कैसी रही यह?
मेरा गुप्त जीवन-26
जैसे जैसे मेरे लखनऊ जाने के दिन निकट आ रहे थे मेरे हाथ पैर फूलने लगे और इसका मुख्य कारण था कि मेरा वहाँ की चुदाई का प्रबंध नहीं हो पा रहा था।एक दिन शाम को घर लौटा तो देखा कि हवेली में बड़ी चहल पहल हो रही थी।निर्मला को बुला कर पूछा- यह क्या हो रहा ह...
मेरा गुप्त जीवन -25
निर्मला गैर मर्दों से अपनी चूत चुदाई के किस्से सुनाती रही, मैं चुप बैठा रहा।निर्मला ने पूछा- छोटे मालिक, कहीं आप बुरा तो नहीं मान गए?‘नहीं नहीं… बुरा कैसा! अच्छा किया अपनी तसल्ली कर ली तुमने! सच बताना उस लड़के के इलावा किसी और से तो नहीं करवाया तुम...
मेरा गुप्त जीवन -24
अगले दिन चम्पा निर्मला को लेकर मम्मी से मिलने आई। थोड़ी देर बाद वो दोनों मम्मी के साथ मेरे कमरे में आईं। मम्मी ने आते ही कहा- सोमू, चम्पा इस निर्मला को ले कर आई है तुम्हारे काम के लिए! बोलो ठीक है यह?मैंने कहा- मम्मी, आप जो फैसला कर लो, वही ठीक है।
मेरा गुप्त जीवन- 23
बसंती के जाने का दुःख किसी को नहीं हुआ क्यूंकि वो कुछ दिनों में सिर्फ मेरे साथ ही सम्बन्ध बना पाई थी। कई बार मैं सोचता था कि बसंती का व्यवहार अजीब ज़रूर था लेकिन इतना भी अजीब नहीं कि संभव न हो सके।ऐसे किस्से तो सुनने में आते रहते थे कि अमुक को रात ...
मेरा गुप्त जीवन- 22
मैंने अपना पायजामा खोला और खड़े लंड को उसकी चूत पर टिका प्रिया।तभी देखा कि उसने भी झट से अपनी टांगें पूरी खोल कर फैला दी जिस वजह से मुझ को लंड को उसकी चूत में डालने में कोई दिक्कत आई।