यश देव
सत्यापित कहानीकार (Verified)@yasha-thava
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
यश देव की रचनाएं
मेरा गुप्त जीवन -94
अगले दिन कॉलेज गया तो सबसे पहले मैंने ऑफिस में वंदना की छुट्टी की अर्ज़ी दे दी और फिर अपने क्लास में आकर बैठ गया।
मेरा गुप्त जीवन -93
थोड़ी देर बाद मैडम मुझको और कम्मो को थैंक्स करके अपनी कार में वापस चल पड़ी।जब मैडम को छोड़ कर हम दोनों वापस आ रहे थे तो मुझको पारो मिल गई और कहने लगी- वाह छोटे मालिक, आप तो मुझको भूल ही गए?मैंने उसको खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया और कहा- पारो, तुमन...
मेरा गुप्त जीवन-92
गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।और फिर कम्मो के इशारे प...
मेरा गुप्त जीवन- 91
गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए।कम्मो और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई।
मेरा गुप्त जीवन- 90
इस तरह आगरा की वो रात समाप्त हुई और अगले दिन का प्रोग्राम केवल आगरा शहर घूमने का था तो जल्दी उठने की कोई बंदिश नहीं थी। मैं लड़कियों को उनके कमरों में छोड़ कर वापस आकर गहरी नींद में सो गया।
मेरा गुप्त जीवन- 89
जेनी बोली- चलेगा, अगर तुम्हारे साथ सेक्स करना पड़ेगा तो दौड़ेगा।फिर हम दोनों आँखें बंद कर के थोड़ी देर के लिए झपकी लेने लगे।
मेरा गुप्त जीवन -88
दो औरतों और एक जवान लड़की को चोदना कोई खाला जी का खेल नहीं है यह मुझको उस दिन महसूस हुआ।इसी कारण सुबह मेरी नींद टाइम पर नहीं खुली और मुझको वंदना ने ही आकर जगाया और जल्दी से मैं मुंह हाथ धोकर चलने के लिए तैयार हो गया।वंदना ने ही मेरा बिखरा सामान बक्से...
मेरा गुप्त जीवन -87
हमारी ट्रेन ठीक टाइम पर दिल्ली स्टेशन पर पहुँच गई और हम सब अपना अपना बैग उठाये हुए स्टेशन के बाहर आ गए।सिर्फ दोनों मैडमों का सामान कुली ने उठाया हुआ था।
मेरा गुप्त जीवन- 85
अगले दिन कॉलेज में हम दोनों ने अपने नाम भी लिखवा दिए और पैसे भी जमा करवा दिए।अगले हफ्ते का प्रोग्राम बना था जिसमें रात को ट्रेन से दिल्ली जाना था और एक दिन और रात दिल्ली रहना था, और अगली सुबह बस से आगरा के लिए निकलना था, वो रात आगरा में रहना था और...
मेरा गुप्त जीवन -84
कम्मो हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुमको हरा देगी।
मेरा गुप्त जीवन- 83
मैं भी नकली गुस्से में बोला- हंस लो हंस लो तुम दोनों… मैं जानता हूँ बचपन से ही इस लड़की की मेरे लौड़े पर नज़र थी, यह हमेशा इस को अपने ऊपर लगाना चाहती थी! क्यों है न वंदना? सच बोलना?वंदना भी गुस्साई हुई बोली- हाँ तो थी मेरी मर्ज़ी वो मैं अब पूरी कर लूंगी...