यश देव
सत्यापित कहानीकार (Verified)@yasha-thava
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
यश देव की रचनाएं
मेरा गुप्त जीवन- 178
नंदा भाभी जो अभी तक ट्रेन में मेरे द्वारा चुदाई प्रोग्राम में शामिल नहीं हो पाई थी और एक रेगिस्तान में प्यासे व्यक्ति की तरह तड़फ रही थी, अपनी सीट से उठी और एकदम से मेरे लण्ड पर झपट पड़ी और उसको मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
मेरा गुप्त जीवन- 177
यह तो ऋषि वात्सयायन का बहुत भला हो जिन्होंने काम शास्त्र की रचना कर के भारतवासियों और विदेशी पंडितों को काम कला के नए तरीके सिखाए और काम कला के साथ जुडी सैंकड़ों भ्रान्तियाँ दूर की।
मेरा गुप्त जीवन- 176
तीनों भाभियाँ अपनी अपनी चुदाई कहानियाँ सुनाने को राजी हो गई।हम सब की नज़रें गौरी भाभी के सुंदर गोल चेहरे पर टिकी हुई थी और उन्होंने मेरे हाथों से खेलते हुए बोलना शुरू किया:
मेरा गुप्त जीवन- 175
मौसी ने सब लड़कियों को अपने अपने कमरों में जाने के लिए कहा तो सब लड़कियाँ कपड़े पहन कर मेरे पास आई और मुझ को एक बड़ी ही हॉट और कामुक जफ्फी मारने लगी और साथ में अभी भी खड़े मेरे लण्ड को चूमती हुई वहाँ से एक एक कर के निकल गई।
मेरा गुप्त जीवन- 174
अब बिमला मौसी मुझको लेकर एक कोने में चली गई और मेरे कान में फुसफुसाने लगी- इसका मतलब यह है कि तुम मुझको गर्भवती कर सकते हो?मैं केवल मुस्करा प्रिया और मैंने मौसी को कोई उत्तर नहीं प्रिया लेकिन मौसी मुझ को कहाँ छोड़ने वाली थी, वो मेरे इर्द गिर्द घूमती रह...
मेरा गुप्त जीवन- 173
हम ये बातें कर ही रहे थे कि जसबीर हल्के से भिड़े दरवाज़े को खोल कर अपनी सहेलियों के साथ अंदर आ गई।जसबीर के साथ आई लड़कियाँ वही थी जो मेरे सामने बैठी थी खाना खाते हुए और जो मुझ से पैरों से छेड़ छाड़ कर रही थी।
मेरा गुप्त जीवन- 172
जसबीर ने ही आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोला तो यह देख कर हम सब डर के मारे सकते में आ गए क्योंकि वहाँ रोबदार बिमला मौसी जी खड़ी हम सब को घूर रही थी।मौसी जसबीर को धकेलते हुए अंदर आई और बड़ी खूंखार नज़रों से हम सबको देख रही थी, फिर शेर के दहाड़ने जैसी आवाज़ में पूछ...
मेरा गुप्त जीवन- 171
मैंने ऊषा, सुश्री और शशि से वायदा ले लिया कि रात में निकलने वाली बरात में वो सब मेरे साथ ही रहेंगी और लड़की वाले घर में वहाँ की लड़कियों से मेरा बचाव करेंगी।
मेरा गुप्त जीवन- 170
अगले दिन बारात का दिन था तो सभी उस काम में व्यस्त थे।नाश्ते के बाद मुझको ऊषा मिली और कहने लगी- कैसे हो सोमू राजा?मैं भी शरारत भरे लहजे में बोला- कल तुमने तो बजा प्रिया था मेरा बाजा!ऊषा ज़रा सा मुस्कराई और हल्की सी आँख मार दी।
मेरा गुप्त जीवन- 169
जब मैं अपने वाले कमरे में पहुँचा तो वहाँ लड़कियों और औरतों का जमघट लगा था।मैंने इधर उधर देखा कि कोई तो इनमें से पहचान वाला मिल जाए जिससे यह पता चल सके क्या यह वही कमरा है, और यदि है तो मेरा बिस्तर कहाँ है और मेरा लिए क्या इंतज़ाम किया है।
मेरा गुप्त जीवन- 168
मैं बड़ी धीरे धीरे चुदाई कर रहा था ताकि ऊषा पुनः गर्म होकर फिर से पूरा आनन्द ले सके।मेरे साथ ही लेटे हुए सूरज भैया कुछ जल्दी करने लगे थे लेकिन मैंने उनको रोक प्रिया, कहा- धीरे धीरे करने में ही आपको और आपके साथी को आनन्द आएगा।
मेरा गुप्त जीवन- 167
सब लड़के लड़कियों ने ज़ोर से तालियाँ मारी लेकिन तभी कमरे के दरवाज़े पर एक ज़ोर से दस्तक हुई और वहाँ एकदम सन्नाटा छा गया, सब नंगे बरातियों के चेहरे एकदम डर के मारे पीले पड़ गए।