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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,039 बार

मेरा गुप्त जीवन- 171

यश देव

09 Apr 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 171
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मैंने ऊषा, सुश्री और शशि से वायदा ले लिया कि रात में निकलने वाली बरात में वो सब मेरे साथ ही रहेंगी और लड़की वाले घर में वहाँ की लड़कियों से मेरा बचाव करेंगी।

शाम को मैं अपनी लखनवी शेरवानी और चूड़ीदार पायजामे में काफी हैंडसम लग रहा था, ऐसा मुझसे सब लड़कियों और फिर कुछ हैंडसम लड़कों ने भी कहा था।

बारात जब दुल्हन के द्वार पर पहुँची तो वहाँ कुछ जवान लड़कियों और छोटे बच्चों के समूह ने मुझको घेर लिया था और ज़ोर शोर से मेरा नाम ले रहे थे।उन सबने मेरी चिपको डांस वाली फिल्म देख रखी थी और इसी बात का मुझ को डर था कि वो मेरी काफी फजीहत करेंगी।लेकिन मेरी बॉडी गॉर्ड लड़कियाँ उनके सामने कुछ ज़्यादा देर टिक नहीं सकी और दूसरे पक्ष की बड़ी लड़कियाँ मुझको धकेलते हुए एक साइड में ले गई और मेरे साथ काफी बेशरमी से पेश आने लगी।

लेकिन मेरी साथी लड़कियों में से ऊषा और शशि मेरे साथ अपने मम्मे चिपका कर मजबूती से खड़ी रही लेकिन फिर भी कुछ मनचली लड़कियों ने उन का घेरा तोड़ लिया और मेरे साथ काफी छीना झपटी शुरू कर दी।ज़्यादातर लड़कियाँ मुझको छूने की कोशिश कर रही थी और इस कोशिश में अक्सर वो मेरे चूतड़ों पर हाथ फेर देती थी या फिर उन का हाथ मेरे लण्ड से भी छू जाता था।

मैंने भी इस धक्कामुक्की में दो तीन लड़कियों के चूतड़ों पर और उनके गोल सुडौल मम्मों पर हाथ फेर ही दिया था और उन लड़कियों के मुंह पर आये भाव देख कर तो मैं दंग ही रह गया था क्यूंकि उनका बुरा मानने की जगह वो खुल कर मेरे से नज़रें मिला कर मुस्करा रही थी जैसे कि खुले आम मुझको आगे बढ़ने का न्यौता दे रही हों।

फिर ना जाने कहाँ से एक बड़ी ही रोबदार आवाज़ आई और सभी शरारती लड़कियाँ वहाँ से रफूचक्कर हो गई हैं और मैं झट से अपनी मण्डली में शामिल हो गया।

थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि एक बहुत ही सुंदर और रोबदार औरत मेरे पास आकर रुकी और बोली- हेलो हैंडसम कैसे हो? तुम दूल्हे के रिश्तेदार हो क्या? अरे वाह तुम तो दूल्हे के भाई के समान दिख रहे हो?

मैं थोड़ा शरमा गया लेकिन तभी रितु भाभी सामने आ गई और ज़ोर से बोली- ये हैं ठाकुर सोमेश्वर सिंह जी, अभी कॉलेज में पढ़ते हैं और बड़े ठाकुर जी के चचेरे भाई के लड़के हैं। फिल्मों में भी कभी कभी काम करते हैं ये!

वही औरत बोली- तभी मैं कहूँ, शक्ल कुछ पहचानी सी लगती है, अच्छा तुम्ही हो वो लड़के जिसने वो हॉट और सेक्सी डांस किया है? बहुत खूब… बहुत अच्छा डांस किया था तुमने भैया जी, चलो आज रात को इनसे वो ही डांस करवाएंगे। क्यों भैया जी करोगे ना?

अब मैं थोड़ा संयत हुआ और बोला- जी नहीं, हम यहाँ डांस करने नहीं आये हैं, हम तो यहाँ अपनी भाभी को लेने आये हैं।रितु भाभी बोली- अरे सोमू भैया, यह तो मज़ाक कर रही हैं, तुम्हारी भाभी की छोटी मौसी जो ठहरी तो इनका हक बनता है। क्यों मौसी जी? हमारा लल्ला तभी डांस करेगा अगर दुल्हन की मौसी भी डांस करेगी! क्यों ठीक है ना?

मौसी हंस कर बोली- हाँ हाँ, मैं भी डांस कर दूंगी, उसमें क्या मुश्किल है, एक बात तो है, ये दूल्हे का भाई है काफी सुंदर और स्मार्ट। क्यों लड़कियो तुम सबको पसंद है क्या? मुझको तो बड़ा पसंद है ये छोकरा!मौसी के सामने कोई लड़की नहीं बोली लेकिन मेरे निकट आने का मौका ताड़ती रही।

उधर शादी की रस्में शुरू हो चुकी थी लेकिन लड़की साइड वाली कोई भी लड़की मुझ से ज़्यादा दूर नहीं जाना चाहती थी और मेरे चारों और ही मंडरा रही थी।ऊषा और शशि हर जगह मेरे साथ ही चल रही थी और ऐसा करते हुए हम सब के जिस्म आपस में रगड़ खा रहे थे। जिधर भी मैं जा रहा था, मुझ को ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैं लड़कियों के बीच ही घिरा हुआ हूँ और लड़कियों का एक हजूम मेरे साथ चलता हुआ नज़र आ रहा था।

जब काफी छीना झपट्टी हो चुकी तो उन लड़कियों के ग्रुप में 4-5 लड़कियों को मैंने दबी हुई आँख मारी और वो झट दूसरी लड़कियों को पीछे करती हुई मेरे साथ आ कर चिपक कर खड़ी हो गई।ये लड़कियाँ काफी सुंदर और गोलगुदाज जिस्म वाली थी और काफी आकर्षक लग रही थी।उधर रितु भाभी और रानी भाभी मेरी तरफ ही देख रही थी और इशारों से मुझको दिलासा दे रही थी कि मैं कतई भी ना घबराऊँ।

ये लड़कियाँ अब मेरे से एकदम सट कर खड़ी थी और उनमें से जो काफी बोल्ड लग रही थी उसने अपने हाथ के ऊपर चुन्नी डाल कर हाथ को मेरे लंड के ऊपर रख हुआ था और उसको हल्के हल्के दबा रही थी।मेरे पीछे खड़ी लड़की ने मेरे चूतड़ों पर हाथ रखे हुए थे और वो उन पर धीरे धीरे हाथ फेर रही थी।

अब मैं भी अपनी सहन शक्ति खो चुका था, मैंने लण्ड पकड़ने वाली लड़की की कमीज को थोड़ा ऊपर करके उसकी चूत पर हाथ रख दिया और उसको दबाने लगा।हाथ फेरते हुए उसकी चूत पर से कटे हुए बाल हाथों में चुभ रहे थे लेकिन वो बड़ा आनन्द भी दे रहे थे।

थोड़ी देर बाद एक दूसरी लड़की ने इसी तरह चुन्नी की आड़ में मेरा लण्ड पकड़ लिया और पहले वाली ने अपने मम्मे आगे कर दिए जिनके ऊपर भी मेरा हाथ आते ही चुन्नी से ढक दिया गया।

दोनों ही लड़कियाँ देखने में बहुत ही सुंदर और स्मार्ट लग रही थी और उनके पहने हुए कपड़े भी काफी महंगे लग रहे थे। उन दोनों की पर्सनालिटी से काफी इम्प्रेस होकर मैंने उनके नाम पूछ लिए।मेरे बाएं तरफ वाली लड़की सिख थी और उसका नाम जसबीर था और मेरे दाईं और वाली लड़की का नाम रिंकू था।

मेरे साथी लड़कियाँ समझ गई थी कि वो दोनों लड़कियाँ मुझको खुले आम छेड़ रही है और मेरे लंड के साथ खूब मस्ती कर रही हैं लेकिन वो काफी समझदार थी और मेरी रज़ामंदी देख कर वो चुप रही।.

तब जसबीर ने कहा- सोमू जी, अगर आप इजाज़त दें तो हम आपको अपना कमरा दिखाना चाहती है। बस पास ही है, जल्दी ही वापस आ जाएंगे।मैंने भी अनजान बनते हुए कहा- कोई ख़ास बात है आपके कमरे में?रिंकू बोली- आप चलिए तो सही, देखिये तो सही!

मैंने अपनी साथी लड़कियों ऊषा और शशि के तरफ देखा तो उन्होंने भी सर हिला दिया।मैंने कहा- मैं अकेला तो आप दोनों के साथ जाऊँगा नहीं, अगर तुम को ऐतराज़ न हो तो ये दोनों भी मेरे साथ जाएंगी। बोलो मंज़ूर है?

जसबीर और रिंकू ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर हामी में सर हिला दिया और हम पांचों वहाँ से एक एक कर के खिसके।जसबीर हमको वहाँ के गेस्ट हाउस में ले गई जो उस वक्त खाली था।अच्छा खासा कमरा था जिसमें डबल बेड सजा हुआ था और एक सोफा सेट भी बिछा था।

स्मार्ट और सुंदर 4 लड़कियों में अकेला मैं… उफ़्फ़ क्या मौका था लेकिन ना जाने क्यों मुझको वहाँ कुछ भय लग रहा था शायद किसी अनहोनी घटना का डर था जिससे मेरे ताऊ जी के नाम पर कोई आंच ना आये… यह विचार बार बार मेरे मन में आ रहा था।

जसबीर ने कमरा बंद कर लिया और मेरे को बेतहाशा लबों पर चूमने लगी और रिंकू ने मेरी पैंट के बटन खोलने की कोशिश शुरू कर दी लेकिन ऊषा और शशि ने उसके हाथ पकड़ लिए और पैंट के बटन खोलने से रोक दिया।

रिंकू नाराज़ होकर उससे हाथापाई करने लगी लेकिन ऊषा ने उसको कस के अपनी बाहों में बाँध लिया और उसके लबों पर ताबड़तोड़ चुम्मियों की बारिश लगा दी।

रिंकू इस घटना से एकदम हतप्रभ हो गई और उसका हाथ मेरी पैंट से हट गया और ऊषा ने अब अपना हाथ उसकी सलवार में छुपी उस की चूत पर फेरना शुरू कर दिया।

उधर शशि ने भी अपने हाथ जसबीर के चूतड़ों पर फेरना शुरू कर दिए और उसके चूतड़ों की दरार में ऊँगली को सलवार के बाहर से डालने की कोशिश करने लगी।जसबीर और रिंकू ने पहले कभी ऐसा व्यवहार नहीं देखा था तो वो भी बहुत अधिक चकित और व्याकुल हो रही थी।

मौका अच्छा देख कर मैंने जसबीर और रिंकू को बड़ी ही कामुक जफ्फी मारी और उनके लबों पर चुम्बन दे डाले।हम तीनों अभी आलिंगनबद्ध हुए ही थे कि कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से खटका और मैं घबरा कर इन दोनों को छोड़ कर शशि और ऊषा के पीछे खड़ा हो गया।

जसबीर ने ही आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोला और यह देख कर हम सब डर के मारे सकते में आ गए क्यूंकि वहाँ रोबदार मौसी जी खड़ी हुई हम सबको घूर रही थी।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

लव कुमार लव

3 days ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

विवेक शांडिल्य

3 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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