यश देव
सत्यापित कहानीकार (Verified)@yasha-thava
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
यश देव की रचनाएं
मेरा गुप्त जीवन- 142
कोई दस मिन्ट के खेल के बाद ही रति फिर चुदाई के लिए ज़िद करने लगी और मैं कम्मो के इशारे पर फिर उसको चूमने लगा और उसके मम्मों को चूसने के बाद ही उसकी चूत में हाथ लगाया तो वो फिर बेहद पनिया रही थी।
मेरा गुप्त जीवन- 141
मैंने तीन चार बार ही ऐसा किया कि रति अपनी कमर नीचे से उठाने लगी और मेरे लंड को पूरा अंदर जाने के लिए उकसाने लगी लेकिन कम्मो ने मुझको रोक दिया और कहा- अभी कुछ मत करना, कल इसकी भाभी से सलाह करके ही आगे बढ़ेंगे।
मेरा गुप्त जीवन- 140
कम्मो कुछ देर सोचते हुए बोली- छोटे मालिक रति को भी एक तरह से एक बिमारी है इस कारण कई औरतें काम क्रीड़ा के लिए ठंडी पड़ जाती हैं। इसको इंग्लिश में FRIGIDITY कहते हैं!
मेरा गुप्त जीवन- 139
कम्मो ने भाभी को पलंग पर लिटा दिया और उनसे आहिस्ता से बातें करने लगी और मैं दोनों को छोड़ कर बैठक में आ गया।बैठक में आकर बैठा ही था कि अचानक रति धड़धड़ाती हुई बैठक में आई और उसके पीछे पारो भी उसको रोक रही थी लेकिन वो किसी की भी ना सुने बिना अंदर आ गई...
मेरा गुप्त जीवन- 138
कम्मो फ़ौरन उठी और बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद चूत को धो पौंछ कर वापस आई, आते ही बोली – यह क्या किया छोटे मालिक? मैं फंस जाती ना अगर अभी तुम्हारा वीर्य साफ़ नहीं किया होता?मैं घबरा कर बोला- सॉरी कम्मो डार्लिंग, वो क्या है, मुझ से रहा नहीं गया ...
मेरा गुप्त जीवन- 137
क्लास खत्म होने से पहले रति ने मुझको अपने घर आने का निमंत्रण दिया और यह भी कहा वो और उसके भैया भाभी मुझसे मिल कर बड़े खुश होंगे।बातों बातों में मैंने उस को बता दिया था कि इस कोठी में मैं अकेला ही अपने कुछ नौकर और नौकरानिओं के साथ रहता हूँ।
मेरा गुप्त जीवन- 136
अगले दिन सुबह ही मैं, कम्मो और निम्मो लखनऊ वापस जाने के लिए चल पड़े और 3-4 घंटे में लखनऊ पहुँच गए।सबसे पहले निम्मो को मैडम जी के घर में छोड़ा और फिर अपनी कोठी में आ गए।
मेरा गुप्त जीवन- 135
चाची भी बहुत अधिक गरमा चुकी थी तो वो भी जल्दी ही झड़ गई और वहीं बिस्तर पर ढेर हो गई लेकिन मैंने इस बार अपना वीर्य चाची की चूत में ही स्खलित किया।निम्मो और पर्बती भी जल्दी ही अपने कपड़े पहन कर अपनी कोठरियों में चली गई।चाची को भी मैंने उसकी नाइटी पहना...
मेरा गुप्त जीवन- 134
थोड़ी देर बाद मुझको एक फ़ोन कॉल आया जो लखनऊ से था और दूसरी तरफ निर्मला मैडम थी, उन्होंने बताया कि कॉलेज 3 दिन बाद खुलने वाला है तो मैं हो सके तो निम्मो उनकी नौकरानी को लखनऊ भेज दूँ।मैंने उनको आश्वासन दिलाया कि मैं स्वयं कम्मो और निम्मो के साथ 2 दिनो...
मेरा गुप्त जीवन- 133
मीनू मैडम और रूबी मैडम ने हम सबको आलिंगनबद्ध किया और फिर उनकी कार और लड़कियों से भरी मिनी बस लखनऊ के लिए रवाना हो गई।उधर देखा चाची लड़कियों के जाने से बहुत खुश लग रही थी और खूब चहक रही थी, कम्मो मुंशी जी के साथ बैठ कर सब काम करने वालों की तनख्वाह का ...
मेरा गुप्त जीवन- 132
कम्मो ने सब लड़कियों को कपड़े पहनने के लिए बोला और हम दोनों भी कपड़े पहनने लगे।समय देखा तो सिर्फ रात के 11 बजे थे, हम दोनों उन लड़कियों को कॉटेज में छोड़ कर हवेली आ गए।
मेरा गुप्त जीवन- 131
कम्मो ने थोड़ी देर में ज़ोर से कहा- ज़ूबी तुम्हारा समय खत्म हो गया है और तुम सोमू के ऊपर से फ़ौरन उतर जाओ!इस समय में ज़ूबी का केवल एक बार ही छूटा।ज़ुबैदा, जूली और हेमा तीनों मेरे पास नंगी मलंगी आ गई और मेरे शरीर के अंगों को छूने लगी जैसे हेमा मेरे लौड़े ...