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मेरा गुप्त जीवन-92

यश देव

06 Mar 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन-92
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गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।

मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।

मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो! चूत चुदाई के तुम्हारे हुनर का तो उषा मैडम भी लोहा मान रही थी, वो कह रही थी कि यह लड़का इतनी छोटी उम्र में ही एक काफी बढ़िया चुदाई करता है। उषा मैडम के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?मैं बोला- बहुत ही सुन्दर लेडी हैं वो लेकिन किस्मत की मारी हैं। बेचारी को इस भरी जवानी में पति छोड़ गया और उनको यौन सुख से वंचित कर गया! बहुत बुरा हुआ उनके साथ।

मैडम बोली- तुम उनकी कुछ मदद कर सकते हो क्या?मैं बोला- कैसी मदद मैडम जी?मैडम बोली- वही चुदाई वाली मदद! क्या तुम उनके घर जाकर चोद सकते हो जब वो चाहें या फिर या जब तुम फ्री हो?मैं भी खुश होकर बोला- क्यों नहीं मैडम, वो खुद इतनी सुन्दर हैं कि कोई भी मर्द उनके लिए तैयार हो जाएगा।मैडम बोली- तो ठीक है, वो कल कॉलेज में तुमसे मिल कर बात कर लेगी और प्लीज तुम हम दोनों के साथ सम्बन्ध का ज़िक्र किसी से न करना, हमारी इज़्ज़त का सवाल है।

कम्मो बोली- मैडम, छोटे मालिक ने जब यह चोदम चुदाई का कार्यक्रम मेरे साथ मिल कर शुरू किया था, तो मैंने इनके दिमाग में यह बात कूट कूट कर डाल दी थी कि इस काम के बारे में किसी से भी कभी कोई ज़िक्र ना करना वरना हम सब मुश्किल में आ जाएंगे और मुझको यह फखर है कि इन्होंने आज तक कभी किसी दूसरे को कुछ भी नहीं बताया! आप निश्चिंत रहें।मैडम बोली- थैंक्स सोमू और कम्मो। अब बस या अभी और है?

कम्मो बोली- मैं चाहती हूँ एक बार और इनसे चुदवा लीजिए ताकि किसी तरह की भी शंका या शक की गुंजाईश ना रहे!मैडम खुश होकर बोली- ठीक कह रही हो पर क्या सोमू कर लेगा दुबारा इतनी जल्दी?मैं और कम्मो हंस पड़े और तब कम्मो बोली- मैडम जी आप इनके लंड को देखिये तो सही? छुइये तो सही?चखिए तो सही!

मैडम ने मेरे लंड को देखा और हैरान रह गई कि वो तो वैसे ही खड़ा था और हवा में लहलहा रहा था!कम्मो बोली- अब आप घोड़ी बन जाएँ तो छोटे मालिक आपको इस पोज़ में भी चोद देते हैं क्यूंकि इस पोज़ में गर्भ ठहरने की अधिक संभावना रहती है!कम्मो ने मैडम को घोड़ी बना दिया और मुझको कहा कि घोड़ी चढ़ जाऊँ।

घोड़ी चढ़ने से पहले मैंने घोड़ी की तैयारी भी देखनी ज़रूरी समझी और उनकी चूत में हाथ लगा कर देखा, वो फिर काफी गीली हो चुकी थी, मैं जान गया कि घोड़ी भागने के लिए पूरी तरह से तैयार है।फिर मैंने मैडम के पीछे खड़ा होकर अपना सख्त लंड उनकी चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया।

अब मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर और बाहर जाने का सिलसिला बना लिया, धीरे से अंदर और फिर धीरे से बाहर और जो अंदर जाता है वो बाहर तो आता ही है, लेकिन कोशिश यह होनी चाहिए की लौड़े का सिर्फ आगे का किनारा ही अंदर रहना चाहिए और बाकी लंड ठंडी हवा खाकर फिर वापस अंदर जाना चाहिए।इस क्रम को पूरी तरह से पालन करने से औरत का मज़ा दुगना हो जाता है क्यूंकि वो इस इंतज़ार में रहती है कि जो पूरा बाहर गया क्या वो अंदर आएगा और कितना आएगा।

मैं हाथ से मैडम की भग को भी सहला रहा था और मेरे हाथ कभी मैडम के मोटे मुम्मों को और उनकी चूचियों को भी सहला रहे थे।लंड की हल्की स्पीड को जारी रखते हुए मैं अब पूरा लंड अंदर डाल कर उसको अंदर ही अंदर ही घुमा रहा था जिससे मुझको गर्भाशय के मुंह को ढूंढने में आसानी रहे।

अब कम्मो ने मुझको इशारा किया कि चुदाई की स्पीड तेज़ करूँ तो मैंने हाथों से मैडम के चूतड़ों को थपकी देनी शुरू कर दी और साथ ही धक्कों की स्पीड भी तेज़ कर दी और इसका मैडम की चूत ने सहर्ष स्वागत किया और वो भी वापसी धक्कों का जवाब देने लगी।

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मेरे लंड को अब मैडम की चूत में एक ख़ास हलचल महसूस हुई जिसके कारण मैं समझ गया कि मैडम छूटने के कगार पर हैं और मैंने अब फुल स्पीड पर धक्के मारने शुरू कर दिए।

लंड की तेज़ स्पीड मैडम की चूत बर्दाश्त नहीं कर सकी और जल्दी ही उसने हथियार डाल दिए और एक ज़ोर की कंपकंपी मैडम के सारे शरीर में हुई और वो नीचे लेटने के लिए जैसे ही झुकी मैंने उसके चूतड़ों को अपने हाथों में ले लिया और उसको वैसे ही घोड़ी बने रहने का इशारा किया।

अब मैंने अंधाधुंध स्पीड से मैडम को चोदना शुरू किया ताकि उनकी चूत में मेरा भी छूट जाए और मेरा वीर्य उनके गर्भाशय के अंदर या फिर उसके मुंह पर छूटे।इंजन स्पीड से मेरी चुदाई के कारण मैं जल्दी ही मैडम को दुबारा छुटाने के लिए प्रेरित करने लगा और फिर थोड़ी देर में हम दोनों का एक साथ स्खलन हुआ और कम्मो ने झट से मैडम की चूत के नीचे मोटे तकिये लगा दिए और उनके चूतड़ों को भी मैंने कस कर पकड़ लिया ताकि वो नीचे लेट ना सकें।

यह सारा खेल कम्मो का ही बनाया हुआ था और वो ही जानती थी कि इसका कितना लाभ था गर्भ धारण करने में!कम्मो के इशारे से मैंने अपना लंड मैडम की चूत से निकाला और नीचे फर्श पर आ गया।

मेरा लंड अभी भी हवा में लहलहा रहा था मैं चुपके से कम्मो के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड में अपना लंड डालने की कोशिश करने लगा लेकिन वो तो साड़ी पहने थी तो वो उसकी साड़ी के बाहर से गांड को रगड़ा मारने लगा।थोड़ी देर बाद कम्मो ने मैडम को उठने दिया और उनकी चूत पर तौलिया रख दिया ताकि वीर्य बाहर ना निकले और अब उनको पलंग पर सीधा लिटा दिया।

कुछ समय बाद हम सब कपड़े पहन कर बैठक में आकर बैठ गए और कम्मो ने पहले मैडम को बादाम वाला खास दूध पिलाया और मुझ को कोकाकोला दिया और स्वयं भी वह पीने लगी।

कुछ देर बाद कम्मो ने मैडम को कहा- आज आप अपने हस्बैंड से भी सेक्स कर लेना ताकि उनको यह शक न रहे कि यह बच्चा किसी और का है। कर पाएँगी उनसे सेक्स?मैडम थोड़ा मुंह बना कर बोली- उनको सेक्स के लिए तैयार करना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि उनका सेक्स का मन ही नहीं करता यही तो प्रॉब्लम है!कम्मो बोली- मैं आपको एक तरीका बताती हूँ जिसके बाद वो स्वयं ही आपके पीछे सेक्स के लिए भागेंगे।

कम्मो के इशारे पर मैं वहाँ से उठ गया और कम्मो उनको कुछ खुसर फुसर में समझाती रही और उनको दो दिन के बाद आने का भी याद कराया।थोड़ी देर बाद मैडम मुझको और कम्मो को थैंक्स कर के अपनी कार में वापस चल पड़ी।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 144
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भाग 7
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भाग 10
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भाग 12
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भाग 30
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भाग 52
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भाग 62
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भाग 66
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भाग 96
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भाग 97
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भाग 102
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भाग 104
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भाग 105
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भाग 109
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सोनाली

2 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

गौरव कहानी

3 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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