दो औरतों और एक जवान लड़की को चोदना कोई खाला जी का खेल नहीं है यह मुझको उस दिन महसूस हुआ।इसी कारण सुबह मेरी नींद टाइम पर नहीं खुली और मुझको पूनम ने ही आकर जगाया और जल्दी से मैं मुंह हाथ धोकर चलने के लिए तैयार हो गया।पूनम ने ही मेरा बिखरा सामान बक्से में डाला और जल्दी से हम दोनों होटल के रेस्तराँ में पहुँच गए जहाँ सब नाश्ता कर रहे थे।नाश्ता खत्म करने के बाद हम सब बस में बैठने के लिए चल पड़े।
क्यूंकि मैं फिर रेनू के साथ सबको बस में बैठाने में लगा था तो सबसे आखिर में बस में चढ़ा और इसी कारण मुझको लास्ट की सीट मिली।वो 2 वाली सीट थी, जब मैं वहाँ बैठा तो मेरे साथ वाली सीट पर एक लड़की बैठी हुई थी।मैंने उसकी तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया और उस खाली सीट पर बैठ गया।आगे बैठी हुई मेरे ग्रुप की लड़कियाँ मेरी तरफ देख रहीं थी और इशारे कर रहीं थी कि मैं उनकी सीट पर आ जाऊँ लेकिन मैंने मना कर दिया।
बस जब शहर के बाहर निकल गई तो मैंने साथ वाली लड़की की तरफ देखा। लड़की का रंग सांवला था लेकिन नयन नक्श गज़ब के थे और शरीर भी काफी भरा पूरा था।वो भी अपनी आँखों की कोर से मुझको देख रही थी।मैंने उसको हेलो किया और उसने भी बड़ी सुरीली आवाज़ में मुझको जवाब दिया।
मैं बोला- मेरा नाम सोमू है और आपका नाम क्या है?लड़की बोली- मेरा नाम जेनी है, मैं इंटर के दूसरे साल में हूँ, आप कौन सी क्लास में हैं?मैं बोला- मैं इंटर के फर्स्ट ईयर में हूँ लेकिन मैंने आपको कभी कॉलेज में पहले देखा नहीं?जेनी बोली- मैं कुछ दिन पहले ही कॉलेज में आई हूँ, उससे पहले मैं अल्मोड़ा में पढ़ती थी।मैं बोला- आपसे मिल कर बड़ी ख़ुशी हुई।
बातों के दौरान दो बार उसका हाथ मेरी जांघों पर लगा और एक बार मेरे हाथ से भी टकराया।मैं रात को देर से सोया था, थोड़ी नींद लग रही थी, मैं आँखें बंद कर के बैठ गया लेकिन 5-10 मिन्ट में मुझको ऐसा लगा कि कोई हाथ मेरी जांघों के ऊपर आ गया है और धीरे धीरे वो मेरी जांघों पर रेंग रहा है।हल्के से आँख खोल कर देखा कि तो जेनी ने अपने ऊपर एक हल्की सी शाल कर रखी और उसका थोड़ा हिस्सा मेरी जांघों पर भी आ रहा था।वहीं से शायद उसका हाथ मेरी जांघों पर चल रहा था।
मैंने भी उसकी तरफ देखा तो वो एक प्यारी सी मुस्कान बिखेर रही थी लेकिन उसने अपना हाथ नहीं हटाया था।मैं भी उसकी मर्ज़ी समझ गया था और बस एक नज़र डाली सब ऊंघ रहे थे सो मैंने भी सब क्लियर देख कर अपना हाथ उसकी गोद में शाल के नीचे रख दिया और उसने भी अपना दायाँ हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया।
उसका बायाँ हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लौड़े पर पड़ा था और उसको हल्के से सहला रहा था और अब मैंने भी अपना हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से उसके चूत पर रख दिया था।जेनी ने अपने बाएं हाथ से मेरी पैंट खोलने की कोशिश करने लगी थी और मैंने उसकी मदद के लिए खुद ही पैंट की ज़िप खोल दी और अपना खड़ा लौड़ा बाहर निकाल दिया ताकि जेनी को कोई दिक्क्त न हो।
जेनी ने जैसे ही मेरे खड़े लौड़े पर हाथ रखा तो उसको एक झटका लगा और उसने झट से हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मेरे हाथ ने उसको रोक दिया और मेरा दायाँ हाथ उसकी साड़ी को ऊपर करने की कोशिश करने लगा और फिर जेनी ने स्वयं ही अपनी साड़ी का एक कोना ऊपर कर दिया और मेरे हाथ को अपनी चूत पर रख दिया।
बालों से भरी हुई चूत पर इस तरह हाथ रखने से मुझको भी एक अजीब सी झनझनाहट हुई लेकिन मैंने भी हिम्मत करके हाथ को चूत पर रखे रखा और उधर वह मेरे लौड़े को अब अपने हाथ में लेकर उसके साथ खेलने लगी।
जब मैंने ऊँगली जेनी की चूत के अंदर डालने की कोशिश की तो वो अंदर नहीं जा पा रही थी क्यूंकि उसकी चूत उसके चूतड़ों के नीचे आ रही थी और इसी कारण वहाँ ऊँगली नहीं जा पा रही थी तब जेनी ने मेरी हेल्प के लिए अपने चूतड़ों को सीट में आगे की तरफ खिसका लिया।
मेरी प्रेमिका और मेरी अधूरी मोहब्बत- 1
मैंने जैसे ही जेनी की चूत में ऊँगली डाली वहाँ मुझको काफी गीलापन मिला।जेनी भी अब बेधड़क मेरे लंड को ऊपर नीचे करके मुठी मारने की कोशिश कर रही थी जिसका उसको काफी आनन्द आ रहा था और मुझको भी कोई कम मज़ा नहीं आ रहा था।
थोड़ी देर कोशिश करने के बाद जेनी ने मेरे कान में कहा- सोमू, क्या मैं तुम्हारे लंड को चूस सकती हूँ?मैं बोला- मुझको कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन तुम अपना देख लो कोई देख न ले तुमको?वो बोली- तुम अपनी सीट में आगे हो जाना न सो किसी को दिखाई नहीं देगा।मैं बोला- ठीक है कोशिश कर देखो।
वो धीरे से सीट के नीचे की तरफ बढ़ी और मैं भी थोड़ा उसकी तरफ मुड़ गया और उसने अपनी शाल अपने सर पर कर ली और मेरे और अपने को पूरा ढक लिया।मैंने भी फुसफुसा कर कहा- ठीक है, शुरू हो जाओ।उसने नीचे पहुँच कर मेरे लौड़े को मुंह में ले लिया और उसको आहिस्ता से लपालप चूसने लगी।
उसको बहुत ही आनंद आ रहा था लेकिन मुझको ज़्यादा फरक नहीं पड़ रहा था लेकिन मेरे हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके मुम्मों के साथ खेल रहे थे।अच्छे सॉलिड मुम्मे थे और ब्लाउज के बाहर से ही बड़े सुंदर लग रहे थे, जेनी ने थोड़ी देर लंड को चूसने के बाद पूछा कि और या बस मैंने उसको इशारा किया कि बस करो और ऊपर आ जाओ।
भग और मुम्मों के साथ खेल में उसकी जांघें मेरे हाथ को अपने बीच में दबाने और खोलने लगी, थोड़ी देर और भग मसली तो जेनी एक कंपकंपी के साथ झड़ गई और मैंने झट से अपना रुमाल उसको दिया, उसने वो अपनी चूत के ऊपर रख लिया जिससे उसकी चूत का गीलापन उसकी साड़ी तक नहीं पहंच पाया और सारा का सारा रुमाल में समा गया।
मैंने अपना रुमाल वापस माँगा तो जेनी कहने लगी कि वो आगरा में इसको धोकर वापस दे देगी लेकिन मैंने कहा- नहीं, तुम मुझको ऐसा ही दे दो, इसमें समाई तुम्हारी चूत की खुशबू मुझको सूंघनी है और धरोहर के रूप में रखनी है।उसने हँसते हुए कहा- यह लो अपना रुमाल… लेकिन तुम एक बहुत ही स्वीट लड़के हो।मैंने भी जवाब में कहा- जेनी, तुम भी एक बहुत ही आकर्षक लड़की हो। अच्छा यह बताओ, क्या तुम आगरा में हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहोगी?
फिर मैंने उसको अपने छोटे से ग्रुप के बारे में बताया और कहा कि हम सब बड़े उन्मुक्त तरीके से रहते हैं और खूब सेक्स भी करते हैं मिल कर।जेनी हैरानी से बोली- रियल सेक्स भी करते हो तुम लोग? मुझको विश्वास नहीं होता।मैं बोला- अगर तुम भी उन्मुक्त व्यवहार के पक्ष में हो तो हम तुम को अपने ग्रुप में शामिल कर सकते हैं लेकिन सेक्स ज़रूर करना पड़ेगा। बोलो तैयार हो?
जेनी पहले तो कुछ झिझकी फिर मान गई और बोली- सेक्स किसके साथ करना पड़ेगा?मैं बोला- पुरुष सिर्फ मैं हूँ, बाकी सब लड़कियाँ हैं तो कभी मेरे साथ और कभी आपस में! बोलो चलेगा?जेनी बोली- चलेगा अगर तुम्हारे साथ सेक्स करना है तो दौड़ेगा।
फिर हम दोनों आँखें बंद कर के थोड़ी देर के लिए झपकी लेने लगे।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com