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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 764 बार

मेरा गुप्त जीवन- 137

यश देव

28 Mar 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 137
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क्लास खत्म होने से पहले रति ने मुझको अपने घर आने का निमंत्रण दिया और यह भी कहा वो और उसके भैया भाभी मुझसे मिल कर बड़े खुश होंगे।बातों बातों में मैंने उस को बता दिया था कि इस कोठी में मैं अकेला ही अपने कुछ नौकर और नौकरानिओं के साथ रहता हूँ।

अगले दिन कॉलेज जाने से पहले मैं रति की कोठी के सामने रुका और यह देख कर हैरान हो गया कि रति वहाँ अपनी पुस्तकें लिए मेरा इंतज़ार कर रही थी।वो जल्दी से बाइक पर मेरे पीछे बैठ गई और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया जिसको महसूस करके मेरे शरीर में एक झुरझुरी से उठ गई।

रति वाकयी में इतनी खूबसूरत थी कि सड़क पर चलते अक्सर लोगों की निगाहें हम दोनों पर टिक जाती थी।एक दो बार बाइक में ब्रेक लगाने के कारण रति मेरी पीठ से अपने मुम्मों के साथ चिपक गई थी और उसके गोल और सॉलिड मुम्मों का दबाव मुझको बहुत ही आनंदित कर रहा था।

कॉलेज पहुंचे तो कुछ मनचले लड़के आवाज़ें कसने लगे- देखो क्या खूबसूरत जोड़ी है यार! ठाकुर को तो मज़ा ही आ गया!यह सुन कर रति थोड़ा शरमा जाती थी, ऐसा मैंने महसूस किया।

लंच में रति और मैं कैंटीन में इकट्ठे बैठ कर खाना खाने लगे और रति बोली- सोमू तुम मत कुछ लेना कैंटीन से मैं तुम्हारा भी खाना लाई हूँ।मैं बोला- वाह रति, क्या स्वादिष्ट खाना है तुम्हारा लेकिन मैं कोल्ड ड्रिंक्स ले आता हूँ!

रति का खाना वाकयी ही बड़ा स्वादिष्ट था और मैंने भी उसके खाने की जी भर कर तारीफ की।छुट्टी के बाद मैं फिर रति को बाइक पर बिठा कर उसकी कोठी तक छोड़ आया लेकिन जैसे ही वापस आने लगा, उसकी भाभी ने हमको देख लिया और ज़ोर डाल कर मुझको कोठी के अंदर ले गई।

रति की भाभी भी काफी सुन्दर थी, पूरा गठा हुआ शरीर और सारे शरीर के अंग एकदम सॉलिड लग रहे थे।बैठक में जाकर बैठे तो भाभी के कहने पर हम दोनों ने बड़ा ही स्वादिष्ट जलपान किया।

थोड़ी देर गपशप मारने के बाद ही बातों बातों में पता चला भाभी कि कोई संतान नहीं हुई अभी तक, हालाँकि विवाह हुए 5 साल हो गए थे।तब मैंने कहा- भाभी जी, अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात कहूँ?भाभी बोली- हाँ हाँ कहो, सोमू क्या कहना चाहते हो?मैं बोला- हमारी एक हाउसमेड है कम्मो, वो एक्सपर्ट दाई है और उसको इसके बारे में काफी ज्ञान है। आप चाहें तो उसको कंसल्ट कर सकती हैं, वो हमारी कोठी में ही रहती है।भाभी खुश होकर बोली- अच्छा, यह तो अच्छी बात बताई सोमू तुमने! उसको मैं कब मिल सकती हूँ?मैं बोला- रुकिये, मैं उसको अभी यहाँ बुला देता हूँ।

यह कह कर मैंने उनके फ़ोन से कम्मो से बात की और फ़ौरन साथ वाली कोठी में आने के लिए बोला।थोड़ी देर में कम्मो कोठी में आ गई और उसका सबसे परिचय करवाया और भाभी को लेकर कम्मो दूसरे कमरे में चली गई और मैं और रति वहीं बैठे रहे।

रति मुझको चोर नज़रों से देख रही थी यह मैंने भांप लिया था, मैं इस इंतज़ार में था कि देखो वो कब खुल के सामने आती है।थोड़ी देर बाद कम्मो भाभी के साथ वापस बैठक में आई और तब भाभी बोली- मैं कल दिन को तुम्हारे पास अपनी सारी रिपोर्ट्स ले कर आऊँगी और सब देख कर बताना क्या इलाज किया जा सकता है इसका।थोड़ी देर में हम दोनों बाइक पर बैठ कर अपनी कोठी आ गए।

अगले दिन फिर मैंने रति को उसकी कोठी से पिक किया और कॉलेज पहुँच गए और रास्ते में फिर वही झटकों का सिलसिला जारी रहा।कॉलेज में उस दिन कुछ ख़ास ही गहमा-गहमी थी, पूछने से पता चला कि कॉलेज में होने वाले सालाना फेस्टिवल में कुछ डांस और ड्रामों का आयोजन करने वाले है कॉलेज की सांस्कृतिक कार्यक्रम वाली सोसाइटी और जो छात्र इन कार्यकर्मो में भाग लेना चाहते हैं वो अपना नाम दे सकते हैं।

रति और मैं डांस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपना नाम दे आये।बाकी कई छात्रों ने अपने नाम दिए और उनमें से अच्छे कलाकारों का चयन करने वाली समिति ने अगले दिन छात्रों को चयन करना था।

अगले दिन चयन समिति ने रति को और मुझको डांस के लिए चुन लिया और छुट्टी के बाद प्रैक्टिस भी शुरू हो गई।कुछ अन्य छात्रों के डांस को देखने के बाद मुझको और रति को डांस करने के लिए कहा गया और एक बहुत ही थिरकते हुए गाने पर हम दोनों ने बहुत ही सुन्दर तालमेल के साथ डांस किया, हालाँकि यह पहला मौका था हम दोनों के एक साथ डांस करने का!

हमारे डांस के बाद डांस मैडम ने बड़ी ख़ुशी से तालियाँ बजाई और कहा- वाह रति और सोमू, तुमने तो ऐसा डांस किया जैसे कि तुम काफी अरसे से एक साथ डांस की प्रैक्टिस करते रहे हो!यह सुन कर रति एकदम शरमा गई और फिर डांस प्रैक्टिस खत्म होने के बाद हम दोनों बाइक पर बैठ कर रति की कोठी पर पहुंचे जहाँ पता चला कि रति की भाभी तो कम्मो से मिलने हमारी कोठी गई है तो मैं में रति को लेकर अपनी कोठी पहुंचा।कम्मो और रति की भाभी बैठक में बैठे बातें कर रहे थे।

पारो हम सब के लिए नाश्ता ले आई और हम सब ने एक साथ जलपान किया।फिर भाभी और रति अपने घर के लिए चल पड़ी और कम्मो ने भाभी को विश्वास दिलाया कि अगर ईश्वर ने चाहा तो आपकी मुराद ज़रूर पूरी होगी।

उनके जाने के बाद कम्मो बोली- यह रति तो बड़ी खूबसूरत है छोटे मालिक, बिल्कुल आपके लायक लड़की है। लेकिन एक प्रॉब्लम है?मैं बोला- क्या प्रॉब्लम है कम्मो?कम्मो बोली- भाभी बता रही थी कि रति काफी ठन्डे स्वभाव की है और उसको सेक्स के प्रति कोई लगाव नहीं है हालाँकि वो जवानी की देहलीज़ लांघ चुकी है।

मैं बोला- ऐसा तो कभी सुना नहीं था? क्या ऐसा होता है औरतों में?कम्मो बोली- हाँ, कई औरतों को यह बीमारी हो जाती है, जैसे तुम्हारी चाची को हर वक्त चुदवाने की इच्छा सताती थी, वैसे कई औरतों को चुदवाने की कोई इच्छा ही नहीं होती। इस कारण उनका विवाहित जीवन नरक बन जाता है और वो किसी बच्चे को जन्म भी नहीं दे सकती।

मैं बोला- तो क्या इस बीमारी का इलाज हो सकता है?कम्मो बोली- हाँ हाँ, हो सकता है, और मैंने भाभी से वादा किया है कि मैं रति का इलाज कर सकती हूँ अगर रति और भाभी राज़ी हों तो?मैं बोला- और भाभी की क्या प्रॉब्लम है?कम्मो हंस कर बोली- वही प्रॉब्लम है जो चाची की और कई दूसरी औरतों की थी जिनका आपने गर्भाधान किया!

मैं बोला- उफ़ फिर एक और गर्भाधान? नहीं अब मैं गर्भाधान करते हुए थक चुका हूँ, किसी और से करवा लें, मैं नहीं करूंगा।कम्मो थोड़ी गुस्से में बोली- वाह छोटे मालिक, यह कैसे संभव है? जब वो मेरे द्वारा अपना इलाज करवाएगी तो गर्भाधान करने वाला सांड भी तो मुझको लाकर देना पड़ेगा न? और सोचो इस चक्कर में आपको नई नकोर चूत को भी चोदने का मौका मिलेगा।

मैं बोला- वह कैसे?कम्मो बोली- अगर रति का इलाज भी मुझसे करवाती है भाभी, तो सोचो उसकी चूत का ट्रायल चुदास भी तो आपको करनी पड़ेगी।मैं अब हँसते हुए बोला- कम्मो यार, तुम भी पूरी घाघ औरत हो? घेर घार कर मुझको बीच में ले ही आती हो!

कम्मो बोली- अच्छा सुनो, मैं एक प्लान बना रही हूँ जिसमें भाभी के साथ रति की चुदाई भी आप आसानी से कर सको!मैं बोला- रति की चुदाई ज़रा मुश्किल लग रही है क्यूंकि वो बहुत ही सुलझी हुई लड़की है और वो आसानी से चुदाई के लिए तैयार नहीं होने वाली।कम्मो बोली- वो आप मुझ पर छोड़ दो, मैं किसी तरह से दोनों को एक साथ चोदने का बहाना ढूंढ लूंगी।

ये बातें करते हुए हम दोनों मेरे बैडरूम में आ गए और क्यूंकि चुदाई की बातें सुन कर मैं काफी गरम हो चुका था तो मैंने कम्मो को पकड़ लिया और उसकी साड़ी ऊपर करके पीछे से चोदने लगा।वो भी काफी गीली हो चुकी थी और हम दोनों बड़े मज़े से एक दूसरे को चोद कर मज़ा देने लगे।

चुदाई के दौरान मुझ को लगा कि कम्मो की चूत सिकुड़ और खुल रही थी जैसे दूध धोने की प्रक्रिया कर रही हो, ऐसा पहले उसने कभी नहीं किया था और मुझको लगा कि यह क्रिया उसने अभी कुछ समय पहले ही सीखी होगी।लेकिन इस जुगल बंदी से मुझको बड़ा ही मज़ा आ रहा था और मैंने भी सर फ़ेंक कर चुदाई शुरू कर दी और कुछ ही धक्कों में कम्मो का पानी छूट गया, अब मैंने भी पूरे जोश से चोदते हुए अपना वीर्य कम्मो की चूत की गहराई में छोड़ दिया।

यह देख कर कम्मो थोड़ी हैरान हो गई क्यूंकि मेरा छूटना और वो भी उसकी चूत के अंदर बहुत ही कम बार हुआ होगा।लेकिन वो फ़ौरन उठी और बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद चूत को धो पौंछ कर वापस आई, आते ही बोली – यह क्या किया छोटे मालिक? मैं फंस जाती ना अगर अभी तुम्हारा वीर्य साफ़ नहीं किया होता?मैं घबरा कर बोला- सॉरी कम्मो डार्लिंग, वो क्या है, मुझ से रहा नहीं गया क्यूंकि बहुत दिनों से छुटाया नहीं था ना!

कम्मो हँसते हुए बोली- जाने दो छोटे मालिक, कहीं ऐसे ही रति की चूत में ना छूटा देना, नहीं तो वो बेचारी फंस जायेगी।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
r

ri

2 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

दीपू कुशवाहा

3 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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