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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 864 बार

चूत एक पहेली -1

पिंकी सेन

17 Dec 2025 को प्रकाशित

चूत एक पहेली -1
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हैलो दोस्तो..मैंने सोचा था कि अब ‘बहन का लौड़ा’ कहानी ख़त्म हो गई है.. तो थोड़ा आराम करूँगी.. मगर आप सभी के इतने ईमेल आ रहे हैं कि नई कहानी लिखो.. तो मुझे अपने दोस्तों की बात माननी ही पड़ी.. तो लीजिए.. आज मैं फिर आ गई हूँ.. आपके लिए एक नई कहानी लेकर..

दोस्तो, अबकी बार की कहानी थोड़ी अजीब सी है या यूँ कहो कि अजीब ढंग से आगे बढ़ेगी..तो कहानी को पढ़िए.. आप खुद जान जाएंगे।

काली अंधेरी रात में बारिश जोरों से हो रही थी और एक कार स्पीड से सड़क पर दौड़ रही थी, यह करीब रात के 10 बजे की बात होगी।

पुनीत- अरे यार धीरे चला.. मरवाएगा क्या.. देख सड़क पर पानी ही पानी फैला है.. कोई सामने आ गया तो ब्रेक भी नहीं लगेगा।

दोस्तो, यह है पुनीत खन्ना.. उम्र 20 साल रंग गोरा.. कद 5’9″.. स्लिम बॉडी और बेहद अमीर दीपक खन्ना जो दिल्ली के बड़े प्रॉपर्टी डीलर हैं.. उनका बेटा है। पैसों के बल पर इसमें थोड़ा बिगाड़ आ गया है.. या देसी भाषा में कहो.. तो पक्का चोदू हो गया है ये.. बस लड़की देखी नहीं कि नियत खराब..

दोस्तो, अभी इतना काफ़ी है.. इसकी बाकी जानकारी कहानी के साथ साथ दे दूँगी।

रॉनी- अबे डर गया तू.. साले फट्टू.. कुछ नहीं होगा.. गाड़ी मैं चला रहा हूँ.. रॉनी दि रॉकस्टार.. तू बस देख..

यह है रॉनी खन्ना.. कहने को तो यह पुनीत का चचेरा भाई है.. मगर दोनों रहते एकदम दोस्त की तरह हैं। वैसे तो रॉनी ठीक है.. मगर पुनीत ने इसको भी अपने रंग में ढाल लिया है। कभी-कभी ये भी पुनीत के साथ रंगरेलियाँ मना लेता है। वैसे रॉनी के पापा के देहांत के बाद दीपक खन्ना ने ही इसको संभाला है। अब ये दोनों साथ ही रहते हैं। बाकी के बारे में बाद में बता दूँगी। इसकी भी उम्र लगभग 20 साल की ही है और बाकी सब भी पुनीत जैसा ही है।

चलिए आगे चलते हैं..

पुनीत- अरे मेरे भाई.. डर मरने का नहीं लग रहा.. अगर एक्सीडेंट के बाद हम बच भी गए.. तो लूले लंगड़े हो जाएँगे.. अभी तो हमने ठीक से अय्याशी भी नहीं की है..रॉनी- अबे कुछ नहीं होगा.. हमारे पास इतने पैसे हैं कि लूले हो भी गए तो भी अय्याशी में फ़र्क नहीं आने वाला।पुनीत- अरे रुक-रुक.. वो देख.. उधर क्या तमाशा हो रहा है?

सड़क से कुछ दूर बिजली की गड़गड़ाहट के साथ पुनीत को कुछ अजीब सा दिखा तो उसने रॉनी को रुकने को कहा।रॉनी ने गाड़ी को धीरे किया और रोका.. तब तक वो कुछ आगे निकल आए थे।पुनीत के कहने पर रॉनी ने गाड़ी वापस पीछे ली।

पुनीत- बस बस.. यहीं रोक यार.. वहाँ कुछ लोग जमा हैं और शायद कोई लड़की भी है.. मुझे हल्का सा कुछ दिखा है।रॉनी- भाई.. तू पक्का लड़कीबाज है.. अंधेरे में भी लड़की ताड़ ली.. चल देखते हैं क्या मामला है।

दोनों ने रेन कोट पहने हुए थे.. तो आराम से गाड़ी से बाहर निकल गए और उन लोगों के पास पहुँच गए।जब वो पास को गए.. तो वहाँ कुछ आदमी और एक लड़की खड़ी थी और पास में एक औरत नीचे लेती हुई कराह रही थी.. जिसके सर से खून निकल रहा था।

पुनीत- अरे क्या हुआ भाई.. ऐसी तूफानी रात में यहाँ क्यों खड़े हो? और इस औरत को क्या हुआ है?

गाँव वाला- बाबूजी ये बेचारी जा रही थी.. कि पेड़ की डाल टूट कर इसके सर पर गिर गई.. ज़ख्मी हो गई है बेचारी.. इसको अस्पताल तक पहुँचा दो.. बड़ी मेहरबानी होगी आपकी..रॉनी- अरे ये तो बहुत ज़ख्मी है.. तो अब तक तुम क्या कर रहे हो.. इसको लेकर क्यों नहीं गए और इतनी रात को यहाँ खड़े-खड़े क्या कर रहे हो?

गाँव वाला- अरे बाबूजी अभी-अभी ही तो ये सब हुआ है.. हम सब पास के गाँव से आ रहे थे.. तो देखते ही देखते बस ये सब हो गया।पुनीत- पैदल ही आ रहे थे क्या.. और तुम्हारा गाँव कहाँ है?मुनिया- बाबूजी.. बस 2 कोस पर ही हमारा गाँव है.. ले चलो ना.. आपका बड़ा अहसान होगा.. ये मेरी माई है.. भगवान आपका भला करेगा..

इतनी देर से वो लड़की पेड़ की आड़ में खड़ी थी.. तो दोनों का ध्यान उस पर नहीं गया था.. मगर जब वो सामने आई.. तो पुनीत तो बस उसको देखता ही रह गया।

वो करीब 18 साल की एक बड़ी ही खूबसूरत सी लड़की थी.. बड़ी-बड़ी सी कजरारी आँखें और लंबे बाल.. बारिश में भीगे हुए उसके कुर्ते से उसके 30″ के मम्मे साफ-साफ झलक रहे थे। अन्दर शायद उसने काली ब्रा पहनी हुई थी जिसकी पट्टी साफ़ नज़र आ रही थी।पतली सी कमर के साथ 30″ की मादक और उठी हुई गाण्ड.. जो भीगने के कारण और भी ज़्यादा मस्त लग रही थी।

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पुनीत- ओह.. चलो देर क्यों करते हो.. इसको गाड़ी तक ले आओ..पुनीत और रॉनी की नजरें आपस में मिलीं और एक इशारे में दोनों ने बात की।उस औरत को पीछे की सीट पर लेटा प्रिया.. उसी के साथ में मुनिया भी बैठ गई।

रॉनी- देखो भाइयो.. यहाँ बस और किसी के बैठने की जगह नहीं है.. तुम सब पैदल ही आ जाओ.. हम इसको लेकर जाते हैं.. ठीक है ना..

सबने ‘हाँ’ कह दी तो रॉनी ने गाड़ी आगे बढ़ा दी।रॉनी- तेरा नाम क्या है?मुनिया- मेरा नाम मुनिया है बाबूजी..पुनीत- अरे वाह.. तेरा नाम तो बड़ा प्यारा है.. मुनिया.. वैसे कितनी साल की हो गई हो? स्कूल वगैरह जाती है या नहीं?

मुनिया- जी.. मैं 18 साल की हो गई हूँ स्कूल कहाँ जाऊँगी बाबूजी.. बस पहले पहल दो जमात तक गई.. उसके बाद बापू चल बसे.. तो माई अकेली रह गई। अब घर में खाने के लिए मुझे भी माई के साथ काम पर जाना पड़ा।रॉनी- अरे.. अरे.. सुनकर बड़ा दुःख हुआ वैसे तू काम क्या करती है?मुनिया- जी बाबूजी.. घर का सारा काम जानती हूँ.. खाना बनाना झाड़ू-फटका.. सफाई.. सब कुछ..

पुनीत- अच्छा कितने पैसे कमा लेती है दिन भर में?मुनिया- दिन के कहाँ बाबूजी.. किसी घर से 400 तो किसी से 500 महीने के मिल जाते हैं।रॉनी- इतना काम.. अरे साले छोड़ हैं सब.. इससे अच्छा तो शहर में मिलता है.. महीने के 3000 तक मिल जाते हैं रहना-खाना.. कपड़े.. वो सब अलग से..

मुनिया- सच्ची में इतना मिलता है? हमें भी कहीं लगवा दो ना बाबूजी..रॉनी- भाई अभी ये 18 की है.. अब आप ही संभालो.. आपकी तो निकल पड़ी..रॉनी ने ये बात धीरे से अंग्रेजी में कही थी।

पुनीत- अरे लगवा तो दूँ.. मगर शहर में एक ही घर में काम करना होगा.. वहीं रहना होगा.. हाँ.. महीने के महीने पगार घर भेज देना और दूसरी बात सेठ लोगों के हाथ पाँव भी रात को दबाने होंगे.. तू ये सब कर लेगी?

मुनिया- अरे बाबूजी.. मैं शहर में रह लूँगी.. और हाथ-पाँव तो क्या.. मैं पूरे बदन की ऐसी मालिश करना जानती हूँ कि सेठ खुश हो जाएगा.. बस आपकी बड़ी दया होगी.. मुझे काम पर लगवा ही दो..रॉनी- ले भाई पुनीत.. इसको तो मालिश भी आती है.. अब तो इसको ‘काम’ पर लगाना ही पड़ेगा..

दोस्तो, ये बस बातें करते रहे और गाड़ी चलती रही.. थोड़ी दूर जाने के बाद सड़क से दाहिनी तरफ़ मुनिया ने बताया कि वो सामने उसका गाँव है।तो बस रॉनी ने गाड़ी उसी तरफ़ बढ़ा दी और वहाँ जाकर गाँव के अस्पताल में उसकी माँ को ले गए.. जहाँ डॉक्टर ने अपना काम शुरू कर प्रिया और मुनिया इन दोनों के साथ बाहर बैठी रही..

यहाँ बल्ब की रोशनी में मुनिया के जिस्म की चमक दुगुनी हो गई थी.. जिसे देख कर पुनीत का लंड पैन्ट में अकड़ने लगा था।

क्यों दोस्तों क्या हुआ.. शुरूआत में ही मज़ा लेना चाहते हो क्या.. अरे यह चिंकी सेन की कहानी है.. इतनी आसानी से कुछ नहीं होगा.. और दूसरी बात.. मेरी कहानी में बस यही 3 किरदार.. नहीं.. नहीं.. अभी तो शुरूआत है.. बहुत सारे किरदार आएँगे और जाएँगे.. अबकी बार आपको चक्कर ना आ जाए तो कहना..

दोस्तो, यहाँ के सीन को अभी रोकती हूँ और दूसरे सीन की शुरूआत करती हूँ.. ताकि और भी किरदार आपके सामने आ जाएं.. तो चलिए आज ही की रात इसी वक़्त पर सीधे आपको दिल्ली ले चलती हूँ।

कमरे में दो लड़कियाँ बैठी हुई आपस में बात कर रही थीं और दरवाजे के बाहर के होल पर कोई नजरें गड़ाए उनको देख रहा था।चलो अब ‘ये लड़कियाँ कौन हैं…’ पहले इनके बारे में जान लेते हैं।इसमें से एक का नाम है नेहा और दूसरी का काजल.. अब इनकी आगे की जानकारी भी ले लीजिए..

नेहा इसकी उम्र है 21 साल.. रंग गेहुँआ.. कद ठीक-ठाक.. चूचे 34″ के एकदम उठे हुए.. बलखाती कमर 30″ की और एकदम गोल गाण्ड.. बाहर को निकली हुई थी 34″ की..यह कौन है.. किसकी बेटी है.. यह बाद में बता दूँगी। अभी बस इतना काफ़ी है।

और दूसरी काजल की उम्र है 18 साल.. रंग दूध जैसा सफेद.. बला की खूबसूरत.. इसको देख कर कई लड़कों की पैन्ट में तंबू बन जाता है क्योंकि इसका फिगर ही ऐसा है 32″ के नुकीले मम्मों को देखें जरा.. ऐसे नोकदार.. जिसे देसी भाषा में खड़ी चूची भी कहते हैं। एकदम हिरनी जैसी पतली कमर और एटम बम्ब जैसी 32″ की मुलायम मतवाली गाण्ड.. जब यह चलती है.. तो रास्ते में लोग बस यही कहते हैं हाय.. कभी ये पलड़ा ऊपर.. तो कभी वो पलड़ा ऊपर.. आप मेरे कहने का मतलब समझ गए ना.. चलो अब आगे तमाशा देखते हैं।

दोस्तो, ज़्यादा सोचो मत.. मैं बता देती हूँ यह एक गर्ल्स हॉस्टल का सीन है।

आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

जयवीर सिंह बघेला

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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