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चूत एक पहेली -3

पिंकी सेन

04 Aug 2014 को प्रकाशित

चूत एक पहेली -3
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साया- नहीं पूजा डार्लिंग.. कुछ बातें छुपी रहें.. यही बेहतर होता है। अब मैं जाता हूँ.. तुम भी जाओ.. नहीं तो किसी को पता लग जाएगा..इतना कहकर वो खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहनने लगा।

पूजा- अरे अब तो तुमने मुझे चोद कर अपना बना लिया.. तो ये छुपा-छुपी किस लिए.. बता न.. कौन हो.. और कभी मुझे तुम्हारी जरूरत होगी तो?साया- पूजा डार्लिंग.. मैंने कहा ना.. यह राज़ की बात है और जब तुम्हें जरूरत होगी.. मैं खुद आ जाऊँगा.. तुम बस अपने कमरे के बाहर सफेद कपड़ा या कोई पेपर लगा देना.. ओके बाय जान..

अब आगे..

पूजा- ओके.. छुट्टियों के बाद मिलती हूँ.. क्योंकि कल शायद मैं चली जाऊँगी।

क्यों दोस्तो, अब यहीं रहोगे क्या.. अभी तो ऐसे बहुत सीन आने है.. तो चलो गाँव में चलते हैं वहाँ मुनिया का क्या हो रहा है।

मुनिया की माँ के मलहम-पट्टी होने के बाद दोनों ने उनको घर छोड़ा.. जहाँ मुनिया की माँ सरिता ने उनको बहुत धन्यवाद दिया।

रॉनी- अरे इसमें शुक्रिया की क्या बात है.. यह तो हमारा फर्ज़ था।मुनिया- माँ.. ये बाबूजी बता रहे थे कि शहर में काम के बहुत पैसे मिलते हैं।रॉनी और पुनीत ने मुनिया की माँ को भी अपनी बातों में ले लिया।सरिता- बेटा तुम्हारा भला होगा.. मुनिया को भी कहीं लगवा दो ना..

पुनीत- देखिए.. अभी तो हम यहाँ से कुछ दूर अपने फार्म हाउस पर जा रहे हैं कुछ दिन वहाँ रहेंगे.. उसके बाद वापस दिल्ली जाएँगे.. तब कहीं लगवा दूँगा।रॉनी- हाँ आंटी ये सही रहेगा.. अच्छा तो हम चलते हैं।

रॉनी जब खड़ा हुआ तो पुनीत ने उसे आँख से इशारा किया कि मुनिया का क्या करें?

रॉनी- आंटी हम कुछ दिन फार्म हाउस पर रहेंगे.. वहाँ के काम के लिए आप किसी को हमारे साथ भेज दो.. हम अच्छे पैसे दे देंगे।

सरिता- अरे बेटा कोई और क्यों.. मुनिया को ले जाओ.. जो ठीक लगे.. सो इसको दे देना।

पुनीत- अरे हाँ.. ये सही है ना.. कुछ दिनों की तो बात है.. वहाँ इसका काम भी देख लेंगे.. चलो मुनिया कपड़े बदल लो.. तुम पूरी भीगी हुई हो।मुनिया- जी बाबूजी.. अभी आई.. आप बैठो.. आपके लिए कुछ चाय-पानी लाऊँ?रॉनी- अरे नहीं नहीं.. बस तुम जल्दी करो.. देर हो रही है..।

मुनिया बड़ी खुश थी कि बड़े लोगों के यहाँ उसको काम मिल गया। वो दूसरे कमरे में कपड़े बदलने चली गई और कुछ ही देर में दूसरे कपड़े पहन कर एक पोटली लिए आ गई।रॉनी- अरे इसमें क्या है?मुनिया- वो बाबूजी अब वहाँ कितने दिन रहूंगी.. तो कुछ कपड़े लिए हैं।पुनीत- अच्छा किया.. ये लो आंटी ये 500 रुपये अपने पास रखो.. दवा बराबर लेती रहना और बाकी के पैसे मुनिया को दे देंगे।

सरिता तो 500 रुपये देख कर खुश हो गई।सरिता- अरे बेटा.. तुमने तो कहा कुछ दिन वहाँ रहोगे.. तो इतने पैसे क्यों दिए और बाद में और भी दोगे?रॉनी- अरे रख लो.. आंटी ये तो पेशगी है.. आगे ऐसे और नोट मुनिया को मिलेंगे.. हम खून चूसने वाले नहीं हैं काम का हक़ बराबर देते हैं।

इतना कहकर वो बाहर निकल गए.. मुनिया भी उनके पीछे चलने लगी.. तो सरिता ने उसका हाथ पकड़ लिया।

उन दोनों के बाहर जाने के बाद सरिता ने मुनिया से कहा- बहुत भले लोग हैं इनको किसी भी तरह की तकलीफ़ ना होने देना.. सब काम अच्छे से करना.. तेरे भाग खुल गए हैं बेटी.. जो ऐसे भले लोगों के यहाँ काम पर जा रही है.. तू बस इनको खुश रखना..पुनीत दरवाजे के पास ही खड़ा था.. उसको ये बात सुनाई दे गई तो उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई।

रॉनी और पुनीत गाड़ी में बैठ गए उनके पीछे मुनिया भी आ गई और पीछे बैठ गई। कार फिर से अपनी मंज़िल की और बढ़ने लगी।

पुनीत- क्यों मुनिया क्या कहा माँ ने तुझे?

मुनिया- कुछ नहीं बाबूजी बस काम समझा रही थीं कि दिल लगा कर सब काम करना.. आपको किसी तरह की तकलीफ़ ना हो.. आपको खुश रखूँ.. यही सब..रॉनी- अरे वाह.. तेरी माँ तो बड़ी समझदार हैं तेरे को बड़े अच्छे ढंग से समझाया और हमको क्या तकलीफ़ होगी.. तू बस पुनीत को खुश रखना.. तो समझ तेरी नौकरी पक्की हो जाएगी।मुनिया- हाँ बाबूजी कोशिश करूँगी।

वो तीनों बातें करते रहे और कुछ देर बाद गाड़ी एक बड़े से फार्म हाउस के अन्दर चली गई। गाड़ी से उतर कर वो अन्दर गए तो इतने बड़े घर को देख कर मुनिया की आँखें चकरा गईं।मुनिया- अरे बापरे बाबूजी इतना बड़ा घर?रॉनी- अरे डरती क्यों है.. तुझे बस हमारी सेवा करनी है.. बाकी काम के लिए तो यहाँ बहुत नौकर हैं।

उस फार्म में कुल 6 आदमी थे.. जो वहाँ की साफ-सफ़ाई खाने का बंदोबस्त आदि करते थे। वो सब इनके खास नौकर थे अक्सर पुनीत वहाँ लड़कियों के साथ आता और रंगरेलियाँ मनाता था.. जिसकी उनको आदत थी।पुनीत- चल मुनिया तू रॉनी के साथ अन्दर जा.. मैं अभी आता हूँ।

रॉनी उसको अन्दर ले गया और एक कमरा उसको दिखा दिया कि आज से वो यहाँ रहेगी और उसको ये भी समझा दिया कि यहाँ के बाकी लोगों से वो ज़्यादा बात ना करे।उधर पुनीत ने सबको समझा दिया कि क्या करना है।

पुनीत के जाने के बाद नौकर आपस में बात करने लगे कि बेचारी कहाँ इस वहशी के जाल में फँस गई.. अब ये इसको कच्चा खा जाएगा।

पुनीत सीधा रॉनी के पास गया और बिस्तर पर बैठ गया।रॉनी- क्यों भाई अब आगे का क्या प्लान है?पुनीत- प्लान क्या था.. चल बाहर निकाल.. इस ठंडे मौसम में ठंडी बहार और उसके बाद हॉट-गर्ल का मज़ा लेंगे।रॉनी- क्या बात है भाई.. इतनी जल्दी.. अरे अभी नई-नई है.. पहले आराम से उसको सिख़ाओ.. नहीं तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी।

पुनीत- अरे यार आज जबसे उसको देखा है.. साला लौड़ा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है।रॉनी- अरे मेरे यार वो कोई कॉलगर्ल नहीं.. जो तुरंत चुदने को रेडी हो जाएगी.. वो एक गाँव की सीधी-साधी लड़की है.. उसको धीरे-धीरे प्यार से पटाना होगा।पुनीत- रॉनी माय ब्रदर.. तुम मुझे नहीं जानते.. वो जितनी सीधी है.. मैं उतना ही टेढ़ा हूँ। अब तुम जल्दी से बीयर खोलो.. मेरा कब से गला सूख रहा है।

रॉनी- अरे भाई ये सलमान बनकर कहाँ जा रहे हो?पुनीत- तू यहाँ बैठ कर बियर का मज़ा ले.. मैं मुनिया से थोड़ी मालिश करवा के आता हूँ।रॉनी- अपनी मालिश ही करवाना.. कहीं उसकी मालिश ना कर देना हा हा हा..पुनीत- अब ये तो आकर ही बताऊँगा.. चल तू बियर पी.. मैं चला..

पुनीत वहाँ से निकल कर सीधा मुनिया के कमरे में पहुँच गया.. वो बिस्तर पर बस लेटी हुई सोच रही थी कि ऐसे आलीशान कमरे मैं वो कभी सोएगी.. ऐसा उसने सपने में भी नहीं सोचा था।पुनीत- अरे मुनिया.. दरवाजा लॉक क्यों नहीं किया.. ऐसे ही सो रही है..

मुनिया- नहीं बाबूजी.. वो मैं अभी सोई नहीं.. बस ऐसे ही लेटी हुई थी.. सोचा सोने के पहले बंद कर दूँगी।पुनीत- अच्छा किया.. तू सोई नहीं.. बारिस से मेरे पूरे बदन में दर्द हो गया है.. क्या तू ज़रा मेरी मालिश कर देगी?

मुनिया- अरे बाबूजी इसी लिए तो आपके साथ आई हूँ.. इसमें पूछने की क्या बात है.. आप यहाँ लेट जाओ.. मुझे थोड़ा सरसों का तेल चाहिए.. कहाँ मिलेगा?पुनीत- अरे तेल को जाने दे.. ऐसे ही दबा दे.. कल तेल भी मंगवा दूँगा..

पुनीत पेट के बल लेट गया और मुनिया उसके कंधे-कमर आदि को दबाने लगी।

मुनिया के छोटे-छोटे और मुलायम हाथों के स्पर्श से पुनीत के जिस्म में वासना की लहर दौड़ने लगी.. उसका लौड़ा तन गया.. तो कुछ देर बाद पुनीत सीधा लेट गया और मुनिया को पैर दबाने को कहा। अब पुनीत सीधा लेटा हुआ था और शॉर्ट्स में उसका लौड़ा तंबू बनाए हुए साफ दिख रहा था। मगर या तो मुनिया ये सब जानती नहीं थी.. या फिर उसने देख कर अनदेखा कर दिया।

मुनिया- क्यों बाबूजी.. कुछ आराम मिला आपको?पुनीत- आह्ह.. आराम कहाँ मिला.. दर्द अब ज़्यादा हो गया है.. लगता है जिस्म का सारा खून पैरों में आकर रुक गया है.. आह्ह.. थोड़ा ऊपर दबाओ.. यहाँ बहुत दर्द हो रहा है।मुनिया- अभी लो बाबूजी.. सारा दर्द निकाल दूँगी.. आप बस बताते जाओ.. कहाँ दर्द है?

पुनीत ने जाँघों में दर्द बता कर मुनिया को वहाँ दबाने को कहा और वो नादान बड़े प्यार से वहाँ दबाने लगी। अब उसका ध्यान पुनीत के खड़े लंड पर बार-बार जा रहा था.. मगर वो चुपचाप बस अपने काम में लगी हुई थी।

पुनीत- मुनिया मैंने तेरी माँ को जो 500 रुपये दिए.. वो बस पेशगी थी.. तू रोज मेरी मालिश करेगी.. तो दिन के काम के रोज 100 और रात की मालिश के 200 तुझे और दूँगा।

पुनीत की बात सुनकर मुनिया की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। इतने पैसे उसने कभी सपने में नहीं सोचे थे.. जो पुनीत उसको देने की बात कर रहा था।

हैलो दोस्तो.. क्या हुआ कहानी में बड़े खोए हुए हो.. मुझे याद ही नहीं करते.. कि मैं कहाँ हूँ।

अब मुनिया को क्या पता था कि पुनीत 200 रुपये में उसकी इज़्ज़त का सौदा कर रहा है। बेचारी उसकी बातों में आ गई.. आगे का हाल आप खुद ही देख लीजिए।

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. जो माँ को दिए.. वही बहुत हैं आप कुछ दिन ही तो यहाँ रहोगे।

पुनीत- नहीं मुनिया.. ये तेरा हक़ है.. तू बस अच्छे से मालिश करना और जैसा मैं कहूँ.. वैसा करती रहना.. फिर देख मैं तुझे हमेशा के लिए अपने पास काम पर रख लूँगा। तू दिन के 500 रुपये तक कमा लेगी। चल अब थोड़ा ऊपर दबा.. वहाँ दर्द ज़्यादा हो रहा है।

आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

चूत एक पहेली

कुल भाग: 50
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 14
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भाग 16
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 34
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भाग 36
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भाग 39
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भाग 42
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भाग 48
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भाग 49
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भाग 63
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भाग 64
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भाग 65
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भाग 71
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भाग 76
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भाग 77
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भाग 78
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भाग 79
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भाग 80
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भाग 81
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भाग 84
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भाग 85
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भाग 87
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भाग 93
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भाग 94
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

चाहत खन्ना

4 days ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

शिल्प मित्तल

1 week ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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