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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,042 बार

चूत एक पहेली -28

पिंकी सेन

08 Feb 2026 को प्रकाशित

चूत एक पहेली -28
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टोनी- नहीं भाई.. टोनी इतना कच्चा नहीं है.. मुझे पता था आप अगर भाई हो तो वहाँ रहोगे.. और हुआ भी वैसा ही.. उसके बाद भी मैंने ब्लू शर्ट वाली बात बोली ताकि पक्का कन्फर्म हो जाए और बस हो गई बात कन्फर्म.. हा हा हा..सन्नी- साला पक्का कुत्ता है तू.. बस फ़र्क इतना है उसकी नाक तेज होती है और तेरी आँख तेज है।टोनी- भाई कुत्ता नहीं.. अपुन बाज है.. जो दूर से भी शिकार को देख लेता है और आप तो बहुत पास थे मेरे..सन्नी- चल अब ये सब बातें बंद कर.. वहाँ क्या हुआ.. यह बता?

अब आगे..

टोनी ने वहाँ का सारा हाल बता प्रिया।सन्नी- अब आएगा मज़ा.. साला हमारे जाल में फँस गया।टोनी- भाई बुरा ना मानना.. मगर मैं जानना चाहूँगा कि वो वजह क्या है जिसके लिए आप ये सब कर रहे हो?सन्नी- वैसे तो तुझे बताना जरूरी नहीं है मगर आज मैं बहुत खुश हूँ इसलिए तुझे बता देता हूँ।टोनी- हाँ भाई अपुन को सुनना है..

सन्नी- मैंने तुझे झूठ कहा था कि काजल ने मुझे नामर्द कहा.. असली बात तो यह है कि मैं एक लड़की से सच्चा प्यार करने लगा था.. हम दोनों शादी करना चाहते थे.. मगर पुनीत की गंदी नज़र उस पर पड़ गई और वो उसे अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए बेताब हो गया।टोनी- ओह.. साला बहुत हरामी है।

सन्नी- हाँ टोनी.. अगर उस टाइम मुझे उसकी नीयत का पता लग जाता.. तो आज मेरा प्यार मेरे साथ होता.. मगर उस कुत्ते की वजह से मैं अकेला हो गया.. मिटा प्रिया उसने मेरी जान को तोड़ प्रिया.. उसने मेरे विश्वास को.. अब में उसे बताऊँगा कि उसकी हवस का अंत उसकी अपनी बहन की चूत पर होगा.. पहले तो सबके सामने साली को नंगा करूँगा.. उसके बाद उस कुत्ते को भी बहनचोद बन जाने पर मजबूर कर दूँगा.. उसके बाद उसकी हवस ख़त्म होगी और मेरा बदला पूरा होगा..

टोनी- भाई काजल को चोद कर उसकी हवस ख़त्म होने के बजाए बढ़ जाएगी.. वो चीज़ ही ऐसी है।सन्नी- नहीं टोनी.. काजल उसकी लास्ट शिकार होगी.. क्योंकि उसके बाद उसको इतना बदनाम कर दूँगा कि साला किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहेगा।टोनी- मगर भाई.. रॉनी का क्या होगा? वो भी तो साथ होगा.. उसको भी साथ बदनाम करोगे क्या?सन्नी- नहीं टोनी.. उससे मेरी कोई दुश्मनी नहीं है.. मगर एक पुरानी कहावत है.. कि गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है.. अगर वो बीच में टांग अड़ाएगा.. तो उसका भी यही अंजाम होगा.. क्योंकि अब मैं पीछे नहीं हटूँगा अपना बदला लेकर रहूँगा।

टोनी- अच्छा.. अब आगे क्या करना है?सन्नी- तुमने बहुत बड़ी ग़लती की जो आलोक और अनिल को यह राज़ बता प्रिया कहीं वो कुछ गड़बड़ ना कर दें।टोनी- नहीं भाई.. वो मेरे भरोसे के आदमी हैं वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे..

सन्नी- ओके ठीक है.. अभी उनके पास जाओ.. उनको समझाओ.. यह राज़ नहीं खुलना चाहिए.. आगे का प्लान मैं फ़ोन पर तुमको बता दूँगा।टोनी- ठीक है भाई.. वैसे भी आज तो उन दोनों की गाण्ड फटी हुई है.. वो तो अब सोचते रहेंगे कि क्या करें..सन्नी- नहीं वो कुछ नहीं सोचेंगे.. सीधे मुझे फ़ोन करेंगे.. वैसे अब तक उनका फ़ोन आ जाना चाहिए था.. लगता है मौका नहीं मिला होगा सालों को.. हा हा हा..

कुछ देर टोनी वहीं रहा.. उसके बाद सीधा अपने दोस्तों के पास आकर उनको अच्छी तरह सब समझा प्रिया कि आगे बहुत ध्यान से सब करना है।

दोस्तों आप सोच रहे होंगे.. शुरू में तो बहुत गर्म पार्ट आ रहे थे.. मैंने अब आपको ये कहाँ ट्विस्ट के चक्कर में फँसा प्रिया.. तो चलो आपकी शिकायत अभी दूर कर देते हैं।

उधर खाना खाने के बाद मुनिया ने माँ से कहा- मैं अर्जुन के साथ खेत पर जा रही हूँ.. जल्दी आ जाऊँगी।उसकी माँ ने उसे भेज प्रिया।

दोनों बातें करते हुए खेत पर पहुँच गए.. वहाँ एक कमरा बना हुआ था.. जहाँ एक चारपाई भी थी.. दोनों वहाँ जाकर उस पर बैठ गए..मुनिया- हाँ तो अर्जुन, अब सुना तू अपनी कहानी शहर में क्या काम करता है.. और कोई शहरी लड़की के चक्कर में तो नहीं पड़ गया ना?

अर्जुन- अरे नहीं रे.. तू भी ना कुछ भी बोल देती है.. मेरे पिता जी ने एक छोटी सी दुकान पर लगाया है.. बस सारा दिन वहीं रहता हूँ.. कभी कभार सेठ छुट्टी दे देता है.. तो उस कुत्ते की खैर-खबर लेता हूँ। मेरा असली मकसद वही था.. अब सब पता लग गया.. तो मैं कुछ दिन की छुट्टी लेकर तेरे से मिलने आ गया। मगर काकी ने बताया तू तो किसी बाबू के साथ गई है.. बस मेरा माथा ठनका.. मगर मैं कुछ करता.. तू आज आ ही गई..

मुनिया- धत्त तेरी की.. शहर में किसी मेम को नहीं देखा तूने?अर्जुन- अरे देखी तो बहुत.. मगर जो बात गाँव की गोरी में होती है.. वो शहर में कहाँ है पगली..मुनिया- अच्छा गाँव में कोई पसन्द है क्या तुझे?अर्जुन- हाँ एक लड़की है.. बड़ी नाज़ुक सी.. मगर कहने में डरता हूँ।

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मुनिया- अरे वाह.. बता ना कौन है वो.. मैं भी तो देखूँ कौन छिपकली है.. जो मेरे दोस्त को भा गई।अर्जुन- ओ मुनिया की बच्ची.. ज़ुबान संभाल.. वो तो स्वर्ग की अप्सरा है।मुनिया- ऊँहह.. होगी मेरी जूती से.. मैं गाँव की सब छोरियों को जानती हूँ.. कौन कैसी है.. समझे..अर्जुन- तू अपने आपको समझती क्या है.. अपनी सूरत देखी है.. लोमड़ी लगती हो एकदम.. हा हा हा..

इतना कहकर अर्जुन खड़ा हो गया और बाहर भाग गया.. वो जानता था मुनिया अब उसको मारने के लिए पीछे आएगी और हुआ भी वही।मुनिया गुस्से में उसके पीछे भागी.. दौड़ते हुए अर्जुन गिर गया और उसकी जाँघ पर कोई नुकीला पत्थर लग गया.. जिससे उसकी पैन्ट भी फट गई और हल्का सा खून भी निकल आया..

अर्जुन दर्द से बिलबिला उठा.. उसकी हालत देख कर मुनिया घबरा गई।मुनिया- हे भगवान.. यह क्या हो गया.. अर्जुन तुम ठीक तो हो ना?

अर्जुन- ओह्ह.. बड़ा दर्द हो रहा है.. मुझे उठने में मदद कर मुनिया आह्ह.. बहुत दर्द हो रहा है..बड़ी मुश्किल से मुनिया ने अर्जुन को उठाया.. वो लंगड़ाते हुए मुनिया के सहारे कमरे तक गया।मुनिया- अरे अर्जुन तुझे तो चोट लगी है.. खून भी आ रहा है.. तू पैन्ट निकाल.. मैं कोई कपड़ा बाँध देती हूँ.. नहीं तो कुछ हो जाएगा..

अर्जुन- अरे नहीं नहीं.. तू पागल है क्या.. मैं घर जाकर कुछ लगा लूँगा..मुनिया- अरे पागल तू है.. ऐसी हालत में घर कैसे जाएगा.. चल ज़िद ना कर.. पैन्ट खोल.. नहीं तो मैं खोल दूँगी..

अर्जुन- अरे मान जा मुनिया.. मैं पैन्ट के अन्दर कुछ नहीं पहना हूँ।

अर्जुन की बात सुन कर मुनिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया.. ना चाहते हुए भी उसकी नज़र अर्जुन की पैन्ट पर उस जगह टिक गई.. जहाँ उसका लंड था और वो आँखों से मुआयना करने लगी कि अर्जुन का लौड़ा कितना बड़ा होगा.. मगर उसकी समझ में कुछ नहीं आया तो वो मुस्कुरा कर बोली- बड़ा बेशर्म है रे तू.. अन्दर कुछ नहीं पहनता.. हवा देता है क्या अपने उसको.. हा हा… हा हा..अर्जुन- क्या अपने उसको..? बोल बोल.. दाँत क्यों निकाल रही है?मुनिया- कुछ नहीं.. ऐसा कर तू पैन्ट निकाल… मैं कोई कपड़ा देखती हूँ.. तू खुद पट्टी बाँध लेना।अर्जुन- नहीं.. तूने देख लिया तो?मुनिया- तेरी तरह बेशर्म नहीं हूँ मैं.. चल निकाल पैन्ट.. मैं कपड़ा लाती हूँ तेरे लिए..

अर्जुन ने पैन्ट का हुक खोला और लेटे हुए पैन्ट निकालने की कोशिश की.. मगर उसको बहुत दर्द हुआ.. उसके मुँह से हल्की चीख निकल गई।

मुनिया- अरे अर्जुन क्या हुआ.. ऐसे क्यों चीखे तुम?अर्जुन- बहुत दर्द हो रहा है मुनिया.. मुझसे नहीं होगा..मुनिया- हे राम.. अब क्या करूँ मैं.. ऐसा करो अपनी आँख बन्द करके पैन्ट निकाल कर पट्टी बाँध देती हूँ।

अर्जुन- पागल है क्या.. आँख बन्द करके कैसे होगा ये..?मुनिया- अच्छा तो ऐसे ही निकाल देती हूँ.. मगर तू अपनी आँख बन्द रखना।अर्जुन- अरे वाह.. ये क्या बात हुई.. मुझे तू नंगा देखेगी और मैं आँख बन्द रखूं..मुनिया- मैं कुछ नहीं देखूँगी.. अब ज़्यादा बहस ना कर.. तुझे मेरी कसम है.. अब अगर तुमने ‘ना’ बोला तो…

अर्जुन- अच्छा ठीक है.. मगर तू बस घाव ही देखना.. और कुछ नहीं वरना डर जाएगी.. हा हा हा हा..मुनिया- चल चल.. बड़ा आया ऐसा क्या है तेरे पास.. जो मैं डर जाऊँगी..।अर्जुन- अब तुझे क्या बताऊँ.. चल तू पैन्ट निकाल.. जब तू बेईमानी करेगी तो तेरे मु ँह से चीख निकलेगी.. तब पता चल जाएगा.. कि तू डरती है या नहीं..मुनिया- चल ज़्यादा डींगें ना मार.. अब तू आँखें बन्द कर.. मुझे तेरी पट्टी करनी है।

अर्जुन ने अपनी आँखें बन्द कर लीं और मुनिया धीरे-धीरे उसकी पैन्ट उतारने लगी।

दोस्तो, उम्मीद है कि आपको कहानी पसंद आ रही होगी.. तो आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

नितिन

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

आकाश जैन

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

लव कुमार

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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