किस्से पर वापस जाएं
जवान लड़की पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,082 बार

चूत एक पहेली -5

पिंकी सेन

04 Aug 2014 को प्रकाशित

चूत एक पहेली -5
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

अब तक आपने पढ़ा..

विवेक- हैलो बॉस कैसे हो आप?बॉस- कहाँ हो तुम दोनों?विवेक- ज..ज़ि..जी यहीं हैं घर पे..बॉस- सालों दारू पीकर पड़े हो.. मैंने तुमको पैसे किस लिए दिए थे?विवेक- नहीं नहीं बॉस.. आपका काम कर दिया हमने.. उसको ले आए..

बॉस- गुड.. अच्छा सुनो.. मैं नहीं आ पाऊँगा.. मैंने जो बताया था.. उसको समझा देना और कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए.. समझे?विवेक- ना ना बॉस.. आपका काम जल्दी हो जाएगा.. उस साली रंडी को आपके सामने नंगा खड़ा करने की ज़िम्मेदारी हमारी है.. बस कुछ दिन सब्र करो आप.. बस ये गेम फिट बैठ जाए.. तो वो रंडी आपकी होगी और इसको भी मैं समझा दूँगा.. आप बेफिक्र रहो।

अब आगे..

बॉस- ठीक है.. ठीक है.. अब गौर से सुन.. वो कुत्ता फार्म पर है.. कल दोनों वहाँ पहुँच जाना.. समझे? बाकी की बात तुमको बताने की जरूरत है क्या?विवेक- नहीं नहीं बॉस.. मुझे पता है क्या करना है.. आप समझो बस हम वहाँ पहुँच गए।

क्यों दोस्तो, मज़ा आ रहा है ना.. ये क्या हो रहा है और ये कौन लोग हैं. किस के पीछे हैं? इन सब बातों का पता तो आगे चल ही जाएगा। अभी मुनिया के पास चलो.. वहाँ देखते हैं क्या हुआ?

हाँ तो जब मुनिया ने अपना मुँह घुमाया.. तो पुनीत थोड़ा गुस्सा हो गया।पुनीत- अरे मुनिया.. ऐसे करोगी तो कैसे काम कर पाओगी.. जाने दे तेरे से नहीं होगा.. कल तेरे को वापस घर भेज दूँगा।मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. मैं सब करूँगी.. मुझे पैसे कमाने हैं।पुनीत- अच्छा तो आ.. इसको पकड़ कर देख.. इसकी मालिश कर.. मज़ा आएगा।

मुनिया उसके पास आ गई और लौड़े को गौर से देखने लगी।मुनिया- बाबूजी आप चिंता ना करो.. मैंने पहले कभी ऐसी मालिश नहीं की है.. मगर में धीरे-धीरे सीख जाऊँगी।पुनीत- मैं जानता हूँ मुनिया.. अब देर मत करो.. आओ शुरू करो..

मुनिया लौड़े को सहलाने लगती है और उसके नर्म हाथों के स्पर्श से पुनीत को मज़ा आने लगता है। वो अपनी आँखें बन्द कर लेता है।

शुरू में तो मुनिया को अजीब लग रहा था मगर बाद में लौड़े का अहसास उसे अच्छा लगने लगा और वो बड़े मज़े से लौड़े को सहलाने लगी।पुनीत बीच-बीच में उसको आइडिया दे रहा था कि ऐसे करो और वो बस करती जा रही थी और पुनीत मज़ा ले रहा था।अब मुनिया अच्छी तरह से पुनीत के लौड़े को सहला रही थी।

पुनीत- आह आह.. मुनिया ऐसे सूखा सूखा.. मज़ा नहीं आ रहा.. अब मुँह से भी मालिश करो न.. आह्ह.. तुमने अगर अच्छे से किया.. तो तेरी नौकरी पक्की..

दोस्तो, मुनिया लंड और चूत के बारे में ज़्यादा नहीं जानती थी.. मगर ये खेल ऐसा है कि कुछ ना जानते हुए भी हमारा जिस्म पिघलने लगता है।

यही मुनिया के साथ हो रहा था.. उसकी चूत एकदम गीली हो गई थी और उसकी आँखों में मस्ती छा गई थी। अब उसको खुद लग रहा था कि लौड़े को मुँह में लेकर चूसे.. बस पुनीत ने कहा और उसने झट अपनी जीभ लौड़े पर रख दी और लण्ड की टोपी को चाटने लगी।

अब मुनिया बड़े मज़े से लौड़े को जड़ तक लेने की कोशिश कर रही थी.. मगर उसके छोटे से मुँह में लौड़ा पूरा लेना मुश्किल था.. वो बस सुपारे को ही चूस पा रही थी.. जैसे कोई गन्ने को चूस रही हो।

पुनीत ने मुनिया के सर को पकड़ लिया और लौड़े को ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा। उसकी नसें फूलने लगी थीं। लौड़ा कभी भी लावा उगल सकता था।

मुनिया की साँसें रुकने लगीं.. पुनीत अब स्पीड से उसके मुँह को चोद रहा था और कुछ ही देर में पुनीत के लंड ने वीर्य की धार मारी.. जो मुनिया के हलक में उतर गई।ना चाहते हुए भी उसको सारा पानी पीना पड़ा। जब पुनीत ने हाथ हटाया तो मुनिया अलग हुई और लंबी साँसें लेने लगी।

मुनिया- हाय उहह.. ये आपने क्या किया बाबूजी.. मेरे मुँह में मूत दिया छी:..पुनीत- अरे पगली ये मूत नहीं.. वीर्य है इसको पीने से लड़की और खूबसूरत होती है.. देख ये तो दूध जैसा है..

पुनीत के लौड़े से कुछ बूंदें और निकाली.. जो एकदम गाढ़ी सफेद थीं.. जिसको मुनिया गौर से देखने लगी।मुनिया- हाँ बाबूजी.. ये तो सफेद है।पुनीत- अरे जल्दी आ.. इसको जीभ से चाट ले.. नहीं तो नीचे गिर जाएगी।

पुनीत के कहने की देर थी.. मुनिया जल्दी से झुकी और बाकी बूंदों को भी चाट कर साफ करने लगी। उसको यह स्वाद अच्छा लग रहा था और इस खेल के दौरान उसकी चूत एकदम पानी-पानी हो गई थी.. जिसका अहसास मुनिया के साथ-साथ पुनीत को भी हो गया था। अब उसकी नज़र मुनिया की कच्ची चूत पर टिक गई थी।

अरे नहीं नहीं.. अभी नहीं.. सारा मज़ा एक साथ ले लोगे.. तो कहानी में मज़ा नहीं रहेगा। अभी तो पुनीत ठंडा हुआ है.. इतनी जल्दी थोड़ी वो कुछ करेगा।चलो वापस कोमल के पास चलते हैं.. देखते हैं कि वहाँ क्या खिचड़ी पक रही है।

कोमल- अरे राजा किसका फ़ोन था.. तू ऐसे क्यों डर गया?सुनील- अरे साली.. तेरे को नहीं पता क्या.. बॉस का फ़ोन था। उन्हीं ने तो तेरे को लाने को कहा है और तेरे को जो पैसे हमने दिए हैं. वो उन्हीं ने हमें दिए थे।

कोमल- तेरे बॉस ने मेरे को लाने के पैसे तुमको दिए.. और सालों तुमने उनके पहले मेरे को चोद कर मज़ा ले लिया.. सालों अब मैं उसके पास नहीं चुदवाऊँगी.. उसके साथ चुदाई के एक्सट्रा पैसे लगेंगे.. सोच लेना हाँ..

सुनील- अबे चुप साली.. बॉस तेरे को नहीं चोदेंगे.. उनको तो तेरे से दूसरा काम है।कोमल- क्यों तेरा बॉस नामर्द है क्या..? जो पैसे खर्चा करके बस मेरी चुदाई होते देखेगा हा हा हा हा..विवेक- अरे साली छिनाल.. पूरी बात तो सुन ले पहले.. अपनी ही बोले जा रही है तू हरामजादी।कोमल- ओ साला.. भड़वा.. गाली नहीं दे मेरे को.. हाँ नहीं तो.. गाली मेरे को भी आती है.. समझा क्या?

विवेक- अच्छा मेरी जान प्लीज़ चुप हो जा और आराम से तू मेरी बात सुन।कोमल- ठीक है रे.. सुना साला.. मैं अब कुछ नहीं बोलेगी।

विवेक- देख रानी.. तू एक कॉलेज गर्ल है और दिखती भी मस्त है। मज़े की बात ये कि तू चुदक्कड़ होते हुए भी शक्ल से बड़ी शरीफ दिखती है.. तो हमारे बॉस को तेरे से कुछ काम है.. इसलिए वो तेरे से मिलना चाहते थे। अब तू साली खाली बात के लिए तो यहाँ आती नहीं.. और हमको पता था बॉस खाली बात ही करेगा.. तो बस हमने सोचा बॉस खाली बात करेंगे.. तो क्यों ना हम तेरी चुदाई करके पैसे वसूल कर लें।

कोमल- कौन है रे तेरा बॉस.. वो कब आएगा..

विवेक- बॉस कहीं बिज़ी हैं. वे नहीं आएँगे.. मेरे को वो बात पता है.. तो मैं भी तेरे को समझा सकता हूँ।

सुनील- यार जब मैंने बॉस को कहा था ये बात हम कोमल को बता देंगे.. तब तो वो गुस्सा हो गए थे। बोले.. नहीं मैं ही अच्छी तरह से बताऊँगा.. अब क्या हुआ..विवेक- अरे यार अब ये बॉस का फंडा वही जाने.. कहीं फँस गए होंगे किसी काम में.. अब कोमल को हमें सब समझाना होगा और वैसे भी बॉस फार्म पर तो आएँगे ही.. बाकी का काम वहाँ हो जाएगा।कोमल- अबे सालों क्या समझाना है.. कुछ मेरे को भी तो बताओ?

विवेक- ठीक है मेरी जान.. गौर से सुन.. अब दिल्ली से कुछ दूर एक फार्म-हाउस है। हर 2 या 3 महीने में वहाँ एक बड़ी पार्टी होती है.. जहाँ फुल शराब और मस्ती होती है। साथ ही एक खास किस्म का गेम भी खेला जाता है।कोमल- किस तरह का गेम?

विवेक- अबे सुन तो साली.. बीच में बोलती है तू.. वो गेम कोई पैसों का नहीं होता है। वहाँ सब अपनी गर्लफ्रेण्ड को लेकर जाते हैं और हम गर्ल फ्रेण्ड के साथ टीम बना कर तीन पत्ती का गेम खेलते हैं और जो हरता है.. हर बाजी के साथ उसकी गर्लफ्रेण्ड को एक कपड़ा उतारना होता है। ऐसे धीरे-धीरे सबके कपड़े उतरते हैं और जिस लड़की के कपड़े सबसे पहले पूरे उतर जाते हैं उसकी टीम हार जाती है। फिर उस रात सभी जीतने वाले उसके साथ सुहागरात मनाते हैं।

कोमल- ओ माय गॉड.. ये तो बहुत ख़तरनाक गेम है.. एक लड़की के साथ सभी चुदाई करते हैं? उसकी जान नहीं निकल जाती.. वैसे वहाँ कितने लड़के होते हैं.?

विवेक- अरे कुछ नहीं होता.. ज़्यादा नहीं बस हर बार 6 लड़के होते हैं। जिसमें हारने वाला तो चोदता नहीं है.. तो बस रात भर 5 ही लौंडे लड़की की चुदाई का मज़ा लेते हैं। फिर दूसरे दिन सुबह वो लड़का गेम से निकल जाता है और बाकी के लोग गेम खेलते हैं। बड़ा मज़ा आता है यार..

कोमल- ओह.. ये बात है.. वैसे हर बार सभी लोग वही होते हैं या अलग-अलग होते हैं?विवेक- नहीं.. बस तीन लड़के वही होते हैं और 3 को हर बार अलग चुना जाता है।कोमल- ऐसा क्यों.. वो 3 कौन हैं और दूसरों को कैसे चुनते हैं?

विवेक- मेरी जान तूने संजय खन्ना का नाम तो सुना होगा? उसका बेटा पुनीत ये पार्टी देता है.. तो वो तो होगा ही वहाँ और उसका भाई रॉनी और एक खास दोस्त सन्नी भी साथ होता है। बाकी लड़कों को पार्टी के कुछ दिन पहले यहाँ के क्लब में जमा करके मीटिंग होती है और एक खेल के जरिए वो बाकी के तीन लड़कों को चुनता है।

कोमल- हाँ खन्ना का नाम सुना है.. वो तो बहुत पैसे वाला है और वहाँ कैसी मीटिंग होती है.. और कैसे चुनते हैं?विवेक- इतना सब तू मत पूछ.. और वहाँ का नहीं पता.. मैं खुद वहाँ पहली बार जा रहा हूँ..

आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

चूत एक पहेली

कुल भाग: 50
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 76
भाग 76: पढ़ें
भाग 77
भाग 77: पढ़ें
भाग 78
भाग 78: पढ़ें
भाग 79
भाग 79: पढ़ें
भाग 80
भाग 80: पढ़ें
भाग 81
भाग 81: पढ़ें
भाग 84
भाग 84: पढ़ें
भाग 85
भाग 85: पढ़ें
भाग 87
भाग 87: पढ़ें
भाग 88
भाग 88: पढ़ें
भाग 89
भाग 89: पढ़ें
भाग 90
भाग 90: पढ़ें
भाग 91
भाग 91: पढ़ें
भाग 92
भाग 92: पढ़ें
भाग 93
भाग 93: पढ़ें
भाग 94
भाग 94: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

टप्पू सेना का टपाटप वाली चुदाई का खेल- 3
जवान लड़की

टप्पू सेना का टपाटप वाली चुदाई का खेल- 3

ग्रैंड डॉटर सेक्स कहानी में गोआ में टप्पू सेना सोनू को नंगी करके उसके तीनों छेदों को चोद रही थी कि बापू जी ने देख लिया. उसके बाद तो बापू जी ने भी सोनू को सबके सामने चोदा.

14 मिनट 550
टप्पू सेना का टपाटप वाली चुदाई का खेल- 2
जवान लड़की

टप्पू सेना का टपाटप वाली चुदाई का खेल- 2

वर्जिन गर्ल चुदाई कहानी में बापू जीके साथ टप्पू सेना गोवा में मस्ती करने गई थी. उनका मकसद तो सोनू की कुंवारी चूत गांड का मजा लेना था. सोनू भी अपनी सील तुड़वाने को बेचैन थी.

13 मिनट 336
मेरी प्रेमिका और मेरी अधूरी मोहब्बत- 1
जवान लड़की

मेरी प्रेमिका और मेरी अधूरी मोहब्बत- 1

ट्रू लव स्टोरी में मुझे एक लड़की से सच्चा प्यार था लेकिन हमारे बीच सेक्स जैसी बात कोई नहीं थी. एक बार उसे शौपिंग करनी थी तो वो मेरे साथ गयी. वापिसी में क्या हुआ?

16 मिनट 978

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

पवन पंडित

2 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।