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चूत एक पहेली -2

पिंकी सेन

19 Dec 2025 को प्रकाशित

चूत एक पहेली -2
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नेहा- अरे यार.. तू भी क्या नखरे कर रही है.. चल आ जा, आज तुझे भी मज़ा देती हूँ।काजल- नहीं यार नेहा.. मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता..नेहा- अरे क्या यार.. तू कब तक अपनी जवानी का बोझ लिए घूमेगी.. कितनी खूबसूरत है तू.. तेरे पर लड़के मरते हैं किसी को तो अपनी जवानी का मज़ा दे..काजल- नहीं नेहा.. तुम ही करो ये सब.. मुझे ऐसे ही रहने दो..

दोस्तो, ज़्यादा सोचो मत.. मैं बता देती हूँ कि यह एक गर्ल्स हॉस्टल का सीन है।

अब आगे..

नेहा और रानी साथ एक कमरे में रहती हैं और रोज ‘लेस्बीयन’ करती हैं।उधर काजल अपनी फ्रेण्ड टीना के साथ दूसरे कमरे में रहती थी.. मगर अब कॉलेज की छुट्टियाँ चालू हो गई हैं। रानी और टीना किसी के यहाँ चले गए हैं.. तो नेहा और काजल को एक ही कमरे में शिफ्ट होना पड़ा.. जैसे-जैसे लड़कियों के घर वाले उनको लेकर जाते रहेंगे.. यहाँ ऐसे ही सबको कमरे बदलना पड़ेगा।

आज नेहा के मन में है कि वो काजल के साथ मज़ा करे- तू ऐसे नहीं मानेगी.. चल तुझे कुछ दिखाती हूँ.. शायद तेरा मन कुछ करने को करे..नेहा ने अपनी नाईटी निकाल दी और अन्दर उसने कुछ नहीं पहना था।

काजल- छी: नेहा.. तुमको ज़रा भी शर्म नहीं आ रही.. ऐसे नंगी हो गई हो..नेहा- अरे बस कर यार.. तू जानती है हम दोनों लड़की हैं अब तेरे पास ऐसा क्या खास है.. जो मेरे पास नहीं है..काजल- अच्छा मेरी माँ.. ग़लती हो गई.. हो जा नंगी.. पर अब बस मुझे कुछ भी मत कहना।

नेहा- मेरी जान.. तू नंगी हो या ना हो मगर मुझे शांत तो कर दे प्लीज़..काजल- वो कैसे करूँ.. मुझे कुछ भी नहीं आता..नेहा- अरे यार तू तो जानती है.. राकेश यहाँ होता तो कब की उसके पास जाकर अपनी प्यास बुझा लेती.. अब वो यहाँ है नहीं.. और रानी भी चली गई.. प्लीज़ थोड़ी देर मेरे साथ मस्ती कर ना यार प्लीज़..

दोस्तो, नेहा एक बिगड़ी हुई लड़की है.. जो चुदाई के खेल में पक्की खिलाड़ी है, वो अपने प्रेमी राकेश से कई बार चुद चुकी थी.. मगर काजल बेचारी इन सबसे दूर रहती है।नेहा ने उसको बहुत मनाया.. मगर वो नहीं मानी..

नेहा- तू किसी काम की नहीं है.. अब मुझे ही कुछ करना होगा।

नेहा थोड़ी गुस्सा हो गई थी और उसने नाईटी पहनी और दरवाजे की तरफ़ जाने लगी।काजल- अरे सॉरी यार.. मुझे ये सब पसन्द नहीं है.. पर तुम कहाँ जा रही हो?

नेहा- अरे इस हॉस्टल में 600 लड़कियाँ हैं कोई तो होगी जो मेरे जैसी होगी.. तू बस आराम से सो जा.. मैं तो अपनी चूत की आग मिटा कर ही आऊँगी।

नेहा को दरवाजे की ओर आता देख कर वो शख्स जो कब से सब देख रहा था.. वो जल्दी से पीछे को हट गया और कॉरीडोर में दाहिनी तरफ को भाग गया।

नेहा कमरे से बाहर निकली और थोड़ा सोच कर वो भी दाहिनी तरफ चलने लगी। तभी कॉरीडोर की लाइट चली गई और वहाँ एकदम अंधेरा हो गया।नेहा- ओह.. शिट.. ये लाइट को भी अभी जाना था..वो अंधेरे में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी.. उसको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

कुछ देर बाद किसी ने नेहा के मुँह पर हाथ रख प्रिया और उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया, इस अचानक हुए हमले से नेहा की तो जान ही निकल गई।

साया- मुझे पता है.. तुम्हें क्या चाहिए.. और मैं वो तुम्हें दे सकता हूँ.. अगर चिल्लाओ नहीं.. तो मैं मुँह से हाथ हटा देता हूँ.. पर अगर चिल्लाईं तो ठीक नहीं होगा।नेहा ने ‘हाँ’ में सर हिलाया तो उस साये ने अपना हाथ हटाया।

नेहा- कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो?साया- मैं कौन हूँ.. यह जानना जरूरी नहीं.. मेरे पास वो आइटम है.. जिसकी आपको बहुत जरूरत है।नेहा- क्या आइटम है.. मैं कुछ समझी नहीं.. मुझे किस चीज की जरूरत है?

उस साये ने पैन्ट की ज़िप खोली.. उसका लौड़ा तना हुआ था.. जो झट से बाहर आ गया, उसने नेहा का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख प्रिया।नेहा ने जब लौड़े को पकड़ा.. तो उसके जिस्म में करंट सा दौड़ गया.. उसने जल्दी से हाथ हटा लिया- यह क्या बदतमीज़ी है.. कौन हो तुम?

साया- मिस नेहा.. आपको अभी इसी की जरूरत है.. अब ये नाटक बन्द करो और हाँ कह दो..नेहा- मुझे कुछ नहीं चाहिए.. जाओ यहाँ से.. नहीं तो मैं शोर मचा दूँगी।

साया- ओके ओके.. जाता हूँ.. मगर दोबारा सोच लो.. ऐसा तगड़ा लौड़ा दोबारा नहीं मिलेगा.. तुम्हारी तड़प को मैं ही मिटा सकता हूँ.. अगर नहीं लेना है.. तो मैं जाता हूँ.. बाय.. जान.. तुम अकेली घूमो.. कोई नहीं मिलेगी तुम्हें.. सब सो गई हैं हा हा हा हा।

नेहा समझ गई कि ये जरूर यहाँ का चौकीदार बबलू होगा.. क्योंकि वही इस समय यहाँ घूमता रहता है।

नेहा- बबलू, मुझे पता है.. यह तुम ही हो.. बोलो.. नहीं तो मैं सुबह मैडम को बता दूँगी..

साया- हा हा हा.. अरे जान क्यों उस गरीब को मरवा रही हो.. मैं कोई बबलू नहीं हूँ.. तुमको अगर चुदना है.. तो हाँ बोलो.. नहीं तो मैं कहीं और जाता हूँ।

उसके बात करने के ढंग से नेहा को भी यही लगा कि यह बबलू नहीं हो सकता क्योंकि वो तो अलग ही अंदाज में बात करता है और इसकी आवाज़ भी उससे नहीं मिलती।

नेहा- रूको तो.. तुम हो कौन?साया- मेरी जान.. मैं तुम्हें अपने बारे में नहीं बता सकता.. मगर हाँ.. अगर तुम हाँ कह दो.. तो ऐसा मज़ा दूँगा.. कि सारी जिंदगी मेरे लौड़े को याद रखोगी।

उसकी बातों से नेहा की चूत की आग भी अब तेज हो गई थी- अच्छा ये बात है.. तो ज़रा अपने लौड़े का कमाल भी दिखा दो.. कैसा मज़ा देता है ये..

साया- चलो मेरे साथ.. यहाँ ज़्यादा देर खड़े रहना ठीक नहीं..

उस साये ने नेहा का हाथ पकड़ा और कॉरीडोर के अंत में एक खाली कमरा पड़ा था.. जहाँ अक्सर एग्जाम के समय लड़कियाँ पढ़ाई करती थीं.. वो नेहा को उस कमरे में ले गया।

अन्दर जाते ही साये ने नेहा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा।

नेहा तो पहले ही वासना की आग में जल रही थी.. अब वो भी उसका साथ देने लगी और उसकी कमर पर हाथ घुमाने लगी।कुछ देर बाद दोनों अलग हुए।

नेहा- उफ़फ्फ़ कौन हो तुम.. आह्ह.. मेरी चूत में आग लगी है.. आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता.. जल्दी से घुसा दो अपना लौड़ा.. उफ्फ..साया- इतनी भी क्या जल्दी है जान.. पहले अपने कपड़े तो निकाल ले..नेहा तो जैसे उसके हुकुम की गुलाम हो उठी थी.. उसने झट से अपने कपड़े निकाल दिए और तब तक उस साये ने भी कपड़े निकाल दिए थे।

कमरे में बहुत ही अंधेरा था.. बड़ी मुश्किल से दोनों एक-दूसरे को देख पा रहे थे।साये ने नेहा के कन्धों को पकड़ कर उसको नीचे बैठा प्रिया और अपना 8″ का लौड़ा उसके मुँह के पास कर प्रिया।नेहा ने लौड़े को हाथ से पकड़ कर उसकी लंबाई और मोटाई का अहसास किया.. तो वो ख़ुशी से फूली ना समाई।

नेहा- वाउ.. क्या मस्त लंड है तेरा तो.. और काफ़ी बड़ा भी है..साया- ले.. चूस मेरी जान.. तेरे आशिक से तो अच्छा ही है.. मज़ा कर।नेहा ने सुपारे को मुँह में लिया और बस मज़े से चूसने लगी।

साया- आह्ह.. चूस.. मेरी नेहा रानी.. तू बड़ी कमाल की हसीना है.. आह्ह.. चूस..कुछ देर चूसने के बाद नेहा खड़ी हो गई और उस साये का हाथ पकड़ कर एक दीवार के पास ले गई- बस साले.. अब बर्दास्त नहीं होता घुसा दो अपना लंड.. मेरी दहकती चूत में.. कर दो मुझे ठंडा..

साये ने नेहा को दीवार के सहारे घोड़ी बनाया और लौड़े को चूत पर सैट करके जोरदार झटका मारा.. ‘घुप्प’ से लौड़ा चूत में आधा घुस गया।नेहा- आह.. आईई.. मर गई रे.. आह्ह.. क्या बेहतरीन लंड है तेरा.. आह्ह.. पूरा घुसा आह्ह.. मज़ा आ गया आह्ह..उस साये ने लौड़े को पीछे किया और अबकी बार ज़ोर से झटका मारा.. पूरा लौड़ा चूत में समा गया।

नेहा पहले भी अपने ब्वॉयफ्रेण्ड से चुदवा चुकी थी.. मगर आज ऐसे तगड़े लौड़े की चुदाई उसको अलग ही मज़ा दे रही थी। वो गाण्ड को पीछे धकेल कर चुद रही थी।

साया- आह ले.. मेरी नेहा.. आह्ह.. आज तेरी चूत को आह्ह.. असली लौड़े का स्वाद देता हूँ.. आह्ह.. अब तक तो तू बस उस मंजनू से ही चुद रही थी आह्ह.. अब आज के बाद तुझे मेरे लौड़े की आदत आ हो जाएगी.. आह्ह.. ले.. हरामिन..

नेहा- आह्ह.. आह.. फास्ट फास्ट.. मेरे अनजान हरामी आशिक.. आह्ह.. मज़ा आ गया.. आह्ह.. और ज़ोर से करो.. आह्ह.. मैं झड़ने ही वाली हूँ आह्ह..साया- आह उहह.. ले ले आ उहह मेरी जान.. मेरा भी पानी निकलने ही वाला है.. आह्ह.. कहाँ निकालूँ.. बाहर छोड़ दूँ या अन्दर लेगी.. आह्ह..नेहा- उईई.. उईई.. उफ़फ्फ़ अन्दर ही आह्ह.. निकाल दो आह्ह.. मैं गोली ले लूँगी आह्ह.. उह.. मैं गई आह्ह..

नेहा की चूत ने पानी छोड़ प्रिया और उसके साथ ही उस साये ने भी अपना वीर्य नेहा के पानी से मिला प्रिया।अब चुदाई का तूफ़ान थम गया था और दोनों वहीं नीचे बैठ गए।

नेहा- उफ्फ.. क्या बड़ा लंड है तेरा.. मज़ा आ गया.. अब तो बता दे.. तू है कौन.. और तुझे कैसे पता है कि मैं इतनी प्यासी हूँ.. जो मुझे चोदने चला आया।

साया- नहीं नेहा डार्लिंग.. कुछ बातें छुपी रहें.. यही बेहतर होता है। अब मैं जाता हूँ.. तुम भी जाओ.. नहीं तो किसी को पता लग जाएगा..इतना कहकर वो खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहनने लगा।

नेहा- अरे अब तो तुमने मुझे चोद कर अपना बना लिया.. तो ये छुपा-छुपी किस लिए.. बता न.. कौन हो.. और कभी मुझे तुम्हारी जरूरत होगी तो?

साया- नेहा डार्लिंग.. मैंने कहा ना.. यह राज़ की बात है और जब तुम्हें जरूरत होगी.. मैं खुद आ जाऊँगा.. तुम बस अपने कमरे के बाहर सफेद कपड़ा या कोई पेपर लगा देना.. ओके बाय जान..

आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

भरत बरोट

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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