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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 906 बार

चूत एक पहेली -10

पिंकी सेन

03 Jan 2026 को प्रकाशित

चूत एक पहेली -10
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दोनों भाई रात को देर तक पीते रहे थे.. तो अब तक सो रहे थे। इधर मुनिया जल्दी उठ गई और नहा कर बाकी नौकरों के पास रसोई में पहुँच गई.. उसको जोरों की भूख लगी थी।

वहाँ किसी ने उससे ज़्यादा बात नहीं की और उसको नाश्ता दे प्रिया। वैसे मुनिया को भी उनसें बात नहीं करनी थी.. क्योंकि पुनीत ने मना किया था। वो अपने कमरे में आ गई और सोचने लगी कि रात जो हुआ.. वो सही था या नहीं..? बस इसी सोच में वो वहीं बैठी रही.. कुछ देर बाद उसको कुछ समझ आया तो वो पुनीत के कमरे की तरफ़ गई।

अब आगे..

जब वो अन्दर गई.. दोनों भाई आराम से एक बिस्तर पर सोए हुए थे। मुनिया उनके पास गई और धीरे से पुनीत को उठाया।

मुनिया- बाबूजी.. उठो देखो.. कितनी देर हो गई है.. मैं क्या काम करूँ.. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा.. उठो ना..पुनीत की आँख खुली तो उसने मुनिया को पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया।

पुनीत- अरे जानेमन.. मैं तुम्हें यहाँ काम करने के लिए नहीं लाया हूँ। तुम बस हमारी सेवा करो और सुबह का वक़्त सेवा करने के लिए सबसे अच्छा होता है.. चल आ जा..मुनिया- क्या बाबूजी.. आप भी ना.. चलो उठो.. मुँह-हाथ धो लो.. कुछ खाना खालो उसके बाद जितनी सेवा करवानी है.. करवा लेना..

उन दोनों की बात सुनकर रॉनी भी उठ गया था और मुनिया को देख कर मुस्कुराने लगा।

रॉनी- मुनिया सारी सेवा पुनीत की करेगी तो मेरा क्या होगा?मुनिया थोड़ा शर्माते हुए बोली।

मुनिया- ऐसी बात नहीं है बाबूजी.. मैं तो आप लोगों की दासी हूँ.. आप जब कहो सेवा में हाजिर हूँ।रॉनी- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. जा रसोई में जाकर बोल दे.. हम 10 मिनट में आते हैं.. हमारा नाश्ता रेडी कर दे.. ठीक है..

मुनिया वहाँ से चली गई तो पुनीत ने रॉनी को देखा और उसको मजाक से एक मुक्का मारा।

पुनीत- क्या बात है मेरे रॉनी दि ग्रेट कच्ची कली को भोगने का मन बना लिया क्या तूने.. हा हा हा..

रॉनी- अब क्या बताऊँ भाई.. कल जब इसको नंगी देखा तो मेरी तो आँख चकरा गई.. साली क्या क़यामत है.. वैसे मानना पड़ेगा.. आपको एक ही रात में लौड़ा चुसवा प्रिया अपने इसको..

पुनीत- अरे एकदम टाइट माल है यार.. इसका मुँह भी चूत का मज़ा देता है। अब बस बर्दाश्त नहीं होता.. नाश्ते के बाद साली को चोद ही दूँगा..

रॉनी- अरे ये क्या यार.. सब कुछ तुम ही कर लोगे.. तो मेरा क्या होगा..? इस नाज़ुक तितली का थोड़ा मज़ा मुझे भी लेने दो.. उसके बाद दोनों साथ मिलकर चोदेंगे साली को..पुनीत- हाँ तू ठीक कहता है.. साली को आगे और पीछे दोनों तरफ़ से बजा कर मज़ा लेंगे.. चल जल्दी तैयार हो ज़ा..

रॉनी- भाई पर यह बहुत दुबली है.. क्या दोनों का लौड़ा से लेगी.. साली कहीं मर-मरा ना जाए..पुनीत- अरे ऐसे कैसे मर जाएगी.. आज तक कभी सुन है कि कोई जवान चूत चुदने से मरी है.. हा हा हा हा..रॉनी- जो करना है जल्दी कर लेना.. बाद में यहाँ सन्नी और बाकी सब आ जाएँगे।

पुनीत- अरे वो अभी कहाँ आने वाले हैं.. अभी बहुत समय है उनके आने में.. तब तक तो मुनिया की मस्त चुदाई कर लेंगे हम.. अब सुन पहले तू मुनिया से मालिश करवा ले और हाँ उसको नंगा कर देना। उसके बाद में आऊँगा और बस साली को फँसा लेंगे अपने लण्डजाल में.. समझ गया ना..

रॉनी ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और अब दोनों फ्रेश होने की तैयारी में लग गए। करीब एक घंटा बाद दोनों ने नाश्ता करके अपने प्लान को अंजाम देने की मुहिम शुरू की।

रॉनी- उफ्फ.. भाई रात को बरसात ने पूरे जिस्म को तोड़ प्रिया है बदन बहुत दर्द कर रहा है..पुनीत- अरे ये मुनिया को किस लिए साथ लाए हैं.. इसके हाथ में जादू है.. तेरा सारा दर्द निकाल देगी.. जा इसको अन्दर ले जा..मुनिया- हाँ बाबूजी.. चलो अभी दबा के आपका दर्द निकाल देती हूँ।

रॉनी और मुनिया कमरे में चले गए तो रॉनी ने कपड़े निकाल दिए.. बस अंडरवियर में आ गया। जिसे देख कर मुनिया शर्मा गई।

रॉनी- अरे क्या हुआ मुनिया.. ऐसे दूर क्यों खड़ी हो.. कपड़े निकाल कर ही सही मालिश होती है।मुनिया- बाबूजी आप लेट जाओ.. मैं अभी कर देती हूँ.. बताओ कहाँ दर्द है?

रॉनी- अरे तू पास तो आ.. ऐसे वहाँ खड़ी होकर दबाएगी क्या.. रात को तो बिना कपड़ों के पुनीत को बड़ा मज़ा दे रही थी.. अब क्या हो गया?मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. ऐसी बात नहीं है.. आप रात की बात ना करो.. मुझे शर्म आती है।रॉनी- अरे इसमें शर्म कैसी.. यहाँ आ.. जो मज़ा पुनीत ने प्रिया.. वो मैं भी दूँगा और सच कहता हूँ.. उससे ज़्यादा दूँगा.. तू मेरे पास तो आ।

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मुनिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. वो धीरे से रॉनी के पास जाकर बैठ गई।

रॉनी ने मुनिया के मम्मों को सहलाते हुए उससे पूछा- सच बता मुनिया.. पुनीत के पहले कभी किसी ने तेरे इन अनारों को छुआ है क्या?

मुनिया एकदम शर्मा कर ‘ना’ में सर हिलाती है.. तब रॉनी खुश होकर मुनिया के होंठों को अपने होंठों से चूसने लगता है और उसके जिस्म पर हाथ फेरने लगता है।मुनिया थोड़ा विरोध करती है.. मगर रॉनी की मजबूत बाहें उसको जकड़े रहती हैं और कुछ देर बाद उसको भी मज़ा आने लगता है।

रॉनी ने मुनिया को बिस्तर पर लेटा प्रिया अब वो उसके मम्मों को कपड़े के ऊपर से चूसने लगा था। मुनिया तो बस जन्नत की सैर पर निकल गई थी।मुनिया- इसस्स.. बाबूजी.. आप दोनों भाई आह.. आह.. एक जैसे हो.. आह्ह.. मुझे काम के बहाने यहाँ ले आए.. इससस्स.. आह्ह.. दुःखता है.. ओह.. और कुछ और ही कर रहे हो मेरे साथ..

रॉनी- गलत बोल रही है तू.. हम एक जैसे नहीं हैं.. बहुत फ़र्क है.. घबरा मत धीरे-धीरे सब फ़र्क नज़र आ जाएगा तुझे और काम का क्या है.. वो तो सारी उम्र पड़ी है.. मेरी जान.. कभी भी कर लेना.. अभी तो जिंदगी के मज़े ले ले..

रॉनी अब बेताब था मुनिया के जिस्म से खेलने के लिए.. उसने मुनिया के कपड़े निकालने शुरू कर दिए। वैसे मुनिया झूटा नाटक कर रही थी मगर रॉनी को कपड़े निकालने में मदद भी कर रही थी।

मुनिया के चमकते जिस्म को देख कर रॉनी का लंड चड्डी फाड़कर बाहर आने को बेताब हो रहा था.. मगर रॉनी ने उसको आज़ाद नहीं किया और मुनिया के छोटे-छोटे मम्मों को सहलाने लगा।

रॉनी- वाह.. रे.. मेरी मुनिया तू तो एकदम कुदरत का तराशा हुआ नगीना है.. तुझे तो बस देखते रहने का मन करता है।मुनिया- बाबूजी कल रात से आप दोनों भाई मुझे नंगा करने में लगे हुए हो.. मेरी हालत खराब हो गई है.. पता नहीं क्यों मुझे कुछ होने लगता है।रॉनी- तू मेरी बात मान ले जान.. तेरी सारी बेचैनी दूर कर दूँगा..मुनिया- बाबूजी मैं नंगी तो आपके सामने पड़ी हूँ.. अब इससे ज़्यादा और क्या मनवाना चाहते हो?

उसकी बात सुनकर रॉनी खुश हो गया और मुनिया पर टूट पड़ा। उसके निप्पल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को रगड़ने लगा।

मुनिया जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी और रॉनी की पीठ पर हाथ घुमाने लगी।

मुनिया- ओससस्स.. आह.. बाबूजी आह्ह.. मेरे नीचे कुछ हो रहा है.. रात को पुनीत बाबू ने जैसे किया था.. आह्ह.. वैसे आप भी करो ना..

रॉनी समझ जाता है कि इसकी चूत में खुजली शुरू हो गई है। वो झट से बैठ जाता है और अपना अंडरवियर उतार कर लौड़े को आज़ाद कर देता है।

उसके 9″ लंबे और 3″ मोटे लंड को देख कर मुनिया सिहर जाती है।मुनिया- हाय राम बाबूजी.. ये कितना बड़ा है!!

रॉनी- मैंने कहा था ना.. हम दोनों में बहुत फ़र्क है.. अभी तो लौड़ा देखा है आगे और भी बहुत से फ़र्क नज़र आएँगे.. चल आज तुझे 69 सिखाता हूँ।

मुनिया- वो क्या होता है बाबूजी?रॉनी- तू मेरा लौड़ा चूसेगी और उसी समय में तेरी चूत को चाटूँगा।मुनिया- हाय बाबूजी.. ऐसे तो बड़ा मज़ा आएगा.. बताओ मैं क्या करूँ..?रॉनी- अरे करना क्या है.. बस मेरे ऊपर आजा.. अपनी चूत मेरे मुँह पर रख और ले ले मेरा लौड़ा अपने मुँह में.. फिर देख क्या मज़ा आता है..

मुनिया ने वैसा ही किया.. अब रॉनी बड़े प्यार से उसकी कुँवारी चूत को चाट रहा था और मुनिया प्यार से उसके बम्बू को चूस रही थी।

यह सिलसिला कुछ देर तक यूँ ही चलता रहा.. तभी अन्दर पुनीत भी आ गया.. उसके हाथ में बियर की बोतल थी और उसने सिर्फ़ लोवर पहना हुआ था।

वो दोनों मस्ती में चूसने में लगे हुए थे पुनीत ने बियर की बोतल को साइड में रखा और अपना लोवर निकाल प्रिया।अब उसका लौड़ा आज़ाद हो गया था और उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।पुनीत- वाह.. बहुत अच्छे ऐसे मालिश हो रही है हाँ..

पुनीत की आवाज़ सुनकर रॉनी पर तो कोई फ़र्क नहीं पड़ा.. लेकिन मुनिया बहुत घबरा गई और जल्दी से बिस्तर पर पड़ी चादर अपने ऊपर डाल लेती है.. जिसे देख कर दोनों भाई हँसने लगते है।

पुनीत- अरे क्या यार मुनिया.. रात को तो बड़ा खुलकर मज़ा ले रही थी.. अब ऐसा क्या है तेरे पास.. जो मुझसे छुपा रही है?मुनिया- बाबूजी आप दोनों एक साथ होते हो.. तो मुझे शर्म लगती है।रॉनी- अरे यार जो मज़ा साथ मिलकर करने का है.. वो अकेले में कहाँ.. चल आज तुझे जन्नत की सैरर कराते हैं.. हटा दे कपड़ा और देख दोनों भाई कैसे तुझे मज़ा देते हैं।

आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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चूत एक पहेली

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हैलो हॉट बाय्स और गरम सेक्सी गर्ल्स.. मेरा नाम विक्की है और मुझे हिंदी में हॉट सेक्स कहानियां और चुटकुले पढ़ना पसंद हैं. मैं लखनऊ में रहकर पढ़ाई करता हूँ.

10 मिनट 837

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रोहित गुप्ता 2

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

संचित ठाकुर

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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