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बाप बेटी की चुदाई • पठन समय: 17 मिनट • पढ़ा गया: 1,258 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-99

पिंकी सेन

21 May 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-99
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अब तक इस सेक्स कहानी में आपने पढ़ा कि गुलशन जी और साधना ने नंगे होकर बाथरूम में एक-दूसरे के लंड चुत की झांटें साफ़ की थीं और रात को होने वाली सील तोड़ प्रोग्राम के लिए ये दोनों तैयार हो गए थे.

अब आगे आपको अनिता और दीपक के किस्से का खुलासा भी जानना है.

अनिता कुछ सामान लेने बाजार गई तो वहाँ उसका सामना दीपक से हुआ.दीपक- अनिता, तुम यहाँ क्या कर रही हो? उस जानवर ने तुम्हारा क्या हाल बना प्रिया है कितनी कमजोर लग रही हो तुम.अनिता- ऐसा कुछ नहीं है दीपक… वो अच्छे इंसान हैं और मैं वैसी की वैसी ही हूँ, तुम्हारा देखने का नज़रिया बदल गया है.दीपक- झूठ बोल रही हो तुम… अगर वो अच्छा होता तो अपनी बेटी के साथ छी… मुझे तो बोलते हुए भी शर्म आ रही है.अनिता- दीपक ये सब भगवान की मर्ज़ी थी. अब तुम भी इस बात को समझ जाओ तो अच्छा रहेगा, नहीं तो सारी लाइफ मेरे बारे में सोचकर परेशान रहोगे.

दीपक- नहीं अनिता, मैं उस कमीने को सबक सिखा कर ही दम लूँगा. उसने तुम्हें अपनी बेटी नहीं माना ना… अब उसकी सग़ी बेटी के साथ ऐसा करूँगा कि वो समझ जाएगा कि बेटी का दर्द क्या होता है.अनिता- नहीं दीपक प्लीज़ तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे, जो हुआ सो हुआ उस वक़्त हालत ऐसे थे. अब तुम कोई ग़लती मत करना, नहीं तो सबका जीवन बिखर जाएगा.दीपक- हा हा हा जीवन बिखर जाएगा हा हा हा… अनिता मैं तुम्हें जान से ज़्यादा प्यार करता था. मेरा जीवन तो उसी वक़्त बिखर गया था. अब उस साधना को रंडी बना दूँगा, तब उस कुत्ते को समझ आएगा.

अनिता ने दीपक को बहुत समझाया मगर वो नहीं माना और अनिता से वादा किया कि वो साधना को रंडी बना कर दम लेगा, उसके बाद गुस्से में वहाँ से चला गया.

दोस्तो, ये बताना जरूरी था. कुछ पाठक समझ रहे होंगे कि अनिता और दीपक मिले हुए हैं. मगर अनिता ने दिल से गुलशन को अपना लिया था, बस दीपक ही बदले की भावना में अँधा हो गया था.

दोस्तो, अब कुछ इधर-उधर नहीं, बस साधना की सुहागरात देखेंगे बाकी सब बाद में बताऊंगी ओके… तो देखो फिर आगे कहानी का मजा क्या आता है.

शाम होते होते गुलशन जी ने सारी तैयारी कर ली थी. अपने कमरे को फूल से सजाया, बिस्तर पे नई सफेद चादर बिछाई, उस पर गुलाब की पत्तियां बिखेर दीं और साधना के लिए खास लाल लहंगा चोली लेकर आए. खुद भी दूल्हे की ड्रेस लेकर आए, आज उनका पूरा मूड अपनी बेटी के साथ सुहागरात मनाने का था.साधना भी उनका पूरा साथ दे रही थी. वो भी पूरी दुल्हन बनकर ही चुदना चाहती थी. इसलिए उसने ब्यूटी पार्लर से एक लड़की को भी बुला लिया था, जो उसको रेडी कर रही थी. यानि आज बाप और बेटी का रिश्ता बदल कर पति पत्नी का होने वाला था और सारे बंधन टूटने वाले थे.

रात दस बजे साधना कमरे से बाहर आई. वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. उसके चेहरे की चमक देखने लायक थी. गुलशन पापा जी तो बस उसको देख कर देखते ही रह गए.साधना- ऐसे क्या देख रहे हो पापा? क्या इरादा है आपका?पापा- क्या बताऊं साधना इतनी सुन्दर… उफ़फ्फ़ दिमाग़ चकरा गया. मेरा तो तुम दुनिया की सबसे हसीन लड़की हो. तुम्हें देख कर मेरी हालत खराब हो रही है.साधना- मैं जो भी हूँ, आपकी ही हूँ. अब आप जो चाहें मेरे साथ कर सकते हो. आज से साधना आपकी हो गई समझो.पापा- अच्छा अगर ये बात है तो फिर मैं आज तुम्हारी माँग भर कर अपनी जीवनसंगिनी बनाऊंगा, उसके बाद लंड के पानी से तेरी चुत भरूंगा, कहो मंजूर है तुम्हें?साधना- मतलब आप मुझसे शादी करोगे और बेटी से बीवी बनाओगे मुझे?पापा- अब प्लीज़ तुम मत कहना कि मैं अपनी माँ की सौतन नहीं बनूंगी.साधना- मैंने तो ऐसा सोचा भी नहीं मगर अपने ये क्यों बोला पापा?पापा- व्व…वो ऐसे ही मुँह से निकल गया. अब तू ये बातें जाने दे. चल जो जरूरी रस्में हैं, वो कर लेते हैं. उसके बाद असली काम करेंगे.साधना- हाँ पापा, सुबह से तड़प रही हूँ. अब जल्दी से आप मुझे शांत कर दो.पापा- बस कुछ देर की बात है जान, उसके बाद हमेशा के लिए तू मेरी हो जाएगी.

गुलशन जी सिर्फ़ साधना को चोदना नहीं चाहते थे, अगर ऐसा होता तो ये तामझाम नहीं होता. उन्होंने उसके साथ फेरे लिए, मंगलसूत्र पहनाया, फिर उसकी माँग भी भरी और अब साधना बिस्तर पर घूँघट निकाले हुए बैठी अपने पति का इंतजार कर रही थी.

गुलशन जी मिठाई लेकर उसके पास गए. मुँह दिखाई में उसको हीरे की रिंग दी, अपने हाथ से उसको मिठाई खिलाई. आगे आने वाले दिनों के लिए कुछ कसमें-वादे लिए.

दोस्तो बोर हो गए क्या… चलो आगे तो देखिए, आपके काम का सीन शुरू हो गया.

गुलशन जी ने साधना को बांहों में लिया और उसको किस करने लगे. उसके गहने चूड़ियां सब धीरे-धीरे निकाल दिए और ये सब करते वक्त वो उसके मम्मों को भी दबा रहे थे. कभी कानों पर हल्का सा काट देते, तो कभी किस करते.

गुलशन जी अब साधना के एक-एक कपड़े को धीरे-धीरे निकाल रहे थे. लगभग 15 मिनट के इस प्यार में पापा ने अपनी बेटी साधना को एकदम नंगी कर प्रिया था और खुद के कपड़े भी निकाल दिए थे.

साधना- ओह पापा… आप कितने अच्छे हो इस्स… इतना प्यार कर रहे हो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… उई… काटो मत ना पापा.पापा- क्या करूं मेरी नई बीवी है ही इतनी मस्त, एकदम रस मलाई की तरह कि चाटने और काटने को दिल कर रहा है.साधना- अच्छा ये बात है… फिर मैं आपके लंड पर काटूं, तब आप कुछ मत कहना.पापा- अरे ऐसी ग़लती मत करना अगर वहाँ काटेगी ना… तो वो उसका बदला तेरी चुत से ले लेगा, फिर मत कहना कि दर्द होता है.साधना- अच्छा मेरे पापा मैं हार गई, अब बातें ही करोगे या सुहागरात को आगे भी बढ़ाओगे… मेरी चुत बहुत तड़प रही है.

गुलशन जी समझ गए कि अब बातों का कोई फायदा नहीं. वो फिर शुरू हो गए और साधना के शरीर को मज़े से चूसने लगे. धीरे-धीरे वो उसकी चुत पे पहुँच गए और जीभ से चुत को चाटने लगे. साथ ही उन्होंने उंगली से चुत को फैला कर साधना के दाने को चूसना शुरू किया, जिससे साधना के जिस्म में 440 वॉल्ट का करंट लगा, वो तड़पने लगी.

साधना- ससस्स आह… पापा अपने ये क्या कर प्रिया… आह बहुत मजा आ रहा है… अइ ओफ्फ… चूसो आह…

गुलशन जी बिना कुछ बोले अपने काम में लगे हुए थे. एक बार उन्होंने उंगली पर थूक लगाया और धीरे से चुत में थोड़ा घुसा प्रिया, जिससे साधना तड़प उठी.

साधना- आआ नहीं ओफ्फ… पापा दर्द हो रहा है आह… निकालो ना बाहर… आह…पापा- मेरी जान चुप रह कर बस मजा ले, सीधे लंड घुसा दूँगा तो तुझे ज़्यादा तकलीफ़ होगी, इसलिए पहले उंगली से थोड़ी देर तेरी चुत को खोलने दे ताकि बाद में दर्द कम हो और ज़्यादा मजा आए.

साधना समझ गई कि अब पापा जो कर रहे हैं, उसके भले के लिए ही होगा. वो बस मादक सिसकारियां लेती रही और उसने पापा को कह प्रिया कि आप जो करना चाहते हो करो… अब नहीं रोकूंगी.पापा जी धीरे-धीरे उंगली से अपनी सगी बेटी की चूत को चोदने लगे. शुरू में उसको दर्द हुआ फिर जब उंगली चुत में एड्जस्ट हो गई तो उसको मजा आने लगा.

साधना- आह… सस्स पापा इससे तो बहुत मजा आ रहा है… अब दर्द कम है… आह… करो और अन्दर तक घुसा दो ओफ्फ… आह…

साधना की उत्तेजना देख कर अब गुलशन जी ने दो उंगलियां एक साथ चुत में घुसा दीं और उसका अंजाम वही हुआ… साधना के मुँह से दर्द भरी आवाज़ निकली, मगर वो सहन कर गई और वैसे ही पड़ी रही. कुछ देर बाद उसको मजा आने लगा और अब वो एकदम चरम पर पहुँच गई थी. उसकी साँसें तेज हो गईं और वो कमर को हिला-हिला कर मजा लेने लगी.

साधना- आह… ससस्स… ज़ोर से करो पापा आह… फास्ट आह… मजा आ रहा है अइ और करो.पापा- साधना तेरी चुत में बहुत आग है… मेरी उंगली झुलस रही है… बाहर ये हाल है तो अन्दर तो क्या पता कितनी आग होगी… ले मेरी बेटी आने दे तेरी रस की धारा… तेरा पापा तैयार है पीने को.

पापा ने अब अपने होंठ चुत पर टिका दिए थे ताकि साधना का रस सीधा उनके मुँह में जाए.साधना- आह पापा आह… चाटो… मैं गई उफ़फ्फ़ चूसो आह… ज़ोर से करो… मेरी चुत पापा आह… चाट लो.साधना कमर को हिला कर झड़ने लगी और उसका सारा रस पापा चट कर गए. अब बेटी तो शांत हो गई थी. मगर पापा जी का लंड पूरे उफान पर था और चुत को देख कर सलामी दिए जा रहा था.

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साधना- आह… पापा मजा आ गया अब मुझे भी आपका लंड चूसने दो ताकि उसकी आग में ठंडी कर सकूं और आपको भी आराम दूँ.पापा- नहीं मेरी जान, तू सिर्फ़ चूस कर इसको गीला कर दे… बाकी आज इसको तो मैं तेरी चुत से ही ठंडा करूँगा.साधना- ठीक है पापा जी, लाओ आप खड़े हो जाओ… मैं आराम से इसको चूस कर गीला करती हूँ, फिर आप भी मेरी चुत को चाट कर गीला कर देना ताकि ये मूसल आराम से अन्दर घुस जाए और मुझे तकलीफ़ ना दे.

पापा- एक काम कर… मेरे ऊपर लेट कर लंड चूस और मैं तुम्हारी चुत को चूस कर चुदाई के लायक बना देता हूँ, इससे दोनों को मजा आएगा.

साधना को बात समझ आ गई. अब वो दोनों 69 के पोज़ में हो गए और चुसाई शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद साधना फिर से गर्म हो गई और गुलशनपापा का लंडभी अब चुत में जाने को बेताब हो रहा था तो उन्होंने साधना को सीधा लेटाया और कमर के नीचे तकिया लगा प्रिया ताकि चुत का उभार ऊपर उठ जाए और वो लंड को आसानी से उसमें घुसा सके.

साधना- पापा आराम से करना, इसमें आज के पहले उंगली भी नहीं गई और आज आपका ये अज़गर घुसने वाला है.पापा- डरो मत बेटा… मैं बड़े आराम से डालूँगा बस तू थोड़ा सहन करना.

साधना जानती थी कि उसको दर्द होगा मगर टीना की कही बात उसको याद थी कि जितना बड़ा लंड होता है, मजा भी उतना ही ज्यादा देता है. बस इसी चक्कर में वो जोश में होश खो बैठी.साधना- ठीक है पापा… अब आप हो तो आप जैसे चाहो डाल दो. मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूँगी.

पापा लंड को चुत के ऊपर रगड़ने लगे. कभी लंड से चुत पे ज़ोर से मारते, जिससे साधना को बहुत मजा आ रहा था.साधना- आह… सस्स पापा आपका लंड है या डंडा… आउच लगता है एयेए…पापा- क्यों मेरी बेटी को मजा नहीं आ रहा क्या… बंद कर दूँ मारना… सीधे पेल दूँ?साधना- नहीं पापा… मजा आ रहा है, करते रहो… ओफ्फ… पापा चुत के ऊपर रगड़ो ना… ज़ोर ज़ोर से… उसमें ज़्यादा मजा आ रहा था.

गुलशन जी समझ गए कि अब साधना की उत्तेजना बढ़ रही है और जब ये एकदम गर्म हो जाएगी, तब चोदना सही रहेगा. यही सोच कर उन्होंने लंड को ज़ोर ज़ोर से चुत पर रगड़ना शुरू कर प्रिया और साथ ही साथ हाथों से साधना की जाँघों को भी मसलने लगे, जिससे साधना का मजा दुगुना हो गया.

साधना- आह… पापा… बहुत मजा आ रहा है उफ़फ्फ़ आपने तो चुत में आग लगा दी… अब मत तड़पाओ ना आह… प्लीज़ ओफ्फ…पापा- साधना अब वक़्त आ गया बेटा… ले संभाल लेना ठीक है.

गुलशन जी ने चुत को फैलाया और अपना मोटा सुपारा चुत की फांकों में घुसेड़ने लगे.

साधना की चुत बहुत टाइट थी और सुपारा बड़ा था, वो अन्दर जा नहीं पा रहा था तो गुलशन जी ने चुत और लंड पर अच्छे से थूक लगाया और दोबारा कोशिश की. इस बार सुपारा चुत को फैलाता हुआ अन्दर घुस गया और उसके साथ ही साधना को असीम दर्द हुआ मगर उसने मुँह से एक आवाज़ भी नहीं निकाली, बस दाँत भींचे पड़ी रही.

गुलशन जी ने सुपारा फँसा कर हल्का सा धक्का मारा तो लंड 2″ चुत में घुस गया और इस बार साधना की बर्दाश्त की ताक़त हार गई, उसके मुँह से दर्द भरी चीख निकली और आँखों से आँसुओं की धारा बह गई.पापा- बस बेटी… रो मत, अब नहीं डालूँगा… मैं इतना ही रखूँगा.साधना- आह… आह… पापा एमेम मेरी जान निकल रही है ओफ्फ… एयेए…

गुलशन जी ने साधना को बहलाया कि वो आराम से करेंगे. थोड़ी देर वो उसी अवस्था में रहे और साधना की चुत के ऊपर हाथ घुमाते रहे, जब उसका दर्द कम हुआ तो वो 2″ लंड को ही चुत में अन्दर बाहर करने लगे.साधना- आ यस पापा आह… करो… अब दर्द नहीं है… आह… करो.

साधना की मादक सिसकारियां गुलशन जी को पागल बना रही थीं. उन्होंने कमर को पीछे किया और ज़ोर का झटका मारा जिससे आधे से ज़्यादा लंड चुत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया. साधना के मुँह से दर्द भरी चीख निकली मगर जल्दी से गुलशन जी ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और कमर को फिर पीछे किया और एक और जोरदार झटका मार प्रिया. अबकी बार पूरा लंड चुत की गहराई में खो गया और साधना की आँखें चढ़ गईं, उनमें से लगातार आँसू बह रहे थे, मगर गुलशन जी बहुत बड़े खिलाड़ी थे. वो वैसे के वैसे पड़े रहे, उन्होंने ज़रा भी हरकत नहीं की.

कुछ मिनट तक बिना हिले गुलशन जी पड़े रहे, फिर उनको अहसास हुआ कि साधना अब नॉर्मल हो चली है तो उन्होंने उसके होंठ आज़ाद कर दिए.

पापा- सॉरी बेटा, तुम्हारी चुत बहुत टाइट थी तो धीरे से लंड जा नहीं रहा था इसलिए मैंने ज़ोर से पेल प्रिया, मगर अब तू टेंशन मत ले, अब तू कहेगी तभी मैं हिलूँगा.साधना- आह… पापा अपने तो एमेम मेरी जान ही निकाल दी आज ओफ्फ… अब बस और अन्दर मत डालना… आह… बहुत दर्द हो रहा है.पापा- अब बचा ही क्या… जो डालूँगा तेरी चुत ने मेरा पूरा लंड निगल लिया है मेरी जान.

साधना को यकीन नहीं हुआ कि इतना बड़ा लंड पूरा चला गया मगर गुलशन के समझाने पर वो मान गई. थोड़ी देर दोनों नॉर्मल रहे फिर साधना को पूछ कर गुलशन जी धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगे.

साधना- आह… उई नहीं… आह… दुख़्ता है पापा आह… ससस्स बहुत दर्द हो रहा है.पापा- बस थोड़ी देर की बात है बेटा… फिर नहीं होगा. तू आँखें बंद करके मजा ले बस.

थोड़ी देर ऐसे ही धीरे-धीरे चुदाई चलती रही. अब साधना का दर्द कम हो गया और उसकी उत्तेजना बढ़ गई थी अब उसकी दर्द भरी आहें मादक सिसकारियों में बदल गई थीं- आह… सस्स पापा आह… करो आह… मजा आ रहा है उफ़ फास्ट करो चोद दो अपनी बेटी को… आह… फास्ट पापा फास्ट एयेए अइ आह…

साधना अब चरम रीमा पर थी और गुलशन जी भी बहुत देर से कंट्रोल किए हुए थे. ऐसी गर्म चुत के आगे वो कब तक टिक पाते, अब उनका लावा भी बहने को तैयार था.पापा- आह… ले बेटी… तेरी चुत को आज अपने लंड के रस से भर दूँगा ले… आह…

अगले 2 मिनट गुलशन जी ने फुल स्पीड से साधना की चुदाई की और दोनों बाप बेटी एक साथ झड़ गए. गुलशन जी वैसे ही साधना पे पड़े रहे.

दोस्तो, चुदाई का ये खेल खत्म हो गया. आज साधना काकौमार्य भंगहो चुका है. अब ये आगे क्या गुल खिलाएगी ये तो आपको आगे आने वाले पार्ट में पता लगेगा.

साथियो, आपको यह कहानी कैसी लग रही है? मेरी कहानी का आनन्द लें और कमेंट्स में अपने विचार प्रकट करें!support@mohakkisse.comकहानी जारी है.

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