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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,132 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-74

पिंकी सेन

14 Mar 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-74
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अब तक की इस नोन वेज कहानी में आपने पढ़ा था कि गुलशन जी अपनी बेटी साधना से अपना लंड चुसवाने की जुगत भिड़ाने में लगे थे, उधर साधना भी अपने बाप का लंड चूसने के चक्कर में थी.अब आगे..

गुलशन जी साधना के पास गए और उसके चेहरे को पकड़ कर मुस्कुराने लगे.साधना- क्या हुआ? केला चाहिए आपको भी?गुलशन- नहीं साधना मेरे दिमाग़ में एक खेल आ गया है. तू ये बता अगर केला खाने की वजह चूसा जाए तो कैसा लगेगा?साधना- हा हा हा पापा, आप भी ना कुछ भी.. ये कैसा खेल हुआ? भला कोई केला भी चूसने की चीज है क्या?गुलशन- अरे पगली पता है मुझे.. मगर ये एक खेल है. अच्छा सुन तुझे मैं ठीक से समझाता हूँ. देख इस खेल में आँखें और हाथ बंद होंगे. मैं तुझे फ़्रीज़ की कोई भी चीज जैसे केला हो या कोई सब्जी जैसे भिंडी या तुरयी, कुछ भी मुँह में दूँगा. तू उसे चूस कर बताना वो क्या है?

गुलशन जी की बात सुनकर साधना की आँखों में चमक आ गई, वो समझ गई इस खेल में उसे लंड चूसने को मिलेगा और साथ ही साथ वो अपने पापा की होशियारी पर फिदा हो गई. मगर उसे थोड़ा शक हुआ अगर गुलशन जी ने लंड ना चुसवाया तो फिर उसने भी दिमाग़ दौड़ाया और फिर बोली- वाओ पापा, ये गेम तो बहुत मस्त सोचा आपने, मगर फ़्रीज़ में क्या-क्या है ये तो मुझे पता है. फिर सब्जी की तो खुशबू से ही पता लग जाएगा कोई ऐसी चीज चूसने को देना, जिसका आसानी से पता ना लग सके. जैसे पेन या पेन्सिल या कोई भी ऐसी चीज जिसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो. हाँ साथ में सब्जी भी यूज करना ताकि कन्फयूजन रहे और खेल लंबा चले.

गुलशन जी ये सुनकर बड़े खुश हुए कि साधना ने उनकी मुश्किल आसान कर दी.गुलशन- हाँ ऐसे ही करेंगे, चलो अब पहले तुम्हारी आँख और हाथ बाँध दूँ.साधना- क्यों मेरी क्यों.. आपकी क्यों नहीं? आप टेस्ट करोगे और बताओगे, मैं नहीं बताने वाली.

साधना ने तो गुलशन जी के अरमानों पर पानी फेर प्रिया मगर ये भी उसकी अपने पापा को तड़पने की एक साजिश थी.गुलशन- अरे नहीं आइडिया मैंने प्रिया, तो मैं ही पहले खेलूँगा. आँख तुम्हें बंद करनी होगी समझी!साधना ने थोड़ी ज़िद की, मगर फिर वो मान गई. वैसे भी उसे मानना ही था.

गुलशन- तुम यहा कुर्सी पर बैठोगी, पीछे तुम्हारे हाथ बाँध दूँगा और आँख पर पट्टी.. ताकि ना तुम छूकर पता कर सको, ना देख कर, समझी!साधना- पापा इस सबकी क्या जरूरत है मैं हाथ नहीं लगाऊंगी और सच्ची में आँख भी बंद रखूँगी, प्लीज़ ऐसे ही करते है ना.गुलशन- नहीं खेल के कुछ नियम होते हैं, उसी हिसाब से खेलना चाहिए.

साधना मान गई तो गुलशन जी ने उसे कुर्सी पे बैठा कर पीछे हाथ बाँध दिए और आँखें भी बंद कर दीं.गुलशन- इन्तजार कर.. बस मैं अभी सब चीजें लेकर आता हूँ हाँ..!गुलशन के जाने के बाद साधना दिल ही दिल में बहुत खुश थी कि आज तो उसे पापा का लंड खुलकर चूसने को मिलेगा.

गुलशन- हाँ तो साधना तैयार हो तुम? और हाँ सिर्फ़ जीभ और होंठों से पता करना है.. किसी भी चीज को दाँत मत लगाना.साधना मन में- ओह पापा डरो मत.. मैं आपके लंड को प्यार से चुसूंगी, काटूंगी नहीं, बस जल्दी से मेरे मुँह में आप अपना लंड घुसा दो.गुलशन- कुछ सुन भी रही है तू.. मैंने अभी क्या कहा तुमसे?साधना- हाँ पापा सुन लिया, अब शुरू करो.

गुलशन जी ने पहले साधना के मुँह में रोटी बेलने का बेलन प्रिया और थोड़ी देर में साधना ने बता प्रिया. उसके बाद केला, पेन्सिल प्रिया, वो भी साधना ने बता प्रिया.

साधना- पापा मैं जीत गई, मैंने सब चीज सही बताई हैं.गुलशन- अरे अभी कहाँ.. अब लास्ट चीज बाकी है. इसका नाम बता तब तू जीतेगी.साधना- अच्छा तो लाओ, उसमें क्या है अभी उसका नाम भी बता देती हूँ.

गुलशन जी अब उत्तेजित हो गए थे, उन्होंने अपना लंड लुंगी से बाहर निकाला, जो अभी आधा ही खड़ा था.. यानि पूरे शबाब पे नहीं आया था.

गुलशन- ये अनोखी चीज है साधना, ध्यान से बताना तू.. ठीक है?

इतना कहकर वो लंड को उसके होंठों के एकदम पास ले गए.

साधना ने पहले जीभ से सुपारे को चाटा और फिर धीरे से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

गुलशन जी को असीम आनन्द की प्राप्ति हुई, मगर वो अपने ज़ज्बात को काबू में किए हुए वैसे ही खड़े रहे.

साधना ने थोड़ी देर लंड चूसा, फिर मुँह हटा लिया क्योंकि थोड़ा नाटक करना पड़ता है, नहीं तो गुलशन जी को शक हो जाता.

साधना- पापा, ये क्या है बहुत अजीब सी चीज है, गोल भी है, नर्म भी है कुछ नमकीन सा स्वाद है, समझ नहीं आ रहा.गुलशन- अरे कहा था ना.. ये हार्ड है. ऐसे जल्दी समझ नहीं आएगा वैसे तुझे एक हेल्प देता हूँ. ये लंबी चीज है अगर तू पूरा मुँह में लेकर चूसेगी तो शायद इसका नाम बता पाएगी, नहीं तो हार जाओगी.साधना ने फिर लंड को मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी. गुलशन जी भी अपनी बेटी को लंड चुसवा कर बहुत ज़्यादा खुश हो रहे थे.

साधना सुपारे को होंठों में दबा कर चूस रही थी. अब वो ज़्यादा से ज़्यादा लंड मुँह में लेना चाहती थी मगर वो कोई मॉंटी का लंड तो था नहीं, जो वो पूरा निगल जाती. ये तो 8″ का अज़गर था, जिसे निगलना मुश्किल था. दूसरी बात वो चीज को पहचानने के लिए ये कर रही थी, तो ज़्यादा मज़ा भी नहीं ले सकती थी. मगर उसने एक तरकीब लगाई, लंड को वापस बाहर निकाला.

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गुलशन- अरे क्या हुआ.. तुझे इसका नाम पता चल गया क्या?साधना- नहीं पापा समझ में नहीं आ रहा. ये तो कोई बड़ी लॉलीपॉप जैसी कोई चीज है. इसमें से थोड़ा नमकीन रस जैसा आ रहा है.. और ऐसा स्वाद मैंने लाइफ में कभी नहीं चखा है.

साधना की बात सुनकर गुलशन जी थोड़े घबरा गए क्योंकि उनके लंड से पानी की बूंदें आने लगी थीं और साधना को शक ना हो जाए ये सोच कर उन्होंने बात को बदल प्रिया और साधना तो खुद यही चाहती थी.गुलशन- अरे वाह तू तो बहुत करीब आ गई. ये रियल में ऐसी ही चीज है, इसमें रस भी रियल है. अब तू इसको चूसती रह और मज़ा लेती रह. जब समझ आ जाए बता देना.साधना- ठीक है पापा अब तो खुलकर चूसना पड़ेगा.. तभी मज़ा आएगा.गुलशन- हाँ ये हुई ना बात, चल चूस और रस के पूरे मज़े ले.

साधना को अब कोई डर नहीं था वो खुलकर लंड को चूसने लगी. मगर एक गड़बड़ थी कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी और उसकी चुत रस टपका रही थी. ऐसे तगड़े लंड की चुसाई से उसकी उत्तेजना भी बढ़ गई थी. उसका बहुत मन था कि उसके पापा उसकी चुत को चूस कर उसकी खुजली मिटा दें. मगर ये इतना आसान नहीं था, तो वो बस लंड को चूस कर मज़ा लेने लगी.

काफ़ी टाइम तक ये लंड चुसाई चलती रही. अब तो गुलशन जी धीरे-धीरे झटके भी मारने लगे थे, उनकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी. उनके विशाल लंड से रस की धारा निकलने को बेताब थी, तभी उन्होंने जल्दी से लंड को बाहर निकाला और पास पड़े प्याले में सारा रस निकाल प्रिया तब जाकर उनको सुकून मिला.

साधना भी समझ गई थी कि उसके पापा ठंडे हो गए हैं मगर उसने अनजान बनने का नाटक किया- क्या हुआ पापा, चुसाओ ना.. बहुत मज़ा आ रहा था.गुलशन- बस बस.. बहुत टाइम हो गया और तू इसको पहचान भी नहीं पाई इसका मतलब तू हार गई है.साधना- अरे थोड़ी देर और चूसती तो पता लग जाता ना पापा.गुलशन- नहीं अब तुझे हार मान लेनी चाहिए.. मैंने तुझे बहुत मौका प्रिया.साधना- अच्छा बाबा हार गई मैं.. बस हैप्पी! चलो अब मुझे खोलो तो.

गुलशन जी ने वो प्याला टेबल के नीचे छुपा प्रिया और लुंगी ठीक करके साधना को खोल प्रिया. मगर ये सब करने के पहले उन्होंने ये नहीं सोचा था कि लास्ट में साधना को वो क्या चीज का नाम बताएँगे.

साधना- ओफफो आप बहुत स्मार्ट हो पापा.. लास्ट में चीज ऐसी ले आए कि मैं पता ही नहीं लगा सकी. वैसे अब तो में हार गई हूँ, तो बताओ मुझे वो क्या चीज थी.. जिसे चूसने में मुझे इतना मज़ा आ रहा था?गुलशन- व्व..वो तत..तू हार गई है. अब तुझे मेरी बात माननी पड़ेगी समझी.साधना- अरे मगर वो चीज का नाम तो मुझे पता होना चाहिए ना?गुलशन- नहीं अगर बता दूँगा तो दोबारा मैं कैसे जीतूँगा.. चल तू हार गई है.साधना- अच्छा ऐसे कैसे हार गई. आपकी बारी भी आएगी और आपको भी ऐसे ही बताना होगा.

गुलशन जी तो अब ठंडे हो गए थे. अब कहाँ उनका मन था, तो बस वो बहाना बनाने लगे कि वो थक गए हैं, आराम करना है.साधना- ये चीटिंग है पापा, ऐसे मैं नहीं हार मानूँगी ओके.

बोलते बोलते साधना की नज़र टेबल के नीचे पड़े प्याले पे गई.

साधना- अच्छा तो वो चीज अपने नीचे छुपा कर रखी है, अभी देखती हूँ.

साधना उस प्याले को लेने लगी, तो घबराहट में गुलशन जी ने साधना के पैर में पैर मार प्रिया, जिससे वो उलझ कर गिर गई और उसकी मैक्सी भी ऊपर हो गई. जिसकी वजह से उसकी खुली चुत के दीदार गुलशन जी को हो गए.

साधना की नज़र गुलशन जी की नज़र पर गई, जो कहीं और ही टिकी थी. तब उनकी नज़र का पीछा करते हुए साधना को अहसास हुआ कि वो उसकी चुत को घूर रहे हैं, जो रस से भीगी हुई थी और चमक रही थी.

साधना ने हालत को समझते हुए जल्दी से कपड़े ठीक किए और झूठ मूट का नाटक करने लग गई.साधना- ओह माँ.. मर गई मैं उउउह पापा.गुलशन- अरे ठीक से चल भी नहीं सकती. अब गिर गई ना.. दिखा कहाँ लगी है.

साधना के दिमाग़ में अपनी चुत को शांत करने का फ़ौरन आइडिया आ गया.

साधना- आह.. पापा पैर में दर्द हो रहा है और कमर में भी जोर से लगी है.गुलशन- अच्छा तू खड़ी हो, मैं देखता हूँ.साधना- आह.. उठा भी नहीं जा रहा.. बहुत दर्द हो रहा है पापा.

बस-बस सारा मज़ा आज ही लोगे क्या कल के लिए भी कुछ बाकी रहने दो. अब साधना की चुत कैसे शांत होती है, ये अगले पार्ट में देखना.

मेरे प्यारे साथियो, आप मेरी इस सेक्स स्टोरी पर कमेंट्स करेंsupport@mohakkisse.comनोन वेज कहानी जारी है.

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रैगिंग ने रंडी बना प्रिया

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