होम पर वापस जाएं
जवान लड़की पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,072 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-61

पिंकी सेन

07 Feb 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-61
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

अब तक की हिंदी पोर्न स्टोरी में आपने पढ़ा था कि गोपाल मोना को मनाता हुआ पूछ रहा था कि जब वो चुदाई की बात करता है तो वो मना क्यों देती है.अब आगे..

मोना ने गोपाल के सवाल का कोई जवाब नहीं प्रिया और कमरे को ठीक करने लग गई, जिसे देख कर गोपाल को बड़ा अजीब लगा. वो खड़ा हुआ और उसने मोना को बांहों में लेकर किस कर प्रिया.मोना- ओह छोड़ो ना गोपाल.. क्या है आपको क्या हो गया है.. मुझे काम करने दो.गोपाल- मुझे कुछ नहीं हुआ… ये बताओ तुम्हें क्या हुआ है.. जब से गाँव से आई हो अजीब हो गई हो. पहले तो चुदाई के लिए तड़पती रहती थी.. मगर अब मेरे कहने के बाद भी मना कर देती हो.मोना- ऐसा कुछ नहीं है.. पहले मैं जो करती थी वो ग़लत था. अब मुझे समझ आ गया है कि औरत को अपनी हद में रहना चाहिए.. ज्यादा चुदाई में मन नहीं लगाना चाहिए.. बस इसी लिए.गोपाल- ये तो अच्छी बात है.. मगर आज करते हैं ना यार!मोना- नहीं आज नहीं.. आज मुझे बहुत काम है और हाँ कल सुबह आप आओगे तो आपके लिए एक सरप्राइज भी होगा.गोपाल- अच्छा क्या बात है.. मतलब कल तुम्हारा कुछ खास करने का इरादा है? चलो अब तो कल ही देखेंगे.

शाम तक दोनों नॉर्मल ही रहे. फिर गोपाल अपनी जॉब पे चला गया तो मोना ने मीना को कॉल किया कि अब वो उस लड़की को ले आए.

आधा घंटा बाद मीना आ गई, उसके साथ एक लड़की थी जो फटा हुआ सा फ्रॉक पहने हुए थी. उसके हाथ में एक पोटली भी थी शायद उसके कपड़े होंगे. मगर उन फटे पुराने कपड़ों में भी वो खिलता हुआ गुलाब नज़र आ रही थी, जिसे देख कर मोना की आँखों में चमक आ गई और उसने मीना को थैंक्स कहा.

मीना- अरे अभी कहाँ थैंक्स बोल रही है.. पहले तेरा काम तो हो जाए.

वो लड़की थोड़ी घबरा रही थी और वहीं एक कोने में खड़ी हुई थी.मोना- अरे तू ऐसे डर क्यों रही है? आ इधर आ मेरे पास आ.मीना- ये ऐसी ही है.. अठारह की हो गई है लेकिन थोड़ी शरमीली है मगर समझदार है. तू इसे ठीक से समझा देगी तो देखना सब काम अच्छे से कर देगी.मोना- अच्छा नाम क्या है इसका?मीना- इसका नाम नीतू है और नीतू आज से तुझे यहीं रहना है. बस हफ्ते में एक बार तुझे छुट्टी मिलेगी, तब तू घर जा सकती है. ये दीदी बहुत अच्छी हैं तेरा बहुत ख्याल रखेगी, बस तू इनकी सब बातें मानती रहना और तुझे पैसे भी बहुत मिलेंगे. समझ गई ना तू मेरी बात..!नीतू ने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिला कर मीना को जबाव प्रिया.

मोना- यार ये तो बहुत डरी हुई लग रही है.. कोई प्राब्लम है क्या?मीना- अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है. पहली बार घर से बाहर रहेगी ना.. बस इसी लिए थोड़ी घबरा रही है.मोना- अच्छी बात है.. चल अब तू निकल, मुझे नीतू को काम समझाना है और इसे कुछ अच्छे कपड़े भी दिलाने होंगे. देखो इसके कपड़े कैसे फटे हुए हैं.मीना- अब वो तेरी मर्ज़ी है तू इसे क्या दिलाती है, चल मुझे बाहर तक छोड़ दे.

नीतू वहीं बुत बनी खड़ी रही और मोना अपनी सहेली के साथ बाहर आ गई.मीना- क्यों मोना कैसी लगी नीतू?मोना- यार मस्त है.. एकदम कच्ची कली है.. गोपाल तो इसको देख कर पागल हो जाएगा. तुझे पता है इसे देख कर तो मुझे ही कुछ-कुछ होने लगा. इसके होंठ देख कितने प्यारे है ना!मीना- हा हा हा तुझे किसने रोका है. तू भी इसके साथ मज़ा कर लेना मगर जल्दबाज़ी मत करना वरना काम बिगड़ जाएगा. इसे प्यार से लाइन पर लाना, बाकी तू खुद समझदार है. ठीक है अब मैं चलती हूँ.मोना- तू टेंशन मत ले.. इसे कैसे लाइन पे लाना है, मुझे पता है.

मोना को बाय बोलकर मीना वहां से चली गई और मोना वापस अन्दर आ गई.नीतू पहले जहाँ खड़ी थी, अब भी वहीं खड़ी रही, जिसे देख कर मोना को उस पर बड़ा प्यार आया और वो उसके पास जाकर बैठ गई.मोना- नीतू तू ऐसे डर क्यों रही है? मैं तुझे ज़्यादा काम नहीं दूँगी और ना ही तुझे गुस्सा करूँगी.. चल इधर आ और मुझसे बातें कर ना.

नीतू चुपचाप मोना के साथ सोफे के पास आकर खड़ी हो गई.मोना- अरे खड़ी क्यों है.. बैठ ना यहाँ.नीतू- नहीं मेमसाब मैं नौकर हूँ.. आपके पास कैसे बैठ सकती हूँ?मोना- धत तेरी की.. तुझे किसने कहा तू नौकर है? अरे तू तो बस मेरी मदद करने आई है और मुझे मेम साब नहीं, दीदी बोल.. समझी मेरा नाम मोना है मेरा मगर तू सिर्फ़ दीदी बोलना समझी!

मोना ने एक घंटे तक नीतू से बातें की और उसका विश्वास जीत लिया. अब नीतू भी खुलकर मोना से बात करने लगी थी.

मोना- अच्छा तेरी ये पोटली में कोई ढंग का कपड़ा भी है या नहीं.. दिखा तो.नीतू- हम गरीब हैं दीदी.. दूसरों के पुराने कपड़े ही पहनने को मिलते हैं.मोना- अब तू ये फटे पुराने कपड़े नहीं पहनोगी.. चल यहीं पास में कपड़ों की दुकान है. तेरे लिए अच्छे कपड़े लाते हैं.नीतू- नहीं दीदी रहने दो.. ये जो मेरे पास हैं.. वही अच्छे हैं.

नीतू का मासूम चेहरा देख कर मोना को हँसी आ गई- अरे डर मत.. ये मेरी तरफ़ से तुझे तोहफा है, मैं तेरे पैसे नहीं काटूंगी.

मोना के समझाने पर नीतू मान गई और फिर दोनों कपड़े लेने चली गईं. मोना ने कुछ कपड़े पसंद किए और कुछ जरूरत का सामान लिया फिर वो नीतू को लेकर घर आ गई.

मोना- देख नीतू, वैसे तो सारा काम मैं अकेले ही करती हूँ मगर कभी-कभी बीमार होती हूँ तो मुश्किल हो जाती है. अब तू ये बता तुझे क्या-क्या काम करना आता है?नीतू- दीदी, मुझे चाय बनानी आती है मगर खाना बनाना नहीं आता.. हाँ मैं साफ-सफ़ाई कर सकती हूँ और सर भी अच्छा दबा देती हूँ. मेरी माँ कहती है कि मेरे हाथों में जादू है.. झट से दर्द निकल जाता है.मोना- अच्छा फिर तो तू मेरे बहुत काम की है. अच्छा सुन मेरे पति की रात की ड्यूटी होती है, वो सुबह जल्दी वापस आते हैं, तू बस सुबह उनके लिए चाय बना देना और थोड़े बहुत बर्तन साफ कर देना.. बाकी खाना वगैरह मैं बना लूँगी, ठीक है.नीतू- ठीक है दीदी.. और घर की सफ़ाई भी मैं कर दूँगी.मोना- अच्छा सुन तू मेरे पति को जीजू बोलना.. उन्हें अच्छा लगेगा. ठीक है.नीतू- वो क्यों दीदी.. मैं उन्हें भैया बोलूँगी ना!मोना- अरे नहीं.. मैं तेरी दीदी हूँ, तो वो जीजू हुए ना. चल अब ये गंदे कपड़े निकाल कर अच्छे से तुझे नहला देती हूँ.. फिर हम खाना बनाएंगे.

मोना ने नीतू का फ्रॉक निकालना चाहा तो वो शर्मा गई और मोना का हाथ पकड़ लिया.नीतू- ये आप क्या कर रही हो दीदी.. मैं अपने आपसे कर लूँगी.मोना- हा हा हा, अरे तू मेरी छोटी बहन जैसी है.. अब मुझसे कैसी शर्म! चल निकालने दे पगली कहीं की!

नीतू ने थोड़ी ना-नुकुर की मगर मोना कहाँ मानने वाली थी. उसने नीतू का फ्रॉक निकाल प्रिया. अब ऊपर सेवो एकदम नंगी थीऔर नीचे सिर्फ़ एक पुरानी सी चड्डी पहने हुए थी. फिर मोना ने ज़बरदस्ती उसकी चड्डी भी निकाल दी.

अब वो कमसिन कली बिना कपड़ों के मोना के सामने थी, जिसे देख कर मोना हैरान हो गई कि इतना कसा हुआ बदन और एकदम बेदाग, कहीं पर कोई भी निशान तक नहीं था.

नीतू का फिगर आपको क्या बताऊं.. कोई साइज़ ही नहीं था उसका.. उसके चूचे कोई सेब जितने होंगे.. एकदम कड़क. इन्हें देख कर साफ पता चलता है कि किसी के हाथ इन तक नहीं पहुँचे होंगे. उसकी चुत एकदम क्लीन चमकती हुई. हाँ थोड़े से रोंए उसपे अभी उगना शुरू ही हुए थे और वो फूली हुई जैसे कोई बड़ा पाव हो. मगर बुर की दोनों फांकें ऐसे चिपकी हुई थीं जैसे इन्हें चाकू से काटकर खोलना पड़ेगा.. नहीं तो ये खुलेंगी ही नहीं.

नीतू बहुत शर्मा रही थी मगर मोना ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे ये उसका रोज का काम हो.मोना- अरे नीतू तू ऐसे क्या शर्मा रही है.. क्या तेरी माँ ने तुझे कभी नहलाया नहीं है?नीतू- व्ववो दीदी, मैं जब छोटी थी तब नहलाती थीं.. अब तो मैं खुद नहाती हूँ.मोना- ओये होये छोटी थी जब.. अब तू कौन सी बड़ी हो गई है.. ये तेरे दूधू तो देख इत्ते से हैं और मेरे देख कितने बड़े हैं.

मोना ने उसके मम्मों को मसलते हुए टच करके ये बात कही.. साथ ही उसके चूचों का जायजा भी ले लिया. वैसे मोना को पता था जो वो कर रही है.. वो बहुत जल्दी कर रही है मगर उसके पास टाइम भी कम था. बाबा की बात उसे अच्छे से याद थी और गोपाल की जान भी बचानी थी.

नीतू- आ दीदी दुख़ता है.. ऐसे मत करो ना.मोना- ओह सॉरी सॉरी अच्छा तुमने इन्हें कभी ऐसे नहीं दबाया क्या?नीतू- नहीं दीदी, मैं इनको क्यों दबाऊंगी?मोना- अरे नहाती है.. उस टाइम साबुन तो लगाती होगी ना.. तब दर्द नहीं होता?नीतू- नहीं दीदी, साबुन तो ऐसे आराम से लगाती हूँ.. आपके जैसे दबा कर नहीं.

मोना समझ गई कि नीतूएकदम अनछुई कली हैऔर इसे इस हालत में गोपाल को देना बहुत ख़तरनाक होगा. इसको पहले थोड़ा तैयार करना होगा.मोना- चल अब तुझे अच्छे से नहलाती हूँ… फिर तेरा गोरा बदन और चमक जाएगा.नीतू- दीदी, मैं खुद नहा लूँगी ना!

नीतू अब भी थोड़ी शर्मा रही थी मगर मोना तो अब पक्की खिलाड़ी बन चुकी थी. उसने अपने कपड़े निकालने शुरू किए.

मोना- मेरे सामने नंगी है इसी लिए शर्मा रही है ना.. चल हम दोनों साथ में नहाते हैं बहुत मज़ा आएगा.

मोना को नंगी देख कर नीतू को और ज़्यादा शर्म आने लगी. साथ ही मोना के बड़े मम्मों को देख कर उसको थोड़ा अजीब भी लगा. ये शायद उसका पहला मौका था जब कोई लड़की या औरत ऐसे नंगी उसके सामने थी.

मोना- बस खुश! अब हम दोनों ही नंगी हैं अब तो कोई शर्म नहीं ना.. चल अब हम दोनों मिलकर मज़े से नहाती हैं.

अरे दोस्तो, क्या हुआ यार चलो यहाँ क्यों खड़े हो.

साथियो, आप मुझे मेरी इस हिंदी पोर्न स्टोरी पर मर्यादित भाषा में ही कमेंट्स करेंsupport@mohakkisse.comहिंदी पोर्न स्टोरी जारी है.

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया

कुल भाग: 104
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
भाग 60
भाग 60: पढ़ें
भाग 61
भाग 61: पढ़ें
भाग 62
भाग 62: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 66
भाग 66: पढ़ें
भाग 67
भाग 67: पढ़ें
भाग 68
भाग 68: पढ़ें
भाग 69
भाग 69: पढ़ें
भाग 70
भाग 70: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 72
भाग 72: पढ़ें
भाग 73
भाग 73: पढ़ें
भाग 74
भाग 74: पढ़ें
भाग 75
भाग 75: पढ़ें
भाग 76
भाग 76: पढ़ें
भाग 77
भाग 77: पढ़ें
भाग 78
भाग 78: पढ़ें
भाग 79
भाग 79: पढ़ें
भाग 80
भाग 80: पढ़ें
भाग 81
भाग 81: पढ़ें
भाग 82
भाग 82: पढ़ें
भाग 83
भाग 83: पढ़ें
भाग 84
भाग 84: पढ़ें
भाग 85
भाग 85: पढ़ें
भाग 86
भाग 86: पढ़ें
भाग 87
भाग 87: पढ़ें
भाग 88
भाग 88: पढ़ें
भाग 89
भाग 89: पढ़ें
भाग 90
भाग 90: पढ़ें
भाग 91
भाग 91: पढ़ें
भाग 92
भाग 92: पढ़ें
भाग 93
भाग 93: पढ़ें
भाग 94
भाग 94: पढ़ें
भाग 95
भाग 95: पढ़ें
भाग 96
भाग 96: पढ़ें
भाग 97
भाग 97: पढ़ें
भाग 98
भाग 98: पढ़ें
भाग 99
भाग 99: पढ़ें
भाग 100
भाग 100: पढ़ें
भाग 101
भाग 101: पढ़ें
भाग 102
भाग 102: पढ़ें
भाग 103
भाग 103: पढ़ें
भाग 104
भाग 104: पढ़ें
भाग 105
भाग 105: पढ़ें
भाग 106
भाग 106: पढ़ें
भाग 107
भाग 107: पढ़ें
भाग 108
भाग 108: पढ़ें
भाग 109
भाग 109: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

गर्लफ़्रेंड शिप्रा की मस्त चुदाई
जवान लड़की

गर्लफ़्रेंड शिप्रा की मस्त चुदाई

आज़ मैं आपको अपनी स्टोरी बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी कॉलेज की लड़की मेरी गर्लफ़्रेंड के साथ चुदाई की।यह बात उस वक्त की है.. जब मैं बीसीए के दूसरे सेमेस्टर में था। इसी सेमेस्टर में हमारे कॉलेज में अहमदाबाद से एक लड़की ट्रांसफ़र हुई थी, उसका ...

6 मिनट 1,078
पहली गर्लफ्रेंड के साथ चुदाई के सफर की शुरुआत-1
जवान लड़की

पहली गर्लफ्रेंड के साथ चुदाई के सफर की शुरुआत-1

दोस्तो, मैं आप सबका आर्यन फिर से हाज़िर हूं अपने जीवन का एक और किस्सा लेकर। उम्मीद है आपको मेरी यह कहानी भी पसंद आएगी जिस तरह आप सबने मेरी पिछली कहानी को खूब सराहा और कमेंट और मेल किए। खासकर उन सभी लड़कियों का जिन्होंने मुझसे मिलने की इच्छा जताई और ...

12 मिनट 270
खूबसूरत लड़की मुझपर मरती थी, चुद गयी
जवान लड़की

खूबसूरत लड़की मुझपर मरती थी, चुद गयी

देसी हॉट सेक्स कहानी मेरी एक परिचित लड़की के साथ सेक्स की है. मैं शर्माता था उससे रिश्तेदारी के कारण! लेकिन उसने खुद पहल करके मेरे साथ सम्बन्ध बनाये.

13 मिनट 303

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

शशि राजीव खन्ना

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

सुनील कुमार आगरा बॉय

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।