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चुदाई की कहानी पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,288 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-55

पिंकी सेन

22 Jan 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-55
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अब तक की इस चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा कि अनिता ने अपनी माँ के दूसरे पति गुलशन के साथ चुदाई करने के लिए अपना मन बना लिया था और इस वक्त वो बिस्तर पर चुदाई के लिए गुलशन जी की अंकशयिनी बनी पड़ी थी.अब आगे..

गुलशन जी उसके यौवन को चूमते जा रहे थे. वे उसकी नाभि पे अपनी जीभ घुमाने लगे और एक हाथ से उसकी मखमली चुत, जो आज ही उसने साफ की थी… उस पर हाथ घुमाने लगे.

अनिता- आह… सस्स नहीं उफ़फ्फ़ प्लीज़ आह… ऐसे मत करो पापा आह… मैं मर जाऊंगी आह..

अनिता की बात का गुलशन पर कहाँ असर होने वाला था, वो तो बस उस कमसिन कन्या का रस को पीने में मस्त थे. फिर गुलशन ने अपने तपते होंठ उसकी कुँवारी चुत पर रखे और जीभ से उसकी चुत को चाटने लगे.

अनिता- ऑश माँ मर गई रे आह… नहीं अफ सस्स आह… मत तड़पाओ आह… आह..

गुलशन ने अब उसकी चुत के दाने को मुँह में लेकर चूसा और अगले कुछ ही पलों में अनिता का बाँध टूट गया. उसका चुत बह निकला, चुत रस को गुलशन बड़े प्यार से चाट गए. फिर उसकी चुत को पूरी तरह से चाट कर ऐसे साफ कर प्रिया, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

अनिता गहरी लंबी साँसें लेने लगी, वो तो बस ऊपर की तरफ़ देख रही थी. उसे जो सुख मिला…. उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता. उसके बाद गुलशन उसके पास लेट गए और उसके मम्मों पर हाथ घुमाने लगे.

गुलशन- क्यों मेरी रानी बहुत जल्दी झड़ गई ना तू… मज़ा आया तुझे?अनिता- आपका हमला ही इतना ख़तरनाक था. मैं तो कुँवारी हूँ… कोई शादीशुदा औरत भी ऐसे ही झड़ जाती. ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं मिला, जैसा आज आपने प्रिया है.गुलशन- क्या कभी पहले भी तूने अपना पानी निकाला है? सही बताना या किसी के साथ ये सब किया हुआ है?अनिता- ये कैसी बातें कर रहे हो आप… मैं एकदम कुँवारी हूँ, मैंने कभी ऐसा कुछ किसी के साथ नहीं किया… हाँ बस कभी कभी नहाते वक़्त मन में कुछ उत्तेजना आ जाती तो चुत को ऊपर से रगड़ कर पानी निकाल लेती थी.

गुलशन- मैं जानता हूँ मेरी रानी, बस ऐसे ही मजाक कर रहा था. अब तू भी मुझे प्यार कर मेरे लंड को सहला, उससे खेल… क्योंकि आज के बाद तुझे उसी से सुकून मिलेगा.अनिता- नहीं… मुझे शर्म आती है, मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली.गुलशन- ये क्या है अनिता… तुम ऐसे करोगी तो मुझे लगेगा तुम ये सब मजबूरी में कर रही हो… ख़ुशी से नहीं. मैंने तुम्हें साफ-साफ कह प्रिया था, अगर तुम चाहो तो मैं कभी यहाँ नहीं आऊंगा और तुम्हारी माँ को भी संभाल लूँगा. जब तुमने ‘हाँ’ कहा, तभी मैं यहाँ आया हूँ, अब जो भी करो दिल से करो.अनिता- ठीक है मेरे राजा… आपकी यही मर्ज़ी है तो अब मैं सब कुछ दिल से ही करूँगी. आज आपको इतना सुख दूँगी कि आप खुश हो जाओगे.

गुलशन जी सीधे लेटे हुए थे, उनका लंड अभी तक फुंफकार रहा था. जब अनिता ने गुलशन जी का कच्छा उतारा, तो उसकी तो साँसें ही अटक गईं. अन्दर से अज़गर जैसा भयानक लंड बाहर निकल पड़ा… जो पूरा तना हुआ किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था. उसकी लंबाई और मोटाई का आपको क्या बताऊं… वो एक 10″ लंबा और अनिता की कलाई जितना मोटा था.

अनिता- ओ माय गॉड… ये क्या है… इतना बड़ा और मोटा! नहीं पापा प्लीज़ मुझसे नहीं होगा, इससे तो मैं मर ही जाऊंगी.गुलशन- अरे फिर पापा… तुझे कैसे समझाऊं, मैं तुम्हारा पापा नहीं हूँ और इसको देख कर तेरी माँ तो बहुत खुश हुई थी, तूने भी देखा होगा वो मुझसे शादी के बाद कितनी खुश रहती थी.अनिता- हाँ वो तो सही है मगर इसको देख कर खुश होने की क्या वजह थी?गुलशन- अरे पागल… किस्मत से ही ऐसा लंड किसी को मिलता है… तेरा नशेड़ी बाप उसको चुदाई का सुख नहीं दे पाता था, वो प्यासी थी. मैंने ही उसकी प्यास बुझाई थी और आज तुझे चोद कर अपने लंड की दीवानी ना बना दूँ तो तुम कहना.

अनिता ने डरते डरते लंड को छुआ, फिर वो उसको सहलाने लगी.

गुलशन- अरे चूम इसे… मुँह में ले, फिर देख कैसा मज़ा आता है.अनिता- इतना मोटा मेरे मुँह में कैसे जाएगा और इसकी लंबाई इतनी है, ये तो मेरे गले में उतर जाएगा.गुलशन- हा हा हा ऐसा कुछ नहीं होगा… तू कोशिश तो कर… फिर मज़ा आएगा तुझे.

अनिता ने लंड को चूमना शुरू किया, अब उस पर भी नशा चढ़ने लगा था. वो लंड को मुँह में लेके चूसने लगी. उसको थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी, मगर वो पूरा मज़ा लेके चूस रही थी. फिर गुलशन ने उसको अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी चुत को चूसने लगे… यानि दोनों 69 के पोज़ में थे.

थोड़ी देर बाद गुलशन ने अनिता को नीचे लेटा प्रिया, उसके पैरों को मोड़ कर कमर के नीचे एक तकिया लगा प्रिया, जिससे उसकी चुत ऊपर उठ गई. अब वो अपने भीमकाय लंड को उसकी चुत पे रगड़ने लगे.

अनिता- आराम से करना, आपका लंड बहुत बड़ा है… कहीं मेरी छोटी सी चुत फट ना जाए.गुलशन- डर मत मेरी जान… एक बार तो तुझे दर्द होगा मगर उसके बाद सारी जिंदगी तू मेरे लंड के गुण गाएगी.अनिता- वो तो बाद की बात है, आज पता नहीं आप मेरा क्या हाल करोगे.मैं कुँवारी हूँमेरी चुत बहुत टाइट है… प्लीज़ आप ध्यान से करना.

गुलशन ने उंगलियों से चुत के मुँह को खोला और अपना टोपा उसमें फँसा प्रिया. फिर अनिता की कमर को पकड़ कर एक झटका मारा, टोपा चुत को फैलाता हुआ अन्दर घुस गया और अनिता की दर्दनाक चीख निकल गई. वो संभल पाती कि तभी गुलशन जी ने दूसरा झटका दे मारा. अबकी बार आधा लंड चुत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया. अनिता की सील टूट चुकी थी और उसकी चीखें कमरे में गूंजने लगीं. तभी फ़ौरन गुलशन ने उसके मुँह पे हाथ रखा और आधे लंड को फँसाए हुए ही उस पर लेट गए.

अनिता की आँखों से आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, उसका चेहरा एकदम लाल हो गया. वो दर्द से छटपटाने लगी. मगर गुलशन जी वैसे ही उस पर यूं ही पड़े रहे. कोई 5 मिनट बाद जब वो थोड़ी शांत हुई तब गुलशन ने अपना हाथ हटाया.

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खूबसूरत खता-2

अनिता- एयेए एयेए प्लीज़ निकाल लो आह… बहुत दर्द हो रहा है एयेए आह… मैं मर जाऊंगी प्लीज़.गुलशन- अरे कुछ नहीं होगा भला चोदने से कोई मरता है क्या? मैंने कहा ना… बस आज सहन कर ले, फिर मज़ा ही मज़ा है… तू बोलेगी तब आगे चोदूंगा ठीक है..!अनिता ने कुछ देर बाद कहा- अब धीरे-धीरे करना… जोर मत लगाना.

गुलशन ने आधे लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया. अनिता को दर्द तो हो रहा था मगर वो साँसें रोके पड़ी थी. जब कुछ देर बाद उसकी चुत में लंड एड्जस्ट हुआ तो उसकी चुत में करंट पैदा होने लगा और उसको थोड़ा मज़ा आने लगा.

अनिता- आह… आ ऐसे ही आह… राजा आह… अब दर्द के साथ मज़ा आने लगा है उफ आह… मेरी चुत में कुछ हो रहा है.गुलशन- देख मैंने कहा था ना… अब बस दाँत भींच ले एक झटका और लगाता हूँ, फिर पूरा लंड चुत में घुस जाएगा, उसके बाद मज़े ही मज़े.अनिता- क्क्क..क्या… अभी आधा ही गया है! नहीं प्लीज़ पापा नहीं अब और नहीं जाएगा…. मैं मर जाऊंगी प्लीज़ नहीं.गुलशन- साली कितनी बार कहा… मुझे पापा मत बोल… ले अब संभाल पूरा लंड..!

गुलशन ने अनिता के होंठों को अपने होंठों से लॉक किया और जोर से कमर को पीछे लेके एक धक्का मार प्रिया. अबकी बार उनका अज़गर चुत को फाड़ता हुआ पूरा अन्दर घुस गया और इस बार दर्द की इंतेहा हो गई, बेचारी अनिता इस दर्द से बेहोश हो गई मगर गुलशन अब लंड को स्पीड से आगे-पीछे करने लगे.

दस मिनट तक वो अँधाधुंध चुदाई करते रहे. अब उनका लंड चुत में बराबर अड्जस्ट हो गया था और अनिता को भी होश आने लगा था. वो बस रोए जा रही थी और गुलशन उसको चोदे जा रहे थे.

अनिता- उउउ उउउ आह… प्लीज़ आह… बहुत दर्द हो रहा है आह… आ नहीं आह… आह..

गुलशन पर कोई असर नहीं हुआ, वो तो चुदाई में लगे हुए थे. अब अनिता का दर्द कम हो गया और फिर से वो उत्तेजित हो गई… उसकी चुत में खुजली होने लगी.

अनिता- आह… आ पापा आह… चोदो आह अब मज़ा आने लगा आह… चोदो अपनी सौतेली बेटी को… आह… आ आह.गुलशन- चुप साली आह… ले उहह उहह बदजात तू मेरी रखैल है… उहह उहह ले मुझे बाप बोलकर आह… ले उहह तू बचेगी नहीं ले उह..

गुलशन जी अब हावड़ा मेल की स्पीड से चुदाई करने लगे थे और अनिता इस हमले को सह नहीं पाई, उसकी चुत का झरना बहने लगा.

अनिता- आह… आ आह… आ फास्ट राजा फास्ट आह… मेरी आह… आ चुत आह… पानी आह… निकाल एयेए आह… आ रहा है आह..

अनिता झड़ गई मगर गुलशन जी का लंड चुदाई में लगा रहा, पता नहीं उस लंड में कितना पॉवर था, वो एक ही स्पीड से चुत की माँ चोदने में लगे हुए थे. ऐसे ही 15 मिनट और निकल गए… बस ताबड़तोड़ चुदाई होती रही. इससे अनिता एक बार फिर उत्तेजित हो गई थी. उसकी चुत फिर बहने को तैयार थी. इस बार गुलशन जी भी अपने चरम पे पहुँच गए थे, वो पूरी ताक़त से अनिता को चोद रहे थे.

अनिता- आह… आ पापा चोदो आह… बन जाओ बेटीचोद आह… मैं फिर आह… झरने वाली हूँ आह… फास्ट करो आह… फास्ट..गुलशन- चुप हरामजादी मेरा भी आह… पानी निकलने वाला है… ले साली आह… ले..

फिर दोनों एक साथ झड़ गए, चुदाई का ये तूफान थम गया. अब कमरे में सिर्फ़ दोनों की सांसों का शोर था. जब गुलशन ने लंड बाहर निकाला, तो वीर्य के साथ बहुत सा खून भी बाहर आ गया. पूरी चादर खून से लाल थी और अनिता की मासूम चुत अब खूनी चुत बन गई थी. उसमें सूजन भी आ गई थी.

काफ़ी देर दोनों वैसे ही पड़े रहे, फिर गुलशन ने अनिता को सहारा देकर उठाया, उसको वॉशरूम लेके गए. वहां दोनों ने साथ में सफ़ाई की, फिर गुलशन ने कमरे में आकर बेड को ठीक किया, चादर बदली और अनिता के साथ लेट गए.

कुछ देर बाद दोनों फिर प्यार में मगन हो गए. अबकी बार गुलशन ने अनिता को घोड़ी बना कर चोदा. काफ़ी देर तक वो उसे अलग-अलग तरीके से चोदते रहे और उन्होंने अनिता को इतना थका प्रिया कि उसकी हालत खराब कर दी. फिर उसको कुछ दवा देकर गुलशन वहां से अपने घर चले गए.

मेरे दोस्तो, आप मेरी चुदाई की कहानी पर मर्यादित भाषा में ही कमेंट्स करेंsupport@mohakkisse.comचुदाई की कहानी जारी है.

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

सरोज धामी

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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