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जवान लड़की पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,017 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-33

पिंकी सेन

23 Nov 2025 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-33
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अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि साधना ने टीना के सोये हुएभाई का लंड चूसाऔर उसके लंड का रस साधना के मुँह में चला गया।अब आगे..

साधना को बड़ा अजीब लगा.. कुछ रस तो उसके गले में सीधा चला गया था, जो उसे निगलना पड़ा बाकी उसके मुँह में था वो भाग कर वॉशरूम गई.. मुँह हाथ सब अच्छे से साफ किया। इधर टीना उसको देखकर बस हँसे जा रही थी।

साधना- छी दीदी, ये क्या हो गया.. मॉंटी ने तो पानी छोड़ प्रिया.. कुछ मुझे पीना पड़ गया.. उउउ उउउ उल्टी जैसा लग रहा है।टीना- अरे अरे पागल.. अमृत को वेस्ट कर प्रिया, ये रस किसी-किसी को ही नसीब होता है। तू ज़्यादा सोच मत, यहाँ बैठ आराम से और बता असली लंड चूस कर मज़ा आया ना?

साधना ने मुस्कुराते हुए ‘हाँ’ में सर हिला प्रिया और टीना से लिपट गई।

टीना- क्या बात है मेरी जान.. चल ठीक से बता ना यार.. कैसा लगा मेरे भाई का लंड और उसका रस?साधना- सच बताऊं दीदी डिल्डो और असली लंड में बहुत फ़र्क है। इसको पकड़ने का और चूसने का मज़ा ही अलग है।टीना- पागल असली और नकली में फ़र्क नहीं होगा.. क्या तू भी ना!साधना- हाँ दीदी.. सही कहा आपने.. सच में बहुत मज़ा आ रहा था मगर लास्ट मौके पे आपके भाई ने सब गड़बड़ कर दी।टीना- अरे गड़बड़ कैसी? तूने उसके लंड की इतनी मस्त चुसाई की थी कि अच्छे-अच्छे लंड पानी फेंक दें, फिर ये तो अभी छोटा है।साधना- दीदी उसमें अजीब सी गंध थी और स्वाद भी कितना अजीब था, शुरू में तो वो ठीक सा लगा.. मगर जब गाढ़ा सफेद रस आया तो उससे मुझे घिन सी आ गई।टीना- अरे शुरू में अजीब लगता है मगर बाद में उसे चाटने के लिए दिल बेताब हो जाता है.. तुझे पूरा चाटना चाहिए था।साधना- नहीं दीदी जो अन्दर गया वही बहुत है.. कुछ भी कहो लंड चूसने का मज़ा अलग था.. काश मॉंटी पानी ना फेंकता और मैं उसके लंड को चूसती रहती।साधना- अरे इस छोटे से लंड से क्या होता है.. किसी मर्द का लंड चूस.. फिर देखा कैसा मज़ा आता है।साधना- नहीं दीदी वो मुझसे नहीं होगा। ये तो सोया था तब हिम्मत हो गई, मगर किसी और का.. ना बाबा कहीं उसने मेरे साथ कुछ कर प्रिया तो मैं तो मर ही जाऊंगी।टीना- अरे कोई ज़बरदस्ती कुछ नहीं करता। तुम एक बार ट्राइ तो करो, डर लगे तो मत करना.. सिंपल है।साधना- दीदी, प्लीज़ अभी जाने दो ना ये सब..!

टीना समझ गई इस पर ज़्यादा ज़ोर देना ठीक नहीं। फिर उसकी नज़र मॉंटी पर गई।

टीना- अरे साधना तूने मॉंटी की कैप्री ठीक नहीं की.. उसका लौड़ा तो बाहर ही निकला पड़ा है। दोबारा चूसने का इरादा है क्या?साधना- सॉरी दीदी भूल गई.. वैसे आप बुरा ना मानो तो एक बार और चूस लूँ?टीना- मैं क्यों बुरा मानने लगी मगर अबकी बार उसका पानी पीना होगा समझी.. तभी तुझे रस का स्वाद समझ आएगा।साधना- नहीं दीदी वो बहुत अजीब है.. और ऐसे अचानक पानी आता है तो अजीब लगता है। हाँ अगर पता हो पानी आएगा.. तब मैं उसको हाथ पे ले लूँगी फिर सोचूँगी कि टेस्ट करूँ या नहीं लेकिन ऐसा होगा कैसे?टीना- बहुत आसान है.. तू चूसती रह जब अचानक लंड की गर्मी बढ़ जाए उसमें एक्सट्रा तनाव महसूस होने लगे तो समझ जाना कि बस उसका रस निकलने वाला है।साधना- हाँ दीदी.. उस टाइम ऐसा हुआ था।टीना- गुड यानि तूने महसूस किया था। चल अबकी बार दोबारा ट्राइ कर.. मैं देखती हूँ तू कैसे करती है?साधना- ओके दीदी.. अभी लो आपको दिखाती हूँ।टीना- अरे रुक अभी तो निकला है उसका पानी.. थोड़ा वेट कर फिर निकालना.. ऐसे फ़ौरन थोड़े ही वो खड़ा हो जाएगा।साधना- क्यों दीदी ऐसा क्यों होता है.. इसमें टाइम क्यों लगता है?

टीना ने उसको विस्तार से सब समझाया कि आदमी को गर्म होने में टाइम लगता है.. कोई जल्दी तो कोई ज़्यादा टाइम लेता है।

साधना- अब समझी उस स्टोरी में भी ऐसा ही कुछ लिखा था।टीना- हाँ सही समझी.. चल उसको अभी भूल जा, मैं चाय बना कर लाती हूँ.. फिर आराम से तेरे साथ बातें करूँगी।साधना- मैं भी आपके साथ चलती हूँ।

दोस्तो यहाँ ब्रेक ज़रूरी था। बेचारे मॉंटी को मरवाओगे क्या.. चलो उधर आपके लिए दूसरा गर्म सीन भी तैयार है।

दोपहर को तो दीपक सो गया था मगर नेहा की नादान जवानी उसे रात को कहाँ सोने देने वाली थी।

सबके सो जाने के बाद कमरे में वो दोनों बैठे हुए थे।

नेहा- मामू अभी तो आपके सर में दर्द नहीं है ना?दीपक- नहीं मेरी जान.. सर तो ठीक है मगर इस लंड का क्या करूँ.. इसमें बड़ा दर्द हो रहा है?नेहा- मैं हूँ ना.. आपका चूस कर सारा रस निकाल दूँगी तो दर्द अपने आप चला जाएगा।दीपक- नहीं पगली.. सिर्फ़ चूसने से कुछ नहीं होता.. इसे ठंडा होने के लिए चुत चाहिए.. ये उसी को चोद कर ही ठंडा होगा।नेहा- अरे तो मेरे पास है ना.. उसके अन्दर डाल दो और ठंडा कर लो।दीपक- तू अभी छोटी है.. तेरी चुत में इसे डालूँगा तो तेरी चुत फट जाएगी।नेहा- हा हा हा मामू ये कोई कपड़ा है क्या जो फट जाएगी.. आप भी ना हा हा हा..

‘अब तुझे कैसे समझाऊं पगली.. एक काम कर.. अपने पूरे कपड़े निकाल, आज तुझे समझा ही देता हूँ कि चुत की चुदाई क्या होती है। साला ऐसे तो तुझे देख-देख कर लंड की हालत खराब होती रहेगी। अब कुछ ना कुछ तो जुगाड़ लगाना ही पड़ेगा।’

नेहा तो ख़ुशी-ख़ुशी नंगी हो गई। उसको तो बस मज़ा चाहिए था चुदना क्या होता है.. उसको नहीं पता था। इधर दीपक भी नंगा हो गया और नेहा को बिस्तर पे लिटा कर उस पर पागल कुत्ते की तरह टूट पड़ा।

कभी उसकी छोटी चूचियों को दबाता.. कभी चूसता.. वो नेहा के मुलायम होंठ ऐसे चूसने लगा जैसे आज सारा रस निचोड़ देगा।

जब नेहा एकदम गर्म हो गई.. तब दीपक ने अपनी ज़ुबान से उसकी चुत को चाटा।

नेहा- आह मामू उफ़ आप बहुत अच्छे हो आह ऐसे ही चाटो.. उई और तेज करो.. अह..

आज दीपक का इरादा कुछ और था। वो चुत चाट कर नेहा का पानी नहीं निकालने वाला था। जब नेहा की चुत रिसने लगी.. तो उसने चाटना बंद कर प्रिया और उसके पैरों को मोड़ कर उसके पास बैठ गया।

नेहा- उफ़ मामू क्या हुआ.. मज़ा आ रहा था और चाटो ना प्लीज़ आह..दीपक- रुक मेरी जान अब चुत को चटवाती ही रहेगी.. तो चुदेगी कब? आज तुझे चुदाई सीखनी है तो चुपचाप लेटी रह और मेरे लंड का कमाल देख आज तुझे नया मज़ा देता हूँ।

दीपक ने अपनी उंगली को मुँह में लेके गीला किया, फिर उसको नेहा की चुत पे घुमाने लगा और धीरे-धीरे उंगली को चुत में घुसेड़ने लगा।

नेहा- आह मामू दर्द होता है उफ़ आह…दीपक- तुझे ज़्यादा मज़ा लेना है ना तो इतना सा दर्द नहीं सह सकती.. अभी उंगली से तू ऐसे कर रही है.. तो सोच मेरा लौड़ा कैसे अन्दर ले पाएगी तू.. हाँ बोल?नेहा- सॉरी मामू आप करो.. मैं बर्दाश्त कर लूँगी.. अब कुछ नहीं कहूँगी।

दीपक ने फिर अपना काम शुरू कर प्रिया वो धीरे-धीरे दो इंच तक उंगली को चुत में घुसेड़ने में कामयाब हो गया। अब कुँवारी चुत.. फिर नेहा थी भी छोटी.. उसको दर्द होना लाजमी था। मगर वो बड़ी बहादुर लड़की थी, अपने दाँत को भींच कर दर्द सहन कर गई।

थोड़ी देर दीपक एक उंगली को ही आगे-पीछे करता रहा और नेहा की चुत को चोदता रहा। जब उसको लगा नेहा अब मज़े ले रही है.. तो उसने फिर अपनी दो उंगलियों को गीला किया और चुत में घुसाने लगा।

अबकी बार नेहा को ज़्यादा दर्द हुआ उसने चादर कसके पकड़ ली मगर कोई आवाज़ मुँह से नहीं निकाली। बड़ी मुश्किल से दीपक ने दो उंगली अन्दर घुसाईं.. अब पहले की तरह वो वैसे ही उसको चोदने लगा। नेहा दर्द के मारे अपना सर कभी इधर घुमाती कभी उधर करती।

ऐसे ही 5 मिनट तक दीपक उसको चोदता रहा। अब नेहा को दर्द के साथ मज़ा आने लगा था वो कमर को हिलाने लगी थी।

दीपक समझ गया कि इसको मज़ा आने लगा है वो ज़ोर-ज़ोर से उंगली आगे-पीछे करने लगा। मगर उसने पूरा ख्याल रखा कि ज़्यादा आगे उंगली ना जाए वरना नेहा की सील उंगली से ही टूट जाएगी।

नेहा- आ आह मामू उफ़ आह ये तो आअज्ज और ज़्यादा आ मज़ा आ रहा है, उई मामू करो आह ज़ोर से करो..

दीपक ने सोचा ऐसे तो इसका पानी निकल जाएगा.. अभी ये फुल जोश में है, लौड़ा घुसा देना चाहिए। बस यही सोच कर उसने उंगली बाहर निकाल ली और लंड पर अच्छे से थूक लगा कर उसको चुत के छेद पर सैट कर प्रिया।

नेहा- आह जल्दी करो ना.. मज़ा आ रहा था.. उफ़ आ आप अब आ लंड घुसाओगे क्या.. आह आराम से मामू आपका बहुत मोटा है।दीपक- चुप.. अब चुदवाने की खुजली है तो थोड़ा दर्द भी सह ले।

दीपक ने लंड को हाथ से पकड़ कर चुत में दबाना शुरू किया.. नेहा की आँख में डर साफ दिखाई दे रहा था। दीपक ने थोड़ा ज़ोर लगाया तो चुत की दीवारों को फैलाकर सुपारा अन्दर घुस गया और नेहा के बर्दाश्त का बाँध भी टूट गया, उसके मुँह से एक दमदार चीख निकल गई।

नेहा- उह अहह..

एक झटके में दीपक ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और नेहा के मुँह पर हाथ रख प्रिया।

दीपक- पागल है क्या.. ऐसे क्यों चिल्लाई.. नीचे कोई सुन लेगा तो पता है क्या होगा?

नेहा ने दीपक का हाथ हटाया और सॉरी कहा।

दीपक- सॉरी कहने से क्या होगा.. अच्छा हुआ टाइम पर मैंने लौड़ा निकाल प्रिया।नेहा- मामू बहुत ज़्यादा दर्द हुआ था.. मेरी चीख अपने आप निकल गई।दीपक- ऐसे तो ये लौड़ा मैं तेरी चुत में कभी नहीं पेल पाऊंगा।नेहा- मामू ये बहुत मोटा है.. ऐसे अन्दर नहीं जाएगा।

दीपक- देख दुनिया का सबसे ज़्यादा मज़ा इसी में है, ये पूरा अन्दर जाएगा और तुझे मज़ा देगा समझी।नेहा- हाँ मामू पता है जब उंगली से इतना मज़ा आ रहा था तो इससे और भी ज़्यादा मज़ा आएगा मगर ये जाएगा कैसे?दीपक- जाएगा मेरी जान और कल ही ये तेरी चुत में जाएगा।नेहा- वो कैसे मामू, बताओ मुझे भी।

मेरे प्यारे साथियों आप मुझे मेरी इस सेक्स स्टोरी पर कमेंट्स कर सकते हैं.. पर आपसे एक इल्तिजा है कि आप मर्यादित भाषा में ही कमेंट्स करें क्योंकि मैं एक सेक्स स्टोरी की लेखिका हूँ, बस इस बात का ख्याल करते हुए ही सेक्स स्टोरी का आनन्द लें और कमेंट्स करें।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
m

mohsin khan

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

राजकुमार हीरो

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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