अब तक की इस हिन्दी सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा कि साधना ने कीड़ा काटने के बहाने अपने पापा से अपने मम्मे खूब मिंजवा लिए थे और पापा ने मौका देख कर साधना के एक निप्पल को चूस भी लिया था.इधर टीना ने जब साधना से पापा के साथ कुछ होने के बारे में पूछा तो साधना ने कुछ नहीं बताया.अब आगे..
टीना ने थोड़ी देर तक कुछ सोचा फिर वो साधना को गौर से देखने लगी.साधना- क्या हुआ दीदी, आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हो?टीना- आज पहली बार तू कुछ और बोल रही है और तेरी आँखें कुछ और कह रही हैं.
टीना भी कम नहीं थी, उसने साधना की आँखों में एक नशा देखा, जिससे उसको लगा कि कुछ तो गड़बड़ है.
साधना- नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपसे झूठ क्यों बोलूँगी.टीना- अच्छा.. मतलब कुछ भी नहीं हुआ?साधना- नहीं दीदी मैंने ऐसा कब कहा.. थोड़ा तो हुआ है.. मैं उनकी गोदी में बैठी, उनका लंड फिर से खड़ा हुआ और हाँ जब मैं कपड़े बदल रही थी तो मैंने पापा को अपने बूब्स दिखाने की कोशिश की, मगर वो रूम में आए ही नहीं.टीना- ऐसा बोल ना कुछ हुआ है. तूने तो पहले साफ मना कर प्रिया था. अच्छा ठीक से बता कि कैसे और क्या हुआ था?
साधना ने थोड़ी बहुत बातें बताईं, जो रात को हुई थीं. बाकी लंड चूसना, खेल खेलना, सुबह की बात.. वो सब कुछ छुपा लिया.
टीना- गुड.. इतना हुआ ये काफ़ी है. अब बस एक काम ऐसा हो जाए कि तेरे पापा रात को तेरे साथ सोएं, तब तो तू उनको ज़्यादा तड़पा सकती है.साधना- लेकिन ये कैसे होगा? मेरी माँ भी तो हैं. उनके रहते मैं पापा के साथ कैसे सो सकती हूँ?टीना- तूने कभी अपने ननिहाल के बारे में नहीं बताया.. क्या तेरी माँ वहां नहीं जातीं?
साधना- ऐसा बताने को कुछ खास है भी नहीं दीदी. मेरे नाना तो रहे नहीं, एक मामा हैं और उनकी वाइफ, वे नानी के साथ रहते हैं. पहले तो गाँव में रहते थे मगर अब मामा का काम जयपुर में चलता है, तो वे वहां रहने लगे और मेरी माँ की मामी से बिल्कुल भी नहीं बनती, तो बस काफ़ी टाइम से हम वहां नहीं गए.टीना- अच्छा ये बात है, वैसे उनसे फ़ोन पर तो बात होती होगी ना?साधना- दीदी सच बताऊं तो बहुत साल पहले मैं माँ के साथ गई थी. तब माँ का मामी से झगड़ा हुआ था और मामा और नानी भी माँ के खिलाफ थे, बस तब से आज तक ना कोई फ़ोन, ना आना-जाना.. कुछ नहीं होता.
टीना- शिट.. ये गड़बड़ है काश ऐसा नहीं होता तो तेरी माँ को वहां भेज देते. फिर तेरे पास अच्छा मौका हो सकता था.साधना- कुछ और सोचो ना दीदी, जिससे काम बन जाए.टीना- देख अभी तो दिमाग़ में कुछ नहीं आ रहा. तू अगर चाहे तो मेरे साथ चल सकती है. मेरे पास फ्लॉरा का फ़ोन आया था. उसके मॉम-डैड कहीं बाहर गए हैं, तो रात को वो अकेली रहने वाली है. बस इसी लिए उसने रात को अपने घर में छोटी सी पार्टी रखी है. बाकी सब भी आने वाले हैं. बोल क्या वहां चलती है?साधना- दीदी मन तो बहुत है, मगर पापा नहीं मानेंगे और वैसे भी सब वहां होंगे तो फिर मैं वहां क्या करूँगी?टीना- अरे क्यों.. सब होंगे तो तुझे क्या प्राब्लम है.. एंजाय करना.
साधना- नहीं दीदी आपकी पार्टी में तो सब कुछ होता है ना.. तो नहीं. आप जानती हो ना मैं सिर्फ़ आपके सामने फास्ट हूँ.. बाकी ये चुदाई मुझे पसंद नहीं है. आप समझ रही हो ना.. मैं क्या कहना चाहती हूँ.टीना- अच्छा तो ये बात है. तेरा मतलब वहां चुदाई भी होगी तो तेरा क्या काम?साधना- हाँ दीदी यही कहना चाहती हूँ.टीना- पागल फ्लॉरा भी तो होगी वहां तो कैसी चुदाई.. हाँ? और जरूरी नहीं हर बार चुदाई ही हो.साधना- नहीं दीदी मुझे पता है.. फ्लॉरा भी करती है और उस रात भी कुछ हुआ था, तभी विक्की और वीरू बोल रहे थे मगर दीपक ने उन्हें रोक प्रिया था.टीना- क्या..? तुझे ये सब किसने कहा?साधना- कहने की क्या जरूरत है. इतनी भी नादान नहीं हूँ. हाँ ये सही है कि पहले मैं कुछ नहीं समझती थी, मगर अब सब कुछ समझ आने लगा है.. और वैसे भी फ्लॉरा को देख कर साफ पता लगता है कि उसने चुदाई जरूर की है.
साधना की बात सुनकर टीना तो चक्कर में पड़ गई, उसे यकीन भी नहीं हुआ कि ये लौंडिया कल तक इतनी भोली थी और आज कैसे इतनी बातें समझने लग गई है.
साधना- क्या हुआ दीदी क्या सोच रही हो? आप मैंने कुछ ग़लत कहा क्या?टीना- नहीं.. तू सच में फास्ट हो गई है और तूने जो कहा, वो भी सच है.साधना- तो फिर इसका मतलब दीपक मुझे भी चोदना चाहता है.. क्यों सही ना?टीना- हाँ सही है.. मगर ज़बरदस्ती नहीं.. अगर तुम खुद चाहो तभी, उस दिन फ्लॉरा ने भी खुद कहा था.. तब ही उसकी चुदाई हुई थी.साधना- अच्छा मगर बाकी सब भी तो वहां थे.. फिर कैसे दीपक ने किया?टीना- तुझे शायद पता नहीं, मगर फ्लॉरा पहले से चुदी हुई थी और उस दिन सबके साथ उसने मज़ा किया था. उसे ग्रुप सेक्स कहते हैं.. समझी मेरी जान!साधना- ओह माँ… सबके साथ कैसे? नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. उसको दर्द नहीं हुआ?टीना- बस यही तो बात है मेरी जान.. तू अभी इतनी भी तेज नहीं हुई.. जो ये सब समझ सके. तू अभी बच्ची है समझी!
टीना ने ये बात कुछ ऐसे अंदाज में कही, जैसे वो चुदाई की बहुत बड़ी ज्ञानी पंडित हो और अपने शिष्या को ज्ञान दे रही हो.
साधना- तो दीदी आप कब काम आओगी.. प्लीज़ मुझे इसके बारे में बताओ ना.टीना- अच्छा सुन.. ये जो चुत होती है ना.. ये बड़ी अजीब चीज है. शुरू में तो उंगली भी डालो तो दर्द होता है, मगर एक बार ये लौड़ा खा ले ना.. उसके बाद इसकी भूख बढ़ जाती है. फिर एक नहीं दो लंड भी कम लगते हैं.. और ऐसे ही धीरे-धीरे ये एक बार में ही अनगिनत लंड खाने में पक जाती है. तब जाकर इसकी भूख या यूं कहें कि चुदास खत्म होती है.साधना- ओह माय गॉड.. ये चुदाई तो बहुत ख़तरनाक खेल है. ना बाबा.. मैं तो इससे दूर ही रहूंगी.टीना- मेरी जान तू चाहे कितना भी मना कर.. मगर एक ना एक दिन तू खुद लंड के लिए मुझे कहेगी.. देख लेना.साधना- अच्छा दीदी वो दिन जब आएगा तब की तब देखेंगे, अभी तो आप आज की बात करो.
हमउम्र मौसी के संग रात भर चोदमचोदी
टीना- ठीक है आज की कर लो.. बोलो तुम क्या कहना चाहती हो?साधना- मॉंटी कहाँ हैं दीदी.. मुझे वो दिखाई नहीं दे रहा?टीना- तू मेरे भाई के पीछे क्यों पड़ी है.. अगर लंड चूसने का इतना ही मन है तो आ जा ना पार्टी में.. बहुत सारे लंड मिलेंगे.साधना- नहीं दीदी आप भी ना.. मैं तो बस ऐसे ही पूछ रही हूँ.
टीना- हा हा हा… मैं अच्छे से जानती हूँ. अच्छा सुन आज तुझे एक और मजेदार खेल बताती हूँ.साधना- वो क्या है दीदी.. बताओ तो मुझे!टीना- देख फ्लॉरा के घर पर सब लोग रात को आएँगे, अभी उसमें बहुत टाइम बाकी है. तुम मेरे साथ अभी चलो हम तीनों ही वहां होंगी तो तुझे सब अच्छे से समझ आ जाएगा.साधना- नहीं दीदी पापा गुस्सा करेंगे और वहां कोई आ गया तो?टीना- तू एकदम बुद्धू है. अरे अभी शाम हुई है.. और रात होने में बहुत वक़्त बाकी है. वहां कोई नहीं आएगा.. और रही बात अंकल की, तो उनको तो यही लगेगा कि तू यहाँ मेरे पास है. वैसे भी एक घंटे में तू वापस आ जाना.. कोई प्राब्लम ही नहीं होनी है.
साधना ने थोड़ी देर सोचा फिर ‘हाँ’ कह दी और दोनों सीधे फ्लॉरा के यहाँ चले गए.
फ्लॉरा ने नीले रंग की नाईटी पहनी हुई थी, जिसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी. इन दोनों को देख कर वो बहुत खुश हुई.
फ्लॉरा- वाउ यार टीना, तुम तो साधना को भी साथ लेकर आई हो.. गुड ये अच्छा किया एंड सॉरी साधना मेरे पास तुम्हारा कोई नंबर नहीं था, वरना मैं खुद तुम्हें फ़ोन करती.साधना- अरे इसमें सॉरी की क्या बात है.. और वैसे भी मेरे पास फ़ोन नहीं है. पापा फ़ोन रखना एलाऊ नहीं करते.. और मैं पार्टी में शामिल नहीं हो सकती. अभी वापस जाना पड़ेगा.. नहीं तो पापा गुस्सा करेंगे. मैं तो बस ऐसे ही आपसे मिलने आ गई थी.फ्लॉरा- यार आजकल तो सबके पास मोबाइल है.. इसमें क्या है? कसम से तू ना बहुत सीधी है.. नहीं तो आजकल पापा की सुनता कौन है.. और तुझे यहाँ रुकना होगा यार.. कम से कम खाना तो खाकर जा ही सकती है.
साधना- नहीं प्लीज़.. आप बात को समझो. मैं बिना बताए यहाँ आई हूँ.. फिर कभी जरूर खाना खा लूँगी, पक्का.फ्लॉरा- यार साधना तू किस दुनिया से आई है. आजकल ये सब नॉर्मल है यार.. एंजाय कर.. ऐसे अपनी लाइफ को वेस्ट मत कर!टीना- अच्छा बस बस.. ये ज्ञान बाद में देना. जो काम करना था तूने वो किया कि नहीं.. या तू बस ऐसे ही पार्टी बनाने चली है?फ्लॉरा- टेंशन मत ले यार.. मैंने दीपक को सब बता प्रिया है. वो बियर और नमकीन लेकर आ जाएगा और बाकी खाने का विक्की और साहिल देख लेंगे. बस अब तो रात होने का इंतजार है, फिर मज़ा ही मज़ा आएगा.टीना- तूने चुत को चमका लिया ना.. या अभी बाकी है?
टीना ने ये बात एकदम से कही, जिससे फ्लॉरा और साधना दोनों चौंक गईं क्योंकि इन दोनों का ऐसी बातों को लेकर कभी सामना नहीं हुआ था और दूसरी बात फ्लॉरा के हिसाब से तो साधना बस कुछ देर बाद चली जाने वाली थी.
फ्लॉरा- त्त..तू ये क्या बोल रही है यार.टीना- बस नाटक मत कर साधना को हमारे बारे में सब पता है और वैसे भी साधना और मेरे बीच कोई परदा नहीं है. बस तेरे सामने कभी मौका नहीं मिला तो मैंने सोचा आज तीनों ही खुलकर बातें करेंगे.. मज़ा आएगा.
टीना की बात सुनकर साधना बस मुस्कुरा दी और फ्लॉरा को देखने लगी.
फ्लॉरा- वाउ यार फिर तो कोई टेंशन ही नहीं है.. आज तीनों मिलकर उन सबके लंड निचोड़ देंगे.. बहुत मज़ा आएगा.टीना- नहीं यार, साधना एकदम कुँवारी है. वो ऐसे ग्रुप सेक्स के लिए ठीक नहीं है.फ्लॉरा- वाउ सो स्वीट यार.. इसकी चुत का मुहूर्त भी हो जाएगा और मज़ा भी आएगा.. क्यों साधना क्या कहती हो तुम?साधना- नहीं.. मुझे अभी ये सब नहीं करना है.. दीदी आप बताओ ना प्लीज़!टीना- फ्लॉरा अभी साधना रेडी नहीं है, जब इसका मन होगा.. तब की तब देखेंगे.
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