अब तक की इस हिंदी पोर्न स्टोरी में आपने पढ़ा कि गोपाल ने नीतू से अपने लंड की मुठ मरवा ली थी और मोना ने ये सब देख लिया था.इधर साधना अपने पापा को गरम करने के लिए हर मौके का इस्तेमाल करने की सोच चुकी थी.अब आगे..
साधना ने एक पतली टी-शर्ट और पजामा पहन लिया था, उसका मन अब कुछ और करने का था.
गुलशन जी बाहर आए और साधना को ऊपर से नीचे तक गंदी नज़रों से देखते हुए साधना के खाना बनाने के सवाल पर बोले- अपने पापा का बड़ा ख्याल है तुझे.. आज तो तू परांठे बना.. एकदम कड़क और मसालेदार.. तब मज़ा आएगा.साधना- ठीक है पापा बना देती हूँ. तब तक आप बाहर बैठ कर इंतजार करो.गुलशन- अरे बाहर क्यों? हम दोनों साथ मिलकर बनाते हैं ना, बात भी होती रहेगी और परांठे भी बन जाएँगे.
साधना समझ गई कि उसकी तरह उसके पापा भी उसके मज़े लेने के चक्कर में हैं. अब वो भी कहाँ पीछे रहने वाली थी उसकी शराफत तो कब की हवा हो गई थी. अब तो साधना बस लंड और चुत के खेल को आगे ले जाना चाहती थी.साधना- ठीक है पापा, जैसा आपको अच्छा लगे. चलो आप आलू उबालो, मैं तब तक आटा गूँथ लेती हूँ.
गुलशन जी ने अपना काम निपटा प्रिया और साधना खड़ी हुई आटा गूँथ रही थी. उसकी गांड थोड़ी बाहर को निकली हुई थी, जिसे देख कर गुलशन जी का मन डोलने लगा. वो साधना के ठीक पीछे जाकर खड़े हो गए और लंड को साधना की गांड से टच कर प्रिया.
साधना- क्या कर रहे हो पापा.. मुझे काम करने दो ना.गुलशन- अरे देख रहा हूँ ना कैसे तुम आटा गूँथ रही हो.साधना अपने मन में- अच्छा ये बात है.. देख रहे हो या आप लंड को गांड से सटा कर मज़ा ले रहे हो.
साधना ने कुछ बोला नहीं और गांड को थोड़ा और पीछे कर प्रिया और आटा गूँथने लगी, जैसे वो हिलती, उसकी गांड ऊपर-नीचे होती, जिससे लंड की अच्छी- ख़ासी घिसाई होने लगी.थोड़ी देर ये खेल चलता रहा, फिर साधना ने अपने पापा को एक्सट्रा मज़ा देने की एक तरकीब लगाई. वो कोहनी से अपने पेट पर खुजलाने लगी, जिससे गुलशन जी को भी एक्सट्रा मज़ा लेने का मौका मिल गया.
गुलशन- अरे क्या हुआ है तुम्हें?साधना- वो पेट के ऊपर खुजली हो रही है.. अब हाथ आते में सने हैं तो कोहनी से करूँगी ना.गुलशन- अरे पापा के होते तुम परेशान क्यों होती हो. लाओ मैं कर देता हूँ.. बताओ कहाँ करूं?साधना- नहीं पापा रहने दो.. मैं अपने आप कर लूँगी ना!गुलशन- अरे ऐसे कैसे.. बताओ मुझे, मैं कर दूँगा.. नहीं तो ऐसे ही परेशान रहोगी.
इतना कहकर गुलशन जी ने पीछे से ही साधना के पेट के ऊपर हाथ रख प्रिया.साधना- पापा व्व..वो थोड़ा ऊपर करो.
गुलशन जी ने धीरे-धीरे हाथ को ऊपर करना शुरू किया. अब वो साधना के मम्मों से बस एक इंच की दूरी पर थे.साधना- आह…. नहीं.. रहने दो सस्स.. मैं खुद कर लूँगी ना पापा.गुलशन- अरे मैं तेरा पापा हूँ, ऐसे क्यों बर्ताव कर रही हो.. यहीं करूं क्या?साधना- व्व..वो पापा आपको कैसे बताऊं व्व..वो मेरे कहाँ खुजली हो रही है?
गुलशन जी भी समझदार थे, उन्हें इतना इशारा काफ़ी था. उन्होंने शर्म को साइड में रखा और हाथ सीधे साधना के मम्मों पे रख प्रिया और धीरे-धीरे सहलाने लगे.साधना- सस्स आह.. पापा.. यहीं हो रही है मगर नहीं रहने दो ना.. नहीं प्लीज़ पापा.गुलशन- चुप कर तू.. ऐसे खुजली ज़्यादा होगी.. मैं कर रहा हूँ ना.
गुलशन जी ऐसे बर्ताव कर रहे थे, जैसे ये एक नॉर्मल बात है. फिर साधना ने भी आगे कुछ नहीं कहा, बस वैसे ही खड़ी अपने मम्मों को दबवाती रही. वैसे तो गुलशन जी कपड़ों के ऊपर से मज़ा ले रहे थे, मगर उनका मन था कि वो सीधे साधना के नंगे चूचों को मसल कर मजा लें और साधना भी यही चाहती थी. मगर वो मर्यादा में रहकर सब करना चाहती थी यानि सब कुछ हो भी जाए और गुलशन जी की नज़र में वो सीधी भी बनी रहे.
साधना- बस बस पापा हो गया.. अब सही है. अब आप रहने दो.
गुलशन जी ने हाथ हटा लिया मगर वो वैसे ही खड़े रहे और लंड को गांड पर दबाते रहे और जैसे साधना का मन था कि पापा डायरेक्ट मम्मों को छुएँ.. अन्दर उसने कुछ पहना भी नहीं था तो वो फिर कोहनी से खुजलाने लगी.साधना- ओफफो.. ये आज क्या हो रहा है बार-बार खुजली क्यों हो रही है?गुलशन- फिर से हो गई.. ला मैं करता हूँ.साधना- नहीं पापा रहने दो, ऐसे ही शायद पसीने से हो रहा होगा.गुलशन- अरे कोई चींटी होगी जो काट रही होगी.. मुझे देखने दे, नहीं तो तुझे और ज़्यादा परेशानी होगी.
साधना कुछ कहती, उससे पहले ही गुलशन जी ने हाथ टी-शर्ट में डाल प्रिया और सीधे साधना के नंगे मम्मों पे लगा प्रिया.साधना- ससस्स.. प्प..पापा ये आप क्या..साधना आगे कुछ बोलती तब तक गुलशन जी ने उसके मम्मों को अच्छे से दबा प्रिया और उसके निप्पलों को भी मरोड़ प्रिया. फिर जल्दी से हाथ बाहर निकाल लिया.गुलशन- त्त.. तुमने अन्दर कुछ नहीं पहना.. मुझे पहले क्यों नहीं बोली.साधना- सॉरी पापा व्व..वो मैं बताना चाहती थी मगर आपने मेरी बात सुनी ही नहीं.
गुलशन जी ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे ये अंजाने में हुआ हो.गुलशन- अरे वो उस दिन तुझे कपड़े दिलाए थे.. उसमें वो अन्दर की भी थी ना.. उसे पहना कर.साधना- व्व..वो पापा घर में मुझे अच्छा नहीं लगता इसलिए.गुलशन- अच्छा अच्छा समझ गया.. जाने दे वैसे वो नए कपड़े क्यों नहीं पहनती. वो बहुत अच्छे हैं, तुझपे जमेंगे भी.साधना- बाद में पहन लूँगी पापा.. अभी नहीं.. पहले मैं थोड़ी एड्जस्टमेंट कर लूँ उसके बाद पहनूंगी.
गुलशन- अच्छा ठीक है, जब मर्ज़ी हो पहन लेना.. अच्छा बेटी तुझे बुरा तो नहीं लगा ना.. अभी जो मैंने किया?साधना- नहीं पापा आपने जानबूझ के थोड़े किया.. वो तो ग़लती से हो गया इट्स ओके.गुलशन- अच्छा बेटी वो तेल मालिश और ये बात अपनी माँ को मत बताना. ऐसे उन्हें पता लगेगा तो अच्छा नहीं लगेगा ना.साधना ने बहुत ही सेक्सी अंदाज में मुस्कान दी.
साधना- आप भी ना पापा.. ये बात कोई बताने की थोड़ी है और वैसे भी अपने ऐसा कुछ गलत भी नहीं किया. मेरे दर्द को ठीक किया और अभी खुजली की.. बस यही ना..!
पापा ने बेटी को क्सक्सक्स मूवी दिखा कर चोदा
साधना की बात सुनकर गुलशन जी खुश हो गए, उनको लगा साधना भी यही चाहती है कि उसके पापा उसको मज़ा दें.साधना- क्या हुआ पापा क्या सोच रहे..?बोलते-बोलते वो जोर से उछली जैसे उसको किसी जानवर ने काट लिया हो.
साधना- ओह माँ उफ़फ्फ़ पापा आह..गुलशन- अरे क्या हुआ.. ऐसे क्यों उछल रही हो.. क्या हो गया है?साधना- व्व..वो पापा टी-शर्ट में कोई कीड़ा है.. मुझे जोर से काट लिया.. उफ़फ्फ़..गुलशन- मैंने पहले ही कहा था.. ला इधर आ.. देखने दे मुझे.
गुलशन जी ने मौके का फायदा उठाया और साधना की टी-शर्ट में हाथ डाल कर अबकी बार बारी-बारी दोनों मम्मों को अच्छे से दबाया और मसला.साधना- उफ़फ्फ़ सस्स क्या हुआ पापा.. कुछ मिला क्या?गुलशन- नहीं कुछ नहीं मिला.. मुझे ठीक से देखने दे.. शायद चिंटी होगी.
इतना कहकर गुलशन जी ने टी-शर्ट ऊपर कर दी. अब साधना के नंगे चूचे उनके सामने थे और साधना आँखें बंद किए बस दर्द का नाटक कर रही थी.
गुलशन जी ने एक बार साधना को देखा फिर अच्छे से पूरे मम्मों पर दोबारा हाथ घुमाया और मौका देख कर जल्दी से एक निप्पल को चूस भी लिया.
साधना इस हरकत से एकदम सिहर गई और जल्दी से पीछे हो गई, उसने अपनी टी-शर्ट ठीक की और गुलशन जी से नज़रें चुराने लगी.गुलशन- क्या हुआ साधना.. देखने तो दे.साधना- नहीं पापा निकल गया शायद.. अब आप बाहर जाओ, मुझे काम करने दो.
दरअसल साधना उत्तेजित हो गई थी और वो नहीं चाहती थी कि वो पापा को इससे ज़्यादा मौका दे, वरना कुछ भी हो सकता था.गुलशन जी भी समझ गए कि शायद उन्होंने कुछ ज़्यादा कर प्रिया, तो वो चुपचाप बाहर निकल गए और अपने कमरे में चले गए.साधना ने परांठे बना लिए, तब तक हेमा भी आ गई. सबने खाना खाया और रोज की तरह आराम करने लगे.
उधर मोना ने भी चाल खेली और गोपाल को सूखा ही रहने प्रिया ताकि उसकी तड़फ बढ़ जाए और वो नीतू को चोदने का पक्का मन बना सके.
दोस्तो साधना और मोना की कहानी को थोड़ा ब्रेक लगाओ और बाकी सब की भी खैर-खबर ले लो ताकि आप किसी को भूल ना जाओ.
दीपक और नेहा का तो आपको पता ही है. अब नेहा के पापा आ गए तो उसका यहाँ सोने का प्रोग्राम बंद हो गया. मगर दोपहर को एक बार तो वो दीपक से चुदवा ही लेती है. बाकी दीपक के दोस्त.. तो उनका अभी कोई खास काम है नहीं.. तो उनको जाने दो. उधर फ्लॉरा की कहानी आपको पता ही है, बस उसका एक राज बाकी है, वो भी आपको जल्दी ही बता दूँगी.
अब साधना की कहानी शुरू हो गई है तो इन सबका धीरे-धीरे काम ख़त्म ही समझो. बस मैं कोई खास मौके पर इनसे आपको मिलवा दूँगी और टीना तो वक़्त-वक़्त पे साधना से मिलती ही है, तो आप उसका टेंशन मत लो.
आज सनडे था.. तो टीना अपने भाई को बाहर घुमाने ले गई. शाम तक दोनों ने खूब एंजाय किया और घर आ गए.शाम को साधना उठी और फ्रेश होकर टीना से मिलने चली गई.
टीना- अरे साधना आज सनडे था और तू आई ही नहीं.. मैंने सोचा बाहर जाएँगे.. घूमेंगे, मस्ती करेंगे.साधना- नहीं दीदी आज घर पर थोड़ा काम था इसलिए नहीं आई.टीना- मैंने सोचा आज तू अपने पापा के साथ कोई गेम खेलेगी, ये सोचकर मैं तेरे घर नहीं आई. वैसे बता ना.. कोई काम बना या नहीं?साधना- कोशिश तो बहुत की, मगर कुछ हुआ नहीं दीदी. अब आप कोई नया आइडिया दो, जिससे मैं पापा को तड़पा सकूं.
साधना ने एकदम झूठ कहा और सारी बातें छुपा लीं. अब ये अदा उसमें कैसे आई, ये तो आप अच्छी तरह जानते हो. टीना ने उसे रंडी बनाने के लिए फास्ट बनाया और साधना अब आधी रंडी तो बन ही गई थी. अब तो साधना टीना के साथ ही गेम खेल रही है.. उसने अपनी कहानी टीना से छुपा ली.
बस दोस्तो अब साधना पर जवानी का रंग चढ़ गया है. अब आगे देखो क्या होता है.
दोस्तो, आप मुझे मेरी इस हिंदी पोर्न स्टोरी पर कमेंट्स कर सकते हैंsupport@mohakkisse.comकहानी जारी है.