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मेरी चालू बीवी-118

इमरान

12 May 2026 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-118
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सम्पादक – इमरानमैं तो उनका लौड़ा देखती रह गई, बहुत लम्बा और मोटा था।वैसे तो अंकुर का बहुत ही अच्छा है पर उसका लण्ड 6 इंच के आस पास ही है।

मैंने इतना बड़ा और अजीब तरह का कभी नहीं देखा था, ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसकी चमड़ी उतार दी हो।

मामाजी- हाँ बेटा.. उनका ऐसा ही होता है, उनका खतना कराया जाता है इसलिए खाल काट दी जाती है।उससे चुदाई का मजा कुछ अलग सा आता है।

इसीलिए औरतें अगर एक बार उस तरह के लण्ड से चुदवा लेती हैं तो उनकी दीवानी हो जाती हैं… है ना?

सलोनी- हाँ मामाजी, आप ठीक कह रहे हैं। मैं भी उसको देख कर बहुत ही ज्यादा उत्सुक हो गई थी। एक तो पहले ही अंकुर मुझे प्यासी छोड़ गए थे और फिर उस जैसे लौड़े को देख मेरी बुरी हालत हो गई थी।

पर शाहरूख भाई का डर ही था, मैं बस उसको देख रही थी मगर उसको छूने का बहुत मन था।तभी एक आईडिया मेरे मन में आया!

मैं, रानी और उसका पति, तीनों दरवाजे से ऐसे चिपके थे जैसे उस पर गोंद लगा हो।हम तीनों ही सलोनी के उस राज का एक एक शब्द सुनना चाहते थे।

मेरा तो फिर भी सही था और रानी के पति का भी, क्योंकि वो मजा लेते हुए अपना लण्ड रानी के हाथ से हिलवा रहा था।परन्तु रानी भी इसमें पूरा रस ले रही थी, उसको बहुत मजा आ रहा था।

शाहरूख मेरा बहुत पुराना दोस्त है पर लड़कियों से हमेशा दूर रहता था, वो बहुत ही स्मार्ट है इसलिए हर लड़की उसको लाइन देती है मगर उसने किसी को घास नहीं डाली।

इसीलिए उस समय मैंने सलोनी को उसके सामने बिल्कुल फॉर्मल रहने को कहा था, मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था कि वह सलोनी के साथ कुछ करेगा।

मगर अब तो मामला कुछ और ही लग रहा था!क्या सलोनी के कामुक बदन से शाहरूख जैसे आदमी का ईमान डोल गया था?

मुझे यह सब सुनकर गुस्सा बिल्कुल नहीं आ रहा था बल्कि मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा था, सलोनी भी अपके इस गुप्त राज भरी घटना को बहुत रस ले ले कर सुना रही थी।

सलोनी- मैंने जैसे ही खुद को उस आईने में देखा, मैं खुद ही शर्म के मारे झेंप गई, इस बीच में मैंने खुद की ओर ध्यान ही नहीं प्रिया था, मेरी महीन सी नाइटी मेरी कमर के ऊपर तक सिमट गई थी, चड्डी और ब्रा तो थी ही नहीं, वो तो अंकुर ही खोलकर चले गए थे तो मैं कमर से नीचे हलफ़ नंगी थी, मतलब मेरे खुले हुए नंगे कूल्हे शाहरूख भाई के सामने थे, जिनको देखकर ही वे अपना लण्ड सहला रहे थे।

अब मैं खुद को ढक भी नहीं सकती थी वरना उनको पता चल जाता कि मैं जाग रही हूँ तो मैं ऐसे ही चुपचाप लेटी रही।

तभी मुझे अपने चूतड़ों पर एक भारी हथेली का एहसास हुआ, शाहरूख भाई का ईमान भी डोल गया था, उन्होंने अपना हाथ मेरे चिकने चूतड़ों पर रख प्रिया था तो मेरे शरीर में सनसनाहट होने लगी।

कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।

मैं साँस रोके ऐसे ही पड़ी रही, मगर मेरी नजर सामने आईने पर ही थी।

तभी शाहरूख साब मेरी ओर झुके और उन्होंने अपनी कमर मेरे चूतड़ों से चिपका दी।

मेरे साथ मेरी गीली फ़ुद्दी तक काँप गई थी।

उनके लण्ड का टोपा पीछे से मेरे चूतड़ों के गैप से चूत के मुख पर था, हे भगवान… क्या शाहरूख भाई मुझे चोदने वाले हैं?

मेरी तो साँस भी बाहर नहीं आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे एक गर्म टेनिस बॉल मेरे चूतड़ों में रखी हो।

हाय मेरा क्या होने वाला था?क्या इतना मोटा लौड़ा शाहरुख मेरी इस कोमल सी चूत में घुसाने वाले हैं?

मेरा दिल बैठा जा रहा था और शाहरूख भाई ने वही किया जिसका डर था, वो अपनी कमर को मेरे पास लाते हुए अपने लौड़े को मेरे अन्दर की ओर ले जाने लगे।

मेरी टाँगें अपने आप खुलने लगी, उनके लुल्ले का आधा टोप मेरी चूत के अन्दर रगड़ मार रहा था और आधा चूत के बाहरी होंठों को रगड़ रहा था।

मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं स्वर्ग में हूँ, अभी कुछ देर तक मेरे दिल में यही था कि बस थोड़ी बहुत मस्ती ही करूँगी पर अब ऐसा लग रहा था कि यह लुल्ला पूरा मेरी प्यासी फ़ुद्दी में घुस जाये… फिर चाहे जो हो…!

मैंने खुद अपने चूतड़ पीछे को निकाल दिए और शाहरूख भाई जो लण्ड को मेरी चूत के मुख पर घिस रहे थे, एक गप्प की आवाज के साथ इतना बड़ा सुपारा मेरी चूत के अन्दर चला गया।

‘हाआईइइइ…!!!’

मेरी मुख से जोर से चीख निकली और मैं दर्द के मारे बिलबिला गई।शाहरूख भाई मेरी पीठ से चिपक गए, उन्होंने अपनी कमर बिल्कुल भी नहीं हिलाई।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे पहली बार मेरी चुदाई हो रही हो और मेरी झिल्ली झटके से टूटी हो।

सच बहुत ही दर्द हो रहा था, चूत के दोनों होंठ जैसे चिर से गए थे।

मैंने एकदम से गर्दन घुमाई- भाई आप?बस इतना ही बोल पाई, उन्होंने मेरे होंठ अपने होंठों के बीच में दबा लिए।

एक छोटी सी चिड़िया जैसी थी मैं उनके सामने ! कहाँ वो लम्बे चौड़े बलशाली… और कहाँ मैं जरा सी, कमसिन!अपने मजबूत बाजुओं में कस लिया था उन्होंने… उनकी लम्बी, खुरदरी जीभ मेरे मुँह के अन्दर चारों ओर घूमने लगी।उनसे बचने के लिए मेरी जीभ भी बार बार उनकी जीभ से टकरा रही थी।

मुझे कसने के लिए उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा और आगे को किया जिससे उनका लण्ड चूत की दीवारों को चीरता हुआ कुछ आगे को खिसका।इस बार हल्की चीसें तो उठी पर वैसा दर्द नहीं हुआ, शायद इसलिए क्योंकि उनके लण्ड के टोप ने आगे जगह बना दी थी।

उनके लुल्ले का टोप बहुत ही मोटा था जबकि पीछे वाला भाग कुछ पतला था इसलिए लुल्ले को आगे बढ़ने में ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था।

मामा जी- हो सकता है बेटी, यही लम्बे लण्ड की खासियत होती हो जिससे लण्ड अन्दर जाने में कोई ज्यादा परेशानी न हो, लण्ड का टोपा अपने आप आगे रास्ता बना देता हो? ..हा हा…

सलोनी- हाँ मामाजी.. आप सही कह रहे हैं… शाहरूख भाई ने होंठ चूसते हुए ही काफी अन्दर तक अपना लुल्ला डाल प्रिया था और फिर उतने लौड़े से ही मुझे चोदने लगे, उनका लण्ड मेरी चूत में अन्दर बाहर होने लगा। उन्होंने पेट पर सिमटी मेरी नाइटी को चूचियों से ऊपर तक उठा प्रिया और फिर मेरी दोनों चूचियों को कस कस कर अपनी बड़ी बड़ी हथेलियों में लेकर मसलने लगे।

मैं स्वर्ग में पहुँच गई थी, अब मैं खुद उनके होंठों और जीभ को चूस रही थी, बहुत मजा आ रहा था, उनका लण्ड बहुत ही फंस-फंस कर मेरी चूत आ जा रहा था।

मैं शाहरूख भाई की जकड़ में फंसी हुई इस चुदाई का मजा ले रही थी।

उनकी गति भले ही बहुत कम थी मगर हर क्षण मेरी जान पर बनी थी, जब भी उनका लण्ड आगे जाता या फिर बाहर आता.. मेरा मजे से बुरा हाल था।शायद पहली बार मेरी चूत से इतना पानी निकल रहा था।

अब मेरा दिल करने लगा था कि वो मुझे अच्छी तरह से रगड़ डालें, मुझे खूब जोर जोर से चोदें।

मगर तभी उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया…

‘अह्ह्ह्ह्हाआआआ…!!!’

यह क्या??कहानी जारी रहेगी।

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