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नौकर-नौकरानी पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 178 बार

मेरी चालू बीवी-33

इमरान

10 Aug 2025 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-33
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इमरानमगर मीनू की चूत बिलकुल अनछुई थी, उस पर अभी बालों ने आना शुरू ही किया था…

जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या…इतनी प्यारी कोमल मीनू की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी… उसकी चूत से निकल रहे कामरस की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी…मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी…मीनू- अह्ह्हा… आआआ… स्श…वो जोर से तड़फी… उसने अपनी कमर उठा बेकरारी का सबूत प्रिया…मैं उस खुशबू से बैचेन हो गया और मैंने अपनी जीभ उसके चूत के मुँह पर रख दी…बहुत मजेदार स्वाद था… मैं पूरी जीभ निकाल चाटने लगा… मुझे चूत चाटने में वैसे भी बहुत मजा आता था…और मीनू जैसी कमसिन चूत तो मक्खन से भी ज्यादा मजेदार थी…मैं उसकी दोनों टाँगें पकड़ पूरी तरह से खोलकर उसकी चूत को चाट रहा था… मेरी जीभ मीनू के चूत के छेद को कुरेदती हुई अब अंदर भी जा रही थी…उसकी चूत के पानी का नमकीन स्वाद मुझे मदहोश किये जा रहा था… मैं इतना मदहोश हो गया कि मैंने मीनू की टाँगें ऊपर को उठाकर उसके चूतड़ तक चाटने लगा…कई बार मेरी जीभ ने उसके चूतड़ के छेद को भी चाटा…मीनू बार बार सिसकारियाँ लिए जा रही थी…हम दोनों को ही अब सलोनी की कोई परवाह नहीं थी…मैंने चाट चाट कर उसका निचला हिस्सा पूरा गीला कर प्रिया था… मीनू की चूत और गांड दोनों ही मेरे थूक से सने थे…मेरा लण्ड बुरी तरह फुफकार रहा था…मैंने एक कोशिश करने की सोची… मैंने मीनू को ठीक पोजीशन में कर उसके पैरों को फैला लिया… और अपना लण्ड का अग्रमुण्ड उसकी लपलपाती चूत के मुख पर टिका प्रिया…यह मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीं पल था…एक अनछुई कली… पूरी नग्न… मेरे नीचे दबी थी…उसके चिकने कोमल बदन पर एक चिंदी वस्त्र नहीं था…मैंने उसके दोनों पैरों को मोड़कर फैलाकर चौड़ा कर प्रिया… उसकी छोटी सी चूत एकदम से खिलकर सामने आ गई…मैंने अपनी कमर को आगे कर अपना तनतनाते लण्ड को उन कलियों से चिपका प्रिया…मेरे गर्म सुपारे का स्पर्श अपने चूत के महाने पर होते ही मीनू सिसकार उठी…मैं धीरे धीरे उसी अवस्था में लण्ड को घिसने लगा..दिल कर रहा था कि एक ही झटके में पूरा लण्ड अंदर डाल दूँ…मगर यही एक शादीशुदा मर्द का अनुभव होता है कि वो जल्दबाजी नहीं करता…मैंने बाएं हाथ को नीचे ले जाकर लण्ड को पकड़ लिया, फिर कुछ पीछे को होकर लण्ड को चूत के मुख को खोलते हुए अंदर सरकाने की कोशिश करने लगा।मीनू बार-बार कमर उचकाकर अपनी बेचैनी जाहिर कर रही थी…शायद दस मिनट तक मैं लण्ड को चोदने वाले स्टाइल में ही चूत के ऊपर घिसता रहा…1-2 बार सुपारा जरा जरा… सा ही चूत को खोल अंदर जाने का प्रयास भी कर रहा था..मगर मीनू का जिस्म अभी बिल्कुल दर्द सहने का आदि नहीं था… वो खुद उसे हटा देती थी…शायद उसको हल्के सी भी दर्द का अंदाजा नहीं था… उसको केवल आनन्द चाहिए था ..इसलिए हल्का सा भी दर्द होते ही वो पीछे हट जाती थी..इससे पहले भी मैंने 4-5 लड़कियों की कुंवारी झिल्ली को भंग किया था और उस हर अवस्था का अच्छा अनुभव रखता था ..जिन 4-5 लड़कियों की मैंने झिल्ली तोड़ी थी उनमें एक तो बहुत चिल्लाई थी, उसने पूरा घर सर पर उठा लिया था..मुझे यकीन था कि मीनू अभी तक कुंवारी है..उस सबको याद करके एवं सलोनी के इतना निकट होने से मैं यह काम आसानी से नहीं कर पा रहा था…मुझे पता था कि मीनू आसानी से मेरे लण्ड को नहीं ले पायेगी और अगर ज़ोर से झटके से अंदर घुसाता हूँ तो बहुत बवाल हो सकता है…

खून-खराबा, चीख चिल्लाहट.. और ना जाने कितनी परेशानी आ सकती है…हो सकता है सलोनी भी इसी सबका इन्तजार कर रही हो…फिर वो मेरे ऊपर हावी होकर अपनी रंगरलियों के साथ-साथ दबाव भी बना सकती है…मेरा ज़मीर खुद उसके सामने कभी नीचे दिखने को राजी नहीं था…वो भी एक चुदाई के लिए… क्या मुझे अपने लण्ड पर काबू नहीं है..??मुझे खुद पर पूरा भरोसा है, मैं अपने लण्ड को अपने हिसाब से ही चुदाई के लिए इस्तेमाल करता हूँ…. ज़बरदस्ती कभी करता मैं…और जो तैयार हो उसको छोड़ता नहीं…मीनू के साथ भी मैं वैसे ही मजे ले रहा था… मुझे पता था कि लौंडिया घर की ही है… और बहुत से मौके आएँगे… जब कभी अकेला मिला तब ठोक दूँगा…और अगर प्यार से ले गई तो ठीक.. वरना खून खराबा तो होगा ही….मीनू की नाचती कमर बता रही थी कि उसको इस सब में भी चुदाई का मजा आ रहा है…खुद को मजा देने के लिए मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत के पूरा लेटी अवस्था में चिपका प्रिया और मैं ऊपर-नीचे होकर मजा लेने लगा…लण्ड पूरा मीनू की चूत से चिपककर उसके पेट तक जा रहा था…उसकी चूत की गर्मी से मेरा लण्ड लावा छोड़ने को तैयार था पर लगता है कि मीनू की चूत के छेद पर अब लण्ड छू नहीं पा रहा था या

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उसको पहले टॉप के धक्कों से ज्यादा आनन्द आ रहा था…उसने कसमसाकर मुझे ऊपर को कर प्रिया, फिर खुद अपने पैरों को मेरी कमर से बांधकर अपना हाथ नीचे कर मेरे लण्ड को पकड़ लिया…उसके पसीने से भीगे नरम छोटे हाथों में आकर लण्ड और मेरी हालत ख़राब होने लगी…उसने लण्ड के सुपारे को फिर अपनी चूत के छेद से चिपकाया और कमर हिलाने लगी…अब मैं भी कमर को थोड़ा कसकर आगे पीछे करने लगा…उसके कसे हुए हाथों में मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरा लण्ड चूत के अंदर ही है…मैं जोर जोर से कमर हिलाने लगा जैसे चुदाई ही कर रहा हूँ…मीनू लण्ड को छोड़ ही नहीं रही थी कि कहीं मैं फिर से लण्ड को वहाँ से हटा न लूँ…कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

जीतू चौधरी

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

विजय अग्रवाल

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

शर्लिन Xxx

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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