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Office Sex पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 424 बार

मेरी चालू बीवी-89

इमरान

07 Feb 2026 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-89
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सम्पादक – इमरानअपने ऑफिस में मैं अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर आराम-मुद्रा में बैठा सिगरेट के कश लगाता हुआ, मस्ती के पलों को जी रहा था…

सामने शीशे पर पड़ा हुआ परदा पूरा हटा हुआ था, सामने जहाँ मेरा स्टाफ पूरी लगन के साथ अपने-अपने काम में लीन था, वहाँ काफी चहल-पहल थी।

और शीशे के ठीक बराबर में जो सोफ़ा पड़ा था, वहाँ रोज़ी मस्ती में नहाई हुई अपने रस में डूबे अंगों को लिए लेटी हुई थी।

मैं उसके अंगों को बड़े आराम से देख रहा था, जब भी वो हिलती, अपने पैरों को ऊपर नीचे करती या फिर घूम जाती, उसकी जांघों का जोड़ और यौवन से लदे चूतड़ बार-बार मेरे लण्ड को आमंत्रण दे रहे थे।

वाह क्या दिलकश नजारा था…

सिगरेट से कहीं ज्यादा नशा उसके अंगों को देखकर चढ़ रहा था, यह मेरा दिल ही जानता है कि मैंने कैसे खुद को रोका हुआ था।

अगर कुछ देर और रोज़ी ऐसे ही रहती तो शायद मैं खुद को नहीं रोक पाता।

पर रोज़ी की शर्म फिर से वापस आ गई और वो सोफे से उठकर जल्दी से खुद को व्यवस्थित करने लगी।

उसकी साड़ी तो पहले से ही अस्त-व्यस्त थी तो उसने उठते हुए साड़ी को अपने बदन से हटा ही प्रिया।वो केवल पेटीकोट और ब्लाउज में बहुत सेक्सी लग रही थी।रोज़ी का पेटीकोट बहुत ही झीने कपड़े का था, कपड़े से उसकी टाँगें और सभी कुछ दिख रहा था।ये सब बहुत ही सेक्सी लग रहा था।

उसने मेरी ओर देखे बिना ही अपने पेटीकोट के नाड़े को सीधा करके बाहर निकाला, शायद उसको अपना पेटीकोट सही करना था।

मैं बिना पलक झपकाये उसको देख रहा था… उसने पेटीकोट के नाड़े को खींच कर खोला, पेटीकोट पहले ही नाभि से काफी नीचे बंधा था, नाड़ा खुलने से वो नाभि के पास से कुछ ओर नीचे खिसक गया।

मुझे उसकी चूत का ऊपरी हिस्सा तक दिख गया था तो मेरे मुख से अह्ह्हाआआ निकल गई।

रोज़ी ने पेटीकोट पकड़े पकड़े ही नजर उठाकर मुझे देखा और वो शरमा गई…

रोज़ी मुझे देखकर वैसे ही शरमाकर मेरी ओर पीठ कर लेती है, उसके घूमने से अब उसका चेहरा शीशे की ओर हो गया तो पहली बार उसने उस शीशे में से सबको देखा…

दो जने ठीक शीशे के सामने खड़े बात कर रहे थे।

बस यही वो क्षण था… उसने जैसे ही शीशे में से सबको देखा और…

स्वाभावि ही उसके मुख से एक जोरदार चीख निकली और उसके दोनों हाथ उसके चेहरे पर आँखों को ढकने के लिए उठ गए।पेटीकोट उसके हाथ से छूट गया, जिसने नीचे जमीन चूमने में एक क्षण भी नहीं लगाया।

अब रोज़ी कमर के नीचे पूरी नंगी थी… लेकिन फिर भी उसके नंगे चूतड़ों का दृश्य की मुझे बस जरा सी झलक ही मिली।

क्योंकि रोज़ी वहाँ से दौड़ कर तुरंत मेरे सीने से लग गई… शायद अपनी शर्म को छिपाने का नारी को यही सबसे सुलभ उपाय लगता है।

मैंने हंसते हुए अपनी सिगरेट बुझाई, उसको डस्टबिन में डालने के बाद उसकी पीठ पर हाथ रख उसको खुद से चिपका लिया।

मैं- क्या हुआ जानेमन?उसने कुछ नहीं कहा… बस तेज तेज सांस लेते हुए उसने अपने एक हाथ से शीशे की ओर इशारा किया।

मैं खुद कुर्सी से खड़ा हुआ और उसको भी उठाकर खड़ा किया।

वो अभी भी मेरे सीने से चिपकी थी, उसकी पीठ पर रखे, अपने हाथ को सरकाकर मैं उसके चूतड़ों पर ले गया और नंगे चूतड़ों की एक गोलाई को मसलते हुए ही उससे कुछ मस्ती करने के लिए मैंने कहा- हा हा हा तो क्या जानेमन… पेटीकोट भी निकालकर उनको ये सब क्यों दिखा रही हो?

मैं उसकी चूतड़ों की दरार में उंगली फिराते हुए उंगली उसकी चूत तक ले गया।

उसने एक जोर की सिसकारी ली- …अह्ह्हाआआ क्या करते हो सर आप…? प्लीज वो परदा बंद करो ना… और यह आपने ही खोला होगा ना?

मैं- अरे घबराओ मत मेरी जान… यह तो बस मनोरंजन ही है… यह ‘वन साइड व्यू ग्लास; है… हम तो बाहर देख सकते हैं मगर उधर से कुछ नहीं दिखेगा।

अब शायद उसको समझ आ गया था क्योंकि उसने भी उधर खड़े होकर कई बार अपने बाल सही किये थे।

उधर से किसी को भी खुद का अपना अक्स ही नजर आता है।

यह सब जानने के बाद भी वो मेरे सीने से लगी रही, मेरा हाथ कभी उसके नंगे चूतड़ों के सम्पूर्ण भाग को सहलाता, कभी उसके चूतड़ों की दरार तो कभी उसके गुदाद्वार को कुरेदता, तो कभी मैं चूतड़ों के नीचे उसकी चूत को भी सहला देता।

उसने एक बार भी मेरे हाथ को ना तो हटाने की कोई कोशिश की और ना ही हल्का सा भी विरोध किया।

मेरा लण्ड आगे से उसकी नंगी चूत को छू रहा था पर वो अभी भी पैंट के अंदर ही था।

मेरा दिल कह रहा था कि यार… लौंडिया पूरी गर्म है… निकाल लण्ड और डाल दे चूत में…

मगर दिमाग अभी उसको बहुत आराम से चोदने के मूड में था… वो कोई भी जल्दबाजी करने की इजाजत नहीं दे रहा था।

मैंने ही रोज़ी को थोड़ा सा अपने से अलग करते हुए कहा- मेरी जान… उधर सबको देखते हुए आराम से कपड़े पहनो, फिर देखो कितना मजा आता है…हा हा हा ह…

रोज़ी ने उउह्ह्ह्हूऊउ करते हुए… अपने कपड़े उठाये और दूसरी तरफ जाकर अपना पेटीकोट और साड़ी पहनी।

फिर करीब एक घंटे तक तो वो बड़ी ही विचलित सी रही मगर बाद में उसकी समझ में आ गया और उसकी आँखों में एक अलग ही प्यार मुझे अपने लिए नजर आया।

कुछ देर तक तो मैं अपनी थकन उतारता रहा और कुछ ऑफिस का काम किया, 2-3 बार नीलू को भी कॉल किया मगर फिर फ़ोन नहीं लगा… लगता था उसको चार्ज करने का समय नहीं मिला था।

पर पहली बार ऐसा हुआ था कि उसने किसी और के फोन से भी मुझे कॉल करके नहीं बताया था… शायद किसी जरुरी कार्य में ही फंस गई थी।

हे भगवान, उसके साथ सब कुछ सही हो…

फिर कुछ फ्री होने के बाद मैंने सलोनी को फोन करने की सोची मगर तभी नलिनी भाभी की कॉल आ गई।

कहानी जारी रहेगी।

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मेरी चालू बीवी

कुल भाग: 129
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भाग 84
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भाग 86
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भाग 90
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17 मिनट 1,309

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अर्नब बनर्जी

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

राम शर्मा

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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