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मेरी चालू बीवी-58

इमरान

29 Oct 2025 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-58
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सम्पादक : इमरान

सलोनी खूब मस्ती से मेरे साथ बैठी थी, वो शायद भूल गई थी कि उसकी स्कर्ट बहुत छोटी है और उसने कच्छी तक नहीं पहनी है, जरा भी हिलने डुलने से बाकी लोगों को बहुत कुछ दिख जाने वाला था।

हम नाइट क्लब में पहुंचे… पार्किंग गेट पर ही एक लड़के ने सलोनी की ओर वाला दरवाजा खोल अदब से उसको उतरने के लिए कहा और सलोनी अपना बायां पैर बाहर रख उतरने लगी…

मेरी नजर उस लड़के पर ही थी, उसकी फैलती आँखे बता रही थीं कि उसने वो देख लिया जिसकी उसने अर्चना नहीं की थी !

उस लड़के की नजर सलोनी की स्कर्ट में ही थी… उसने सोचा होगा कि कच्छी देख लूंगा… मगर यहाँ तो… कच्छी ही गायब थी तो क्या दिखा होगा…??

मैं गाड़ी पार्क करके सलोनी के पास आया, वो लड़का अभी भी सलोनी को भूखी नजरों से घूर रहा था…

सलोनी इसे अपनी खूबसूरती मान रही थी, वो शायद भूल गई थी कि उसने कच्छी नहीं पहनी क्योंकि वो बहुत बिंदास होकर चल रही थी…

मैंने भी उसको याद दिलाना उचित नहीं समझा… मैं भी उसके मस्ताने रूप और अंदाज का मजा लेना चाहता था।

उसके चलने से हल्की हल्की उड़ती स्कर्ट माहौल को बहुत गर्म बना रही थी।

वो लड़का हमारे गेट के अंदर जाने तक सलोनी की टांगों को ही देखता रहा…

सबसे पहले हम बार में ही गए और कोने वाली डबल सीट पर बैठ गए, कुछ देर बाद वेटर आया, वो भी सलोनी को भूखी नजरों से ही घूर रहा था।

वैसे तो वहाँ और भी जोड़े बैठे थे मगर सलोनी जैसी सेक्सी कोई नहीं थी इसीलिए ज्यादातर वहाँ बैठे हमें ही देख रहे थे।

मैंने वोडका आर्डर की, मुझे पता था कि सलोनी वोडका ही पसंद करती है… सलोनी ने कोई विरोध नहीं किया…

वैसे तो वो 1-2 पेग ही पीती है मगर मैंने आज उसको अपने साथ 4-5 पेग पिला दिए तो वो कुछ ज्यादा ही नशे में हो गई थी… बार बार उठकर बड़बड़ाने लगती थी…

अब मुझे खुद पर गुस्सा भी आ रहा था कि मैंने क्यों उसको ज्यादा पिला दी…

तभी उसको उलटी जैसी फीलिंग होने लगी…अब मैं घबरा गया, मैंने के वेटर को बुलाया…उसने मुस्कुराकर कहा- घबराओ मत साहब… मैं मेमसाब को वाशरूम तक ले जाता हूँ…

और वो सलोनी को पकड़कर बड़े अदब के साथ वाशरूम की ओर ले गया…मैं अपना बचा हुआ पेग ख़त्म करने लगा…

करीब दस मिनट में भी जब सलोनी नहीं आई तो मैं उसको देखने के लिए चल पड़ा… मुझे घबराहट होने लगी कि यार यह कहाँ गई…और तभी…!!!

कभी-कभी शराब पीने का लालच भी कितना बुरा होता है केवल एक पेग पीने के लिए मैं कितना बावला सा हो गया था… मैंने अपनी स्वप्न सुंदरी, अति खूबसूरत कामुक बीवी को जो इस समय अर्धनग्न अवस्था और नशे में थी, उसको एक अजनबी के साथ भेज प्रिया था…

जरा सी असावधानी ही दूसरे को बता सकती थी कि उसकी चूत बिना किसी आवरण के है और इस नशे की हालत में तो उसको अपनी स्कर्ट क्या टॉप का भी ध्यान नहीं होगा…

अगर उसको पकड़ने के लिए ही उस वेटर ने उसके चूतड़ों पर हाथ रखा होगा तो उसको सलोनी के नग्न चूतड़ों का आभास हो गया होगा…

और अगर उसने उसके चूतड़ों को जरा भी सहलाया तो मुझे तो सलोनी पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं था…

जो हर समय गरम और हर काम के लिए तैयार रहती हो… जिसे सेक्स में हर कार्य केवल आनन्द मात्र लगता हो…

चाहे आदमी कोई हो… बस ज़िंदगी का मजा आना चाहिए… वो क्या वेटर को मना करेगी… हो सकता है खुद ही उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत में ले ले…

और मैंने ऐसी हालत में अपनी पत्नी को उस हवशी वेटर के हवाले कर प्रिया था… ना जाने पिछले 10-15 मिनटों में उसने सलोनी के साथ क्या क्या किया होगा…

मैं साइड में बनी गैलरी में दोनों और देखता हुआ जा रहा था कि मुझे वहीं एक तरफ काफी गंदगी दिखी जो फैली हुई थी…

वो जरूर किसी की वोमिट (उलटी) ही थी… लगता था जैसे सलोनी ने वहीँ उलटी कर दी हो… तभी एक तरफ बने कमरे से कुछ आवाज सी सुनाई दी…

मैंने देखा कमरा जरा सा खुला था… डर तो बहुत लग रहा था मगर फिर भी मैं बिना नोक किये ही अंदर चला गया…

अंदर कोई नहीं था… हाँ उस कमरे के अंदर भी एक बाथरूम था… वहाँ से बड़ी भयानक आवाजें आ रही थी…

मैंने थोड़ा निकट जाकर सुनने की कोशिश की…

लड़का- साली फाड़ दूंगा… थोड़ा और झुक…लड़की- अह्ह्ह्ह्ह्हीई ईईईईईई… ईईई नहीईइइइइइ इइइइइ… निकाल लो मर जाऊँगी…लड़का- अह्हा हा हा हा ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बस चला गया पूरा अंदर… कोई नहीं मरता चुदाई से…

बस इतना सुनना था… मैं हड़बड़ा गया और मुझे सलोनी का ख्याल आ गया और मैंने फटाक से दरवाजा खोल प्रिया…

ओह थैंक्स गॉड…

सामने एक लड़की जिसने बहुत ज्यादा मेकअप किया था, कोई बार डांसर जैसी ही लग रही थी…

बिल्कुल नंगी… कपड़े की एक चिन्दी तक नहीं थी उसके बदन पर…

कमोड पर झुकी थी और एक मोटा, काला सा आदमी नीचे से नंगा… पीछे उसकी कोमल सी गांड में अपना लण्ड घुसाये आगे पीछे हो रहा था…

बड़ा ही सेक्सी नज़ारा था…मगर लड़की के चेहरे से दर्द महसूस हो रहा था…दोनों ने ही एक साथ मेरे को देखा…

लड़की- ओहह्ह्ह्ह्ह… बचा लो साहब… बहुत दर्द हो रहा है…आदमी- कौन है बे तू..?और लड़की से… चुप कर साली ! हजार रुपये लेते हुए दर्द नहीं हो रहा था?

लड़की- अरे तो चूत मारते ना… इतना मोटा खूटाँ… गाण्ड में ठूंस प्रिया… आह्ह्ह्हाआआआ माआआआ मर गई… ओह्ह्ह्ह बहुत दर्द कर रहा है…

मैं- अर्र्… ऐ ऐ ऐ ये आप लोग हो… व्ववओ एक लड़की कोई यहाँ… वो छोटी सी स्कर्ट और…

आदमी बहुत बेशर्म था… वो अब भी उस लड़की के चूतड़ों पर हाथ से मारते हुए लगातार उसको चोदने में लगा था, बोला- अरे वो गोरी सी छमिया… जो स्कर्ट के नीचे नंगी थी… अरे बहुत कसा हुआ माल है यार… उसको तो वो साला श्याम बराबर वाले कमरे में ले गया है… चोद रहा होगा साला… क्या चिकनी और कसी हुई चूत थी उसकी यार… उंगली तक अंदर नहीं जा रही थी…

उसने अपनी पहली उंगली को ऐसे सूंघा जैसे उसने खुद अपनी उंगली अंदर डाली हो…

लड़की- साहब बचा लो उसको… बिल्कुल नई ही लग रही थी… अह्हा हाँ आहा… ववो श्याम बहुत ही कमीना है… अह्हा अह्हा…

लगता था अब उस लड़की को भी चुदाई में मजा आ रहा था… पर मुझे उनकी चुदाई देखने का कोई शौक नहीं था… मुझे सलोनी की चिंता हो रही थी…

मैं जल्दी से वहाँ से निकला और बराबर वाले कमरे में देखा…

ओह यह कमरा तो अंदर से बंद था… मैंने जल्दी से कमरे को ज़ोर ज़ोर से खटखटाया… खट… खट… खट… खट… खट… खट… खट…

कई बार जोर से थपथपाने के बाद आवाज आई- कौन है…????

मैं- अरे श्याम खोल जल्दी से…

मैंने जान बूझकर उसका नाम लिया और मेरी ट्रिक काम कर गई…

तुरंत दरवाजा खुला, मैंने एक झटके में दरवाजा पूरा धकेला और अंदर घुस गया…

श्याम- अर्रर रे रे रे क्या है…????

मैं- साले कमीने… इसे यहाँ क्यों ले आया तू? तुझे क्या कहा था…

अब उसने मुझे पहचान लिया…

श्याम- वो साहब, मेमसाहब को बाहर ही उलटी हो गई थी… सब होटल गन्दा कर प्रिया… फिर बेहोश हो गई तो मैंने यहीं लिटा प्रिया था…

कहानी जारी रहेगी।

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

वर्चुअल वर्मा

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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