होम पर वापस जाएं
पड़ोसी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 374 बार

मेरी चालू बीवी-39

इमरान

29 Aug 2025 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-39
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

इमरानमैंने मोबाइल निकाल समय देखा… करीब आधा घंटा मुझे घर से निकले हो गया था… मीनू भी वहाँ थी तो अरविन्द अंकल सलोनी से ज्यादा मजा तो नहीं ले पाये होंगे… और मैंने तो यहाँ पूरा काम ही कर प्रिया था…

पर कहीं ना कहीं दिल सलोनी के बारे में जानने को कर रहा था…

तभी नलिनी भाभी ने मेरे लण्ड को भी कपड़े से साफ़ किया… फिर उसको चूमकर मेरी पैंट में कर प्रिया…

मैंने उनको चूमा और वहाँ से निकल आया…

मैंने अपने फ्लैट की ओर देखा… दरवाजा बंद था… मतलब अंकल अभी भी अंदर ही थे…

मैं अभी प्लान कर ही रहा था कि मुझे सीढ़ियों से मीनू आती नजर आई…

मैं चोंक गया… मीनू यहाँ है… तो क्या बंद फ्लैट के अंदर अंकल और सलोनी अकेले हैं… ओह क्या वो दोनों भी चुदाई कर रहे हैं…???

मीनू मुझे आश्चर्य से देख रही थी…

मैंने उसको आँखों में देखते हुए ही पूछा- कहाँ गई थी तू??

मीनू जैसे उसने कुछ सुना ही नहीं- अरे भैया आप यहाँ… इस समय?

मैं- मैंने तुझसे कुछ पूछा…

मीनू अपने हाथ में सिगरेट की डब्बी दिखाते हुए- अंकल ने मंगाई थी…

मैं- क्या कर रहे हैं वो दोनों अंदर????

मीनू ने कंधे उचकाए- मुझे क्या पता??

मैं- कितनी देर हो गई तुझे निकले हुए…

मीनू- अभी तो गई थी… हाँ दुकान पर कुछ भीड़ थी…

मुझे पता था कि बाहर कॉलोनी तक जाने इतनी सीढ़ियां… इस सबमें करीब 15 मिनट तो लगते ही हैं… इसका मतलब पिछले 15-20 मिनट से दोनों अंदर हैं और दरवाजा भी लॉक कर लिया…

साला अरविन्द मेरी बीवी से पूरा मजा ले रहा होगा… अब देखा कैसे जाये…

तभी मुझे रसोई वाली खिड़की नजर आई और मैं चुपचाप मीनू को वहाँ ले गया…

मेरी किस्मत कि खिड़की खुली थी… हाँ उसके दरवाजे भिड़ा कर बंद कर प्रिया था…

मैंने हल्की से आहत लेते हुए दरवाजे को खोल प्रिया… रसोई में कोई नहीं था…

मैंने उसके जंगले की चिटकनी खोल उसको भी खोला और देखा… अब अंदर जाया जा सकता था…

पर खिड़की काफी ऊँची थी, ऊपर चढ़ने के लिए कोई ऊँची कुर्सी या स्टूल चाहिए था…

मैंने मीनू की ओर देखा, उसने अपना कल वाला फ्रॉक पहन लिया था शायद बाहर आने के लिए… या अंकल के कारण…

मैंने मुँह पर ऊँगली रख उसको चुप रहने के लिए इशारा किया और उसको अंदर जाने के लिए बोला…

वो एकदम तैयार हो गई…

मैंने उसको उचकाया… और जैसे ही उसके चूतड़ों पर हाथ लगाया… एकदम से ठंडा सा लगा…

मीनू ने अभी भी कच्छी नहीं पहनी थी, उसके चूतड़ नंगे थे…

मैंने मीनू को गोद में उठाकर खिड़की पर टिकाया और अपना हाथ सहारे के लिए ही उसके चूतड़ों पर रखा… उसका छोटा फ्रॉक हट गया था और मेरा हाथ उसके नंगे चूतड़ों पर था…

एक बार फिर मेरे हाथों ने मीनू के मांसल, छोटे छोटे चूतड़ों का स्पर्श किया और रोमांच से भर गए…

यह भी पढ़ें (Recommended)

गदराई लंगड़ी घोड़ी-7

इससे पहले मेरे मन में उत्तेजना के साथ साथ शायद कुछ गुस्सा भी था कि एक 62 साल का बूढ़ा मेरी जवान सुन्दर बीवी जो लगभग नंगी थी…

अंदर मेरे घर पर और शायद मेरे ही बैडरूम में… मेरे बिस्तर पर… ना जाने क्या कर रहा होगा???

मगर मीनू के नंगे चूतड़ों के स्पर्श… और जब वो खिड़की पर उकड़ू बैठी… तब उसके नंगे चूतड़ और उसकी प्यारी, कोमल, छोटी सी चूत देख… जिससे मैंने कल बहुत मजे किये थे और वो सब मेरी जान सलोनी के कारण ही हो सका था…

मेरा सारा अंदर का द्वेष गायब हो गया और मैं अब केवल सलोनी के मजे के बारे में सोचने लगा…

लेकिन मन उसको ये सब करते देखना चाहता था कि मेरी जान सलोनी को पूरा मजा आ रहा है या नहीं… वो पूरी तरह आनन्द ले रही है या नहीं…

मीनू के उकड़ू बैठने से उसके नंगे चूतड़ और खिली चूत ठीक मेरे चेहरे पर थे… उसकी फ्रॉक सिमटकर मेरे हाथो से दबी थी…

मैंने मीनू को दोनों हाथों से थाम रखा था… मेरी गर्म साँसे जब मीनू को अपनी चूत पर महसूस हुई होंगी…

तभी उसने अपनी आँखों में एक अलग ही तरह की बैचेनी लिए मेरी ओर देखा…

मैंने आँखों ही आँखों में उसको आई लव यू कहा और अपने होंठ उसकी चूत पर रख एक गर्म चुम्मा लिया…

मीनू की आँखे अपने आप बंद हो गई…

मगर मैंने खुद पर नियंत्रण रखा… मैंने उसको रसोई में उतरने और दरवाजा खोलने को बोला…

वो जैसे सब समझ गई… वो जल्दी से नीचे उतर रसोई से होते हुए… ऐसे आगे बड़ी कि कोई उसे ना देखे… वो बहुत सावधानी और चारों ओर देखकर आगे बढ़ रही थी…

फिर वो मुख्य द्वार की ओर बढ़ी…

मैं भी घूमकर आगे बढ़ गया और अपने दरवाजे की तरफ आया…

बहुत हल्के से लॉक खुलने की आवाज आई…

मीनू काफी समय से हमारे घर आ रही है इसलिए उसे ये सब करना आता था… उसने वाकयी बहुत सावधानी से काम किया… अंकल या सलोनी किसी को कोई भनक तक नहीं मिली…

मैं चुपचाप अंदर आया और उससे इशारे से पूछा- …कहाँ हैं दोनों??

मीनू ने बैडरूम की ओर इशारा किया…

मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी…

मैंने मीनू को एक तरफ से देखने भेज पहले रसोई में जाकर सबसे पहले खिड़की का जंगला लॉक किया कि सलोनी को बिल्कुल शक ना हो…

मैं जैसे ही मुड़ा…मुझे रसोई में एक कोने में सलोनी की नाइटी दिखी जो उसने सुबह पहनी थी…

मुझे अच्छी तरह याद है कि सलोनी केवल यही नाइटी पहने थी… और इसके अंदर कुछ नहीं… इसका मतलब अंकल ने सलोनी को यहीं नंगी कर प्रिया था… और अब बैडरूम में तो निश्चित चुदाई के लिए ही ले गए होगे…

मैं केवल यही सोच रहा था कि आदमी कितना बदकार होता है… वहाँ नलिनी भाभी सोचती है कि अरविन्द अंकल कुछ कर ही नहीं सकते क्योंकि उनका अब खड़ा ही नहीं होता…

और यहाँ दूसरी औरत को देख वो सब करने को तैयार हो जाते हैं… उनका मरा हुआ लण्ड भी ज़िंदा हो जाता है… वाह रे चुदाई की माया…

मैं जल्दी से रसोई से निकला और फिर मीनू के पास जा खड़ा हो गया…

बैडरूम का दरबाजा पूरा खुला ही था, बस उस पर परदा पड़ा था…

बैडरूम का दरवाजा उन्होंने इसलिए बंद नहीं किया होगा कि वो दोनों घर पर अकेले ही थे और परदा तो उस पर हमेशा पड़ा ही रहता है…

मीनू परदे का एक सिरा हटाकर अंदर झांक रही थी… और अंदर का दृश्य देखते ही मेरा लण्ड तनतना गया…

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरी चालू बीवी

कुल भाग: 129
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
भाग 60
भाग 60: पढ़ें
भाग 61
भाग 61: पढ़ें
भाग 62
भाग 62: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 66
भाग 66: पढ़ें
भाग 67
भाग 67: पढ़ें
भाग 68
भाग 68: पढ़ें
भाग 69
भाग 69: पढ़ें
भाग 70
भाग 70: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 72
भाग 72: पढ़ें
भाग 73
भाग 73: पढ़ें
भाग 74
भाग 74: पढ़ें
भाग 75
भाग 75: पढ़ें
भाग 76
भाग 76: पढ़ें
भाग 77
भाग 77: पढ़ें
भाग 78
भाग 78: पढ़ें
भाग 79
भाग 79: पढ़ें
भाग 80
भाग 80: पढ़ें
भाग 81
भाग 81: पढ़ें
भाग 82
भाग 82: पढ़ें
भाग 83
भाग 83: पढ़ें
भाग 84
भाग 84: पढ़ें
भाग 85
भाग 85: पढ़ें
भाग 86
भाग 86: पढ़ें
भाग 87
भाग 87: पढ़ें
भाग 88
भाग 88: पढ़ें
भाग 89
भाग 89: पढ़ें
भाग 90
भाग 90: पढ़ें
भाग 91
भाग 91: पढ़ें
भाग 92
भाग 92: पढ़ें
भाग 93
भाग 93: पढ़ें
भाग 94
भाग 94: पढ़ें
भाग 95
भाग 95: पढ़ें
भाग 96
भाग 96: पढ़ें
भाग 97
भाग 97: पढ़ें
भाग 98
भाग 98: पढ़ें
भाग 99
भाग 99: पढ़ें
भाग 100
भाग 100: पढ़ें
भाग 101
भाग 101: पढ़ें
भाग 102
भाग 102: पढ़ें
भाग 103
भाग 103: पढ़ें
भाग 104
भाग 104: पढ़ें
भाग 105
भाग 105: पढ़ें
भाग 106
भाग 106: पढ़ें
भाग 107
भाग 107: पढ़ें
भाग 108
भाग 108: पढ़ें
भाग 109
भाग 109: पढ़ें
भाग 110
भाग 110: पढ़ें
भाग 111
भाग 111: पढ़ें
भाग 112
भाग 112: पढ़ें
भाग 113
भाग 113: पढ़ें
भाग 114
भाग 114: पढ़ें
भाग 115
भाग 115: पढ़ें
भाग 116
भाग 116: पढ़ें
भाग 117
भाग 117: पढ़ें
भाग 118
भाग 118: पढ़ें
भाग 119
भाग 119: पढ़ें
भाग 120
भाग 120: पढ़ें
भाग 121
भाग 121: पढ़ें
भाग 122
भाग 122: पढ़ें
भाग 123
भाग 123: पढ़ें
भाग 124
भाग 124: पढ़ें
भाग 125
भाग 125: पढ़ें
भाग 126
भाग 126: पढ़ें
भाग 127
भाग 127: पढ़ें
भाग 128
भाग 128: पढ़ें
भाग 129
भाग 129: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

पड़ोसन भाभी की भूख और मेरे लौड़े की प्यास
पड़ोसी

पड़ोसन भाभी की भूख और मेरे लौड़े की प्यास

नंगी भाभी की गर्म चूत का मजा मुझे मिला जब मैंने भाभी को चूत में उंगली करती देख लिया. भाभी बहुत गर्म हो रही थी तो उनके पास चला गया और सेक्स का मजा लिया.

13 मिनट 403
गदराई लंगड़ी घोड़ी-7
पड़ोसी

गदराई लंगड़ी घोड़ी-7

“बस आंटी अब ज़रा इस अपनी इस मस्त गाण्ड को पीछे को उभार दो और जितना हो सके वॉशबेसिन पर झुक जाओ ऊऊऊ अन्न्न्नान्न्न..!”“उन्न्न्हह्ह्ह्ह..वीर पर झड़ना नहीं अभी.और धीरे चोदना. और इस तरह टब के ऊपर तो दिक्क़त होगी… अआःह्ह्हाआ अय्य्य्य …उईईईई ईईईई …धीरे वीर..!”

15 मिनट 810
आंटी ने टीचर बन के प्यार से करवाई अपनी चूत की चुदाई
पड़ोसी

आंटी ने टीचर बन के प्यार से करवाई अपनी चूत की चुदाई

दोस्तो, पड़ोस की एक आंटी की चुदाई की सेक्स स्टोरी में आज मैं अपने जीवन का सच बताना चाहता हूँ जिससे आपको मजा भी आए और आप संतुष्टि का आनन्द भी लें सकें।

10 मिनट 988

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

रानी आहूजा

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।